संयुक्त राष्ट्र आर्थिक व सामाजिक परिषद United Nations Economic and Social Council - ECOSOC

आर्थिक व सामाजिक परिषद संयुक्त राष्ट्र तथा उसके विशिष्ट अभिकरणों व संस्थाओं द्वारा सम्पन्न किये जाने वाले आर्थिक एवं सामाजिक कार्यों में समन्वय करने वाला सर्वप्रमुख अभिकरण है। चार्टर के अनुच्छेद 55 में संयुक्त राष्ट्र को स्थिरता एवं समृद्धि की ऐसी दशाएं निर्मित करने का निर्देश दिया गया है, जो राष्ट्रों के मध्य मित्रवत तथा शांतिपूर्ण संबंधों के लिए जरूरी हो तथा लोगों के आत्मनिर्णय व समान अधिकारों के सिद्धांत पर टिकी हुई हों। इसके लिए निम्नलिखित बातों को प्रोत्साहन देना आवश्यक है-

  1. उच्च जीवन स्तर, पूर्ण रोजगार तथा आर्थिक व सामाजिक उन्नति और विकास की अवस्थाए।
  2. अंतरराष्ट्रीय आर्थिक, सामाजिक, स्वास्थ्य तथा अन्य संबद्ध समस्याओं का समाधान और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक व शैक्षिक सहयोग।
  3. लिंग, जाति, धर्म एवं भाषा के आधार पर भेदभाव किये बिना सभी के लिए स्वतंत्रता तथा मानव अधिकारों का अनुपालन तथा उनके प्रति वैश्विक सम्मान।

आर्थिक व सामाजिक परिषद में कुल 54 सदस्य होते हैं, जिनमें से 18 सदस्य (1/3) प्रतिवर्ष महासभा द्वारा निर्वाचित किये जाते हैं। सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष होता है। सदस्यों के निर्वाचन भौगोलिक वितरण पर आधारित एक प्रणाली के माध्यम से किया जाता है। अध्यक्ष का कार्यकाल वार्षिक होता है। अध्यक्ष एवं अन्य सदस्य सेवामुक्ति के तुरंत बाद पुनः चुने जा सकते हैं।

परिषद की बैठक वर्ष में दो बार होती है तथा विशेष सत्रों का आयोजन भी किया जा सकता है। प्रत्येक सदस्य को एक मत देने का अधिकार होता है तथा निर्णय साधारण बहुमत द्वारा किये जाते हैं।

आरम्भिक काल में आर्थिक व सामाजिक परिषद की गतिविधियां युद्धपीड़ित यूरोप, एशिया व इजरायल में राहत एवं पुनर्निर्माण की समस्याओं तक सीमित थीं। किंतु 1950 के दशक के मध्य में इसका ध्यान अफ्रीका, एशिया तथा लैटिन अमेरिका के अल्पविकसित राष्ट्रों की समस्याओं पर केन्द्रित होने लगा।

आर्थिक व सामाजिक परिषद द्वारा महासभा एवं अन्य संयुक्त राष्ट्र अंगों के विचारार्थ प्रस्तुत करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय आर्ह्तिक, सामजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य एवं अन्य सम्बंधित समस्याओं पर अध्ययनों, रिपोर्टों तथा अनुमोदनों की पहल और निर्माण किया जाता है। यह परिषद संयुक्त राष्ट्र के विशेष अभिकरणों के साथ संयुक्त राष्ट्र के साथ उनके सम्बंध को परिभाषित करने के लिए, समझौते सम्पन्न करती है तथा परामर्श एवं सिफारिशों के माध्यम से विशिष्ट अभिकरणों की गतिविधियों में समन्वय स्थापित करती है।

पिछले कुछ वर्षों में परिषद का सम्बंध अधिक दबावकारी समस्याओं, जैसे-विकासशील देशों से विकसित देशों की ओर होने वाला संसाधनों का प्रवाह, तीसरी दुनिया के देशों का बाह्य ऋण, बढती हुई अपराध दरें, व्यापक भुखमरी एवं कुपोषण, महिलाओं का अपर्याप्त आर्थिक समाकलन, एवं अन्य विषैले रसायनिक अवशिष्टों का निपटान तथा बाल अधिकारों का हनन इत्यादि, से रहा है।

आर्थिक व् सामाजिक परिषद् की गगतिविधियाँ 9 कार्यात्मक आयोगों, 5 क्षेत्रीय आयोगों अनेक स्थायी समितियों एवं आयोगों (जैसे-मानव अधिवासन पर आयोग तथा नवीन एवं पुनर्नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के द्वारा विकास हेतु आयोग) द्वारा सम्पन्न की जाती हैं। इसके अतिरिक्त कई विशेषज्ञ निकाय भी विद्यमान हैं, जैसे-विकासात्मक नियोजन हेतु समिति, खतरनाक वस्तुओं के परिवहन पर विशेषज्ञों की समिति तथा तदर्थ समूह इत्यादि। अपने उत्तरदायित्वों के व्यापक क्षेत्र के कारण परिषद अनेक सहायक एवं सम्बद्ध अंगों के साथ एक जटिलतापूर्ण सम्बंध रखती है। आर्थिक व सामाजिक परिषद सदस्य राष्ट्रों के राष्ट्रीय संगठनों तथा गैर-सरकारी स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ परामर्श का आदान-प्रदान भी करती है।

कार्यात्मक आयोग

आर्थिक व सामाजिक परिषद के कार्यात्मक आयोग सदस्य राष्ट्रों से जुड़े आर्थिक व सामाजिक मामलों पर अनुशंसाएं, समीक्षा एवं रिपोटें तैयार करके परिषद के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। आयोगों के सदस्य 3 या 4 वर्ष के लिए चुने जाते हैं। परिषद के कार्यात्मक आयोग निम्नलिखित हैं-

आयोग/फोरम स्थापना सदस्यता उद्देश्य
1. अपराध निवारण एवं आपराधिक न्याय आयोग 1992-40 नीतिगत मार्ग-दर्शन प्रदान करना।संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं की अनुसंधान गतिविधियों में समन्वय स्थापित करना।
2. मादक औषधि आयोग 1946-53 परिषद् को मादक दवाओं से संबंधित विषयों पर परामर्श देता है।
3. जनसंख्या व विकास 1946-47 जनसंख्या व अप्रवासन से संबंधित विषयों पर आयोग अध्ययन करता है तथा परिषद् को परामर्श प्रदान करता है।राष्ट्रीय जनगणनाओं की गुणवत्ता में सुधार करता है।
4. विकास हेतु विज्ञान व प्रोद्योगिकी आयोग 1992-53 विकास हेतु विज्ञान व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहन देता है।संयुक्त राष्ट्र संघ की विज्ञान व प्रौद्योगिकी गतिविधियों का निरीक्षण व निर्माण करता है।
5. सामाजिक विकास आयोग 1946-46 सामाजिक विकास नीतियों के समस्त पहलुओं पर परिषद् की परामर्श प्रदान करता है।राष्ट्रीय आय के समान वितरण को सुनिश्चित करता है।
6. महिलाओं की स्थिति पर 1966-45 महिलाओं के अधिकारों को प्रोत्साहित करने हेतु आयोग विभिन्न पद्धतियां सुझाता है।इस सिद्धांत पर बल देता है कि महिलाओं व पुरुषों को समान अधिकार प्राप्त होने चाहिए।
7. सतत् विकास आयोग 1993-53 संयुक्त राष्ट्र संघ पर्यावरण व विकास सम्मेलन द्वारा किए गए समझौतों के क्रियान्वयन में सहायता प्रदान करता है।
8. साख्यिकी आयोग 1946 24 अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकी सेवाओं का विकास करता है।राष्ट्रीय सर्पोख्यकी के विकास को प्रोत्साहन देना तथा उन्हें तुलना योग्य बनाना।
9. वन फोरम, 2000 2000 सभी प्रकार के वनों के प्रबंधन, संरक्षण एवं सतत् विकास को प्रोत्साहित एवं संवद्धित करना।

