प्रश्न-उत्तर

यदि भारतीय संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हो गया, तो इसे दो महीने बाद 26 जनवरी 1950 को ही लागू क्यों किया गया ?

हालांकि संविधान सभा ने 26 नवम्बर 1949 को संविधान के प्रारूप को अंतिम रूप से स्वीकार कर लिया था, पर यह तय किया गया कि इसे 26 जनवरी से लागू किया जाए क्योंकि 26 जनवरी 1930 के लाहौर कांग्रेस-अधिवेशन में पार्टी ने पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पास किया था और अध्यक्ष पं जवाहर लाल नेहरू ने अपने भाषण में इसकी माँग की थी। संविधान के नागरिकता, चुनाव और संसद जैसी व्यवस्थाएं तत्काल लागू हो गईं थीं। राष्ट्रीय संविधान सभा ने ध्वज 22 जुलाई 1947 को ही स्वीकार कर लिया था। और वह 15 अगस्त 1947 से औपचारिक रूप से राष्ट्रीय ध्वज बन चुका था।


क्या कारण है कि द्रव का आयतन निश्चित होता है, परन्तु आकार नहीं ?

द्रवों के अणुओं के मध्य अन्तराण्विक स्थान ठोस की अपेक्षा अधिक होता है तथा अणुओं के मध्य कम आकर्षण बल होता है। अतः द्रव पदार्थों के अणुओं की गति अनियमित होती है तथा चलने में अधिक स्वतन्त्र है और सम्पूर्ण द्रव में गति कर सकते हैं। यही कारण है कि द्रव पदार्थों का आयतन निश्चित होता है, परन्तु आकार नहीं।


दुनिया में ऐसे कितने देश हैं जहां लोकतंत्र या डेमोक्रेसी नहीं है ?

घाना, म्यांमार और वैटिकन सिटी किसी न किसी रूप में लोकतंत्र की परिधि से बाहर के देश हैं। इसके अलावा सउदी अरब, जॉर्डन, मोरक्को, भूटान, ब्रूनेई, कुवैत, यूएई, बहरीन, ओमान, कतर, स्वाज़ीलैंड वगैरह में राजतंत्र है। इन देशों में लोकतांत्रिक संस्थाएं भी काम करती हैं। नेपाल में कुछ साल पहले तक राजतंत्र था, पर अब वहाँ लोकतंत्र है। दुनिया के 200 के आसपास देश हैं, जिनमें से तीस से चालीस के बीच ऐसे देश हैं, जो लोकतंत्र के दायरे से बाहर हैं या उनमें आंशिक लोकतंत्र है। जिन देशों में लोकतंत्र है भी उनमें भी पूरी तरह लोकतंत्र है या नहीं यह बहस का विषय है।


तत्व एवं यौगिक (Element and Compound) में क्या अंतर है ?

तत्व- वे वस्तुएँ जो शुद्ध अवस्था में पाई जाती हैं और जिनमें कोई मिलावट नहीं होती है, तत्व कहलाती है, जैसे- ऑक्सीजन, गंधक आदि।

यौगिक- जब दो या दो से अधिक तत्व किसी निश्चित अनुपात में मिलकर एक नया पदार्थ बनाते हैं तो वह यौगिक कहलाता है, जैसे- पानी (H2O) हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन का यौगिक है।


क्या वेस्टइंडीज कोई देश है ?

वेस्टइंडीज कोई देश नहीं है, उत्तरी अटलांटिक महासागर के कैरीबियन बेसिन से जुड़े इलाके के अनेक द्वीपों को वेस्टइंडीज कहते हैं। इस इलाके के अलग-अलग द्वीप सत्रहवीं से उन्नीसवीं सदी तक ब्रिटिश, डेनिश, नीदरलैंड्स और स्पेनिश उपनिवेश रहे। सन 1958 से 1962 के बीच युनाइटेड किंगडम ने एक स्वतंत्र देश के रूप में वेस्टइंडीज संघ भी बनाया, पर 1963 में यह संघ भंग हो गया और नौ स्वतंत्र देश और चार ब्रिटिश ओवरसीज टेरीटरी बन गईं। वेस्टइंडीज़ संघ भंग होने के बाद स्वतंत्र हुए देश इस प्रकार थे: बारबेडस-1966, ग्रेनेडा-1974, डोमिनिका-1978, सेंट लूसिया-1979, सेंट विनसेंट और ग्रेनेडाइंस-1979, एंटीगुआ और बारबुडा-1981, सेंट किट्स और नेविस-1983।

चूंकि वेस्टइंडीज एक नहीं अनेक देशों की टीम है इसलिए वह अपना अलग ध्वज इस्तेमाल करती है, जिसमें एक द्वीप में क्रिकेट स्टम्प और ताड़ का एक पेड़ बना है। यह अनेक देशों की टीम है इसलिए किसी एक देश के राष्ट्रगान के बजाय इसके लिए एक विशेष गीत लिखा गया है, जिसकी शुरूआती पंक्तियाँ हैं रैली राउंड द वेस्टइंडीज, इसे डेविड रडर ने लिखा है।


मिट्टी के बर्तन में पानी ठंडा क्यों रहता है?

जब किसी तरल पदार्थ का तापमान बढ़ता है तो भाप बनती है। भाप के साथ तरल पदार्थ की ऊष्मा भी बाहर जाती है। इससे तरल पदार्थ का तापमान कम रहता है। मिट्टी के बर्तन में रखा पानी उस बर्तन में बने असंख्य छिद्रों के सहारे बाहर निकल कर बाहरी गर्मी में भाप बनकर उड़ जाता है और अंदर के पानी को ठंडा रखता है। बरसात में वातावरण में आर्द्रता ज्यादा होने के कारण भाप बनने की यह क्रिया धीमी पड़ जाती है, इसलिए बरसात में यह असर दिखाई नहीं पड़ता।


परावर्तन एवं अपवर्तन (Reflection and Refraction) में क्या अंतर है ?

परावर्तन- जब प्रकाश की किरणें किसी चमकदार एवं चिकने धरातल पर पड़ती हैं, तो प्रकाश का कुछ अंश उसी माध्यम में दूसरे माध्यम से लौट जाता है जिस माध्यम से लौट जाता है जिस माध्यम से प्रकाश गया था। इस क्रिया को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

अपवर्तन- प्रकाश किरण जब एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाती है, तो वह अपने मार्ग से विचलित हो जाती है। मार्ग से विचलित होने को ही प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।


बॉडी मास इंडेक्स क्या होता है ? आदर्श बीएमआई 20.85 ही क्यों माना जाता है ?

बॉडी मास इंडेक्स या बीएमआई Body Mass Index- BMI

व्यक्ति की ऊँचाई और वजन के संतुलन को बताता है। यह सिर्फ इस बात का संकेत देता है कि व्यक्ति का वजन कम या ज्यादा तो नहीं। इस संकेतक का आविष्कार बेल्जियम के वैज्ञानिक एडॉल्फ केटेलेट ने सन 1830 से 1850 के बीच कभी किया। उनके नाम पर इसे केटेलेट इंडेक्स भी कहते हैं। इसे निकालने का आसान तरीका है व्यक्ति अपने वजन को अपनी ऊँचाई के वर्ग मीटर से भाग दे तो जो प्राप्त होगा वह उसका बीएमआई है। आमतौर पर यह इंडेक्स 18.5 से 25 के बीच रहना चाहिए। 25 से ऊपर का अर्थ है व्यक्ति का वज़न ज्यादा है और 18.5 से कम का अर्थ है वज़न कम है। 18.5, इन दो के बीच की संख्या है, इसलिए आदर्श है।


क्या कारण है कि कच्चे हरे फल पकने पर पीले दिखाई देते हैं ?

फलों के पकने की प्रक्रिया उनके स्वाद, खुशबू और रंग में भी बदलाव लाती है। यह उनकी आंतरिक रासायनिक क्रिया के कारण होता है। ज्यादातर फल मीठे और नरम हो जाते हैं और बाहर से उनका रंग हरे से बदल कर पीला, नारंगी, गुलाबी और लाल हो जाता है। फलों के पकने के साथ उनमें एसिड की मात्रा बढ़ती है, पर इससे खट्टापन नहीं बढ़ता, क्योंकि साथ-साथ उनमें निहित स्टार्च शर्करा में तबदील होता जाता है। फलों के पकने की प्रक्रिया में उनके हरे रंग में कमी आना, चीनी की मात्रा बढ़ना और मुलायम होना शामिल है। रंग का बदलना क्लोरोफिल के ह्रास से जुड़ा है। साथ ही फल के पकते-पकते नए पिंगमेंट भी विकसित होते जाते हैं।


द्रव्यमान तथा भार (Mass and Weight) में क्या अंतर है ?

द्रव्यमान- द्रव्य का जितना परिमाण किसी वस्तु में होता है, वह उस वस्तु का द्रव्यमान कहलाता है।

भार किसी वस्तु को पृथ्वी जिस आकर्षण बल से अपने केंद्र की और खींचती है, उसे वस्तु का भार कहते हैं।


किसी प्रोडक्ट का बारकोड क्या होता है ?

बारकोड मोटे तौर पर किसी वस्तु के बारे में जानकारी देने वाले डेटा का मशीन से पढ़े जाने लायक ऑप्टिकल विवरण होता है। मूलतः शुरूआती बारकोडों में अनेक समांतर रेखाओं की मोटाई और उनके बीच की व्यवस्थित दूरी उस विवरण को व्यक्त होती थी। यह एक आयामी व्यवस्था थी, अब इनमें चतुष्कोण, पंचकोण, डॉट और अन्य ज्यामितीय संरचनाओं यानी दो आयामी व्यवस्था का इस्तेमाल भी होने लगा है। शुरू में बारकोड को पढ़ने के लिए ऑप्टिकल स्कैनरों और बारकोड रीडर आते थे, पर अब डेस्कटॉप प्रिंटरों और स्मार्टफोनों में भी इसकी व्यवस्था होने लगी है।

साठ के दशक में अमेरिकन रेलरोड्स की एसोसिएशन ने बारकोड का चलन शुरू किया था। इसका विकास जनरल टेलीफोन एंड इलेक्ट्रॉनिक्स (जीटीई) ने किया था। इसके तहत इस्पात की पटरियों की पहचान के लिए उनमें रंगीन पट्टियाँ लगाई जाती थीं। ये पट्टियाँ उस सामग्री के स्वामित्व, उस उपकरण के टाइप और पहचान नम्बर की जानकारी देती थीं। गाड़ी के दोनों और ये पट्टियाँ लगी होती थीं। इन प्लेटों को यार्ड के गेट पर लगा स्कैनर पढ़ता था। तकरीबन दस साल तक इस्तेमाल में आने के बाद इसका चलन बंद कर दिया गया, क्योंकि यह व्यवस्था विश्वसनीय नहीं रही। इसके बाद जब सुपरमार्केट में सामान के भुगतान की व्यवस्था में इस्तेमाल किया गया तो उसमें काफी सफलता मिली। इसके बाद यह व्यवस्था दुनिया भर में चलने लगी। इसके बाद ऑटोमेटिक आइडैंटिफ़िकेशन एंड डेटा कैप्चर (एआईडीसी) नाम से यह प्रणाली दूसरे कई कामों में भी शुरू की गई। इसके अलावा युनीवर्सल प्रोडक्ट कोड (यूपीसी) नाम से एक और सिस्टम भी सामने आया। इक्कीसवीं सदी में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडैंटिफ़िकेशन की शुरूआत भी हुई।

बारकोड अब जीवन के ज्यादातर क्षेत्रों में अपनाए जा रहे हैं। अस्पताल में मरीज का पूरा विवरण बारकोड के मार्फत पढ़ा जा सकता है, किताब के बारे में जानकारी बारकोड से मिल जाती है, हर तरह के उत्पाद की कीमत बारकोड बताता है।


मॉनसून केरल से ही क्यों शुरू होता है?

मॉनसून तो केरल के पहले भी होता है, पर चूंकि दक्षिण से उत्तर की ओर उठते बादलों से भारत की पहली मुलाकात केरल में होती है, इसलिए माना जाता है कि मॉनसून केरल से शुरू होता है। यों तो भारत का सबसे दक्षिणी किनारा ग्रेट निकोबार द्वीप का इंदिरा पॉइंट है, जिसे पहले पिग्मेलियन पॉइंट कहते थे। अकसर यहाँ मॉनसून की बारिश केरल के पहले हो जाती है। मोटे तौर पर देश की मुख्य ज़मीन पर मॉनसून केरल से ही प्रवेश पाता है।


प्रघाती तरंगें (Shock Waves) क्या होती हैं ?

जब किसी पिण्ड, जैसे जेट यान या रॉकेट, सुपरसोनिक (ध्वनि की चाल से अधिक) चाल से चलता है, तो एक विशेष प्रकार की तरंगें उत्पन्न हो जाती हैं जिन्हें प्रघाती तरंगें कहते हैं। शंक्वाकार रूप से चलती हुई यह तरंगें अपने आघात से इमारतों तक की ध्वस्त करने की क्षमता रखती हैं।


कुल कितने क्षेत्रों के लिए नोबेल पुरस्कार दिया जाता है ? वे कौन से हैं ?

नोबेल पुरस्कार की स्थापना स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल की याद में 1901 में की गई थी। उनका जन्म 1833 ई। में स्वीडन के शहर स्टॉकहोम में हुआ था। उन्होंने 1866 में डाइनामाइट की खोज की। स्वीडिश लोगों को 1896 में उनकी मृत्यु के बाद ही पुरस्कारों के बारे में पता चला, जब उन्होंने उनकी वसीयत पढ़ी, जिसमें उन्होंने अपने धन से मिलने वाली सारी वार्षिक आय पुरस्कारों की मदद करने में दान कर दी थी। शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वालों को हर साल यह पुरस्कार दिया जाता है। पहले नोबेल पुरस्कार पाँच विषयों में कार्य करने के लिए दिए जाते थे। अर्थशास्त्र के लिए पुरस्कार स्वेरिजेश रिक्स बैंक, स्वीडिश बैंक द्वारा अपनी 300वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में 1967 में आरम्भ किया गया और इसे 1969 में पहली बार प्रदान किया गया। इसे अर्थशास्त्र में नोबेल स्मृति पुरस्कार भी कहा जाता है।


हीरा क्यों चमकता है ?

