विकलांगों एवं वृद्धों के लिए कल्याणकारी कार्यक्रम Welfare Programs for the Disabled and Elderly

भारत के संविधान में सभी लोगों को समानता, स्वतंत्रता, न्याय और सम्मान सुनिश्चित किया गया है। इसका अर्थ है सर्वसमागम वाला समाज जिसमें विकलांग भी शामिल हैं। संविधान में ऐसे व्यक्तियों के सशक्तिकरण की जिम्मेदारी राज्यों पर डाली गई है।

भारत ने विकलांग व्यक्तियों की पूर्ण भागीदारी और समानता पर एशिया प्रशांत क्षेत्र संधि उद्घोषणा पर हस्ताक्षर किए गए हैं। एक सर्वसुलभ, अवरोध मुक्त और अधिकार आधारित समाज की दिशा में कार्य करने के बिकावो मिलेनियम फ्रेमवर्क पर भी भारत ने हस्ताक्षर किए हैं। साथ ही, विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा और संवर्द्धन पर संयुक्त राष्ट्र संधि पर भारत ने पहली अक्टूबर 2008 को हस्ताक्षर किए।

समाज के अलग-थलग पड़े वर्गों में विकलांग व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय नीति को वर्ष 2005 में अंतिम रूप दिया गया। इस नीति में विकलांगता की रोकथाम और विकलांग व्यक्तियों के शारीरिक और आर्थिक पुनर्वास के उपायों पर बल दिया गया है। इसे सरकार और अन्य एजेंसियों द्वारा लागू किया जाएगा। विकलांग व्यक्तियों के कल्याण और पुनर्वास के लिए पहले भी विभिन्न प्रकार के उपाय किए गए हैं।

विकलांग व्यक्ति अधिनियम, 1995: विकलांग व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों की रक्षा और पूर्ण सहभागिता) अधिनियम, 1995 नामक व्यापक कानून फरवरी 1996 में लागू किया गया। इस कानून के तहत् केंद्र और राज्य स्तर पर विकलांगों के पुनर्वास को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों जैसे शिक्षा, रोजगार और व्यावसायिक प्रशिक्षण, अनुकूल परिवेश का निर्माण, विकलांगों के लिए पुनर्वास सेवाओं का प्रावधान, संस्थागत सेवाएं और सहायक सामाजिक सुरक्षा उपाय जैसे केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर बेरोज़गारी भत्ता तथा शिकायत निवारण तंत्र आदि बातों पर ध्यान दिया गया है।

विकलांग व्यक्तियों के लिए कृत्रिम अंगों और उपकरणों की खरीद/फिटिंग की सहायता योजना: इस योजना का उद्देश्य जरूरतमंद विकलांगों को टिकाऊ, अत्याधुनिक और वैज्ञानिक निधि से निर्मित मानक सहायक उपकरणों की सहायता उपलब्ध कराना है जिससे उनकी विकलांगता की परेशानियां कण हो सकें और उनकी आर्थिक क्षमता बढ़ सके तथा शारीरिक, सामाजिक तथा मनोवैज्ञानिक रूप से उनका पुनर्वास हो सके। यह योजना स्वयंसेवी संगठनों, मंत्रालय के तहत् आने वाले राष्ट्रीय संस्थानों, एएलआईएमसीओ, जिला पंचायतों, जिला ग्रामीण विकास एजेंसियों आदि के माध्यम से लागू की जा रही है। अमल करने और उनका वितरण आदि के लिए अनुदान/सहायता उपलब्ध करायी जाती है। इस योजना के तहत् उपकरणों और सहायक पुर्जों की फिटिंग के पहले उनकी चिकित्सा/सर्जरी से ठीक करने आदि की सभी प्रक्रियाएं भी शामिल हैं।

वृद्धजनों के लिए राष्ट्रीय नीति: वृद्धजनों के लिए राष्ट्रीय नीति की घोषणा जनवरी 1999 में की गई। इसका मुख्य उद्देश्य है व्यक्ति को स्वयं अपने और सहयोगी के वृद्ध जीवन की तैयारी हेतु प्रोत्साहन देना, परिवारों को अपने बुजुर्ग सदस्यों की देखभाल के लिए प्रोत्साहित करना, परिवार द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली देखभाल में स्वयंसेवी और गैर सरकारी संगठनों को पूरक योगदान हासिल करना, गंभीर हालत वाले वृद्ध लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल और संरक्षण, वृद्धों के लिए सेवा और संरक्षण देने वाले लोगों को अनुसंधान तथा प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराना और वृद्धों में ऐसी जागरूकता पैदा करना जिससे वे स्वयं आत्मनिर्भर बन सकें।

वृद्धजनों के लिए समेकित कार्यक्रम: भारत में वृद्धजनों की जनसंख्या में काफी वृद्धि हुई है। वृद्धजनों की संख्या वर्ष 1951 के 19.8 मिलियन से बढ़कर वर्ष 2001 में 76 मिलियन हो गई है और अनुमानों के अनुसार वर्ष 2013 में 60 वर्ष से अधिक आयुके व्यक्तियों की संख्या 100 मिलियन तथा वर्ष 2030 में 198 मिलियन होने की आशा है। जीवनप्रत्याशा,जो 1947 में लगभग 29 वर्ष थी अब कई गुणा बढ़कर 65 वर्ष के पास ही गई है।

भारतीय समाज के परम्परागत मूल्यों में वृद्धजनों को सम्मान देना और देखभाल करने पर बल दिया जाता था। तथापि, हाल के समय में समाज में धीरे-धीरे लेकिन निश्चित तौर पर संयुक्त परिवार प्रणाली में विघटन हो रहा है पणिामस्वरूप भावनात्मक शारीरिक और वित्तीय सहायता की कमी से काफी संख्या में माता-पिता की उनके परिवारों द्वारा उपेक्षा की जा रही है। ये वृद्धिजन पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा की कमी में अनेक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि वृद्धावस्था एक बड़ी सामाजिक चुनौती बन गई है और वृद्धजनों की आर्थिक और स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने और वृद्धजनों की भावनात्मक जरूरतों के प्रति संवेदनशील सामाजिक वातावरण बनाए जाने की आवश्यकता है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य वृद्ध व्यक्तियों को मौलिक सुविधाएं जैसे आश्रय, भोजन, चिकित्सा देखभाल और मनोरंजन के अवसर प्रदान कर और सरकारी/गैर-सरकारी सकारात्मक एवं सक्रिय अनुकूल वृद्धावस्था को प्रोत्साहित करके, समर्थन देकर वृद्ध व्यक्तियों के जीवन स्तर में सुधार लाना है।

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