पथ विक्रेता (जीविका सुरक्षा एवं पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 Street Vendors (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending) Act, 2014

राज्य सभा ने 19 फरवरी 2014 को पथ विक्रेता (जीविका का संरक्षण एवं पथ विक्रय का विनियमन) विधेयक, 2014 को पारित किया। इस विधेयक के तहत् पथ विक्रेताओं को जीविका संरक्षण का अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और देश में शहरी पथ विक्रय के विनियमन तथा इनसे जुड़े मामलों के बारे में सुरक्षा प्राप्त होती है।

पथ विक्रेता (जीविका का संरक्षण एवं पथ विक्रय का विनियमन) विधेयक, 2014 को लोक सभा ने 06 सितंबर 2013 को ही पारित कर दिया था।

पथ विक्रेता (जीविका का संरक्षण एवं पथ विक्रय का विनियमन) विधेयक, 2014 का उद्देश्य शहरी इलाकों के पथ विक्रेताओं के हितों की रक्षा करना करना एवं पथ विक्रय गतिविधियों को नियमित करना है। साथ ही, इस विधेयक का उद्देश्य पथ विक्रेताओं हेतु ऐसा माहौल तैयार करना है जिसमें वे सुगमता तथा पारदर्शिता के साथ कारोबार कर सकें और उन्हें किसी भी प्रकार से निकाले जाने एवं प्रताड़ित किये जाने का भय न हो।

विधेयक के मुख्य बिंदु
1. विधेयक में उपबंध किया गया है कि टाउन वेंडिंग कमेटी (टीवीसी) के 40 प्रतिशत सदस्य चुनाव के जरिए स्ट्रीट वेंडरों में से ही होंगे। इनमें एक-तिहाई महिलाएं होंगी।
2. इस कानून के प्रभाव में आने से पूर्व जिन्हें वेंडिंग सर्टीफिकेट/ लाइसेंस जारी किए गए हैं वे सर्टिफिकेट में दर्ज अवधि तक उस श्रेणी के स्ट्रीट वेंडर माने जाने का प्रावधान है।
3. विधेयक में प्रत्येक स्थानीय क्षेत्र में शहरी वेंडिंग प्राधिकार के गठन का प्रावधान किया गया। यह विधेयक के प्रावधानों को लागू करने की धुरी है।
4. विधेयक के तहत स्ट्रीट वेंडिंग से जुड़ी गतिविधियों जैसे बाजार वेंडिंग समिति (टीवीसी) में अधिकारियों, गैर-अधिकारियों, महिला वेंडर जाति/अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़े वर्ग तथा लोगों का प्रतिनिधित्व हो।
5. यह विधेयक जब्त की गई विनाशशील और गैर-विनाशशील वस्तुओं को छुड़ाने के लिए निश्चित समयावधि प्रदान करती है। विनाशशील वस्तुओं के मामले में, स्थानीय अधिकारी को दो कामकाजी दिनों में माल को छोड़ने का प्रावधान है और नष्ट होने वाली वस्तुओं के मामले में उसी दिन उस माल की छोड़ने का प्रावधान है, जिस दिन दावा किया गया है।
6. विधेयक में सभी वर्तमान स्ट्रीट वेंडरों के सर्वेक्षण और प्रत्येक 5 वर्ष में पुनर्सवेक्षण की व्यवस्था है, जिसमें सर्वे में चिन्हित स्ट्रीट वेंडरों को प्रमाण-पत्र जारी करना शामिल है। इसमें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़े वर्ग तथा अशक्त लोगों की प्राथमिकता की बात भी है।
7. सर्वे में चिन्हित सभी वर्तमान स्ट्रीट वेंडरों की वेंडिंग क्षेत्र में शामिल किया जाना है, शर्त यह है कि वार्ड या क्षेत्र या शहर की आबादी का 2.5 प्रतिशत वेंडिंग जीन हो।
8. वेंडिंग जोन की क्षमता से अधिक जहां चिन्हित स्ट्रीट वेंडर्स हैं वहां टीवीसी द्वारा लॉटरी निकालकर उस वेडिंग जोन के लिए प्रमाणपत्र जारी किए जाने का प्रावधान है। शेष बचे लोगों को पड़ोस के वेंडिंग जोन में समायोजित किया जाना है।
9. इस विधेयक में स्ट्रीट वेंटरों के लिए सरकार द्वारा किए जाने वाले कर्जे की उपलब्धता, बीमा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों का प्रावधान किया गया।
10. यदि किसी रेहड़ी और खोमचे वाले को प्रमाणपत्र जारी किया गया है और उसका निधन हो जाता है या वह बीमार है या वह स्थायी रूप से अशक्त हो जाता है तो उसके परिवार के सदस्य यानी उसकी पत्नी या निर्भर बच्चे को रेहड़ी पटरी और खोमचे चलाने का अधिकार देने का प्रावधान है। यह अधिकार तब तक है जब तक प्रमाणपत्र की वैधता है।
11. रेहड़ी पटरी वालों का स्थान परिवर्तन अंतिम उपाय के तौर पर किए जाने का प्रावधान है। इसी तरह रेहड़ी पटरी वालों को एक स्थान से हटाकर दूसरे स्थान पर ले जाने के मामले में विधेयक की दूसरी अनुसूची में व्यवस्था है।
12. इस तरह विधेयक में रेहड़ी पटरी और खोमचे वालों की परेशानी से सुरक्षित रखने के लिए तथा उसकी जीविका को बढ़ावा देने की उपाय कर सबको शामिल किया गया है।
13. विधेयक की धारा-29 स्ट्रीट वेंडरों के पुलिस और अन्य अधिकारियों के उत्पीड़न से संरक्षण प्रदान करती है और यह अभिभावी धारा का प्रावधान करती है जो सुनिश्चित करता है कि वे किसी अन्य कानून के तहत् भी बिना किसी उत्पीड़न और भय के अपना काम करें।
14. विधेयक में स्ट्रीट वेंडर्स की शिकायतों को दूर करने के लिए निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विवाद निवारण तंत्र की स्थापना का प्रावधान है।
15. विधेयक में प्रावधान किया गया है कि सर्वे पूरा होने तथा स्ट्रीट वेंडरों की सर्टिफिकेट जारी होने तक किसी भी स्ट्रीट वेंडर को उस स्थान से हटाया नहीं जाता है।
16. विधेयक प्राकृतिक बाजार पर बल देता है।
17. विधेयक में स्थान बदलने, स्थान से हटाने और सामान की जब्ती को निर्दिष्ट किया गया है और यह रेहड़ी पटरी और खोमचे बालों के लिए सुलभ है। स्थानीय अधिकारियों द्वारा रेहड़ी पटरी और खोमचे वाले को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने के मामले में टीवीसी की सिफारिश का प्रावधान है।
18. यह विधेयक विशेष तौर से इस बात का प्रावधान करता है की विधेयक के अंतर्गत नियमों को इसके प्रारंभ होने के एक वर्ष
19. विधेयक उपबंध करता है कि पूरी योजना इस बात को सुनिश्चित करे कि स्ट्रीट वेंडर के लिए जगह या क्षेत्र की व्यवस्था उचित हो और प्राकृतिक बाजार के स्वभाव के अनुरूप हो। इस तरह प्राकृतिक स्थान जहाँ खरीददार और दुकानदार का निरंतर मिलना होता है, उसे विधेयक में संरक्षित किया गया है।