हीरे के लिए क्रान्तिक कोण बहुत कम होता है तथा यह इस प्रकार काटकर बनाया जाता है कि जब कोई प्रकाश-किरण हीरे में प्रवेश करे, तो उसका आपतन कोण क्रान्तिक कोण से बड़ा हो। अतः प्रकाश का पूर्ण परावर्तन होता है, जिससे हिरा चमकदार दिखाई देता है।


सत्यमेव जयते प्रतीक चिह्न कहाँ से लिया गया ? यह क्यों और कहाँ इस्तेमाल होता है ?

हमारे देश का प्रतीक चिह्न चार शेरों वाली प्रतिमा है जो अशोक स्तम्भ के शिखर पर लगी थी। इसे ईसवी सन शुरू होने के 250 साल पहले सम्राट अशोक ने बनवाया था। यह स्तम्भ सारनाथ में आज भी खड़ा है और प्रतिमा सारनाथ के संग्रहालय में रखी है। इन चारों शेरों के नीचे एक घेरे में एक हाथी, एक घोड़ा और एक नन्दी है। इसके बीच में धर्मचक्र है। इसके नीचे लिखा है सत्यमेव जयते, जो मुंडक उपनिषद से लिया गया है। इसे हमारे तमाम शासकीय कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है। उसमें स्थित धर्मचक्र हमारे तिरंगे झंडे के बीच में लगाया गया है। हर देश का कोई न कोई प्रतीक चिह्न होता है। हमारा प्रतीक चिह्न हमारे गौरवपूर्ण अतीत की कहानी कहता है।


हिमांक तथा गलनांक (Freezing Point and Melting Point) में क्या अंतर है ?

हिमांक- वह निश्चित ताप जिस पर सम्पूर्ण द्रव ऊष्मा का परित्याग करके ठोस में बदल जाता है, उसे द्रव का हिमांक कहते हैं। पानी का हिमांक 0°C है।

गलनांक वह निश्चित ताप, जिस पर सम्पूर्ण ठोस ऊष्मा ग्रहण कर द्रव में बदल जाता है, उसे ठोस का गलनांक कहते हैं। बर्फ का गलनांक वायुमण्डलीय दाब पर 0°C है।


हरित क्रांति क्या है ?

हरित क्रांति शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल युनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएड) के पूर्व डायरेक्टर विलियम गॉड ने सन 1968 में किया। पर इसकी अवधारणा यूरोप की औद्योगिक क्रांति के बाद खेती-बाड़ी के काम में विज्ञान और तकनीक के इस्तेमाल से जुड़ी है। बीसवीं सदी में दूसरे विश्व युद्ध के पहले ही अन्न उत्पादन की और दुनिया का ध्यान गया था। अलबत्ता दूसरे विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद जब विजयी अमेरिकी सेना जापान पहुंची तो उसके साथ कृषि अनुसंधान सेवा के सैसिल सैल्मन भी थे। उस समय सबका ध्यान इस बात पर केंद्रित था कि जापान का पुनर्निर्माण कैसे हो। सैल्मन का ध्यान खेती पर था। उन्हें नोरिन-10 नाम की गेंहू की एक क़िस्म मिली जिसका पौधा कम ऊँचाई का होता था और दाना काफ़ी बड़ा होता था। सैल्मन ने इसे और शोध के लिए अमेरिका भेजा। तेरह साल के प्रयोगों के बाद 1959 में गेन्स नाम की क़िस्म तैयार हुई। अमेरिकी कृषि विज्ञानी नॉरमन बोरलॉग ने गेहूँ कि इस किस्म का मैक्सिको की सबसे अच्छी क़िस्म के साथ संकरण किया और एक नई क़िस्म निकाली।

उधर साठ के दशक में भारत में अनाज की उपज बढ़ाने की सख्त ज़रूरत थी। भारत को बोरलॉग और गेहूं की नोरिन क़िस्म का पता चला। भारत में आईआर-8 नाम का बीज लाया गया जिसे इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट ने विकसित किया था। पूसा के एक छोटे से खेत में इसे बोया गया और उसके अभूतपूर्व परिणाम निकले। 1965 में भारत के कृषि मंत्री थे सी सुब्रमण्यम। उन्होंने गेंहू की नई क़िस्म के 18 हज़ार टन बीज आयात किए, कृषि क्षेत्र में ज़रूरी सुधार लागू किए, कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से किसानों को जानकारी उपलब्ध कराई, सिंचाई के लिए नहरें बनवाईं और कुंए खुदवाए, किसानों को दामों की गारंटी दी और अनाज को सुरक्षित रखने के लिए गोदाम बनवाए। देखते ही देखते भारत अपनी ज़रूरत से ज़्यादा अनाज पैदा करने लगा। बहरहाल नॉरमन बोरलॉग हरित क्रांति के प्रवर्तक माने जाते हैं लेकिन भारत में हरित क्रांति लाने का श्रेय सी सुब्रमण्यम को जाता है।


स्वतन्त्रतापूर्वक लटका हुआ चुम्बक उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है, क्यों ?

हमारी पृथ्वी भी एक बड़े चुम्बक की तरह व्यवहार करती है। अतः लटकी हुई चुम्बक पृथ्वी के विपरीत ध्रुवों की ओर ठहर जाती है, जोकि उत्तर-दक्षिण दिशा की ओर संकेत करती है।


तीसरी दुनिया के देश कौन-कौन से हैं ? यह नाम किस तरह पड़ा ?

तीसरी दुनिया शीतयुद्ध के समय का शब्द है। शीतयुद्ध यानी मुख्यतः अमेरिका और रूस का प्रतियोगिता काल। फ्रांसीसी डेमोग्राफर, मानव-विज्ञानी और इतिहासकार अल्फ्रेड सॉवी ने 14 अगस्त 1952 को पत्रिका ‘ल ऑब्जर्वेतो’ में प्रकाशित लेख में पहली बार इस शब्द का इस्तेमाल किया था। इसका आशय उन देशों से था जो न तो कम्युनिस्ट रूस के साथ थे और न पश्चिमी पूँजीवादी खेमे के नाटो देशों के साथ थे। इस अर्थ में गुट निरपेक्ष देश तीसरी दुनिया के देश भी थे। इनमें भारत, मिस्र, युगोस्लाविया, इंडोनेशिया, मलेशिया, अफगानिस्तान समेत एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के तमाम विकासशील देश थे। यों माओत्से तुंग का भी तीसरी दुनिया का एक विचार था। पर आज तीसरी दुनिया शब्द का इस्तेमाल कम होता जा रहा है।


ससंजक बल और आसंजक बल क्या हैं ?

ससंजक बल Cohesive Force- यह एक ही पदार्थ के अणुओं के बीच लगने वाला आकर्षण बल है।

आसंजक बल Adhesive Force- यह भिन्न-भिन्न पदार्थों के अणुओं के बीच लगने वाला आकर्षण बल है।


विमान पर चढ़ने से पहले पैन की स्याही निकाल देने की सलाह दी जाती है, क्यों ? अथवा ऊँचे पर्वत पर फाउन्टेन पेन से स्याही क्यों रिसने लगती है ?

ऊँचाई पर विमान के उड़ने से वायु दाब कम हो जाता है। अतः पैन की स्याही बाहर निकलने लगती है और कपड़े खराब होने का भय रहता है, इसलिए विमान पर चढ़ने से पहले पैन की स्याही निकालने की सलाह दी जाती है।


विश्व में कहाँ पर स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाया जाता ?

स्वतंत्रता दिवस वही देश मनाएगा, जो कभी परतंत्र रहा हो। यूके, रूस, फ्रांस, नेपाल, थाईलैंड, जापान, चीन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड जैसे अनेक देश नहीं मनाते। फिर भी फ्रांसीसी क्रांति की याद में बास्तील दिवस मनाता है। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका पर बाहर से आए लोगों का शासन है। पर वे अब भी इन देशों के निवासी हैं, इसलिए स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाते। चीन 1 अक्तूबर को कम्युनिस्ट शासन की शुरूआत को मनाता है। नेपाल 29 मई 2008 को संप्रभुता सम्पन्न गणतंत्र बना। इस दिन यहाँ से राजशाही का खात्मा हुआ। नेपाल में लोकतंत्र दिवस हर साल फाल्गुन सप्तमी को मनाया जाता है। इस रोज सन 1951 में राजा त्रिभुवन ने देश को राणाशाही के हाथों से निकाल कर लोकतंत्र की स्थापना की थी। पर देश में लोकतंत्र 1960 में आया जब राजा महेन्द्र ने पंचायत प्रणाली की स्थापना की।


टी. वी. सेट में रिमोट कन्ट्रोल कैसे काम करता है ?

रिमोट कन्ट्रोल एक सुविधाजनक तकनीक है। इसका उपयोग करने पर टी। वी। को पास जाकर हाथ से चालू करने की जरूरत नहीं पड़ती। एक निश्चित दूरी पर बैठकर टी। वी। की गतिविधियों को नियंत्रित किया जा सकता है। यह इसमें एक छोटा-सा ट्रांसमीटर होता है जो अवरक्त (infrared) संकेत उत्सर्जित करता है। विभिन्न संक्रियाओं जैसे- ऑन-ऑफ, दृश्य तीव्रता, रंग, ध्वनि आदि के संयोजन के लिए ट्रांसमीटर से विभिन्न संकेत भेजे जाते हैं। ये सभी संकेत टी। वी। सेट के अन्दर रखे एक छोटे से रिसीवर द्वारा ग्रहण कर लिए जाते हैं तथा वांछित संयोजन प्रारम्भ हो जाता है।


ग्रह और तारे में क्या अन्तर है ?

तारा वह आकाशी पिण्ड है, जो एक स्थान पर नियत है और अपना प्रकाश रखता है, ग्रह वह आकाशी पिण्ड है, जो तारा से टूटकर बना है, अपने अण्डाकार मार्ग पर उस तारे के चारों ओर चक्कर लगाता है और अपना कोई प्रकाश नहीं रखता बल्कि तारे के प्रकाश से प्रकाशित होता है।


भारत से किन-किन लोगों को नोबल पुरस्कार मिले हैं ?

नोबेल सम्मान पाने वाले भारत से सम्बद्ध व्यक्तियों के नाम इस प्रकार है-

नोबेल सम्मान पाने भारतीय
1902 रोनाल्ड रॉसचिकित्साभारत में जन्मे विदेशी
1907रुडयार्ड किपलिंगसाहित्यभारत में जन्मे विदेशी
1913रवीन्द्रनाथ ठाकुरसाहित्यभारतीय नागरिक
1930सीवी रामनभौतिक विज्ञानभारतीय नागरिक
1968डॉ हरगोविन्द खुरानाचिकित्साभारत में जन्मे अमेरिकी नागरिक
1979मदर टेरेसाशांति पुरस्कारविदेश में जन्मीं, भारत में निवास
1983सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखरभौतिक विज्ञानभारत में जन्मे अमेरिकी नागरिक
1989दलाई लामाशांतिभारत में निवासी विदेशी
1998अमर्त्य सेनअर्थशास्त्रभारतीय नागरिक
2001वीएस नाइपॉलसाहित्यभारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक
2009वेंकट रामन रामकृष्णनरसायन शास्त्रभारत में जन्मे अमेरिकी नागरिक
2014कैलाश सत्यार्थीशांतिभारतीय नागरिक


गिरगिट रंग कैसे बदलता है ?

केवल गिरगिट की बात ही नहीं है, तमाम तरह के प्राणियों को प्रकृति ने आत्मरक्षा में अपने रंग-रूप को बदलने की सामर्थ्य दी है। गिरगिट जिस परिवेश में रहते हैं उनका रंग उसी से मिलता जुलता होता है ताकि वे दूर से नज़र न आएं। यह उनकी प्रणय शैली भी है, अपने साथी को आकर्षित करने के लिए वे रंग बदलते हैं। उनकी ऊपरी त्वचा पारदर्शी होती है जिसके नीचे विशेष कोशिकाओं की परतें होती है जिन्हें क्रोमैटोफोरकहा जाता है। इनकी बाहरी परत में पीले और लाल सेलों की होती है। निचली छेद होते हैं, जिनसे गुज़रने वाली रोशनी नीले रंग की रचना करती है। ऊपरी रंगत पीली हो दोनों रंग मिलकर हरे हो जाते हैं। सबसे आखिरी परत मेलनोफोर से बनी होती है। इसमें मेलनिन नामक तत्व होता है।

जब मेलनोफोर सेल सक्रिय होते हैं, तब गिरगिट नीले और पीले रंग के मिश्रण से हरा दिखाई देता है या नीले और लाल रंग का मिश्रण दिखाई देता है। जब गिरगिट गुस्से में होता है तो काले कण उभर आते हैं और गिरगिट गहरा भूरा  दिखाई देता है। तितलियों का भी रंग बदलता है, लेकिन वह हल्के से गहरे या फिर गहरे से हल्के रंगों में ही परिवर्तित होता है, जबकि गिरगिट के कई रंग होते हैं। इनके मस्तिष्क को जैसे ही खतरे का संदेश जाता है, इनका दिमाग उन कोशिकाओं को संकेत भेजता है और यह कोशिकाएं इसी के अनुरूप फैलने व सिकुड़ने लगती हैं और गिरगिट का रंग बदल जाता है।


रेल की दो पटरियों के बीच थोड़ी दरार (Space) क्यों रखी जाती है ?

लोहे का ताप बढ़ने से उसकी लम्बाई बढ़ती है। अतः गर्मी के दिनों में ताप बढ़ने से लोहे की पटरियाँ भी लम्बाई में बढ़ती हैं। उनके बीच में जगह छोड़ने से वह लम्बाई में बढ़ सकती है और रेलवे लाइन उसी तरह बनी रहती हैं। यदि उनके बीच में जगह न छोड़ी जाए, तो वह लम्बाई बढ़ने पर टेढ़ी-मेढ़ी हो जायेंगी।


मिस्र के पिरामिडों का निर्माण कैसे हुआ ?

