कोलम्बो योजना Colombo Plan

कोलम्बो योजना में 24 देश सम्मिलित हैं, जो दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में विकास योजनाओं के संबंध में चर्चा करते हैं।

औपचारिक नाम: एशिया और प्रशान्त में सहकारी, आर्थिक और सामाजिक विकास के लिये कोलम्बी योजना The Colombo Plan for Cooperative Economic and Social Development in Asia and the Pacific

मुख्यालय: कोलम्बो (श्रीलंका)।

सदस्यता: प्रमुख दाता: आस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैण्ड और संयुक्त राज्य अमेरिका।

क्षेत्रीय सदस्य: अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, कम्बोडिया, फिजी, भारत, इण्डोनेशिया, ईरान, लाओस,मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान, पापुआ न्यू गिनी, फिलिपीन्स, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और थाईलैण्ड।

अस्थायी सदस्य: मंगोलिया।

उत्पति एवं विकास

1950 में कोलम्बो (तत्कालीन सिलोन) में आयोजित राष्ट्रकुल देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में कोलम्बो योजना की स्थापना दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में सहकारी आर्थिक विकास के लिए कोलम्बो योजना के नाम से हुई। इसकी स्थापना के पीछे मुख्य उद्देश्य नव-स्वतंत्र एशियाई देशों के आर्थिक विकास में सहयोग की भावना को प्रोत्साहन देना था। यह योजना विधिवत रूप से जुलाई 1951 में अस्तित्व में आई। इसके संस्थापक-सदस्य 7 राष्ट्रकुल देश थे- आस्ट्रेलिया, कनाडा, श्रीलंका, भारत, न्यूजीलैण्ड, इंग्लैण्ड और दक्षिण अफ्रीका संघ। बाद में कई अन्य देश-राष्ट्रकुल और गैर-राष्ट्रकुल-इस योजना में सम्मिलित हो गये। 1977 में कोलम्बो योजना का नया संविधान बना और उसी वर्ष इस योजना को वर्तमान नाम- एशिया और प्रशान्त क्षेत्रों में सरकारी आर्थिक और सामाजिक विकास के लिये कोलम्बो योजना-दिया गया। नया संविधान कोलम्बो योजना के विस्तार और भौगोलिक रचना का अधिक सटीक प्रतिबिम्ब था।

आरंभ में यह योजना छह वर्षों के लिये ही शुरू की गई थी। लेकिन समय-समय पर इसकी कार्य अवधि में विस्तार होता रहा और 1980 में इसे अनिश्चित काल के लिये बढ़ा दिया गया। कनाडा, दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैण्ड इस योजना से हट गये।

उद्देश्य

कोलम्बो योजना के मुख्य उद्देश्य हैं-

  1. स्थानीय स्तर पर सामाजिक और आर्थिक विकास के विषय पर चर्चा के लिये एक मंच प्रदान करना;
  2. एशिया और प्रशान्त क्षेत्र के देशों में तकनीकी सहायता और पूंजी अनुदान में समन्वय स्थापित करना, और;
  3. सदस्य देशों में विकास की गति को तेज करने के लिये कार्यक्रमों का संचालन करना।

संरचना

कोलम्बो योजना में सलाहकार समिति, कोलम्बो योजना परिषद और कोलम्बी योजना ब्यूरो हैं। सलाहकारी समिति योजना की सर्वोच्च परामर्शदात्री संस्था है। सदस्य देशों के सभी मंत्री और/या अधिकारी इस समिति के सदस्य होते हैं। प्रत्येक दो वर्ष के अंतराल पर इसकी बैठक होती है, जिसमें विकास कार्यक्रमों तथा क्षेत्र की अग्रिम आवश्यकताओं का सर्वेक्षण होता है तथा इन जरूरतों को पूरा करने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की उपलब्धता का परीक्षण होता है। कोलम्बो योजना परिषद, जिसके सदस्य कोलम्बो में अवस्थित सदस्य देशों के राजनयिक मिशनों के प्रमुख होते हैं, के कार्य हैं- विकास के विषयों की पहचान करना, सलाहकार समिति के समक्ष अपनी अनुशंसाएं प्रस्तुत करना तथा नितीयों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करना। कोलोम्बो योजना ब्यूरो सचिवालयी सेवाएं प्रदान करता है तथा यह प्रशासन अनुसन्धान तथा सुचना प्रसारण का कार्य करता है ब्यूरो के निदेशक की नियुक्ति कोलम्बो योजना परिषद के द्वारा होती है।

