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यूरोपीय नाभिकीय अनुसंधान संगठन European Organization for Nuclear Research – CERN – Vivace Panorama

यूरोपीय नाभिकीय अनुसंधान संगठन European Organization for Nuclear Research – CERN

यह संगठन विशुद्ध रूप से वैज्ञानिक और मौलिक चरित्र वाले नाभिकीय अनुसंधानों में यूरोपीय देशों के मध्य सहयोग स्थापित करने के लिये एक मंच का कार्य करता है। यह संगठन गैर-सदस्यीय देशों से भी सहयोग लिया जाता है।

औपचारिक नाम: ऑर्गेनाइजेशन यूरोपीने पौडर ला रिचर्चे न्युक्लियरे (Organisation Europeenne pour la Recherche Nucleaire)।

मुख्यालय: जेनेवा (स्विट्जरलैंड)। 

सदस्यता: आस्ट्रिया, बेल्जियम, चेक गणराज्य, डेनमार्क, फ़िनलैंड, फ़्रांस, जर्मनी, यूनान, हंगरी, इजरायल, इटली, नीदरलैंड, नार्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, स्लोवाकिया, स्पेन स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम।

सहायक सदस्य: पाकिस्तान, साइप्रस, रोमानिया, सर्बिया, यूक्रेन।

पर्यवेक्षक सदस्य: जापान, रूस, तुर्की, संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत।

आधिकारिक भाषाएं: अंग्रेजी और फ्रेंच।


उद्मव एवं विकास

यूरोपीय नाभिकीय अनुसन्धान संगठन (European Organisation for Nuclear Research-CERN) की स्थापना 1954 में हुई। इससे पहले इस विषय पर पेरिस में तैयार एक अभिसमय को 1953 में अनुसमर्थन मिला। यूरोपीय नाभिकीय अंनुसंधान संगठन ने 1952 में स्थापित काउंसिल यूरोपीने पोउर ला रिचर्चे न्युक्लियरे (सीईआरएन) को विस्थापित कर दिया, लेकिन इसके परिवर्णी शब्द (acronym) सीईआरएन, को सुरक्षित रखा।

सर्न शब्द का प्रयोग एक प्रयोगशाला के तौर पर भी होता है, जिसमें 2,400 पूर्णकालिक कर्मी और 1,500 अंशकालिक कर्मी काम करते हैं, और तकरीबन 10,000 विजिटिंग वैज्ञानिक एवं इंजीनियर्स, जो 608 विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थाओं एवं 113 राष्ट्रीयताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, की मेजबानी करता है।

वर्तमान में सर्न की अधिकतर गतिविधियां लार्ज हेड्रान कोलाइडर (एलएचसी) के संचालन की तरफ निर्देशित होती हैं। एलएचसी बड़े पैमाने के विश्वव्यापी वैज्ञानिक सहयोग परियोजना का प्रतिनिधित्व करता है।

उद्देश्य

सीईआरएन विशुद्ध वैज्ञानिक और मौलिक चरित्र वाले उप-नाभिकीय (sub-nuclear) अनुसंधान तथा आवश्यक रूप से उससे संबंधित अनुसंधानों में यूरोपीय देशों के मध्य सहयोग स्थापित करना चाहता है। इस संगठन का सैनिक आवश्यकताओं से संबंधित कार्यों से कुछ भी लेना-देना नहीं होगा तथा प्रायोगिक एवं सैद्धान्तिक कार्यों के परिणाम प्रकाशित किये जायेंगे या अन्य युक्ति से उपलब्ध कराये जायेंगे।

संरचना

सीईआरएन की संगठनात्मक संरचना में एक परिषद्, परिषद् की एक समिति, एक वैज्ञानिक नीति समिति, एक वित्त समिति तथा चार प्रयोग समितियां सम्मिलित हैं।