मिस्र के पिरामिड वहां के तत्कालीन फराऊन (सम्राट) के लिए बनाए गए स्मारक स्थल हैं। इनमे राजाओं और उनके परिवार के लोगों के शवों को दफनाकर सुरक्षित रखा गया है। इन शवों को ममी कहा जाता है। उनके शवों के साथ भोजन सामग्री, पेय पदार्थ, वस्त्र, गहने, बर्तन, वाद्य यंत्र, हथियार, जानवर एवं कभी-कभी तो सेवक सेविकाओं को भी दफना दिया जाता था।

मिस्र के सबसे पुराने पिरामिड एक पुराने प्रांत की राजधी मैम्फिस के पश्चिमोत्तर में स्थित सक्कारा में मिले हैं। इनमें सबसे पुराना जोसर का पिरामिड है, जिसका निर्माण ईसा पूर्व 2630 से 2611 के बीच हुआ होगा। पिरामिडों को देखकर उन्हें बनाने की तकनीक, सामग्री और इस काम में लगे मजदूरों की संख्या की कल्पना करते हुए हैरत होती है। एक बड़े पिरामिड का निर्माण करने में पचास हजार से एक लाख लोग तक लगे हों तब भी आश्चर्य नहीं। मिस्र में 138 पिरामिड हैं। इनमें काहिरा के उपनगर गीज़ा का ‘ग्रेट पिरामिड’ शानदार है। यह प्राचीन विश्व के सात अजूबों की सूची में है। उन सात प्राचीन आश्चर्यों में यही एकमात्र ऐसा स्मारक है जिसे समय के थपेड़े खत्म नहीं कर पाए। यह पिरामिड 450 फुट ऊंचा है।

43 सदियों तक यह दुनिया की सबसे ऊंची इमारत रही। 19वीं सदी में ही इसकी ऊंचाई का कीर्तिमान टूटा। इसका आधार 13 एकड़ में फैला है जो करीब 16 फुटबॉल मैदानों जितना है। यह 25 लाख शला खंडों से निर्मित है जिनमें से हर एक का वजन 2 से 30 टन के बीच है। ग्रेट पिरामिड को इतनी गणितीय परिशुद्धता से बनाया गया है कि आज भी इसे बनाना आसान नहीं है। कुछ साल पहले तक (लेसर किरणों से माप-जोख का उपकरण ईजाद होने तक) वैज्ञानिक इसकी सूक्ष्म सममिति (सिमिट्रीज) का पता नहीं लगा पाए थे। ऐसा दूसरा पिरामिड बनाने की बात छोडिए। प्रमाण बताते हैं कि इसका निर्माण करीब 2560  वर्ष ईसा पूर्व मिस्र के शासक खुफु के चौथे वंश ने कराया था। इसे बनाने में करीब 23 साल लगे।

पिरामिड कैसे बनाए गए होंगे यह हैरानी का विषय है। इसमें लगे विशाल पत्थर कहाँ से लाए गए होंगे, कैसे लाए गए होंगे और किस तरस से उन्हें एक-दूसरे के ऊपर रखा गया गया होगा? यहाँ आसपास सिर्फ़ रेत है। यह माना जाता है कि पहले चारों ओर ढालदार चबूतरे बनाए गए होंगे, जिनपर लट्ठों के सहारे पत्थक ऊपर ले जाए गए होंगे। पत्थरों की जुड़ाई इतनी साफ है कि नोक भर दोष नजर नहीं आता।


क्या अन्तर है ?

धमनी और शिरायें

⇨ कठोर और मृदु जल

⇨ संसर्गज और संक्रामक रोग

⇨ साधारण वर्ष तथा लीप वर्ष

⇨ परमाणु तथा अणु

धमनी और शिराएँ- हृदय से शुद्ध रक्त को समस्त शरीर में ले जाने वाली नलियाँ धमनियाँ कहलाती हैं और अशुद्ध रक्त को समस्त शरीर से इकट्ठा करके वापस हृदय को लाने वाली नलियाँ शिराएँ कहलाती है।

कठोर तथा मृदु जल- जिस जल में कैल्सियम या मैग्नीशियम के क्लोराइड, सल्फेट बाइकार्बोनेट के घुले होने के कारन साबुन के झाग नहीं उठते हैं, उसे कठोर जल कहते हैं। इसके विपरीत जिस जल में उपर्युक्त लवण नहीं घुले होते है और साबुन के झाग खूब उठते हैं, वह मृदु जल होता है।

संसर्गज तथा संक्रामक रोग- जो रोग किसी अन्य रोगी के सम्पर्क में आने से उत्पन्न होते हैं, उन्हें संसर्गज रोग कहते हैं जैसे-क्षय रोग, परन्तु जो रोग वायु, जल तथा कीटाणु द्वारा रोगी के पास आते हैं, उन्हें संक्रामक रोग कहते हैं।

साधारण वर्ष व लीप वर्ष जिस वर्ष मे 365 दिन होते हैं, वह साधारण वर्ष होता है तथा जिस वर्ष में 366 दिन होते हैं, वह लीप वर्ष कहलाता है।

परमाणु और अणु- किसी तत्व का वह सूक्ष्मतम कण जो रासायनिक क्रिया में भाग ले सके परन्तु स्वतन्त्र अवस्था में न ठहर सके, परमाणु कहलाता है। परन्तु तत्व अथवा यौगिक का वह सूक्ष्मतम कण जो रासायनिक क्रिया में भाग न ले सके, परन्तु स्वतन्त्र अवस्था में ठहर सके, अणु कहलाता है।


रोमन संख्या 7 को लिखते समय ज्यादातर बीच से काट क्यों दिया जाता है? हिन्दी के अंकों में नहीं काटा जाता ?

यूरोप और खासतौर से फ्रांस में 7 की संख्या के बीच में एक छोटी सी क्षैतिज रेखा खींच दी जाती है। इसका कारण 7 को 1 से अलग दिखाना है। फ्रांस में 1 की संख्या सिखाते समय बच्चों को शीर्ष से एक छोटी सी रेखा जो 45 अंश का कोण बनाती हुई नीचे की ओर खींचना सिखाते हैं। इसके साथ ही 7 की संख्या के मध्य में काटती हुई रेखा खींचते हैं ताकि दोनों भिन्न लगें। 1 के शिखर पर छोटी सी रेखा उसे सात जैसा बना देती है। फ्रांस के अलावा जर्मनी, रोमानिया, पोलैंड और रूस के स्कूलों में बच्चों को हाथ से गिनती लिखने का अभ्यास कराते समय यह रेखा खींचने का अभ्यास भी कराया जाता है।


सूर्य, तारे तथा आकाश की ओर उड़ते हुए विमान अपनी वास्तविक स्थिति से ऊँचे क्यों दिखाई देते हैं ?

वायु का घनत्व पृथ्वी से ऊपर जाने पर कम हो जाता है। इसलिए वायुमण्डल को बहुत-सी परतों से मिलकर बना हुआ माना जाता है और यह बिलकुल सत्य भी है। इन स्तरों का अपवर्तनांक पृथ्वी तल से ऊपर जाने पर कम हो जाता है। जब सूर्य, तारे अथवा विमान से प्रकाश पृथ्वी की ओर आता है तो वह विरल माध्यम (Rare medium) से सघन माध्यम (Dense medium) में प्रवेश करता है और प्रत्येक परत पर अपवर्तित होकर अभिलम्ब की ओर झुकता है, जिससे तारे, सूर्य तथा विमान अपनी वास्तविक स्थिति (Orginal position) से ऊपर उठे हुए मालूम पड़ते हैं।


कॉकटेल शब्द का अर्थ क्या है ?

कॉकटेल ऐसी शराब है जिसमें कई तरह की शराब, फलों के रस और शर्बत मिलाए जाते हैं। इस शब्द का सबसे पुराना लिखित प्रमाण 20 मार्च 1798 के लंदन के ‘द मॉर्निंग पोस्ट एंड गजेटियर’ में मिलता है। ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी के अनुसार इस शब्द का जन्म अमेरिका में हुआ। इसे ऐसे पेय के रूप में पेश किया जाता है, जिसे पीने के बाद इंसान कुछ भी पी सकता है। पर इसका नाम ऐसा क्यों पड़ा? कुछ लोग कहते हैं कि जो शराब का मिश्रण बनाया जाता था उसे मुर्गे की पूँछ से हिलाकर मिलाया जाता था। इसे नाम पड़ा कॉकटेल। ऐसा भी कहा जाता है कि यह शब्द फ्रांसीसी शब्द कॉकते से बना है जिसका मतलब था अंडे का कप। फ्रांस में किसी ने इसी किस्म के मिश्रित पेय को अंडों के कप में ढालकर दिया और कप ने पेय का नाम ले लिया। बहरहाल अब यह किसी किस्म की मिली-जुली चीज का पर्याय बन गया है। विभिन्न तेजाबों और विस्फोटकों से बने बम का नाम है मोलोतोव कॉकटेल।


बर्फ का टुकड़ा पानी पर तैरता है, क्यों ?

जब पानी बर्फ बनता है, तो आयतन में बढ़ जाता है तथा बर्फ का घनत्व कम हो जाता है। अतः बर्फ का घनत्व पानी के घनत्व से कम होने के कारण वह पानी पर तैरता है।


सर्कस की शुरुआत कब और कहाँ से हुयी ?

दुनिया की तकरीबन सभी पुरानी सभ्यताओं में शारीरिक व्यायाम और पशुओं के साथ खेलने का चलन रहा है। खासतौर से पुराने यूनान और रोम में खेलों के बड़े स्टेडियमों का चलन था। पर हम जिस आधुनिक सर्कस का ज़िक्र कर रहे हैं उसे शुरू करने का श्रेय लंदन के फिलिप एश्ले को दिया जाना चाहिए। उन्हें घुड़सवारी में महारत हासिल थी। उन्होंने 9 जनवरी 1768 को लंदन के एक रिंग में घुड़सवारी के करतब दिखाए। पर उन्होंने इसे सर्कस नाम नहीं दिया। उसे एश्लेज़ एम्फीथिएटर ऑफ इक्वेस्ट्रियन आर्ट्स कहा जाता था। सर्कस नाम दिया इस कारोबार में उनके प्रतिद्वंदी जॉन ह्यूजेस ने जिन्होंने पास में ही रॉयल सर्कस शुरू किया। एश्ले ने घुड़सवारी के करतबों के बीच के समय में दर्शकों को बाँधे रखने के लिए जोकरों, टाइटरोप पर चलने वालों, बाजीगरों और कुत्तों के खेलों की शुरूआत भी की।


एक हाथ में पानी की बाल्टी ले जाने पर दूसरा हाथ बाहर की ओर उठाना पड़ता है, क्यों ?

जब किसी वस्तु के गुरुत्व केन्द्र से जाने वाली भार की कार्य रेखा उसके आधार क्षेत्रफल में से गुजरती है, तो वह वस्तु सन्तुलन में रहती है। अतः दूसरा हाथ बाहर की ओर उठाने से सन्तुलन बना रहता है, क्योंकि ऐसा करने से मनुष्य के गुरुत्व केन्द्र से जाने वाली उसके भार की कार्य रेखा उसके पैरों के आधार के क्षेत्रफल से गुजरती है और उसका सन्तुलन बना रहता है।


इंग्लैंड और युनाइटेड किंगडम में क्या अंतर है ?

युनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड नॉर्दर्न आयरलैंड को युनाइटेड किंगडम, यूके और ब्रिटेन भी कहते हैं। यह एक स्वतंत्र सम्प्रभु देश है, जिसमें ऐतिहासिक कालक्रम में चार देश शामिल हो गए। इनके नाम हैं इंग्लैंड, नॉर्दर्न आयरलैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स। यूके में संसदीय राजतंत्र है, जिसकी एक संसद है। इसकी राजधानी तंदन है। इस देश का यह नाम सन 1927 से प्रचलन में है। इसके पहले 1801 में युनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड आयरलैंड बना था। पर 1922 तक आयरलैंड का काफी हिस्सा इससे अलग हो चुका था। इसके पहले सन 1707 में किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन बना था जिसमें किंगडम ऑफ इंग्लैंड तथा किंगडम ऑफ स्कॉटलैंड का विलय हुआ था। आपने देखा होगा कि कॉमनवैल्थ गेम्स में यूके के चारों देशों की टीमों ने हिस्सा लिया था। मोटे तौर पर यह एक सम्प्रभु देश है। हाल के वर्षों तक उत्तरी आयरलैंड की स्वायत्तता को लेकर हिंसक आंदोलन भी चलता रहा। उत्तरी आयरलैंड के नेशनलिस्ट्स, जो रोमन कैथलिक थे इसे आयरलैंड का हिस्सा बनाना चाहते थे और यूनियनिस्ट्स जो प्रोटेस्टेंट्स थे इसे यूके के साथ रखना चाहते थे। फिलहाल 1998 के गुडफ्रायडे समझौते के बाद उत्तरी आयरलैंड में सशस्त्र संग्राम खत्म हो गया।


क्रिकेट का खिलाड़ी गेंद लपकते समय हाथ पीछे ले जाता है, क्यों  ?

गेंद द्वारा आरोपित बल का मान कम करने के लिए क्रिकेट खिलाड़ी गेंद लपकने में अपने हाथों को पीछे ले जाता है, जिससे उसके हाथ में कम चोट लगती है, क्योंकि संवेग परिवर्तन की दर लगाए गए बल के समानुपाती होती है। संवेग परिवर्तन में समय बढ़ने से बल कम हो जाता है, जिससे हाथ में चोट कम लगती है।


बैक्टीरिया वनस्पति (Plant) है या प्राणी ?

