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रेलवे सुरक्षा आयोग Commission Of Railway Safety – Vivace Panorama

रेलवे सुरक्षा आयोग Commission Of Railway Safety

रेलवे सुरक्षा आयोग एक उच्चस्तरीय संविधिक निकाय है जो रेलवे अधिनियम, 1989 के अंतर्गत नई रेलवे लाइनों की जांच, खुली लाइनों की जाँच, गंभीर रेल दुर्घटनाओं की जाँच और कुछ अन्य खास कृत्य जो रेलवे सुरक्षा से सम्बद्ध हैं, करता है।

लखनऊ में स्थित रेलवे सुरक्षा मुख्य आयुक्त, आयोग का मुखिया होता है, जो रेलवे सुरक्षा से जुड़े सभी मामलों पर केंद्र सरकार के प्रधान तकनीकी सलाहकार के तौर पर भी कार्य करता है। रेलवे सुरक्षा मुख्य आयुक्त (सीसीआरएस) के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन रहते हुए 9 रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) होते हैं, जिसमें से प्रत्येक 16 जोनल (रेल) में से एक या अधिक पर अधिकार क्षेत्र रखता है। इसके अतिरिक्त मेट्रो रेल, कोलकाता; डीएमआरसी, दिल्ली; एमआरटीपी, चेन्नई और कोंकण रेलवे भी इनके अधिकार क्षेत्र में आते हैं। जब आवश्यकता होती है तब मुख्यालय, लखनऊ में सीसीआरसी की सहायता हेतु 5 रेलवे सुरक्षा उपयुक्त नियुक्त किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, सिग्नल एवं दूरसंचार से सम्बद्ध मामलों में रेलवे सुरक्षा आयुक्त की मदद के लिए मुम्बई एवं कोलकाता, प्रत्येक में 2 फील्ड उपायुक्त होते हैं।

रेलवे सुरक्षा आयोग रेलवे अधिनियम, 1989, में उल्लिखित रेल यात्रा एवं संचालन से सम्बद्ध सुरक्षा हेतु कार्य करने वाली संविधिक संस्था है, जो अन्वेषणीय, जांच करने वाली और सलाहकारी प्रकृति की है। आयोग रेलवे अधिनियम एवं समय-समय पर जारी कार्यकारी निर्देशों के तहत् बनाए गए नियमों से दुर्घटना मामलों में संविधिक जांच करता है। आयोग का बेहद महत्वपूर्ण कार्य है यह सुनिश्चित करना की यात्री परिवहन के लिए खुली नई रेल लाइन मंत्रालय द्वारा जारी मानकों एवं नियमों के अनुसार हैं या नहीं और नई लाइन यात्री परिवहन के लिए सभी तरह से सुरक्षित है।

रेलवे दावा न्यायाधिकरण

रेलवे दावा ट्रिब्यूनल अधिनियम, 1987 रेलवे प्रशासन के खिलाफ नुकसान, विध्वंस, हानि, या पशुओं या सामान न पहुंचा पाने या किराया या मालभाड़ा लौटाने या यात्रियों की मृत्यु या चोट की क्षतिपूर्ति करने (रेलवे दुर्घटना की स्थिति में) या रेलवे से संबंधित अन्य मामलों के लिए एक रेलवे दावा ट्रिब्यूनल के गठन का प्रावधान करता है। रेलवे दावा ट्रिब्यूनल में एक अध्यक्ष, चार उपाध्यक्ष और न्यायिक सदस्यों और तकनीकी सदस्यों की ऐसी संख्या जो केंद्र सरकार उचित समझे, होंगे।

अपने कृत्यों का निर्वहन करने के लिए ट्रिब्यूनल को निम्न मामलों में दीवानी न्यायालय के समान शक्तियां प्राप्त होंगी-

  • किसी व्यक्ति को ट्रिब्यूनल के समक्ष उपस्थित होने का सम्मन भेजना और शपथ देकर उसका मूल्यांकन करना;
  • दस्तावेजों की खोज एवं प्रस्तुति की मांग करना;
  • शपथपत्र पर प्रमाण प्राप्त करना;
  • साक्ष्यों या दस्तावेजों के परीक्षण हेतु समिति गठित करना;
  • स्वयं के निर्णयों की समीक्षा करना;
  • डिफाल्ट के लिए आवेदन रद्द करना;
  • डिफाल्ट (अयोग्य) के लिए किसी आवेदन को रद्द करने के आदेश को एक तरफ रखना;
  • अन्य कोई मामला जो इसे अनुशंसित किया गया हो।


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