गतिविधियां

योजना का दृष्टिकोण बहुपक्षीय होता है क्योंकि यह एशिया और प्रशान्त क्षेत्र की समस्याओं पर समग्र तथा समन्वित रूप से विचार करती है। यह संचालन में द्वि-पक्षीय है क्योंकि इसमें सहायता के लिये दाता एवं ग्राही देशों के बीच प्रत्यक्ष रूप से बातचीत होती है। इसमें ऐसे किसी केन्द्रीय कोष की व्यवस्था नहीं है, जिससे ऋण या अनुदान का आवंटन हो। विकास परियोजनाओं के वित्तीय पोषण के लिये समझौता व्यक्तिगत देशों के बीच द्वि-पक्षीय स्तर पर या फिर विश्व बैंक के माध्यम से होता है।

1998 में हुई सलाहकारी समिति की बैठक में आर्थिक और सामाजिक विकास में विदेशी निवेश की भूमिका पर चर्चा हुई। विकास प्रक्रिया में उद्यमशीलता, तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण, विज्ञान और तकनीक तथा महिलाओं के समाकलन को प्राथमिकता दी गई। सलाहकारी समिति की 1990 में हुई बैठक में मुख्य रूप से मानव संसाधन विकास, गरीबी-उन्मूलन और ग्रामीण प्राकृतिक संसाधन विकास पर जोर दिया गया। 1994 में कोलम्बो योजना की भावी भूमिका का मूल्यांकन किया गया तथा सदस्य देशों से आर्थिक विकास के लिये दोहरी नीति अपनाने का आग्रह किया गया। प्रत्येक स्थायी कार्यक्रम के पूरक के रूप में अनेक अल्पकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने की घोषणाएं हुई। 1995 में कोलम्बो योजना के पुनर्गठन की दिशा में प्रारम्भिक कदम के रूप में लोक प्रशासन कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत विकासशील सदस्य देशों के अधिकारियों के लिये लोक प्रशासन के सभी क्षेत्रों में, विशेषकर बाजारोन्मुखी अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, प्रशिक्षण के आयोजन का प्रावधान है।

1972 में औषधि सलाहकारी कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ। अनेक सदस्य स्वैच्छिक आधार पर इस कार्यक्रम में आर्थिक सहयोग देते हैं। यह कार्यक्रम औषधि दुरुपयोग निवारण से संबंधित राष्ट्रीय कार्यक्रमों में पूरक का कार्य करता है। साथ ही, यह सदस्य देशों को नियंत्रण कार्यालय स्थापित करने, वर्तमान नियमों में सुधार लाने और मादक द्रव्य नियंत्रण अधिकारियों के प्रशिक्षण में सहायता प्रदान करता है।

1973 में सिंगापुर में तकनीकी शिक्षा हेतु कोलम्बो योजना स्टाफ कॉलेज (ColomboPlan Staff College for Technical Education) की स्थापना हुई। यह कालेज सदस्य देशों के प्रबंधन और तकनीकी कर्मचारियों को प्रशिक्षण देता है। सदस्य देश इस कॉलेज के लिये पृथक् रूप से वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं। कॉलेज के पर्यवेक्षण के लिये इसका अपना शासी निकाय है। 1987 में इस कॉलेज की फिलीपीन्स में स्थानान्तरित कर दिया गया।

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