पहले बैक्टीरिया को पौधा माना जाता था परंतु अब उनका वर्गीकरण प्रोकैरियोट्स के रुप में होता है। पारंपरिक रूप से बैक्टीरिया शब्द का प्रयोग सभी सजीवों के लिए होता था, परंतु यह वैज्ञानिक वर्गीकरण 1990 में हुई एक खोज के बाद बदल गया जिसमें पता चला कि प्रोकैरियोटिक सजीव वास्तव में दो भिन्न समूह के जीवों से बने है जिनका क्रम विकास एक ही पूर्वज से हुआ। इन दो प्रकार के जीवों को बैक्टीरिया एवं आर्किया कहा जाता है।

बैक्टीरिया एककोशिकीय जीव है। इसका आकार कुछ मिलीमीटर तक ही होता है। इनकी आकृति गोल या मुक्त-चक्राकार से लेकर छड़ आदि के आकार की हो सकती है। ये प्रोकैरियोटिक, कोशिका भित्तियुक्त, एककोशकीय सरल जीव हैं जो प्रायः सर्वत्र पाए जाते है। ये पृथ्वी पर मिट्टी में, अम्लीय गर्म जल-धाराओं में, नाभिकीय पदार्थों में, पानी में,भू-पपड़ी में, यहां तक की कार्बनिक पदार्थों में तथा पौधों एवं जन्तुओं के शरीर के भीतर भी पाये जाते हैं। साधारणतः एक ग्राम मिट्टी में 4 करोड़ जीवाणु कोष तथा एक मिलीलीटर जल में 10 लाख जीवाणु पाएं जाते हैं। ये संसार के बायोमास का एक बहुत बड़ा भाग है। ये कई तत्वों के चक्र में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, जैसे कि वायुमंडलीय नाइट्रोजन के स्थिरीकरण में। बहुत सारे वंश के बैक्टीरिया का श्रेणी विभाजन भी नहीं हुआ है तथापि लगभग आधे जातियों को किसी न किसी प्रयोगशाला में उगाया जा चुका है। इनका अध्ययन बैक्टिरियोलोजी के अन्तर्गत किया जाता है जो कि सूक्ष्मजैविकी की ही एक शाखा है।

मानव शरीर में जितनी मानव कोशिकाएं है, उससे  लगभग 10 गुणा अधिक जीवाणु कोष है। इनमें से अधिकांश जीवाणु त्वचा तथा आहारनाल में पाएं जाते हैं। हानिकारक बैक्टीरिया इम्यून तंत्र के रक्षक प्रभाव के कारण शरीर को नुकसान नही पहुंचा पाते है। कुछ बैक्टीरिया लाभदायक भी होते हैं।


हिन्दुस्तान में हीरे की खानें कहाँ है ?

भारत में आंध्र प्रदेश के गोलकुंडा और तमिलनाडु के कोल्लूर तथा मध्य प्रदेश के पन्ना और बुंदर में हीरा खानें हैं। भारत के हीरे क ज़माने में विश्व प्रसिद्ध थे। गोलकुंडा से 185 कैरेट का दरिया-ए नूर हीरा ईरान गया था। भारत के सबसे बड़े हीरे की बात करें तो नाम आता है ग्रेट मुगल का । गोलकुंडा की खान से 1650 में जब यह हीरा निकला तो इसका वजन 787 कैरेट था। यानी कोहिनूर से करीब छह गुना भारी। कहा जाता है कि कोहिनूर भी ग्रेट मुगल का ही एक अंश है। 1665 में फ्रांस के जवाहरात के व्यापारी ने इसे अपने समय का सबसे बड़ा रोजकट हीरा बताया था। यह हीरा आज कहां है किसी को पता नहीं। लंबे समय से गुमनाम भारतीय हीरों की सूची में आगरा डायमंड और अहमदाबाद डायमंड भी शामिल हैं। अहमदाबाद डायमंड को बाबर ने 1526 में पानीपत की लड़ाई के बाद ग्वालियर के राजा विक्रमजीत को हराकर हासिल किया था। तब 71 कैरेट के इस हीरे को दुनिया के 14 बेशकीमती हीरों में शुमार किया जाता था।

हल्की गुलाबी रंग की आभा वाले 32.2 कैरेट के आगरा डायमंड को हीरों की ग्रेडिंग करने वाले दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ अमेरिका ने वीएस-2 ग्रेड दिया है। द रीजेंट की कहानी भी कुछ ऐसी ही हैं। 1702 के आसपास यह हीरा गोलकुंडा की खान से निकला। तब इसका वजन 410 कैरेट था। मद्रास के तत्कालीन गवर्नर विलियम पिट के हाथों से होता हुआ द रीजेंट फ्रांसीसी क्रांति के बाद नेपोलियन के पास पहुंचा। नेपोलियन को यह हीरा इतना पसंद आया कि उसने इसे अपनी तलवार की मूठ में जड़वा दिया। अब 140 कैरेट का हो चुका यह हीरा पेरिस के लूव्र म्यूजियम में रखा गया है। गुमनाम भारतीय हीरों की लिस्ट में अगला नाम है ब्रोलिटी ऑफ इंडिया का। 90.8 कैरेट के ब्रोलिटी को कोहिनूर से भी पुराना बताया जाता है। 12वीं शताब्दी में फ्रांस की महारानी में इसे खरीदा। कई सालों तक गुमनाम रहने के बाद यह हीरा 1950 में सामने आया। जब न्यूयॉर्क के जूलर हेनरी विन्सटन ने इसे भारत के किसी राजा से खरीदा। आज यह हीरा यूरोप में कहीं है।


पानी या ओस की बूँदें गोल क्यों होती हैं ?

पानी की बूँदों के गोल होने का कारण भी पृष्ठ तनाव है। यों तो पानी जिस पात्र में रखा जाता है उसका आकार ले लेता है, पर जब वह स्वतंत्र रूप से गिरता है तो धार जैसा लगता है, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण जैसे–जैसे उसकी मात्रा धरती की ओर जाती है उसी क्रम में आकार लेती है। इसके अलावा पानी के मॉलीक्यूल एक-दूसरे को अपनी ओर खींचते हैं और यह क्रिया केन्द्र की ओर होती है, इसलिए पानी टूटता नहीं। जैसे-जैसे पानी की बूँद का आकार छोटा होता है, वह गोल होती जाती है। यों आपने कुछ बड़ी बूँद को हल्का सा नीचे की ओर लटका हुआ भी पाया होगा।


दो किलोग्राम भार की रबड़ की कोई गेंद हल्के ढाल पर लुढ़कती है, परन्तु उतने ही भार का लोहे का चपटा बाँट नहीं लुढ़कता है, क्यों ?

रबड़ की गेंद के लुढ़कने में घर्षण बल कम काम करता है और गेंद सरलता से आगे लुढ़क जाती है। चपटा बाँट घसीटा जाता है। घसीटने में घर्षण बल लगाये गये बल के विरुद्ध कार्य करता है। अतः लोहे का चपटा बॉट नहीं लुढ़कता है।


मनुष्य को हिचकियाँ क्यों आती है और पानी पीने पर बंद क्यों हो जाती है ?

हिचकी का कारण होता है अचानक डायफ्राम में ऐंठन आना। फेफड़ों में अचानक हवा भरने से  कंठच्छद(एपिग्लॉटिस) बंद हो जाता है। इससे हिच या हिक् की आवाज आती है। इसीलिए इसें अंग्रेजी में हिक-अप कहते हैं। हिचकी जब आती है तब कई बार आती है। हिचकी एक शारीरिक दोष के कारण भी आती है। उसे सिंग्युलटस कहते हैं। हिचकी आने की कई वजहें हैं। जल्दी-जल्दी खाना, बहुत गर्म या तीखा खाना, हँसना, खाँसना भी हिचकी का कारण बनता है। शराब पीने और धूम्रपान से भी आती है। इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस भी हिचकियाँ पैदा करता है। श्वसन पर रिसर्च करने वाले एक ग्रुप का कहना है कि मानव शरीर के विकास का एक लक्षण हिचकी है। पानी के अंदर रहने वाला मेढक पानी और हवा को उसी तरह घुटकता है जैसे हम हिचकी लेते हैं। अक्सर समय से पहले जन्मे शिशु जन्म लेते ही कुछ समय तक हिचकियाँ लेते हैं। हिचकियाँ काफी छोटे समय तक रहतीं हैं। पानी पीने शरीर की सामान्य क्रिया जल्द वापस आ जाती है।


एक नाव पर नदी की तुलना में समुद्र में अधिक बोझा लादा जा सकता है, क्यों ?

नदी के पानी का घनत्व समुद्र के पानी के घनत्व की अपेक्षा कम होता है, जिसके कारण नदी में नाव पर कम उछाल होता है, जबकि समुद्र के पानी का घनत्व अधिक होने के कारण अधिक उछाल होता है। अतः नाव में नदी की तुलना में समुद्र में अधिक बोझा लादा जा सकता है।


भारतीय संसद में प्रतिवर्ष रेल बजट एवं सामान्य बजट एक साथ पेश न करके अलग-अलग क्यों पेश किए जाते हैं ?

संविधान के अनुच्छेद-112 के अनुसार राष्ट्रपति प्रत्येक वित्तीय वर्ष के सम्बंध में संसद के दोनों सदनों के सामने भारत सरकार की उस वर्ष के लिए प्राप्तियों और व्यय का विवरण रखवाएंगे, जिसे वार्षिक वित्तीय विवरण कहा गया है। यह बजट सामान्यतः फरवरी की अंतिम तिथि को पेश किया जाता है और 1 अप्रेल से लागू होता है। यदि किसी कारण से वर्ष का बजट पेश न हो सके तो सरकार को जरूरी खर्च के लिए संचित निधि में से धन निकालने के लिए अनु्छेद-116 के अंतर्गत संसद अनुदान मांगें पास कर सकती है।

भारतीय रेल भी सरकार का उपक्रम है। इसका अलग बजट बनाने की परम्परा सन 1924 से शुरू हुई है। इसके लिए 1920-21 में बनाई गई विलियम एम एकवर्थ कमेटी ने रेल बजट को सामान्य बजट से अलग पेश करने का सुझाव दिया था। 1920-21 मे सरकार का कुल बजट 180 करोड़ का था, जबकि इसमें 82 करोड़ रु का रेल बजट था। अकेला रेल विभाग देश की अकेली सबसे बड़ी आर्थिक गतिविधि संचालित करता था। इसलिए उसका बजट अलग तैयार करने का सुझाव दिया गया। अब अनेक विशेषज्ञ रेल बजट को आम बजट का हिस्सा बनाने का सुझाव देते हैं। रेल बजट आम बजट से दो दिन पहले पेश होता है और आम बजट में रेलवे की प्राप्तियों और व्यय का विवरण दिया जाता है।


खराब अण्डा पानी में क्यों तैरने लगता है ?

जब अण्डा खराब हो जाता है, तो इसके घनत्व में कमी आ जाती है। इसलिए खराब अण्डा पानी में तैरने लगता है।


पोलर लाइट्स क्या है और इनका रहस्य क्या है ?

ध्रुवीय ज्योति (अंग्रेजी: Aurora), या मेरुज्योति, वह चमक है जो ध्रुव क्षेत्रों के वायुमंडल के ऊपरी भाग में दिखाई पड़ती है। उत्तरी अक्षांशों की ध्रुवीय ज्योति को सुमेरु ज्योति (अंग्रेजी: aurora borealis), या उत्तर ध्रुवीय ज्योति, तथा दक्षिणी अक्षांशों की ध्रुवीय ज्योति को कुमेरु ज्योति (अंग्रेजी: aurora australis), या दक्षिण ध्रुवीय ज्योति, कहते हैं। यह रोशनी वायुमंडल के ऊपरी हिस्से थर्मोस्फीयर ऊर्जा से चार्ज्ड कणों के टकराव के कारण पैदा होती है। ये कण मैग्नेटोस्फीयर, सौर पवन से तैयार होते हैं। धरती का चुम्बकीय घेरा इन्हें वायुमंडल में भेजता है। ज्यादातर ज्योति धरती के चुम्बकीय ध्रुव के 10 से 20 डिग्री के बैंड पर होती हैं। इसे ऑरल ज़ोन कहते हैं। इन ज्योतियों का भी वर्गीकरण कई तरह से किया जाता है।


ह्वाइट कॉलर जॉब क्या है ?

ह्वाइट कॉलर शब्द एक अमेरिकी लेखक अपटॉन सिंक्लेयर ने 1930 के दशक में गढ़ा। औद्योगीकरण के साथ शारीरिक श्रम करने वाले फैक्ट्री मजदूरों की यूनीफॉर्म डेनिम के मोटे कपड़े की ड्रेस हो गई। शारीरिक श्रम न करने वाले कर्मचारी सफेद कमीज़ पहनते। इसी तरह खदानों में काम करने वाले ब्लैक कॉलर कहलाते। सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े कर्मियों के लिए अब ग्रे कॉलर शब्द चलने लगा है।


विदा लेते समय अंग्रेजी में बाई के साथ टाटा कहते हैं, यह टाटा क्या है ?

अंग्रेजी में विदाई के वक्त टाटा कहने का चलन है। यह शब्द बोली का है। इसका प्रचलन उन्नीसवीं सदी से हुआ है। ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के अनुसार यह गुडबाई का नर्सरी संस्करण है। इसका इस्तेमाल पहली बार 1837 में दर्ज है। सन 1941 में बीबीसी के एक रेडियो प्रोग्राम में इस्तेमाल किया गया संक्षिप्त प्रयोग टीटीएफएन काफी लोकप्रिय हुआ था जिसका मतलब था टाटा फॉर नाउ।


किसी डरावनी चीज को देखने पर दिल की धड़कन तेज क्यों हो जाती है ?

हमारा मस्तिष्क एक केन्द्रीय कम्प्यूटर की तरह शरीर के सारे कार्यों को संचालित करता है। यह काम नर्वस सिस्टम के मार्फत होता है। पूरे शरीर में नाड़ियों यानी नर्व्स का एक जाल है। मस्तिष्क से हमारी रीढ़ की हड्डी जुड़ी है, जिससे होकर धागे जैसी नाड़ियाँ शरीर के एक-एक हिस्से तक जाती हैं। मस्तिष्क से निकलने वाला संदेश शरीर के हर अंग तक जाता है। मसलन कभी आपका हाथ दुर्घटनावश जल जाय तो हाथ की त्वचा से जुड़ी नर्व्स दर्द का संदेश मस्तिष्क तक भेजती है। जवाब में मस्तिष्क मसल्स को संदेश देता है कि हाथ को खींचो। यह सब बेहद तेजी से होता है। नर्वस सिस्टम का एक हिस्सा शरीर की साँस लेने, भोजन को पचाने, पसीना निकालने, काँपने जैसी तमाम क्रियाओं का संचालन करता रहता है। आपको उसमें कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं होती है। इसे ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम कहते हैं। इस सिस्टम के दो हिस्से होते हैं। सिम्पैथेटिक और पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम। जब आप कोई डरावनी चीज़ देखते हैं तब सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम हृदय की गति को बढ़ा देता है। उसका उद्देश्य शरीर के सभी अंगों तक ज्यादा रक्त पहुँचाना होता है। साथ ही यह किडनी के ऊपर एड्रेनल ग्लैंड्स से एड्रेनालाइन हार्मोन को रिलीज़ करता है, जिससे मसल्स को अतिरिक्त शक्ति मिलती है। यह इसलिए कि या तो आपको लड़ना है या भागना है। दोनों काम के लिए फौरी ऊर्जा मिल सके। इसके अलावा शरीर की मसल्स शरीर के रोम (रोयों) को उत्तेजित करती है ताकि शरीर में गर्मी आए। यह काम सर्दी लगने पर भी होता है।


किस फिल्म को पहला राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था ?

