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अन्तर-संसदीय संघ Inter-Parliamentary Union – IPU – Vivace Panorama

अन्तर-संसदीय संघ Inter-Parliamentary Union – IPU

मुख्यालय: जेनेवा (स्विट्जरलैंड)।

सदस्यता: 164 सदस्य और 10 सम्बद्ध सदस्य।

उद्भव एवं विकास

विलियम रैडल क्रेमर (युनाइटेड किंगडम) तथा फ्रेडरिक पेसी (फ्रांस) ने वर्ष 1889 में स्थापित अंतर संसदीय संघ (Inter-Parliamentary Union-IPU) के गठन में सक्रिय भूमिका अदा की। आईपीयू बहुपक्षीय राजनीतिक वार्ताओं के लिये पहला स्थायी मंच है। यह विश्व के सभी प्रमुख राजनितिक तंत्रों और प्रवृत्तियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों के बीच संवाद और संसदीय कूटनीतिक का केन्द्र है।

आईपीयू को संयुक्त राष्ट्र में स्थायी पर्यवेक्षक का दर्जा और आर्थिक एवं सामाजिक परिषद् में सामान्य परामर्शकारी का दर्जा प्राप्त है।

24 जुलाई, 1996 को आईपीयू और महासचिव के बीच में एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए और तत्पश्चात महासभा प्रस्ताव द्वारा इसकी पुष्टि हो गयी, जहाँ संयुक्त राष्ट्र संघ ने आईपीयू को सांसदों के विश्व संगठन के तौर पर मान्यता प्रदान की। 19 नवम्बर, 2002 को, आईपीयू की महासभा में पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त हुआ।

उद्देश्य


आईपीयू का गठन इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिये किया गया है- सभी देशों की संसदों और सांसदों के मध्य सम्पर्क, समन्वय तथा अनुभवों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना; अंतरराष्ट्रीय हित और समस्याओं से जुड़े प्रश्नों पर विचार करना तथा इन विषयों पर अपने विचार व्यक्त करना ताकि संसद आवश्यक कार्यवाही कर सकें; संसदीय प्रजातंत्र और विकास के लिए आवश्यक मानवाधिकारों की रक्षा और प्रोत्साहन में योगदान देना, तथा; प्रतिनिधि संस्थाओं के क्रिया-कलापों की बेहतर जानकारी तथा उनकी कार्रवाई के साधनों के विकास और मजबूती में सहयोग देना।

संरचना

परिषद् की वर्ष में दो बार बैठक होती है। परिषद् का संगठन अंतर-संसदीय संघ के सदस्यों द्वारा प्रतिनिधि के तौर पर नामित सांसदों द्वारा होता है। परिषद् को इसके कार्यों में स्थायी समिति मदद करती है, जिसकी संख्या एवं पदावधि गवर्निग कॉसिल द्वारा निर्धारित की जाती है। स्थायी समितियां सामान्य तौर पर परिषद् के लिए प्रतिवेदन एवं ड्राफ्ट प्रस्ताव तैयार करती हैं। कोई भी प्रतिनिधि 10 वोट से अधिक नहीं दे सकता। शासकीय परिषद् के सामान्यतः वर्ष में दो सत्र होते हैं। शासकीय परिषद् का संघटन आईपीयू के प्रत्येक सदस्य के तीन प्रतिनिधियों द्वारा होता है। शासकीय परिषद्-तीन वर्षों के लिए आईपीयू के अध्यक्ष का चुनाव करती है। यह कार्यकारी समिति के सदस्यों का चुनाव करती है और संघ के लिए महासचिव की नियुक्ति करती है। कार्यकारी समिति का गठन आईपीयू के अध्यक्ष, विभिन्न संसदों के 15 सदस्य और महिला सांसदों की बैठक के समन्वय समिति के अध्यक्ष से होता है। 15 चयनित सीटें भू-राजनीतिक समूहों के लिए रखी जाती हैं। केवल उन राज्यों के सांसद जहां महिलाओं को मतदान का अधिकार और चुनाव में खड़े होने का अधिकार दोनों ही प्राप्त होता है, कार्यकारी समिति के लिए अर्ह होते हैं। कार्यकारी समिति आईपीयू का प्रशासनिक अंग है। संघ के सचिवालय में कार्यरत लोगों की संख्या संघ के महासचिव के निर्देश के अंतर्गत होती है। संसदों के महासचिवों के संगठन आईपीयू का एक परामर्शीय निकाय है।

अंतरराष्ट्रीय संसदीय परिषदें सम्बद्ध सदस्य के रूप में शासकीय परिषद् के माध्यम से प्रवेश कर सकती हैं। प्रत्येक संसद जो संप्रभु देश के कॉनन से संगत रहते हुए गठित हुई है और जिसका यह प्रतिनिधित्व करती है और जिसकी भूमि पर यह कार्य करती है, अंतर-संसदीय संघ से सम्बद्ध होने का आग्रह कर सकती है। संसद के प्रवेश और पुनप्रवेश का निर्णय गवर्निग कौंसिल द्वारा लिया जाता है। यह संघ के सदस्यों का दायित्व होता है कि वे अपनी सम्बद्ध संसद का प्रस्ताव संघ की प्रस्तुत करें, सरकार को सूचित करें, उसके क्रियान्वयन को प्रेरित करें और संघ के सचिवालय को सूचित करें।

अक्टूबर 2000 में जकार्ता (इंडोनेशिया) में आयोजित आईपीयू के 104वें कॉफ्रेंस में तीन प्रस्ताव पारित किए गए-(i) सैन्य तख्ता पलट को रोकने संबंधी प्रस्ताव; (ii) आम लोगों पर आर्थिक प्रतिबंधों के नकारात्मक प्रभाव; और (iii) विकास संबंधी मामलों पर प्रस्ताव।

संयुक्त राष्ट्र संघ और आईपीयू विभिन्न क्षेत्रों में, विशेष रूप से शांति एवं सुरक्षा, आर्थिक और सामाजिक विकास, अंतर्राष्ट्रीय कानून, मानवाधिकार और लोकतंत्र और लिंग मामले में बेहद आपसी सहयोग किया। आईपीयू ने अंतर्सरकारी स्तर पर संस्थानों के स्थापना के लिए कार्य किया। प्रत्येक वर्ष आईपीयू संसदीय सुनवाई का आयोजन करती है।

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