Notice: Function _load_textdomain_just_in_time was called incorrectly. Translation loading for the colormag domain was triggered too early. This is usually an indicator for some code in the plugin or theme running too early. Translations should be loaded at the init action or later. Please see Debugging in WordPress for more information. (This message was added in version 6.7.0.) in /home/vivace/public_html/wp-includes/functions.php on line 6131
भारत-बांग्लादेश सम्बन्ध India-Bangladesh Relations – Vivace Panorama

भारत-बांग्लादेश सम्बन्ध India-Bangladesh Relations

भारत-बांग्लादेश का साझा इतिहास, साझी विरासत, साझी भाषा संस्कृति, स्वाधीनता संघर्ष एवं स्वतंत्रता की साझी विरासत दोनों देशों को आपस में जोड़ती है। भारत के प्रयासों द्वारा 1971 में इस स्वतंत्र राष्ट्र को संप्रभुता हासिल हुई एवं ये भारत के ही प्रयास थे कि बांग्लादेश को 1974 में संयुक्त राष्ट्र संघ की सदस्यता प्राप्त हुई। उल्लेखनीय है कि जल-विवाद, सीमा विवाद, न्यू मूर द्वीप की समस्या, शरणार्थी समस्या, आतंकवाद, भारत विरोधी गतिविधियां आदि विवादित मुद्दों के कारण दोनों देशों के मध्य तनाव की स्थिति बनी हुई है। दोनों देशों के बीच 4005 किमी. लम्बी सीमा रेखा है। इसमें पश्चिम बंगाल में 2216 किमी., मिजोरम में 318 कि.मी. और असम में 262 कि.मी. का विस्तार है। भारत एवं बांग्लादेश के मध्य द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिएकोलकाता-ढाका एवं अगरतला-ढाका बस सेवाएं शुरू की गयी हैं। व्यापार व वाणिज्य के विस्तार, वीजा व्यवस्थाओं के उदारीकरण,रेल सेवाओं के विस्तार, शिक्षा व तकनीकी प्रशिक्षण तथा भू-सीमारेखांकन के संबंध में दोनों देशों के बीच व्यापक सहमति कायम हुई है। संयुक्त नदी आयोग जल-बंटवारे में सहयोग की समीक्षा करता है। बांग्लादेश राइफल्स द्वारा अप्रैल 2001 में भारतीय सीमा सुरक्षा बल के कुछजवानों की नृशंसहत्या करके दोनों देशों के बीच आशिक दरार पैदा कर दी गई किंतु भारत की धैर्य एवं सहिष्णुता की नीति के कारण इस संकट को आसानी से सुलझा लिया गया। 6 अगस्त, 2005 को भारत व बांग्लादेश के मध्य प्रत्यर्पण संधि पर सहमति बनी। इसके अतिरिक्त सीमा पर चौकसी की व्यवस्था को और अधिक बेहतर बनाने पर बल दिया गया।

गौरतलब है कि पिछले पांच वर्षों में दोनों देशों के मध्य 145 प्रतिशत की व्यापारिक साझेदारी हुई है। वाणिज्यिक व्यापार के साथ-साथ पारस्परिक निवेश एवं तकनीकी में संयुक्त उद्यम के प्रयत्न किए जा रहे हैं। भारतीय कंपनियां बांग्लादेश में कपड़ा, रसायन, विद्युत एवं औषधि उत्पाद के क्षेत्रों में भारी निवेश कर रही हैं जो दोनों देशों के मध्य आर्थिक संबंधों की प्रगाढ़ता का सूचक है। दिसंबर 2008 में बांग्लादेश में हुए आमचुनाव में अवामी लीग के नेतृत्व वाले महागठबंधन (ग्रैंड अलायंस) को भारी बहुमत से सत्ता हासिल होने एवं शेख हसीना के प्रधानमंत्री बनने के पश्चात् दोनों मुल्कों के आपसी संबंध सामान्य होने की उम्मीद बढ़ी है क्योंकि शेख हसीना लोकतांत्रिक व्यवस्था एवं अपने पड़ोसी भारत के प्रति कहीं अधिक सकारात्मक और सहयोगी दृष्टिकोण रखती हैं। दोनों देशों को करीब लाने हेतु भारत ने कई द्विपक्षीय एवं एकपक्षीय उपाय किए, जैसे-43 वर्षों बाद कोलकाता एवं ढाका के बीच मैत्री एक्सप्रेस रेल सेवा पुनः आरंभ करना, चक्रवात से हुई हानि पर नियंत्रण के लिए व्यापक सहायता प्रदान करना आदि।