1954 में कथा-चित्र के लिए पहला राष्ट्रीय पुरस्कार मराठी फिल्म ‘श्यामची आई’ को दिया गया।


पेन ड्राइव का आविष्कार किसने किया ?

यूएसबी फ्लैश पेन ड्राइव मूलतः डेटा स्टोरेज डिवाइस है।। इसमें तमाम पुरानी तकनीकों का समावेश है। मूलतः यूनिवर्सल बस इंटरफेस (यूएसबी) इसका माध्यम है। अलबत्ता अप्रेल 1999 में इसरायली कम्पनी एम-सिस्टम्स ने इसके पेटेंट के लिए अमेरिका में अर्जी दी थी। इस कम्पनी के अमीर बैन, डोव मोरान और ओरोन ओग्दान ने इसका आविष्कार किया था।

इस पेटेंट में मेमरी यूनिट और यूएसबी कनेक्टर के बीच एक केबल का ज़िक्र किया गया था। उसी साल सितम्बर में शिमॉन श्मुएली की ओर से प्रस्तुत आईबीएम के एक पेटेंट में इस यूएसबी फ्लैश ड्राइव का पूरा विवरण दिया गया था। अलबत्ता आईबीएम और एम-सिस्टम्स ने मिलकर इस बाजार में उतारा। इस पेटेंट के बाद कई कम्पनियों ने अपने प्रोडक्ट्स के लिए अर्जियाँ दी हैं और इसमें कई तरह के विवाद है।


गाडियों के टायर काले क्यों होते हैं ?

टायर बनाने की प्रक्रिया को वल्कनाइजेशन कहते हैं। आमतौर पर रबर का रंग स्लेटी होता है। प्राकृतिक रबर यानी लेटेक्स में कार्बन ब्लैक मिलाते हैं ताकि वह मजबूत रहे, रबर जल्दी न घिसे। अगर सादा रबर का टायर 8 हज़ार किलोमीटर चल सकता है तो कार्बन युक्त टायर एक लाख किलोमीटर चल सकता है। काले कार्बन की भी कई श्रेणियां होती हैं। इसमें सल्फर भी मिलाते हैं। कार्बन ब्लैक के कारण यह काला हो जाता है। इससे यह अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से बच जाता है। यों आपने बच्चों की साइकिलों में सफेद, पीले और दूसरे रंगों के टायर देखे होंगे। बीसवीं सदी के पहले-दूसरे दशक में कारों के सफेद टायर भी होते थे। यों हाल के वर्षों तक ह्वाइटवॉल टायरों का प्रचलन रहा है जिनमें टायर का साइड वाला हिस्सा सफेद होता था।


दुनिया के पहले कार्टूनिस्ट कौन थे ?

सन 1841 में लंदन से प्रकाशित पत्रिका पंच में सबसे पहले कार्टून छपने शुरू हुए थे। इनमें जॉन लीच के बनाए स्केच प्रमुख थे। पत्रिका के पहले अंक का मुखपृष्ठ आर्किबाल्ड हैनिंग ने डिजाइन किया था। जॉन लीच के अलावा रिचर्ड डॉयल, जॉन टेनियल और चार्ल्स कीन के कार्टून भी पत्रिका में छपते थे। उन्हें भी पहले कार्टूनिस्ट मान सकते हैं।


‘भारत माता’ का प्रसिद्ध चित्र किसने बनाया था ?

‘भारत माता’ की अवधारणा उन्नीसवीं सदी में बंगाल से शुरू हुई थी। सन 1873 में किरण चन्द्र बंदोपाध्याय का लिखा नाटक ‘भारत माता’ खेला गया था। उन्हीं दिनों प्रसिद्ध चित्रकार अवनीन्द्र नाथ ठाकुर ने भारत माता का चित्र बनाया। इसके बाद अनेक चित्रकारों ने भारत माता के चित्र बनाए हैं। वाराणसी में एक भारत माता मंदिर भी है।


अक्षरों की छपाई का आविष्कार कहाँ और किस तरह हुआ ?

प्रारंभिक युग में मुद्रण एक कला था, लेकिन आधुनिक युग में पूर्णतया तकनीकी आधारित हो गया है। सामान्यतः मुद्रण का अर्थ छपाई से है, जो कागज, कपड़ा, प्लास्टिक, टाट इत्यादि पर हो सकता है। पहले बोली और फिर भाषा का आविष्कार हुआ। इसके बाद लिपि का आविष्कार हुआ। पत्थरों व वृक्षों की छालों पर खोदकर इनसान लिखने लगा। इसके बाद लकड़ी को नुकीला छीलकर ताड़पत्रों और भोजपत्रों पर लिखने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई।

प्राचीन काल के अनेक ग्रंथ भोजपत्रों पर लिखे मिले हैं। सन् 105 में चीन में कागज का आविष्कार हुआ। चीन में ही सन् 712 में ब्लॉक प्रिंटिंग की शुरूआत हुई। इसके लिए लकड़ी का ब्लॉक बनाया गया। सन 1041 में चीन के पाई शेंग नामक व्यक्ति ने चीनी मिट्टी की मदद से अक्षरों को तैयार किया। इन अक्षरों को आधुनिक टाइपों का आदि रूप माना जा सकता है। चीन में ही दुनिया का पहली छपाई हुई। लकड़ी के टाइपों के ऊपर स्याही जैसे पदार्थ को पोतकर कागज के ऊपर दबाकर छपाई का काम किया जाता था। यह कला यूरोप में चीन से गई अथवा वहां स्वतंत्र रूप से विकसित हुई।

जर्मनी के मिंज़ शहर में रहने वाले जोहानन गुटेनबर्ग ने सन् 1440 में ऐसे टाइपों का आविष्कार किया, जो बदल-बदलकर विभिन्न सामग्री को बहुसंख्या में मुद्रित कर सकता था। गुटेनबर्ग ने ही सन् 1454 में दुनिया का पहला छापाखाना (प्रिंटिंग-प्रेस) लगाया तथा सन् 1456 में बाइबिल की 300 प्रतियों को प्रकाशित कर पेरिस और फ्रांस भेजा। इस पुस्तक की मुद्रण तिथि 14 अगस्त, 1456 है।


धरती पर सबसे लंबी उम्र और सबसे छोटी उम्र वाले जीव कौन हैं ?

‘कोई’ नाम की जापानी मछली 250 साल तक, विशाल कछुआ (जाइंट टर्टल) पौने दो सौ से दो सौ साल तक, ह्वेल मछली दो सौ साल तक जीती है। ‘मे फ्लाई’ नाम की मक्खी की उम्र एक से लेकर 24 घंटे तक होती है। इसी तरह जल में रहने वाले एक नन्हें प्राणी ‘गैस्ट्रोटिच’ की उम्र होती है तीन दिन।


दुनिया में सबसे पहला उपन्यास कब लिखा गया ?

यों तो विश्व साहित्य की शुरुआत किस्सों-कहानियों से हुई और वे महाकाव्यों के युग से आज तक के साहित्य की बुनियाद रही हैं। उपन्यास को आधुनिक युग की देन कहना बेहतर होगा। साहित्य में गद्य का प्रयोग जीवन के यथार्थ चित्रण की कोशिश है। आमतौर पर गेंजी मोनोगतारी या ‘द टेल ऑफ गेंजी’ को दुनिया का पहला आधुनिक उपन्यास मानते हैं। जापानी लेखिका मुरासाकी शिकिबु ने इसे सन 1000 से सन 1008 के बीच कभी लिखा था। बेशक यह दुनिया के श्रेष्ठतम ग्रंथों में से एक है, पर इस बात पर एक राय नहीं है कि यह पहला उपन्यास था या नहीं। इसमें 54 अध्याय और करीब 1000 पृष्ठ हैं। इसमें प्रेम और विवेक की खोज में निकले एक राजकुमार की कहानी है।

अलबत्ता हमें पहले यह समझना चाहिए कि उपन्यास होता क्या है। उपन्यास गद्य में लिखा गया लम्बा आख्यान है, जिसकी एक कथावस्तु होती है और चरित्र-चित्रण होता है। कथावस्तु को देखें तो महाभारत, रामायण और तमाम भाषाओं में महाग्रंथ हैं। पर वे सब प्रायः महाकाव्य हैं। अलबत्ता संस्कृत में दंडी के ‘दशकुमार चरित्र’ और वाणभट्ट के ‘कादम्बरी’ को भी दुनिया का पहला उपन्यास माना जा सकता है। यूरोप का प्रथम उपन्यास सेर्वैन्टिस का ‘डॉन क्विक्ज़ोट’ माना जाता है जो स्पेनी भाषा का उपन्यास है। इसे 1605 में लिखा गया था। अनेक विद्वान 1678 में जोन बुन्यान द्वारा लिखे गए “द पिल्ग्रिम्स प्रोग्रेस” को पहला अंग्रेजी उपन्यास मानते हैं। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार ‘परीक्षा गुरु’ हिन्दी का पहला उपन्यास है, जो 1882 में प्रकाशित हुआ। इसके लेखक लाला श्रीनिवास दास हैं। हालांकि इसके पहले सन 1870 में 'देवरानी जेठानी की कहानी' (लेखक -पंडित गौरीदत्त) और श्रद्धाराम फिल्लौरी के ‘भाग्यवती’ को भी हिन्दी के प्रथम उपन्यास होने का श्रेय दिया जाता है। पर ये पुस्तकें मुख्यतः शिक्षात्मक और अपरिपक्व हैं।


खबर है कि इस साल मॉनसून सामान्य से कम होगा। यह मॉनसून क्या होता है ?

अंग्रेज़ी शब्द मॉनसून पुर्तगाली शब्द ‘मॉन्सैओ’ से निकला है। यह शब्द भी मूल अरबी शब्द मॉवसिम (मौसम) से बना है। यह शब्द हिन्दी एवं उर्दू एवं विभिन्न उत्तर भारतीय भाषाओं में भी प्रयोग किया जाता है। आधुनिक डच शब्द मॉनसून से भी मिलता है। मानसून मूलतः हिन्द महासागर एवं अरब सागर की ओर से भारत के दक्षिण-पश्चिम तट पर आनी वाली हवाओं को कहते हैं जो भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि में भारी वर्षा करातीं हैं। यह ऐसी मौसमी पवन होती हैं, जो दक्षिणी एशिया क्षेत्र में जून से सितंबर तक, प्रायः चार महीने तक सक्रिय रहती है।

इस शब्द का पहला इस्तेमाल अंग्रेजों के भारत आने के बाद बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से चलने वाली बड़ी मौसमी हवाओं के लिए हुआ था। हाइड्रोलॉजी में मानसून का व्यापक अर्थ है- कोई भी ऐसी पवन जो किसी क्षेत्र में किसी ऋतु-विशेष में ही वर्षा कराती है। मॉनसून हवाओं का अर्थ अधिकांश समय वर्षा कराने से नहीं लिया जाना चाहिए। इस परिभाषा को देखते हुए संसार के अन्य क्षेत्र, जैसे- उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, उप-सहारा अफ़्रीका, आस्ट्रेलिया एवं पूर्वी एशिया को भी मॉनसून क्षेत्र की श्रेणी में रखा जा सकता है।


बादल क्यों और कैसे फटता है?

बादल फटना, बारिश का एक चरम रूप है। इस घटना में बारिश के साथ कभी-कभी गरज के साथ ओले भी पड़ते हैं। सामान्यत: बादल फटने के कारण सिर्फ कुछ मिनट तक मूसलधार बारिश होती है लेकिन इस दौरान इतना पानी बरसता है कि क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। बादल फटने की घटना अमूमन पृथ्वी से 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर घटती है। इसके कारण होने वाली वर्षा लगभग 100 मिलीमीटर प्रति घंटा की दर से होती है। कुछ ही मिनट में 2 सेंटी मीटर से अधिक वर्षा हो जाती है, जिस कारण भारी तबाही होती है।

मौसम विज्ञान के अनुसार जब बादल भारी मात्रा में पानी लेकर आसमान में चलते हैं और उनकी राह में कोई बाधा आ जाती है, तब वे अचानक फट पड़ते हैं, यानी संघनन बहुत तेजी से होता है। इस स्थिति में एक सीमित इलाके में कई लाख लीटर पानी एक साथ पृथ्वी पर गिरता है, जिसके कारण उस क्षेत्र में तेज बहाव वाली बाढ़ आ जाती है। भारत के संदर्भ में देखें तो हर साल मॉनसून के समय नमी को लिए हुए बादल उत्तर की ओर बढ़ते हैं। हिमालय पर्वत एक बड़े अवरोधक के रूप में इसके सामने पड़ता है। इसके कारण बादल फटता है।

पहाड़ ही नहीं कभी गर्म हवा का झोंका ऐसे बादल से टकराता है तब भी उसके फटने की आशंका बढ़ जाती है। उदाहरण के तौर पर 26 जुलाई 2005 को मुंबई में बादल फटे थे, तब वहां बादल किसी ठोस वस्तु से नहीं बल्कि गर्म हवा से टकराए थे।


अंटार्कटिका की खोज किसने और कब की?