क्षेत्रीय आयोग

पांचों क्षेत्रीय आयोग महासचिव द्वारा नामित कार्यकारी सचिवों के अधीन कार्य करते हैं। ये आयोग अपने अधिकारियों का चयन तथा प्रक्रियात्मक नियमों का निर्धारण स्वयं करते हैं। उनके द्वारा सदस्य राष्ट्रों की सरकारों तथा संयुक्त राष्ट्र के विशिष्ट अभिकरणों के समक्ष अपनी सिफारिशें सीधे ही प्रस्तुत की जाती हैं। ये वार्षिक रूप से आर्थिक व सामाजिक परिषद को रिपोर्ट प्रेषित करते हैं। इन आयोगों के बजट को महासभा द्वारा मंजूरी दी जाती है। आयोगों के निर्णयों एवं प्रस्तावों को मतदान के बिना सहमति के आधार पर स्वीकार किया जाता है। आयोग बिना सदस्य राष्ट्र की सहमति के उसके विरुद्ध कोई भी कार्यवाही नहीं कर सकते। इन आयोगों का मूल उद्देश्य अपने-अपने क्षेत्रों में आर्थिक क्रिया-कलापों के स्तर को उठाने में सहायता करना तथा प्रत्येक क्षेत्र में राष्ट्रों के बीच आर्थिक सम्बंधों को मजबूत बनाना है। पांचों क्षेत्रीय आयोगों का विवेचन नीचे दिया गया है-

अफ्रीका के लिए आर्थिक आयोग Economic Commission for Africa– ECA

इस आयोग का लक्ष्य अफ्रीका के आर्थिक विकास हेतु कार्यवाही तथा सम्बंधित उपायों में सहयोग एवं पहल करना है। इसके अंतर्गत अफ्रीकी देशों के पारस्परिक तथा अन्य देशों के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाना और आर्थिक क्रिया-कलापों तथा रहन-सहन के स्तर को ऊपर उठाना है।

आयोग अफ्रीकी क्षेत्रीय संगठनों (ओएयू. ईसीओडब्ल्यूएएस, एडीबी तथा एएसीबी इत्यादि), संयुक्त राष्ट्र के विशेष अभिकरणों तथा अन्य क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ निकट सहयोग स्थापित करके कार्य करता है। आयोग के कार्य विचारात्मक की बजाय कार्यात्मक होते हैं।

ईसीए की स्थापना 29 अप्रैल, 1958 को की गयी थी । इसका मुख्यालय इथोपिया के आदिस अबाबा में है। इसके 53 सदस्य अफ्रीका महाद्वीप से सम्बद्ध हैं तथा 2 सहयोगी सदस्य ब्रिटेन एवं फ्रांस हैं। आयोग द्वारा खाद्यान्न आत्मनिर्भरता के विकास में सहायता देकर, औद्योगिक आधार को मजबूती प्रदान करके, भौतिक आधार संरचना में सुधार लाकर, प्राकृतिक संसाधनों का विकास करके, तकनीक व सेवाओं के स्तर की ऊंचा बनाकर, अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रमों हेतु कार्मियों को प्रशिक्षण प्रदान करके तथा उप-क्षेत्रीय समूहों के बीच सहयोग एवं एकीकरण को बढ़ाकर अपने लक्ष्यों को पूरा किया जाना है।

ईसीए का सर्वोच्च निर्णयकारी अंग मंत्रियों का सम्मेलन है, जो वार्षिक रूप से आयोजित होता है। सदस्य राष्ट्रों के वित्तीय एवं आर्थिक मामलों के मंत्रियों से निर्मित यह सम्मेलन मूलभूत नीतियों का निर्माण करता है तथा क्रियान्वित किये जा रहे कार्यक्रमों एवं परियोजनाओं की समीक्षा करता है। अनेक विशेष कार्यों को निष्पादित करने के लिए विशेषज्ञों व सरकारी अधिकारियों की अनेक सहायक समितियां बनायी गयी हैं।

