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भारतीय विज्ञापन मानक परिषद् The Advertising Standards Council of India – ASCI – Vivace Panorama

भारतीय विज्ञापन मानक परिषद् The Advertising Standards Council of India – ASCI

एडवटाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इण्डिया (एएससीआई) एक स्वयंसेवी स्वनियंत्रित संस्था है, जो भारतीय कपनी अधिनियम की धारा 25 के तहत् अलाभकारी संस्था के तौर पर रजिस्टर्ड है। इस संस्था को प्रायोजित करने वाली प्रमुख कंपनियां भारतीय उद्योग जगत की विख्यात कम्पनियां हैं, जिसमें मीडिया, विज्ञापनदाता कम्पनियां और विज्ञापन की दुनिया से जुड़ी अन्य एजेंसियां भी शामिल हैं। यह सरकारी संस्था नहीं है, न ही यह आम जनता या इंडस्ट्री के लिए नियामक (रगुलेटरी बॉडी) का काम करती है।

संगठन

बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (16 सदस्य) विज्ञापन कपनियों, एजेंसियों, मीडिया एवं अन्य विज्ञापन सेवाओं का एकसमान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है, सदस्य कम्पिनियाँ उनकी सम्बद्ध उद्योगों एवं सेवाओं का नेतृत्व करती हैं। उपभोक्ता शिकायत परिषद् (सीसीसी) (21 सदस्य) में 12 सदस्य सिविल सोसायटी का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-विज्ञान पेशेवर होते हैं, जो अपने अनुशासन विशेष जैसे चिकित्सा, विधिक, औद्योगिक अभिकल्प, इंजीनियरिंग, रसायन प्रावधि, मानव संसाधन एवं उपभोक्ता हित समूह, के प्रसिद्ध एवं मान्य व्यक्ति होते हैं; और 9 सदस्य, कपनियों के विज्ञापन विशेषज्ञ होते हैं।

उद्देश्य

एडवर्टाइजिंग कोड का उद्देश्य है विज्ञापन की विषय-वस्तु पर नियंत्रण रखना, ताकि किसी भी वजह से लोगों की भावनाएं आहत न हों और उत्पाद की बिक्री पर असर न पड़े। हां अगर विज्ञापन में कोई आक्रामक बात न हो, तो इस कोड के तहत् उस पर आपत्ति नहीं की जाएगी।

मूल सिद्धांतों का स्पष्टीकरण

स्वनियंत्रण का यह कोड इंडस्ट्री और एडवर्टाइजिंग बिजनेस से जुड़े लोगों ने तैयार किया है और इसमें विज्ञापन से प्रभावित होने वाले लोगों अर्थात् उपभोक्ताओं के प्रतिनिधियों की भी राय ली गई है। आम लोगों कॉर्पोरेट्स और विज्ञान जगत् से जुड़ी कंपनियों ने इस कोड को गाइडलाइन के तौर पर स्वीकार कर लिया है, जिससे उपभोक्ताओं के बीच विज्ञापनों की स्वीकार्यता बढ़ाई जा सके।


  1. विज्ञापन में किए गए वादों की सच्चाई को सुनिश्चित करना और भ्रमित करने वाले विज्ञापनों पर नियंत्रण
  2. आम तौर पर मान्य सार्वजनिक शालीनता को देखते हुए यह सुनिश्चित करना कि विज्ञापन अभद्र न हों।
  3. ऐसे उत्पादों के विज्ञापन पर नजर रखना जिनका उपयोग सामाजिक तौर पर मान्य नहीं है, या जिन उत्पादों को व्यापक तौर पर खतरनाक माना जाता है।
  4. यह सुनिश्चित करना कि विज्ञापन स्वस्थ प्रतियोगिता के तहत् बनाए गए हो, जिसमें उपभोक्ता बाजार में मौजूद उत्पादों के बारे में जानकारी हासिल कर सके और बिजनेस की प्रतियोगिता का उद्देश्य भी सार्थक हो।

किसी उत्पाद के विज्ञापन पर उठे विवाद पर निर्णय करते समय कोड के उपरोक्त नियमों को आधार माना जाएगा चाहे विज्ञापन को ऐड वर्ल्ड से चैलेंज किया जाए या इसके बाहर से। आम जनता और विज्ञापनदाता के प्रतिद्वंदी दोनों के जिम्मेदार, बुद्धिमत्तापूर्ण और सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किए गए विज्ञापन की उम्मीद करने का समान अधिकार है। यह कोड एडवटाइजिंग, एडवटाइजिंग एजेंसी और मीडिया तीनों पर लागू होता है।

कोड को लागू करने की जिम्मेदारी

सेल्फ-रेगुलेशन इन एडवर्टाइजिंग कोड को लागू करने की जिम्मेदारी उन सभी पर है जो किसी विज्ञापन को तैयार करवाते हैं, क्रिएट करते हैं, दिखाते हैं या प्रकाशित करते हैं या इनमें सहयोग करते हैं। सभी एडवर्टाइजर्स, एडवर्टाइजिंग एजेंसी और मीडिया से उम्मीद की जाती है कि वे इस कोड का उल्लंघन वाले विज्ञापनों को न तैयार करवाएंगे, न क्रिएट करेंगे और न ही इसे दिखाएंगे या प्रकाशित करेंगे। विज्ञापनों की तैयार करवाने वाले, बनाने वाले या प्रकाशित करने वालों के लिए सेल्फ-रेगुलेशन इन एडवर्टाइजिंग का कोड स्वतः लागू होने वाला नियम है। यह कोड उन सभी विज्ञापनों पर लागू होता है, जो भारत में पढ़े, देखे या सुने जाते हैं, इसके अलावा भारत के बाहर बने या प्रकाशित हुए विज्ञापन पर भी यह लागू होगा अगर वे भारतीय उपभोक्ता को लक्ष्य करते हो या उनकी पहुंच भारत के काफी लोगों तक हो।

कोड और नियम

विज्ञापनों पर सिर्फ कोड के ही नियम नहीं लागू होते। भारत के सामान्य कानून और नियमों के तहत् भी ऐसे कई प्रावधान हैं जो किसी भी विज्ञापन की विषय-वस्तु को निर्देशित कर सकते हैं। कोड उन कानूनों के मुकाबले के लिए नहीं है। इसके नियम और इन्हें लागू करने वाली मशीनरी इस तरह से तैयार की गई कि वे कानूनी नियंत्रण की पूरक बनें, न कि इसकी प्रतिद्वंद्वी या विरोधी।

कोड के मानक

अपने उत्पादों के प्रति लोगों में रुचि जगाने के लिए विक्रेता द्वारा विज्ञापन देना एक अहम और वैध तरीका है। विज्ञापन की सफलता जनता के विश्वास पर निर्भर करती है। इसलिए ऐसे किसी भी तरीके की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए, जिससे लोगों का विश्वास भंग हो। यहां बताए गए मानक स्वीकार्यता के न्यूनतम मानक हैं, जिन्हें समय-समय पर रिव्यू किया जाना चाहिए और उन्हें समय के मुताबिक उपभोक्ताओं के मानदंड पर खरा उतरना चाहिए।

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