अंटार्कटिका के होने की संभावना करीब दो हजार साल पहले से थी। इसे ‘टेरा ऑस्ट्रेलिस’ यानी दक्षिणी प्रदेश के नाम के एक काल्पनिक इलाके के रूप में जानते थे। यह भी माना जाता था कि ऑस्ट्रेलिया का दक्षिणी इलाका दक्षिण अमेरिका से जुड़ा है। यूरोपीय नक्शों में इस काल्पनिक भूमि का दर्शाना लगातार तब तक जारी रहा जब तक कि 1773 में ब्रिटिश अन्वेषक कैप्टेन जेम्स कुक ने अपने दो जहाजों के साथ अंटार्कटिक सर्किल को पार करके उस सम्भावना को खारिज कर दिया। पर जबर्दस्त ठंड के कारण कैप्टेन कुक को अंटार्कटिक के सागर तट से 121 किलोमीटर दूर से वापस लौटना पड़ा। इसके बाद सन 1820 में रूसी नाविकों और ने अंटार्कटिक को पहली बार देखा। उसके बाद कई नाविकों को इस बर्फानी ज़मीन को देखने का मौका मिला। 27 जनवरी 1820 को रूसी वॉन फेबियन गॉतिलेब वॉन बेलिंगशॉसेन और मिखाइल पेत्रोविच लजारोव जो दो-पोत अभियान की कप्तानी कर रहे थे, अंटार्कटिका की मुख्य भूमि के अन्दर पानी पर 32 किलोमीटर तक गए थे और उन्होंने वहाँ बर्फीले मैदान देखे थे। प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार अंटार्कटिका की मुख्य भूमि पर पहली बार पश्चिम अंटार्कटिका में अमेरिकी सील शिकारी जॉन डेविस 7 फ़रवरी 1821 को उतरा था, हालांकि कुछ इतिहासकार इस दावे को सही नहीं मानते।


एफ़एम, मोबाइल और वायरलेस तथा अन्य तरंगों का इंसानों और पशु पक्षियों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

एफ़एम, मोबाइल और वायरलेस,  कॉर्डलेस हैडफोन, वाइ-फाई, माइक्रोवेव अवन, ऑप्टिक फाइबर तथा अन्य तरंगों तक से स्वास्थ्य के लिए पैदा होने वाले खतरों को लेकर चिंता व्यक्त की जाती है। मोबाइल टावरों से रेडिएशन हो सकता है, पर उनके लिए सीमा निर्धारित है। वस्तुतः ज्यादा धूप, गर्मी, सर्दी, पानी से भी स्वास्थ्य के लिए खतरा होता है, पर सीमा के भीतर रहें तो नहीं होता।


पानी में भँवर कैसे बनते हैं? और चक्रवात किसे कहते हैं?

भँवर आमतौर पर एक-दूसरे से विपरीत दिशाओं से आ रही लहरों के टकराने से बनते हैं। इसके कई रूप हैं। जब आप किसी पानी के बर्तन में ऊपर से पानी गिराएं तो दबाव के कारण पानी नीचे जाता है और इसके चारों ओर गोल घेरा बन जाता है यह भी एक प्रकार का भँवर है। आप किसी पानी की भरी बोतल की तली में छेद कर दें और उसे देखें तो पता लगेगा कि पानी के बीचोबीच घूमते चक्रवात जैसा एक खड़ा स्तम्भ बन जाता है और सबसे ऊपर पानी की सतह पर भँवर जैसा बन जाता है। सागर के ऊपर या धरती की सतह पर जब हवाएं टकराकर गोल- गोल घूमने लगती हैं तब उसे हम चक्रवात कहते हैं।


ट्रैफिक सिग्नल की शुरुआत सबसे पहले कहां हुई?

ट्रैफिक सिग्नल की शुरूआत रेलवे से हुई है। रेलगाड़ियों को एक ही ट्रैक पर चलाने के लिए बहुत ज़रूरी था कि उनके लिए सिग्नलिंग की व्यवस्था की जाए। 10 दिसम्बर 1868 को लंदन में ब्रिटिश संसद भवन के सामने रेलवे इंजीनियर जेपी नाइट ने ट्रैफिक लाइट लगाई। पर यह व्यवस्था चली नहीं। सड़कों पर व्यवस्थित रूप से ट्रैफिक सिग्नल सन 1912 में अमेरिका के सॉल्ट लेक सिटी यूटा में शुरू किए गए। सड़कों पर बढ़ते यातायात के साथ यह व्यवस्था दूसरे शहरों में भी शुरू होती गई।


दुनिया में सबसे पहले कपड़े कहाँ पहने गए?

पुरातत्ववेत्ताओं और मानव-विज्ञानियों के अनुसार सबसे पहले परिधान के रूप में पत्तियों, घास-फूस,जानवरों की खाल और चमड़े का इस्तेमाल हुआ था। दिक्कत यह है कि इस प्रकार की पुरातत्व सामग्री मिलती नहीं है। पत्थर, हड्डियाँ और धातुओं के अवशेष मिल जाते हैं, जिनसे निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं, पर परिधान बचे नहीं हैं। पुरातत्ववेत्ताओं को रूस की गुफाओं में हड्डियों और हाथी दांत से बनी सिलाई करने वाली सूइयाँ मिली हैं, जो तकरीबन 30,000 साल ईपू की हैं। मानव विज्ञानियों ने कपड़ों में मिलने वाली जुओं का जेनेटिक विश्लेषण भी किया है, जिसके अनुसार इंसान ने करीब एक लाख सात हजार साल पहले बदन ढकना शुरू किया होगा। इसकी ज़रूरत इसलिए हुई होगी क्योंकि अफ्रीका के गर्म इलाकों से उत्तर की ओर गए इंसान को सर्द इलाकों में बदन ढकने की ज़रूरत हुई होगी। कुछ वैज्ञानिक परिधानों का इतिहास पाँच लाख साल पीछे तक ले जाते हैं। बहरहाल अभी इस विषय पर अनुसंधान चल ही रहा है।


राष्ट्रपति भवन और संसद भवन का निर्माण कब हुआ?

सन 1911 में घोषणा की गई कि भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली ले जाई जाएगी। मशहूर ब्रिटिश आर्किटेक्ट सर एडविन लैंडसीयर लुट्यन्स ने दिल्ली की ज्यादातर नई इमारतों की रूपरेखा तैयार की। इसके लिए उन्होंने सर हरबर्ट बेकर की मदद ली। जिसे आज हम राष्ट्रपति भवन कहते हैं उसे तब वाइसरॉयस हाउस कहा जाता था। इसके नक्शे 1912 में बन गए थे, पर यह बिल्डिंग 1931में पूरी हो पाई। संसद भवन की इमारत 1927 में तैयार हुई।


क्रिकेट के एक ओवर में छह गेंदें ही क्यों होती हैं, चार या पाँच क्यों नहीं?

सच यह है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सन 1979-80 के बाद से ही सारी दुनिया में छह गेंदों के मानक ओवर का चलन शुरू हुआ है। उसके पहले अलग-अलग समय और अलग-अलग देशों में चार, पाँच और आठ गेंदों के ओवर भी होते रहे हैं। क्रिकेट के ज्ञात इतिहास में इंग्लैंड में सन 1889 तक चार गेंदों का एक ओवर होता था। उसके बाद 1899 तक पाँच गेंद का ओवर हो गया। इसके बाद सन 1900 में एक पहल के बाद छह गेंदों के ओवर की शुरूआत हुई। शुरूआती वर्षों में ऑस्ट्रेलिया में भी चार गेंद का ओवर होता था। इसके बाद जब इंग्लैंड में छह गेंद का ओवर हुआ तो वहाँ भी छह गेंद का ओवर हो गया। पर 1922-23 के सीज़न से ऑस्ट्रेलिया ने आठ गेंदों का एक ओवर करने का फैसला किया।


किसी वस्तु का भार भूमध्यरेखा के मुकाबले ध्रुव पर अधिक क्यों होता है ?

पृथ्वी किसी वस्तु को जिस बल (W = mg) से अपने केन्द्र की ओर खींचती है, उस बल को उस वस्तु का भार कहते हैं। वस्तु पृथ्वी के केन्द्र से जितनी दूर होती जाती है, उतना ही पृथ्वी का आकर्षण बल कम होता जाता है। चूंकि भूमध्यरेखा पृथ्वी के केन्द्र से धुव की अपेक्षा दूर है। अतः भूमध्यरेखा के मुकाबले धुव पर वस्तु का भार अधिक होता है। इसके अतिरिक्त पृथ्वी के दैनिक घूर्णन के कारण भूमध्यरेखा पर g का मान ध्रुवों की अपेक्षा कम होने से भी भार कम होता है।


बिजली चालू करने पर बिजली का बल्ब प्रकाश क्यों देता है ?

बिजली के बल्ब में टंग्स्टन का एक तन्तु होता है तथा बल्ब में निष्क्रिय गैस भरी होती है। टंग्स्टन का गलनांक बहुत ऊँचा होता है। जब बिजली चालू की जाती है, तो टंग्स्टन का तन्तु अत्यधिक गर्म हो जाता है। अधिक ताप होने पर वह स्वयं प्रकाशमान हो जाता है और प्रकाश देने लगता है।


नियो बैंकिंग क्या है ?

आन लाइन भुगतान प्रणाली (नियो बैंकिंग Neo Banking)- इधर हाल के वर्षों में आन लाइन पेमेन्ट या हस्तान्तरण के अनेक तरीके विकसित हुए हैं जिनको बहुत से लोग नियो बैंकिंग का नाम देते हैं। इनके परिणामस्वरूप बैंकिंग भुगतान प्रणाली में समय, सहूलियत, लागत, व्यापार के स्वरूप आदि के सम्बन्ध में क्रान्तिकारी परिवर्तन आया है। आन लाइन पेमेन्ट के निम्नांकित तरीके हैं-

(i) रीयल टाइम ग्रास सेटिलमेंट (Real-time gross settlement systems - RTGS)- यह इन्टरनेट बैंकिंग को प्रयोग लाते हुए इन्टरनेट के द्वारा फण्ड ट्रान्सफर का एक तरीका है। इसके द्वारा भुगतान की न्यूनतम सीमा दो लाख रुपया है। इसकी कोई ऊपरी सीमा नहीं है।

(ii) नेशनल इलेक्ट्रानिक फण्ड ट्रान्सफर (National Electronic Funds Transfer - NEFT)- आर.टी.जी.एस. के ही समान एन.इ.एफ.टी. फण्ड इन्टरनेट के द्वारा ट्रान्सफर की प्रणाली है। कोई भी व्यक्ति, फर्म या कम्पनी किसी दूसरी को जिसका बैंक में खाता हो, अपने बैंक खाते से फण्ड का ट्रान्सफर कर सकता है। NEFT के लिए आवश्यक है कि बैंक नेफ्ट से जुटे हों। इसके लिए बैंक का IFSC कोड आवश्यक है। इसमें भेजी जाने वाली राशि अधिकतम सीमा 5 लाख रुपये की है।

(iii) कोर बैंकिंग सल्युशन (Core Banking Solution - CBS)- सी.बी.एस. बैंकिंग शाखाओं की नेटवर्किंग हैं जो अपने ग्राहकों को सी.बी.एस. नेटवर्क की किसी शाखा के साथ अपने खातों के प्रयोग करने तथा बैंकिंग सुविधाओं को प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है।

(v) इलेक्ट्रानिक क्लियरिंग सर्विस (Electronic Clearing Service - ECS)- इसके तहत बैंक अपने ग्राहकों को यह सुविधा देता है कि वह उसके खाते से आटोमेटिक उसके द्वारा नियमित भुगतान की जाने वाली किश्त, जैसे मकानों के लिए गये ऋण का ई.एम.आई. (Equated monthly installments) को ट्रान्सफर कर दे।


फ्यूज का क्या उपयोग है ?

जब कभी घरों में बिजली के तारों में शार्ट सर्किट हो जाता है, तो वैद्युत परिपथ का प्रतिरोध एकदम कम हो जाता है तथा परिपथ में बहुत अधिक धारा बहने लगती है। परिणामस्वरूप परिपथ में लगे रेडियो, बल्ब, पंखे आदि जलने का भय रहता है तथा आग भी लग सकती है। इससे बचने के लिए फ्यूज तार मुख्य लाइन के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ देते हैं। जब परिपथ में किसी कारन धारा का मान बढ़ता है तो फ्यूज तार तुरंत गर्म होकर पिघल जाता है तथा परिपथ को तोड़ देता है।


प्रोटॉन, न्यूट्रॉन तथा इलैक्ट्रॉन किसे कहते हैं ?

प्रोटॉन- यह परमाणु का एक अनिवार्य कण है, इस पर इकाई धनावेश होता है। इसका द्रव्यमान हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान के लगभग बराबर होता है।

न्यूट्रॉन- यह एक उदासीन कण है, इस पर किसी तरह का विद्युत आवेश नहीं होता तथा यह प्रोटोन की अपेक्षा कुछ भारी होता है।

इलेक्ट्रॉन- यह परमाणु का एक अनिवार्य कण है। इस पर इकाई ऋणावेश होता है। इसका द्रव्यमान हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान का लगभग 1/1837वाँ भाग होता है।


पानी में डूबी हुई वस्तु हल्की क्यों प्रतीत होती है ?

जब कोई वस्तु पानी में डुबाई जाती है, तो उस वस्तु को पानी ऊपर की और उछालता है। इस उछाल के कारण ही वस्तु हल्की प्रतीत होती है।


भारतीय मुद्रा में गांधी जी ग्यारह लोगों के साथ दांडी यात्रा पर दिखाए गए हैं। क्या ये ग्यारह सदस्य ही यात्रा पर गए थे ?

महात्मा गांधी ने दांडी यात्रा 12 मार्च 1930 को शुरू की थी। उनके साथ 78 यात्री और चले थे। 240 मील (करीब 325 किमी) की यह यात्रा 24 दिन में पूरी हुई। रास्ते में हजारों लोगों ने उनका स्वागत किया। बड़ी संख्या में नए लोग उनके साथ यात्रा में शामिल हुए। आपने करेंसी में जो चित्र देखा है वह दिल्ली में मदर टेरेसा क्रेसेंट और सरदार पटेल मार्ग के टी पॉइंट पर स्थापित ग्यारह मूर्तियों का है। यह प्रतीक चित्र है। इसमें सभी यात्रियों को शामिल नहीं किया गया है। इन मूर्तियों के पास यह विवरण भी नहीं है कि इनमें गांधी जी के साथ दूसरे यात्री कौन हैं। यह प्रतिमा प्रसिद्ध मूर्तिकार देवी प्रसाद रॉय चौधरी ने बनाई थी।


किसी वस्तु का भार भूमध्यरेखा के मुकाबले ध्रुव पर अधिक क्यों होता है ?

पृथ्वी किसी वस्तु को जिस बल (W = mg) से अपने केन्द्र की ओर खींचती है, उस बल को उस वस्तु का भार कहते हैं। वस्तु पृथ्वी के केन्द्र से जितनी दूर होती जाती है, उतना ही पृथ्वी का आकर्षण बल कम होता जाता है। चूंकि भूमध्यरेखा पृथ्वी के केन्द्र से धुव की अपेक्षा दूर है। अतः भूमध्यरेखा के मुकाबले धुव पर वस्तु का भार अधिक होता है। इसके अतिरिक्त पृथ्वी के दैनिक घूर्णन के कारण भूमध्यरेखा पर g का मान ध्रुवों की अपेक्षा कम होने से भी भार कम होता है।


मोबाइल टेलीफोन सेवाओं को संदर्भ में जीएसएम (GSM), जीपीआरएस (GPRS) और सीडीएमए (CDMA) क्या होते हैं ?