भारत ने साक में बांग्लादेश सहित अल्पविकसित देशों के निर्यात पर 1 जनवरी, 2008 से निर्यात शुल्क मुक्त प्रदान करना प्रारंभ किया है। इसके अतिरिक्त बांग्लादेश की जमीन पर भारत के विघटनकारी गुटों की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए दोनों देशों ने संयुक्त कार्यदल को बहल किया।

परस्पर हित के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग का दायरा बढ़ाने एवं मजबूत करने के प्रयास जारी रहे तथा 6-7 सितंबर, 2011 में प्रधानमंत्री की बांग्लादेश यात्रा के दौरान यह उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। जनवरी, 2010 में जारी संयुक्त वक्तव्य के अनुपालन के जरिए सहयोग की प्रक्रिया दोनों प्रधानमत्रियों द्वारा समीक्षा की गई तथा 7 सितंबर, 2011 के संयुक्त कथन में प्रधानमंत्री की यात्रा के नए आवेग प्रदर्शित हुए। भारत ने तीन बीघा क्षेत्र से दादाग्राम एवं अंगोरपोटा एनक्लेव के जरिए बांग्लादेश को 24 घंटे अधिगम्यता में सहायक हुआ तथा बांग्लादेश के अनुरोध पर 46 टेक्सटाइल मदों (वृद्धि में सभी मदों तक विस्तार किया गया, 25 को छोड़कर) के ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी।

पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी को प्रदान किए गए बांग्लादेश फ्रीडम एवार्ड को स्वीकार करने यूपीए अध्यक्षता श्रीमती सोनिया गांधी ने 25-25 जुलाई, 2011 को ढाका की यात्रा की। सेंट्रल त्रिपुरा विश्वविद्यालय द्वारा प्रदत्त मानद डी. लिट् पुरस्कार को प्राप्त करने के लिए बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 11-12 जनवरी, 2012 को त्रिपुरा की यात्रा की। दोनों देशों के बीच मित्रतापूर्ण एवं गति पूर्ण द्विपक्षीय सहयोग के निष्कर्ष के रूप में दो ऐतिहासिक समझौते एवं आठ अन्य द्विपक्षीय दस्तावेजों पर भारतीय प्रधानमंत्री की बांग्लादेश यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए। इसमें शामिल है सहयोग एवं विकास पर एक लैंडमार्क तथा अग्रदर्शी समझौता जो परस्पर शांति समृद्धि तथा स्थायित्व हासिल करने के लिए एक टिकाऊ तथा दीर्घकालीन सहयोग के साझा विजन को रेखांकित करता है तथा 1974 समझौते के प्रोटोकॉल को भी रेखांकित करता है जो भारत-बांग्लादेश की थल सीमा के निर्धारण से संबंधित है। प्रोटोकाल 1974 के थल सीमा समझौते के तीन लबित मुद्दों के हल होने की राह दिखलाता है जो हैं- (i) अनिर्धारित थल सीमा सेगमेन्ट, (ii) एनक्लेव का आदान प्रदान तथा (iii) प्रतिकूल कब्जे का निपटारा।

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने बांग्लादेश की सरकार के आमंत्रण पर 3-5 मार्च, 2013 को बांग्लादेश की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ द्विपक्षीय वार्ता में दो देशों के बीच हस्ताक्षरित भू-सीमा समझौते के शीघ्र अनुसमर्थन हेतु भारत की वचनबद्धता दोहरायी। दोनों पक्षों ने भारत द्वारा बांग्लादेश की 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर ऋण के अंतर्गत परियोजनाओं के कार्यान्वयन में हुई प्रगति की भी समीक्षा की। दोनों देशों के सम्बंधों को मजबूती प्रदान करने की दिशा में भारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की बांग्लादेश की यात्रा मील का पत्थर साबित होगी। अपनी तीन दिवसीय राजकीय यात्रा (3 मार्च से 5 मार्च, 2013) की शुरुआत करते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पड़ोसी देश बांग्लादेश के नागरिकों को स्पष्ट आश्वासन दिया कि भारत उनके साथ सदैव मित्रता ही नहीं बनाए रखेगा, अपितु उनके विकास और स्वतंत्र आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए पूरी तरह से सचेत रहते हुए भारतीय उपमहाद्वीप में स्थायित्व एवं शांति के लिए कार्य करता रहेगा।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *