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व्यक्तिगत स्वतंत्रता हेतु प्रक्रियात्मक संरक्षण का कठोरता से पालन किया जाना चाहिए: सर्वोच्च न्यायालय The procedural protection of personal liberty must be strictly followed: Supreme Court – Vivace Panorama

व्यक्तिगत स्वतंत्रता हेतु प्रक्रियात्मक संरक्षण का कठोरता से पालन किया जाना चाहिए: सर्वोच्च न्यायालय The procedural protection of personal liberty must be strictly followed: Supreme Court

व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए प्रक्रियात्मक संरक्षण का दृढ़ता से पालन किया जाना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने फॉरन एक्सचेंज एण्ड प्रिवेंशन ऑफ स्मगलिंग एक्टिविटीज एक्ट के अंतर्गत गिरफ्तार चार लोगों की गिरफ्तारी को अमान्य घोषित करते हुए यह व्यवस्था दी। न्यायाधीशों की एक पीठ ने निवारक निरोध के अंतर्गत चल रहे मामलों पर त्वरित सुनवाई करने की बात कही और एक दिन के विलम्ब होने की स्थिति में भी इसका समुचित कारण बताया जाना चाहिए। एक मामला जिसमें 26 फरवरी, 2011 को फॉरन एक्सचेंज एण्ड प्रिवेंशन ऑफ स्मगलिंग एक्ट के अंतर्गत 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, और इस गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका को केरल उच्च न्यायालय द्वारा 30 सितंबर, 2011 को अस्वीकृत कर दिया गया था। निर्णय देते हुए न्यायमूर्ति गांगुली ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं का इतिहास प्रक्रियात्मक संरक्षण प्रावधानों से जुड़ा है। इसके अतिरिक्त न्यायपीठ ने संविधान के अनुच्छेद 22(5) का जिक्र किया जिसमें जल्द से जल्द मामलों के निर्धारण की बात कही गई है। इसमें ऐसे मामलों के महत्व और बिना विलम्ब के सुनवाई की बात कही गई है। इन प्रावधानों पर विचार करते हुए न्यायपीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी प्रकार की लापरवाही, आलस्य, संवेदनहीनता सहन नहीं की जा सकती। किसी प्रकार का विलंब जिसे ऐसे मामलों में सही नहीं ठहराया जा सकता, एक प्रकार से संविधान का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसी स्थिति में विरोधात्मक गिरफ्तारी को गैर-कानूनी माना जाएगा। वर्तमान राजनीतिक हालात में इस फैसले का व्यापक महत्व हो सकता है। सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय से गिरफ्तार व्यक्तियों को जमानत पर छोड़ने की एक परंपरा विकसित हो सकती है। उल्लेखनीय है कि न्यायालय ने इस मामले में पाया कि जरूरत से अधिक विलम्ब हुआ है। इसका कोई सटीक एवं सही स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सका। इस प्रकार केंद्र सरकार की ओर से किए गए विलम्ब को देखते हुए विरोधात्मक गिरफ्तारी को गैर-कानूनी घोषित करने में किसी प्रकार का संकोच नहीं है और गिरफ्तार व्यक्तियों को स्वतंत्र कर देना चाहिए।

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