जीएसएम यानी ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशन (Global System for Mobile communication)। मोबाइल टेलीफोन की यह सबसे ज्यादा प्रचलित पद्धति है। इनका दुनिया भर में नेटवर्क है और अधिकतर देशों में इसकी रोमिंग सुविधा है। जीएसएम एसोसिएशन इस तकनीक का इस्तेमाल करने वाले संगठनों की अंतरराष्ट्रीय संस्था है। इनकी वैबसाइट http://www.gsmworld.com/ पर जीएसएम पभोक्ताओं की लगातार बढ़ती संख्या आती रहती है। अनुमान है कि इस वक्त दुनिया में करीब पाँच अरब जीएसएम फोन हैं। जीएसएम की तरह सीडीएमए भी मोबाइन फोन की एक तकनीक है। इसका पूरा नाम है कोड डिवीजन मल्टिपल एक्सेस (Code-Division Multiple Access)। इसे चैनल एक्सेस मैथड भी कहते हैं। जीपीआरएस यानी जनरल पैकेट रेडियो सर्विस (General Packet Radio Service) एक प्रकार की तेज डेटा सर्विस है जैसे फिक्स्ड लाइन पर ब्रॉडबैंड सेवा होती है।


किसी वस्तु को हवा में उठाने की अपेक्षा उसे पानी में उठाना आसान क्यों होता है ?

आर्किमिडीज के सिद्धान्त के अनुसार- जब किसी वस्तु को किसी द्रव में अंशतः या पूर्णतः डुबाया जाता है, तो उसके भार में कमी आती है। यह कमी उस वस्तु द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होती है। अतः किसी वस्तु को हवा में उठाने की अपेक्षा पानी में उठाना ज्यादा आसान है।


दयामृत्यु क्या है? क्या किसी देश में व्यक्ति को अपनी इच्छा से मरने का अधिकार है ?

दयामृत्यु का अर्थ है किसी व्यक्ति या प्राणी के जीवन का ऐसी स्थिति में अंत जब समझा जाय कि उसकी मृत्यु उसके जीवित रहने से बेहतर है। इसके कई रूप सम्भव है। मृत्यु का स्वयं वरण, सम्बंधियों और परिजन द्वारा निश्चय या किसी अन्य स्थिति में जीवन का अंत। मृत्यु का वरण निष्क्रिय या सक्रिय दोनों प्रकार से हो सकता है। व्यक्ति को जीवित रखने वाले उपकरण हटा लिए जाएं या इंजेक्शन आदि देकर अंत किया जाए।

हाल में सुप्रीम कोर्ट में अरुणा शानबाग के मामले का फैसला आने के पहले से देश में इस प्रश्न पर बहस चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने दया मृत्यु को कानूनी शक्ल दे दी है, साथ ही उम्मीद जाहिर की है कि देश की संसद इस मामले में कोई नियम बनाएगी।

दया मृत्यु पर सारी दुनिया में बहस चल रही है, पर इसे स्वीकार बहुत कम लोग करते हैं। युरोप में अल्बानिया, बेल्जियम, नीदरलैंड्स, आयरलैंड, जर्मनी और लक्जेमबर्ग में पूर्ण या आंशिक दया मृत्यु की अनुमति है। अमेरिका के ओरेगॉन, वॉशिंगटन और मोंटाना राज्यों में भी इसकी अनुमति है। इस व्यवस्था का अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में विरोध हुआ था, पर अंततः अदालत ने दया मृत्यु को स्वीकार कर लिया। इन राज्यों में अब भी इस कानूनी अधिकार के अनेक पहलू अस्पष्ट हैं। दया मृत्यु के समानांतर इच्छा मृत्यु की अवधारणा है। जैन समाज में संथारा एक पवित्र कर्म है। इसी तरह जापान के परम्परागत समाज में हाराकीरी को योद्धाओं का पवित्र कार्य माना जाता है।


लोहे का बना जहाज पानी पर क्यों तैरता है ?

जहाज लोहे की चादर का इस प्रकार बनाया जाता है कि इसके अन्दर काफी खाली जगह होती है। इस कारण इसके थोड़े ही डूबे भाग द्वारा हटाये गये पानी का भार जहाज, यात्रियों और सामान आदि के भर के बराबर हो जाता है। अतः लोहे का बना जहाज पानी पर तैरता है।


दुनिया में कुल कितने देश हैं ? क्या सभी देश संयुक्त राष्ट्र-सदस्य हैं ?

दुनिया के पूर्ण सम्प्रभुता सम्पन्न देशों की संख्या 193 है। इनमें से 192 संयुक्त राष्ट्र-सदस्य हैं। वैटिकन सिटी को सम्प्रभुता सम्पन्न राज्य की मान्य परिभाषाओं में रखा जा सकता है, पर वह संयुक्त राष्ट्र का सदस्य नहीं केवल स्थायी पर्यवेक्षक है। वस्तुतः वैटिकन सिटी नहीं रोम के कैथलिक चर्च की प्रशासनिक व्यवस्था, जिसे होली सी कहा जाता है प्राचीनकाल से चली आ रही है। वैटिकन सिटी का गठन 1929 में हुआ था। उसके 178 देशों के साथ राजनयिक सम्बन्ध भी हैं।

संयुक्त राष्ट्र के 192 सदस्य देशों के अलावा कुछ राजव्यवस्थाएं और हैं, जिन्हें पूर्ण देश नहीं कहा जा सकता । उनके नाम हैं अबखाजिया, कोसोवो, नागोर्नो–कारबाख, उत्तरी सायप्रस, फलस्तीन, सहरावी गणराज्य, सोमालीलैंड, दक्षिण ओसेतिया, ताइवान, और ट्रांसनिस्ट्रिया। ये देश किसी न किसी वजह से राष्ट्रसंघ के पूर्ण सदस्य नहीं हैं। हाल में अफ्रीका में एक नए देश का जन्म हुआ है, जिसका नाम है दक्षिणी सूडान। लम्बे अर्से से गृहयुद्ध के शिकार सूडान में इसी साल जनवरी में एक जनमत संग्रह हुआ, जिसमें जनता ने नया देश बनाने का निश्चय किया है। यह फैसला देश के सभी पक्षों ने मिलकर किया है। नया देश 9 जुलाई 2011 को औपचारिक ऱूप से जन्म लेगा।

दुनिया में 6 प्रमुख विवादित क्षेत्र हैं ; गाजा पट्टी और पश्चिमी तट (the Gaza Strip and the West Bank), पार्सेल आइलैंड्स (Paracel Islands), स्प्रैटली आइलैंड्स (Spratly Islands), पश्चिमी सहारा (Western Sahara) और अंटार्कटिका (Antarctica)- (लगभग एक दर्जन राष्ट्रों ने अंटार्कटिका के भाग के लिए दावा कर रखा है)।


 कीड़े-मकौड़े पानी पर बिना डूबे कैसे चलते रहते हैं ?

आमतौर पर कीड़ों का वजन इतना कम होता है कि वे पानी के पृष्ठ तनाव या सरफेस टेंशन को तोड़ नहीं पाते। पानी और दूसरे द्रवों का एक गुण है जिसे सरफेस टेंशन कहते हैं। इसी गुण के कारण किसी द्रव की सतह किसी दूसरी सतह की ओर आकर्षित होती है। पानी का पृष्ठ तनाव दूसरे द्रवों के मुकाबले बहुत ज्यादा होता है। इस वजह से बहुत से कीड़े मकोड़े आसानी से इसके ऊपर टिक सकते हैं। इन कीड़ों का वजन पानी के पृष्ठ तनाव को भेद नहीं पाता। सरफेस टेंशन एक काम और करता है। पेन की रिफिल या कोई महीन नली लीजिए और उसे पानी में डुबोएं। आप देखेंगे कि पानी नली में काफी ऊपर तक चढ़ आता है। पेड़ पौधे ज़मीन से पानी इसी तरीके से हासिल करते है? उनकी जड़ों से बहुत पतली-पतली नलियां निकलकर तने से होती हुई पत्तियों तक पहुंच जाती हैं। सन 1995 में गणेश प्रतिमाओं के दूध पीने की खबर फैली थी। वस्तुतः पृष्ठ तनाव के कारण चम्मच का दूध पत्थर की प्रतिमा में ऊपर चढ़ जाता था।


सोखता स्याही क्यों सीखता है ?

स्याही सोखते का कार्य केशिका क्रिया (Capillary action) पर निर्भर करता है। स्याही सोखता सरन्ध्र (Porous) होता है। जब इसे गीली स्याही पर रखते हैं, तो स्याही इसके महीन छेदों में होकर चारों ओर फैल जाती है।


गैस जलने से पहले भुप्प या धुप्प जैसी आवाज क्यों करती है ?

आमतौर पर हम गैस जलाते वक्त दो काम करते हैं। एक हाथ से गैस का स्विच खोलते हैं और दूसरे हाथ से लाइटर से चिंगारी पैदा करते हैं। दोनों क्रियाओं के बीच समय का अंतर होता है। पहले लाइटर जलने पर आग नहीं लगती। आमतौर पर पहले गैस निकलती है, फिर चिंगारी बनती है। बर्नर में पहले से गैस जमा होने पर वह हत्के से धमाके के साथ जलती है।


सूर्य प्रातः एवं सायंकाल ही सिंदूरी क्यों दिखाई देता है? दोपहर में क्यों नहीं ?

इस सवाल का जवाब जानने के लिए पहले यह समझना होगा कि आसमान का रंग नीला या आसमानी क्यों होता है। धरती के चारों ओर वायुमंडल यानी हवा है। इसमें कई तरह की गैसों के मॉलीक्यूल और पानी की बूँदें या भाप है। गैसों में सबसे ज्यादा करीब 78 फीसद नाइट्रोजन है और करीब 21 फीसद ऑक्सीजन। इसके अलावा ऑरगन गैस और पानी है। इसमें धूल, राख और समुद्री पानी से उठा नमक वगैरह है। हमें अपने आसमान का रंग इन्हीं चीजों की वजह से आसमानी लगता है। दरअसल हम जिसे रंग कहते हैं वह रोशनी है। रोशनी वेव्स या तरंगों में चलती है। हवा में मौजूद चीजें इन वेव्स को रोकती हैं। जो लम्बी वेव्स हैं उनमें रुकावट कम आती है। वे धूल के कणों से बड़ी होती हैं। यानी रोशनी की लाल, पीली और नारंगी तरंगें नजर नहीं आती। पर छोटी तरंगों को गैस या धूल के कण रोकते हैं। और यह रोशनी टकराकर चारों ओर फैलती है। रोशनी के वर्णक्रम या स्पेक्ट्रम में नीला रंग छोटी तरंगों में चलता है। यही नीला रंग जब फैलता है तो वह आसमान का रंग लगता है।

दिन में सूरज ऊपर होता है। वायुमंडल का निचला हिस्सा ज्यादा सघन है। आप दूर क्षितिज में देखें तो वह पीलापन लिए होता है। कई बार लाल भी होता है। सुबह और शाम के समय सूर्य नीचे यानी क्षितिज में होता है तब रोशनी अपेक्षाकृत वातावरण की निचली सतह से होकर हम तक पहुँचती है। माध्यम ज्यादा सघन होने के कारण वर्णक्रम की लाल तरंगें भी बिखरती हैं। इसलिए आसमान अरुणिमा लिए नज़र आता है। कई बार आँधी आने पर आसमान पीला भी होता है। आसमान का रंग तो काला होता है। रात में जब सूरज की रोशनी नहीं होती वह हमें काला नजर आता है। हमें अपना सूरज भी पीले रंग का लगता है। जब आप स्पेस में जाएं जहाँ हवा नहीं है वहाँ आसमान काला और सफेद सूरज नजर आता है।


हृदशूल (Angina) तथा रोधगलन (Infraction) में क्या अन्तर है ?

जब हृदय को रक्त पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं होता है, तब हृदय पर जोर पड़ता है। इस स्थिति को हृदशूल कहते हैं, परन्तु जब हृदशूल की स्थिति बनी रहती है तथा किसी कारणवश रक्त का प्रवाह रुक जाता है, तो हृदय के मसल क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इस स्थिति को रोधगलन कहते हैं।


बिजली चालू करने पर बिजली का बल्ब प्रकाश क्यों देता है ?

बिजली के बल्ब में टंग्स्टन का एक तन्तु होता है तथा बल्ब में निष्क्रिय गैस भरी होती है। टंग्स्टन का गलनांक बहुत ऊँचा होता है। जब बिजली चालू की जाती है, तो टंग्स्टन का तन्तु अत्यधिक गर्म हो जाता है। अधिक ताप होने पर वह स्वयं प्रकाशमान हो जाता है और प्रकाश देने लगता है।


डेंगू शब्द कहाँ से आया ?

हालांकि डेंगू शब्द का इस्तेमाल काफी होने लगा है, पर इस शब्द का सही उच्चारण डेंगी है। यह स्पष्ट नहीं है कि शब्द कहां से आया। कुछ लोगों का मानना है कि यह शब्द स्वाहीली भाषा के वाक्यांश का-डिंगा पेपो से आया है। यह वाक्यांश बुरी आत्माओं से होने वाली बीमारी के बारे में बताता है। माना जाता है कि स्वाहीली शब्द डिंगा स्पेनी के शब्द डेंगी से बना है। इस शब्द का अर्थ है सावधान। वह शब्द एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताने के लिए उपयोग किया गया हो सकता है जो डेंगू बुखार के हड्डी के दर्द से पीड़ित हो; वह दर्द उस व्यक्ति को सावधानी के साथ चलने पर मजबूर करता होगा। यह भी संभव है कि स्पेनी शब्द स्वाहीली भाषा से आया हो। कुछ का मानना है कि डेंगू नाम वेस्ट इंडीज़ से आया है। वेस्ट इंडीज़ में, डेंगू से पीड़ित लोग डैंडी की तरह तनकर खड़े होने वाले और चलने वाले कहे जाते थे और इसी कारण से बीमारी को भी डैंडी फीवर कहा जाता था।


आकाश क्यों नीला दिखाई देता है ?

