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सिकंदर महान Alexander The Great – Vivace Panorama

सिकंदर महान Alexander The Great

सिकंदर, जिसका पूरा नाम मॅसेडोनिया का अलेक्ज़ेंडर तृतीय (Alexander III of Macedon) था, वह एक विशाल साम्राज्य ग्रीस, फारस, मिस्र, और भारत के संक्षिप्त भागों का विजेता था| सिकंदर मॅसेडोनिया के राजा फ़िलिप II ( King Philip II) का पुत्र और अरस्तू का शिष्य था| उसने 326 ईसा पूर्व के वसंत में केवल 30,000 पैदल सैनिकों और घुड़सवार सेना के साथ पंजाब को जीतने के लिए, अटक सिंधु पार करके उसने अपनी मकदूनियाई सेना का नेतृत्व किया| सिकंदर की महत्वाकांक्षा संपूर्ण भारत को जीतने की थी, लेकिन उसकी यह महत्वाकांक्षा अपने ही सैनिकों द्वारा अवरुद्ध कर दी गयी जब उन्होने ब्यास नदी से आगे जाने से इनकार कर दिया| पंजाब की संक्षिप्त विजय का उस समय के युवा किशोर चंद्रगुप्त मौर्य पर सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा और चंद्रगुप्त मौर्य ने भारत में सिकंदर के संक्षिप्त शासनकाल के दौरान भारत का पहला शाही राजवंश स्थापित किया, जो की 140 वर्षों तक कायम रहा| सिकन्दर के आक्रमण के ने हेलेनिस्टिक (Hellenistic) और भारतीय सभ्यताओं के मिश्रण के उपरांत शुरूआती कारोबार और सांस्कृतिक राजमार्गों की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया| भारत पर सिकन्दर के आक्रमण के समय चाणक्य (विष्णुगुप्त अथवा कौटिल्य) तक्षशिला में प्राध्यापक थे। तक्षशिला और गान्धार के राजा आम्भि ने सर्वप्रथम सिकंदर का सामना किया परंतु उसने सिकन्दर से समझौता कर लिया। चाणक्य ने भारत की संस्कृति को विदेशियों से बचाने के लिए सभी राजाओं से आग्रह किया किन्तु सिकन्दर से लड़ने कोई नहीं आया। मगध के राजा महापद्मनंद ने चाणक्य का साथ देने से मना कर दिया और चाणक्य का अपमान भी किया। चाणक्य ने चन्द्रगुप्त को साथ लेकर एक नये साम्राज्य की स्थापना की और सिकन्दर द्वारा जीते गए राज्य पंजाब और उसके राजदूत सेल्यूकस को भी हराया। हेलेनिस्टिक सिक्के और गंधार-कला और एक छोटे से यूनानी मंदिर, के टुकड़े, जो की आधुनिक पाकिस्तान के तक्षशिला संग्रहालय में संरक्षित हैं, सिकंदर के आक्रमण के प्रभाव को दर्शाते हैं|

इतिहासकार स्ट्रैबो के अनुसार सिकंदर के एक अधिकारी ऑनसीक्रैटस ने तक्षशिला के द्वार के बाहर, पंद्रह हिंदू योगियों को धूप में प्रज्ज्वलित चट्टानों पर पूर्ण रूप से नग्न बैठे पाया, उसने तीन दुभाषियों के माध्यम उनकी सहनशक्ति के राज को जानने के लिए कोशिश की, लेकिन असफल रहा| एक योगी को सिकंदर घर लौटने से पहले अपने साथ ले गया परंतु रास्ते में ही उसकी मौत हो गयी|

ईसा पूर्व 326 में सिकंदर सिंधु नदी को पार करके तक्षशिला की ओर बढ़ा व भारत पर आक्रमण किया। तब उसने झेलम व चिनाब नदियों के मध्‍य अवस्थ्ति राज्‍य के राजा पौरस को चुनौती दी। यद्यपि भारतीयों ने हाथियों, जिन्‍हें मेसीडोनिया वासियों ने पहले कभी नहीं देखा था, को साथ लेकर युद्ध किया, परन्‍तु भयंकर युद्ध के बाद भारतीय हार गए। सिकंदर ने पौरस को गिरफ्तार कर लिया, तथा जैसे उसने अन्‍य स्‍थानीय राजाओं को परास्‍त किया था, की भांति उसे अपने क्षेत्र पर राज्‍य करने की अनुमति दे दी।

दक्षिण में हैडासयस व सिंधु नदियों की ओर अपनी यात्रा के दौरान, सिकंदर ने दार्शनिकों, ब्राह्मणों, जो कि अपनी बुद्धिमानी के लिए प्रसिद्ध थे, की तलाश की और उनसे दार्शनिक मुद्दों पर बहस की। वह अपनी बुद्धिमतापूर्ण चतुराई व निर्भय विजेता के रूप में सदियों तक भारत में किवदंती बना रहा।

उग्र भारतीय लड़ाके कबीलों में से एक अस्सकेनोई मालियों के गांव में सिकन्‍दर की सेना और उनके बीच युद्ध हुआ और एक तीर उसकी पसलियों में जा घुसा, तब वह बहुत गंभीर रूप से जख्‍मी हो गया था| मेसेडोनियन अधिकारियों ने उसे बड़ी मुश्किल से बचाकर गांव से निकाला।

सिकन्‍दर व उसकी सेना जुलाई 325 ईसा पूर्व में व्यास नदी नदी के मुहाने पर पहुंची, परन्तु वहाँ से उसे वापस लौटना क्योंकि उसके सैनिक मगध के नन्द शासक की विशाल सेना का सामना करने को तैयार नहीं थे।

325 ई. पू. में भारतभुमि छोड़कर सिकन्दर बेबीलोन (इराक़ Iraq) चला गया। जहाँ 10 या 11 जून, 323 ई. पू. को उसकी मृत्यु हो गयी|


अपने अपने इंजीनियरिंग कोर के साथ सिंधु पार करने की क्षमता, सैन्य कौशल और वैश्विक विजय की साहसिक दृष्टि के अलावा, सिकंदर कॉ शहरों और पुलों के निर्माता के रूप में भी जाना जाता है| उसके शानदार ग्रीक चिकित्सा वैज्ञानिकों जिनमें से कुछ अपनी अनूठी खोजों के लिए जाने जाते थे, उसे भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा अपनाया गया| सिकंदर के आक्रमण के बाद पश्चिमी हेलेनिस्टिक और भारत के बीच बहुसांस्कृतिक संबंधों का विकास हुआ|

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