परिषद में एक अध्यक्ष तथा दो उपाध्यक्ष होते हैं तथा वर्ष में इसकी दो बार बैठक होती है। यह सर्वोच्च नीति-निर्धारक अंग है। परिषद की समिति प्रत्येक सदस्य देश के एक प्रतिनिधि तथा वैज्ञानिक नीति समिति, वित्त समिति तथा भावी त्वरक यूरोपीय समिति (European Committee for Future Accelerators) के अध्यक्षों से बनी होती है। यह एक अनौपचारिक  मंच है, जिस पर सदस्य अपने व्यक्तिगत विचार प्रकट करते हैं और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हैं। वैज्ञानिक नीति समिति में सदस्य देशों के 21 वैज्ञानिक सम्मिलित होते हैं, जो कि भौगोलिक वितरण के आधार पर मनोनीत किये जाते हैं। यह समिति परिषद को वैज्ञानिक मामलों में सलाह देती है। वित्त समिति में प्रत्येक सदस्य देश का एक प्रतिनिधि होता है। चार प्रयोग समितियों का भी प्रावधान है। इन समितियों के अध्यक्ष गैर-सदस्यीय देशों के वैज्ञानिक होते हैं। ये समितियां सीईआरएन उपकरणों की सहायता से किये जाने वाले प्रयोगों के लिए सदस्य देशों के भौतिकशास्त्रियों के प्रस्तावों की जांच करती हैं।

गतिविधियां

सीईआरएन विश्व का एक प्रमुख कणिका (particle) भौतिकी अनुसंधान केंद्र है। यह ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और प्रकृति पर अनुसंधान करता है। इसके पास एक विशाल त्वरक (accelerator) तथा वहद् इलेक्ट्रॉन धनाणु (positron) विरोधक (collider) है, जो इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न करता है जैसी स्थिति संभवतः ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के समय विद्यमान थी। सीईआरएन इससे भी बड़ा त्वरक, विशाल हैड्रॉन विरोधक (large hadron collider) विकसित कर रहा है।

सितंबर, 2011 में यूरोपियन आर्गेनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्चसर्न के वैज्ञानिकों ने यह संभावना व्यक्त की कि उन्होंने न्यूट्रिनो के प्रकाश की गति से तीव्र चलने की प्रघटना की खोज की है। ओसिलेशन प्रोजेक्ट विद इमल्शन ट्रैकिंग अपरेट्स (ओपेरा) नामक इस परियोजना में न्यूट्रिनोज की एक बड़ी संख्या को नाभिकीय अनुसंधान के लिए यूरोपीय संगठन की प्रयोगशाला से एक कण-त्वरक के माध्यम से 700 किलोमीटर की दूरी पर इटली में स्थित ग्राम सैसी सुरंग में भेजा गया। न्यूट्रिनोज को इस यात्रा में प्रकाश की गति से चलने पर लगने वाले समय से साठ नैनो सेकेण्ड से कम समय लगा। ओपेरा परियोजना के समर्थकों के अनुसार यह प्रयोग आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत पर प्रश्नचिंह लगाता है। उल्लेखनीय है कि 23 फरवरी, 2012 को अनुसंधानकर्ताओं को न्यूट्रिनो के प्रकाश से भी तेज गति के दावे वाले प्रयोग में तकनीकी दोष मिला जिसने सितंबर, 2011 में समस्त विज्ञान जगत को आश्चर्यचकित कर दिया था।

दरअसल वर्ष 2008 में सर्न ने विश्व के सबसे बड़े पार्टिकल कोलाइडर एलएचसी की शुरुआत की। जेनेवा स्थित सर्न प्रयोगशाला ने 4 जुलाई, 2012 को गॉड पार्टिकल की खोज की घोषणा की। यूरोपीय नाभिकीय अनुसंधान संगठन (सन) द्वारा महाप्रयोग के लिए प्रयुक्त कण त्वरक लार्ज हेड्रान कोलाइडर है जिसे 100 मीटर सतह से नीचे 27 किलोमीटर लंबी सुरंग के रूप में स्थापित किया गया है।

एलएचसी से पूर्व सर्न में ही लार्ज इलेक्ट्रान-पॉजिट्रान (एलईवी) कोलाइडर नामक एक और कण त्वरक कार्य कर रहा था पर इसे नवम्बर 2000 में बंद कर दिया गया। एक और कण त्वरक अमेरिका की फर्मीलैब में कार्य कर रहा था । टेवाट्रॉन नामक इस कण की भी दिसंबर 2011 में बंद कर दिया गया। एलएचसी के एटलस और सीएमएस के संसूचकों पर स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहे वैज्ञानिकों के दो दलों को दिसंबर, 2011 में ही हिग्स बोसॉन के अस्तित्व के संकेत प्राप्त हुए थे लेकिन उस समय इसकी घोषणा नहीं की गई थी।

वर्ष 2013 के प्रारंभ में एलएचसी को दो वर्ष के लिए रख-रखाव हेतु बंद कर दिया गया ताकि त्वरक के भीतर भारी चुम्बकों को और शक्तिशाली किया जा सके।

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