अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य मंडल International Chamber of Commerce - ICC

मुख्यालय: पेरिस (फ्रांस)।

उद्भव एवं उद्देश्य

अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्य मंडल (International Chamber of Commerce—ICC) का गठन 1919 में हुआ था। यह अग्रलिखित दो प्रमुख उद्देश्यों की पूर्ति के लिये कार्यरत है-(i) मुक्त व्यापार और निजी उद्यम को प्रोत्साहित करना, तथा; (ii) प्रायोगिक सेवाएं (practical services) प्रदान करना और सरकारी एवं अंतर-सरकारी स्तरों पर व्यापार हितों का प्रतिनिधित्व करना।

संरचना

आईसीसी की संगठनात्मक संरचना में परिषद्, कार्यकारी बोर्ड, राष्ट्रीय समितियां और समूह, कांग्रेस सम्मेलन और अंतरराष्ट्रीय सचिवालय सम्मिलित हैं। आईसीसी का शासी निकाय परिषद है, जिसकी प्रत्येक वर्ष दो बैठकें होती हैं। शासी निकाय के सदस्य राष्ट्रीय समितियों द्वारा मनोनीत होते हैं। शासी निकाय दो वर्ष के लिये सभापति और उप-सभापति का चुनाव करता है। कार्यकारी बोर्ड में 15-30 सदस्य होते हैं, जो परिषद के द्वारा तीन वर्ष के लिये चुने जाते हैं। बोर्ड के सदस्य आईसीसी की विभिन्न गतिविधियों में समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से वर्ष में कम-से-कम तीन बैठकें करते हैं। राष्ट्रीय समितियां और समूह अपने-अपने राष्ट्रीय घटकों से जुड़े विषयों का विश्लेषण करते हैं तथा आईसीसी की नीतियों की ओर लोगों तथा सरकार का ध्यान खींचते हैं।

कांग्रेस आईसीसी की सर्वोच्च सभा है, जिसमे सभी सदस्य- कम्पिनियों तथा संगठनों को अपने वरिष्ठ प्रतिनिधि भेजने के लिये आमंत्रित किया जाता है। कांग्रेस का आयोजन प्रत्येक तीन वर्ष के अंतराल पर होता है। व्यापार, बैंक और वाणिज्य के क्षेत्रों में आईसीसी की सुविज्ञता (expertise) के प्रसार के उद्देश्य से वर्ष 1996 में सम्मेलनों का आयोजन किया गया। अंतरराष्ट्रीय सचिवालय का प्रधान अधिकारी महासचिव होता है, जिसकी नियुक्ति कार्यकारी बोर्ड की सिफारिश के आधार पर परिषद के द्वारा की जाती है।

गतिविधियां

आईसीसी के अधीन अनेक नीति एवं तकनीकी आयोग गठित किये गये हैं। इन आयोगों के सदस्य राष्ट्रीय समितियों द्वारा मनोनीत किए जाते हैं। ये आयोग विश्व व्यापार समुदाय के लिये विशिष्ट संहिताओं और दिशा-निर्देशों का निर्धारण करते हैं। आईसीसी ओईसीडी, डब्ल्यूटीओ, ईयू, आदि अंतरराष्ट्रीय संगठनों से घनिष्ठ संपर्क बनाकर रखता है। यह वाणिज्य से जुड़े अंतरराष्ट्रीय अपराधों से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। आईसीसी अंतरराष्ट्रीय विवाचन न्यायालय वाणिज्यिक विवादों पर विचार करता है।

अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य मण्डल (आईसीसी) विश्व में सबसे बड़ा एवं अधिकतम प्रतिनिधित्व करने वाला व्यावसायिक संगठन है। इसके 180 से अधिक देशों में हजारों कपनियां सदस्य हैं। आईसीसी की तीन मुख्य गतिविधियां हैं-नियम निर्धारण, विवाद समाधान, और नीति वकालत है।

90 से अधिक देशों में राष्ट्रीय समितियों का एक विश्व नेटवर्क राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय स्तर पर व्यवसायगत प्राथमिकताओं की वकालत करता है। आईसीसी की सदस्य कपनियों के 2,000 से अधिक विशेषज्ञ आईसीसी के विशिष्ट व्यवसाय मामले पर अपना रूख, ज्ञान एवं अनुभव प्रदान करते हैं। संगठन का अंतरराष्ट्रीय सचिवालय पेरिस में स्थापित किया गया था। आईसीसी अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय 1923 में सृजित किया गया।

सितंबर, 2011 में, अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य मण्डल ने पूरे विश्व में विपणन एवं विज्ञापन पेशेवरों के मार्ग-निर्देशन हेतु एक नवीन संशोधित समन्वित विज्ञापन एवं विपणन संचार व्यवहार संबंधी आईसीसी कोड प्रस्तुत किया।

मार्च 2012 में आईसीसी ने कतर चैम्बर के साथ भागीदारी करके आईसीसी बिजनेस वर्ल्ड ट्रेड एजेंडा की पहल का शुभारंभ किया ताकि नवीन बहुपक्षीय व्यापार नीति एजेंडे में निजी क्षेत्र को नेतृत्व प्रदान किया जा सके। इसके प्रारंभ से, वर्ल्ड ट्रेड एजेंडा पहल ने अपनी अनुशंसाओं के लिए आगत एवं वैधता एकत्रित करने के लिए विश्व के सभी बड़े क्षेत्रों में वरिष्ठ कार्यकारियों एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श एवं परामर्श का आयोजन किया। इन व्यवसाय प्रथमताओं का प्रसारण दोहा में 22 अप्रैल, 2013 को आईसीसी वर्ल्ड ट्रेड एजेंडा शिखर सम्मेलन के दौरान किया गया।

व्यापार सुसाध्यता पर समझौते को अंतिम तौर पर 7 दिसंबर, 2013 को डब्ल्यूटीओ के नवें मंत्रिस्तरीय कॉफ्रेंस में अपनाया गया। यह डब्ल्यूटीओ के सृजन के समय से व्यापार सुसाध्यता पर सबसे बड़ा समझौता था।

वर्ष 2009 में आईसीसी ने सार्वजनिक ज्ञान, शिक्षा एवं वैश्विक व्यापार समझौता एवं निवेश के लाभों पर चर्चा में योगदान के लिए स्वतंत्र अनुसंधान हेतु आईसीसी रिसर्च फाउंडेशन (आईसीसीआरएफ) की स्थापना की।

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