संवैधानिक स्थिति

इस विधेयक से संविधान में उल्लिखित सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा एवं समानता के उद्देश्य की पूर्ति हो सकेगी। संविधान के अनुच्छेद-21, 41, 42 एवं 46 इत्यादि का कार्यान्वयन हो सकेगा।

प्रभाव


इस विधेयक से रेहड़ी पटरी एवं खोमचे वालों की आजीविका की सुरक्षा एवं सम्मान प्राप्त हो सकेगा जिसके परिणामस्वरूप देश में आर्थिक समानता, शिक्षा एवं स्वास्थ्य तक उनकी बेहतर पहुंच हो सकेगी, जो समावेशी विकास की अवधारणा को बल प्रदान करेगा।

4 thoughts on “पथ विक्रेता (जीविका सुरक्षा एवं पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 Street Vendors (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending) Act, 2014

  • August 31, 2018 at 7:52 pm
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    राज्य स्तरीय पथ विक्रेता कल्याण परिषद् (प्रदेश सचिव)

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  • August 31, 2018 at 9:19 pm
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    उपरोक्त विषय मे निवेदन है कि, स्थान महाराज बाडा़ लश्कर ग्वालियर म.प्र.पर स्थाई व अस्थाई स्वीकृत स्थानों पर पथ विक्रेता अपना व्यवसाय पिछले 20 वरषो से करते आ रहे है। शासन द्वारा विक्रेताओं के संबंध में अधिसूचना जारी कर अधिनियम पारित किया गया है जो पथ विक्रेता (जिविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम 2014 के नाम से जारी किया गया है जिसकी धारा 3(3) के अनुसार किसी भी पथ विक्रेता को उपधारा (1) के अधीन विनिदिरषट सर्वेक्षण के पूरा होने और सभी पथ विक्रेताओ के विक्रय प्रमाण पत्र जारी होने तक यथा स्थिति बेदखल या पुनः स्थापित नहीं किया जावेगा । उक्त धारा के तहत पथ विक्रेताओ को संरक्षण प्राप्त है। परंतु स्थानीय निगम कर्मचारी एंव पुलिस कर्मचारी उक्त नियम के बावजूद भी पथ विक्रेताओं से अनैतिक लाभ हासिल करने के आशय से परेशान कर रहे है उक्त पथ विक्रेताओ को उक्त नियम के तहत संरक्षण प्रधान किया जावे तथा स्थानीय निगम एवं प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की जावे तथा स्थानीय पथ विक्रेताओ को अपना व्यवसाय करने में व्यवधान उतपंन न किया जावे। ततसंबंध में निगम एवं प्रशासनिक अधिकारी एवं कर्मचारियों को उचित आदेश एवं निर्देश जारी किया जावे ताकि गरीब पथ विक्रेताओ का शोषण न होकर शोषण मुक्त हो सके। (सादर धन्यवाद) प्रदेश सचिव जयकुमार जैन

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