सचिवालय बैठकों के आयोजन तथा अन्य प्रशासनिक व तकनीकी कार्यों में अपनी सेवाएं प्रदान करता है। अफ्रीका के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक बहुराष्ट्रीय योजनात्मक एवं क्रियात्मक केन्द्र स्थापित किये गये हैं, जो विकास कार्यक्रमों के कार्यान्वयन हेतु क्षेत्रीय अभिकर्ताओं के रूप में कार्य करते हैं।

यूरोप के लिए आर्थिक आयोग Economic Commission for Europe– ECE

इस आयोग की स्थापना 28 मार्च, 1947 को हुई थी तथा इसका आरंभिक उद्देश्य द्वितीय विश्वयुद्धजनित आर्थिक समस्याओं से निपटने में त्वरित सहायता उपलब्ध कराना था। किंतु वर्तमान में ईसीई का लक्ष्य सदस्य राष्ट्रों के मध्य आर्थिक संबंधों को मजबूती देना, उनके आर्थिक क्रिया-कलापों के स्तर की ऊंचा उठाना तथा महाद्वीप के पूर्वी एवं पश्चिमी क्षेत्रों के मध्य सेतु के रूप में कार्य करना है।

ईसीई में कुल 56 सदस्य हैं तथा इसका मुख्यालय जेनेवा में है। हाल में आयोग द्वारा ऊर्जा तथा पर्यावरण सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। पूर्वी व मध्य यूरोप के देशों तथा पूर्व सोवियत संघ में निर्देशित व नियंत्रित अर्थव्यवस्था के बाजार अर्थव्यवस्था में रूपांतरण हेतु विशेष सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। ईसीई संयुक्त राष्ट्र के कई विशिष्ट अभिकरणों तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ प्रासंगिक विषयों पर सहयोग कायम करता है। आयोग की बैठक वार्षिक सत्र के रूप में होती है, जिसमें सभी सदस्य राष्ट्रों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। कुछ सहायक निकाय पूरे वर्ष के दौरान सक्रिय रहते हें। ये निकाय विशेष तकनीकी कार्य सम्पन्न करते हैं। सचिवालय आयोग की बैठकों तथा सहायक निकायों के लिए जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराता है।

लैटिन अमेरिका एवं कैरीबियन हेतु आर्थिक आयोग Economic Commission for Latin America and the Caribbean-ECLAC इस आयोग का लक्ष्य सम्बंधित क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों के स्तर को उठाना तथा सदस्य देशों के बीच आर्थिक सम्बंधों को सुदृढ़ता प्रदान करना है। इस आयोग का गठन ईसीएलए के रूप में 25 फरवरी, 1948 को किया गया। 1984 में इसके अंतर्गत कैरेबियाई क्षेत्र को भी जोड़ दिया गया। इस 41 सदस्यीय आयोग का मुख्यालय सेन्टियागो (चिली) में है। इसके पूर्ण सदस्यों में कनाडा, फ्रांस, सं.रा. अमेरिका, ब्रिटेन, स्पेन, पुर्तगाल, नीदरलैंड तथा इटली भी शामिल हैं। अरुबा, ब्रिटिश वर्जिन द्वीप समूह, मोंसेरात, नीदरलैंडस एंटीलीज, प्युर्टो रिको तथा संयुक्त राज्य अमेरिका वर्जिन द्वीप समूह को सहयोगी का दर्जा प्राप्त है।

आयोग की बैठक वर्ष में दो बार होती है, जिसमें सभी सदस्य भाग लेते हैं। स्थायी सहायक निकायों में केन्द्रीय अमेरिकी आर्थिक सहयोग समिति, कैरेबियन विकास एवं सहयोग समिति, उच्चस्तरीय सरकारी विशेष समिति तथा अन्य विशेष उप-समितियां शामिल हैं। प्रशासनिक कार्यो को सचिवालय द्वारा सम्पन्न किया जाता है।

ईसीएलसी अपना कार्य विभिन्न कार्यात्मक, कार्यक्रमों, जैसे-विकासात्मक मुद्दे एवं नीतियां, खाद्य व कृषित जनसांख्यिकी, मानव अधिवासन तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार इत्यादि के माध्यम से संचालित करता है। आयोग के अधीन आर्थिक व सामाजिक नियोजन हेतु लैटिन अमेरिकी एवं कैरेबियन संस्थान (आईएलडीईएस) तथा लैटिन अमेरिकी जनसांख्यकीय केन्द्र (सीईएलएडीई) की स्थापना की गयी है।

एशिया एवं प्रशांत के लिए आर्थिक व सामाजिक आयोग Economic and Social Commission for Asia and the Pacific—ESCAP

इस आयोग की स्थापना 28 मार्च, 1947 को एशिया व सुदूर पूर्व को ध्यान में रखकर की गयी थी। 1974 में इसके अंतर्गत सुदूर पूर्व की जगह प्रशांत क्षेत्र जोड़ दिया गया। इस आयोग में 51 सदस्य हैं। यह आयोग क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के साथ-साथ वाद-विवाद के एक मंच के रूप में भी कार्य करता है। इसका मुख्यालय बैंकॉक में स्थित है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान खाद्य एवं कृषि, तकनीक स्थानातंरण, व्यापार, एकीकृत ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में एस्केप (ईएससीएपी) द्वारा शोधकार्य एवं परियोजनाओं को लागू करने वाले अभिकरण की भूमिका निभाई गयी है।

एस्केप के मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में नीति-निर्माण समीक्षा एवं क्रियान्वयन से जुड़े निर्णय लिये जाते हैं। क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग, पर्यावरण एवं संवहनीय विकास, गरीबी उन्मूलन जैसे विषयों पर कई सहायक समितियां भी गठित की गयी हैं। दो विशेष निकायों द्वारा अल्पविकसित तथा भू-स्थलबद्ध विकासशील देशों और प्रशांत द्वीपों के विकासशील देशों पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है।

पश्चिम एशिया के लिए आर्थिक एवं सामाजिक आयोग Economic and Social Commission for Western Asia–ESCWA

इस आयोग की स्थापना9 अगस्त, 1973 को पश्चिम एशिया के आर्थिक पुनर्निर्माण एवं विकास को प्रोत्साहन एवं गति देने के उद्देश्य से की गयी थी। इसके अंतर्गत मिस्र तथा दक्षिण-पश्चिम एशिया के अरब देश शामिल हैं। ईरान, इजरायल तथा तुर्की जैसे मध्य-पूर्वी देशों को आयोग के कार्यक्षेत्र से बाहर रखा गया है (ईरान एस्केप से तथा इजरायल व तुर्की ईसीई से जुड़े हैं)। एस्क्वा (ईएससीडब्ल्यूए) का मुख्यालय बेरूत (लेबनान) में है तथा इसके कुल 14 सदस्य हैं। यह आयोग खाद्य व कृषि, मानव अधिवास, अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा सामाजिक विकास से जुड़े अनेक कार्यात्मक कार्यक्रम लागू करता है।

महासभा एवं आर्थिक व सामाजिक परिषद् के अधीन विशेष निकाय

महासभा द्वारा आर्थिक व सामाजिक परिषद के साथ सहयोग करते हुए अनेक विशेष स्वायत्त या अर्द्धस्वायत्त निकायों की स्थापना की गयी है, जो विकास व व्यापार, राहत एवं कल्याण, जनसांख्यिकी और पर्यावरण तथा शोध व प्रशिक्षण से जुड़ी समस्याओं से निपटने का कार्य करते हैं।

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