प्रकाश का प्रकीर्णन तरंगदैर्घ्य के चतुर्थ घात के व्युत्क्रमानुपाती होता है। चूंकि नीले रंग की तरंगदैर्घ्य सबसे कम होती है। अतः नीले रंग का प्रकीर्णन सबसे अधिक होता है। इस कारण आकाश नीला दिखाई देता है।


जाड़ों में स्वेटर या गर्म कपड़े पहनने पर हमें ठंड क्यों नहीं लगती है ?

ऊनी कपड़ों में गर्मी नहीं होती, बल्कि वे हमें सर्दी लगने से रोकते हैं। ऊनी या मोटे कपड़े तापमान के कुचालक होते हैं। यानी बाहर की सर्दी से वे ठंडे नहीं होते। हमारे शरीर की गर्मी हमें गर्म रखती है। यही बात गर्मी पर भी लागू होती है। आपने देखा होगा कि रेगिस्तानी इलाकों के लोग मोटे कपड़े पहनते हैं। इसका कारण यह है कि मोटे कपड़े गर्मी को भीतर आने नहीं देते।


अपने देश की सर्वप्रथम प्रकाशित हुई मासिक पत्रिका कौन-सी है तथा उसके संपादक कौन रहे ?

देश का पहला मासिक पत्र ओरिएण्टल मैगजीन ऑर कैलकटा एम्यूज़मेंट कोलकाता से 6 अप्रैल 1785 को शुरू हुआ। अंग्रेजी की इस पत्रिका का प्रकाशन मैसर्स गॉर्डन एंड हे ने किया था। सन 1799-1805 के बीच लॉर्ड वेलेज़ली ने जब प्रेस नियम लागू किए उसके पहले इसका प्रकाशन बंद हो चुका था।

ब्रिक्स, दक्षेस, जी-8 और जी-20 की विशेषताएं, कार्य, वैश्विक पटल पर इनके योगदान आदि के बारे में बताइए?

आपने कुछ देशों के औपचारिक-अनौपचारिक संगठनों और समूहों के नाम गिनाए हैं। ये समूह विभिन्न उद्देश्यों को लेकर बने हैं। संक्षेप में इनका परिचय इस प्रकार है-

ब्रिक्स Brazil, Russia, India, China and South Africa- BRICS

ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अंग्रेज़ी में नाम के प्रथमाक्षरों से इस समूह का यह नामकरण हुआ है। सन 2010 में दक्षिण अफ्रीका के इसमें शामिल होने से पहले इसका नाम "ब्रिक"। रूस को छोडकर इस समूह के सभी सदस्य विकासशील या नव औद्योगिक देश हैं जिनकी अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। यह समूह बनाने के लिए शुरुआती चार ब्रिक देशों ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन के विदेश मंत्री सितंबर 2006 में न्यूयॉर्क शहर में मिले और उच्च स्तरीय बैठकों की एक श्रृंखला की शुरुआत की। इसके बाद 16 मई 2008 एक बड़ा सम्मेलन येकतेरिनबर्ग, रूस में आयोजित किया गया था। इसके बाद 16 जून 2009 को ब्रिक समूह का पहला औपचारिक शिखर सम्मेलन, येकतेरिनबर्ग में ही हुआ। इसमें लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा (ब्राजील), दिमित्री मेदवेदेव(रूस), डॉ मनमोहन सिंह (भारत) और हू जिन्ताओ (चीन) शामिल हुए। यह समूह आपसी सहयोग के अलावा वैश्विक अर्थ-व्यवस्था की दशा-दिशा पर विचार-विमर्श करता है। ब्रिक्स का छठा शिखर सम्मेलन 15-16 जुलाई, 2014 को ब्राज़ील के फोर्टालेज़ा और ब्रासीलिया में आयोजित किया गया। इसका मुख्य विषय था, समावेशी वृद्धि, सतत विकास

सार्क South Asian Association for Regional Cooperation- SAARC

जिसका हिन्दी में संक्षेप नाम दक्षेस है, दक्षिण एशिया के आठ देशों का आर्थिक और राजनीतिक संगठन है। इसकी स्थापना 8 दिसम्बर 1985 को भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान ने मिलकर की थी। अप्रैल 2007 में संघ के 14 वें शिखर सम्मेलन में अफ़ग़ानिस्तान इसका आठवाँ सदस्य देश बना।

जी-8

ग्रुप ऑफ 8 दुनिया की आठ सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का मंच है। इसका न तो कोई मुख्यालय है और न कोई औपचारिक संगठन। जी-8 बनाने के पीछे सोच यह था कि लंबे-चौड़े तामझाम से बचकर इन देशों के शीर्ष नेता सीधे-सीधे अनौपचारिक तरीके एक दूसरे से बात कर सकें। जी-8 का मेज़बान देश ही सम्मेलन की तैयारियाँ करता है और उसका ख़र्च उठाता है। 1970 के दशक में तेल संकट और आर्थिक मंदी के माहौल के बीच महसूस किया गया कि दुनिया के अहम देशों के नेताओं के लिए खुलकर बात करने का कोई मंच होना चाहिए। इसी के बाद 1975 में फ्रांस में जी-6 की स्थापना हुई। इसके छह सदस्य थे– फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका। 1976 में कनाडा और 1998 में रूस भी इनके साथ जुड़ा और बन गया जी-8. हाल में यूक्रेन के संकट के बाद 24 मार्च को इस फोरम से जुड़े देशों ने रूस को इससे बाहर करने का फैसला किया। इस प्रकार अब यह जी-7 है।

जी-20

25 सितंबर 1999 को अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में विश्व के सात प्रमुख देशों के संगठन जी-7 ने एक नया संगठन बनाने की घोषणा की थी। उभरती आर्थिक ताक़तों की बुरी वित्तीय स्थिति से बने चिंता के माहौल के बीच गठित इस संगठन का नाम दिया गया-जी 20। उस वक्त यह विश्व की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों के संगठन के रूप में सामने आया था, जिसमें 19 देश और यूरोपीय संघ शामिल थे। इन देशों के अलावा इसके सम्मेलनों में दुनिया भर के तमाम संगठनों और देशों को समय-समय पर निमंत्रित किया जाता है। वस्तुतः इस समय दुनिया की आर्थिक परिघटनाओं, खासतौर से वैश्विक मंदी के मद्दे-नजर यह सबसे प्रभावशाली संगठन है। इस संगठन का कोई स्थायी सचिवालय नहीं है, पर अब प्रयास किया जा रहा है कि स्थायी सचिवालय बने। इसकी अध्यक्षता हर साल बदलती है।


नाभिकीय विखण्डन और नाभिकीय संलयन (Nuclear Fission and Nuclear Fussion) में क्या अंतर है ?

नाभिकीय विखण्डन- वह प्रक्रिया जिसमें एक भारी नाभिक न्यूट्रॉन के संघात से लगभग दो समान नाभिकों में टूट जाता है, नाभिकीय विखण्डन कहलाती है। इसमें विशाल मात्रा में ऊर्जा प्राप्त होती है।

नाभिकीय संलयन- हल्के दो नाभिकों को मिलाकर उनसे भारी नाभिक बनाने की क्रिया की नाभिकीय संलयन कहते हैं। इस क्रिया में भी विशाल मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है।


टेस्ट ट्यूब बेबी क्या है ?

ट्यूब बेबी के रूप में सबसे पहले लड़की का जन्म हुआ था। 25 जुलाई 1978 को ग्रेट ब्रिटेन में लेज़्ली ब्राउन ने दुनिया के पहले टेस्ट ट्यूब बेबी को जन्म दिया था। इस बेबी का नाम है लुइज़ जॉय ब्राउन। इनके पिता का नाम है जॉन ब्राउन। इनके माता-पिता के विवाह के नौ साल बाद तक संतान नहीं होने पर उन्होंने डॉक्टरों से सम्पर्क किया। डॉक्टर रॉबर्ट जी एडवर्ड्स कई साल से ऐसी तकनीक विकसित करने के प्रयास में थे, जिसे इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन कहा जाता है। डॉक्टर एडवर्ड्स को बाद में चिकित्सा विज्ञान का नोबेल पुरस्कार भी दिया गया। टेस्ट ट्यूब बेबी लुइज़ आज एक बच्चे की माँ हैं। उनके बेटे का नाम केमरन है। लुइज़ का विवाह सन 2004 में वेस्ली मलिंडर से हुआ था और 20 दिसम्बर 2006 को केमरन का जन्म सामान्य तरीके से हुआ।


मैग्नीशियम, कार्बन डाइऑक्साइड गैस में भी जलने लगता है, क्यों ?

मैग्नीशियम जलकर उच्च ताप तथा प्रकाश उत्पन्न करता है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड अपने घटकों कार्बन तथा ऑक्सीजन में विभक्त हो जाती है। इस प्रकार मैग्नीशियम कार्बन डाइऑक्साइड गैस की उपस्थिति में भी जलता रहता है।


क्या कारण है कि हीरा, ग्रेफाइट से अधिक कठोर है, जबकि दोनों ही कार्बन से बने हैं ?

हीरा के अणुओं के मध्य अन्तराण्विक स्थान ग्रेफाइट के अणुओं के मध्य अन्तराण्विक स्थान से बहुत कम होता है जिससे आकर्षण बल अधिक होता है। अतः हीरा, ग्रेफाइट से अधिक कठोर होता है।


सूक्ष्मदर्शी यंत्र क्या है ? इसका आविष्कार कब, कैसे और कहाँ हुआ ? 

सूक्ष्मदर्शी या माइक्रोस्कोप वह यंत्र है जिसकी सहायता से आँख से न दिखने योग्य सूक्ष्म वस्तुओं को भी देखा जा सकता है। सामान्य सूक्ष्मदर्शी ऑप्टिकल माइक्रोस्कोप होता है, जिसमें रोशनी और लैंस की मदद से किसी चीज़ को बड़ा करके देखा जाता है। ऐसा माना जाता है सबसे पहले सन 1610 में इटली के वैज्ञानिक गैलीलियो ने सरल सूक्ष्मदर्शी बनाया। पर इस बात के प्रमाण हैं कि सन 1620 में नीदरलैंड्स में पढ़ने के लिए आतिशी शीशा बनाने वाले दो व्यक्तियों ने सूक्ष्मदर्शी तैयार किए। इनके नाम हैं हैंस लिपरशे (जिन्होंने पहला टेलिस्कोप भी बनाया) और दूसरे हैं जैकैरियस जैनसन। इन्हें भी टेलिस्कोप का आविष्कारक माना जाता है। इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी एक प्रकार का सूक्ष्मदर्शी में प्रकाश के बदले इलेक्ट्रॉन का इस्तेमाल होता है। इलेक्ट्रॉन द्वारा वस्तुओं को प्रकाशित किया जाता है एवं उनका परिवर्धित चित्र बनता है। कुछ इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी वस्तुओं का 20 लाख गुणा बड़ा चित्र बना सकते है। परमाण्विक बल सूक्ष्मदर्शी यंत्र (atomic force microscope, AFM), जिसे scanning force microscope, SFM भी कहा जाता है, एक बेहद छोटी चीजों को यानी नैनोमीटर के अंशों से भी सूक्ष्म स्तर तक दिखा सकता है। एक नैनोमीटर माने एक मीटर का एक अरबवाँ अंश।


पोजिट्रॉन एवं प्रोटॉन (Positron and Proton) क्या हैं ?

पोजिट्रॉन- यह इलेक्ट्रॉन का प्रतिकण है। इसका द्रव्यमान ठीक इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान के समान होता है और आवेश भी इलेक्ट्रॉन के आवेश के समान परन्तु धनात्मक होता है।

प्रोटॉन- यह एक धनावेशित नाभिकीय कण है, जिसका आवेश इलेक्ट्रॉन के आवेश के बराबर होता है। इसका द्रव्यमान 1.67 × 10-7 किग्रा है।


छुई-मुई के पौधे की पत्तियों को स्पर्श करने से वे पत्तियां आपस में सिकुड़ क्यों जाती हैं ?

लाजवंती को आमतौर पर छुई-मुई के नाम से जाना जाता है। इस पौधे का वानस्पतिक नाम मिमोसा प्यूडिका है। इस पौधे की पत्तियां अत्यंत संवेदनशील होती है। छुई-मुई की पत्तियां किसी बाहरी वस्तु के स्पर्श से मुरझाती हैं। ये पत्तियां कोई कीड़ा, लकड़ी यहां तक कि तेज हवा चलने और पानी की बूंदों के स्पर्श मात्र से ही मुरझा जाती है। आसपास ढोल बजाने से भी इसकी पत्तियाँ मुरझाने लगती है। यह संयुक्त पत्तियों वाला पौधा है। इसमे छोटी-छोटी पत्तियां या पर्णक होते हैं जिनको सामान्यतया पत्तियां ही समझा जाता है। ये छोटी-छोटी पत्तियां (पर्णक) मुख्य पत्ती के बीचों-बीच स्थित मध्य शिरा के दोनों तरफ लगी होती हैं। यह पौधा अपनी प्रतिक्रिया इन छोटी-छोटी पत्तियों को आपस में चिपका कर अथवा खोलकर व्यक्त करता है जिसे छुई-मुई का मुरझाना या शर्माना भी कहते हैं।

इसकी पत्तियाँ कई कोशिकाओं की बनी होती हैं। इनमें द्रव पदार्थ भरा रहता है। यह द्रव कोशिका की भित्ति को दृढ़ रखता है तथा पर्णवृन्त को खड़ा रखने में सहायक होता है। जब इन कोशिकाओं के द्रव का दाब कम ही जाता है तो पर्णवृन्त तथा पत्तियों की कोशिका को दृढ़ नहीं रख पाता। जैसे ही कोई व्यक्ति इसकी पत्तियों को छूता है एक संदेश पत्तियों और उनके आधार तक पहुँचता है। इससे पत्तियों के निचले भाग की कोशिकाओं में द्रव का दाब गिर जाता है जबकि ऊपरी भाग की कोशिका के दाब में कोई परिवर्तन नहीं होता है, अतः पत्तियाँ मुरझा जाती है।

देखा गया है कि इस पौधे में जहां पहले स्पर्श होता है, वहां की पत्तियां पहले बंद होती हैं।  इस गुण की वजह से छुई-मुई का पौधा पशुओं द्वारा चरने से बच जाता है क्योंकि पशु के किसी अंग के हल्के स्पर्श से ही पूरा पौधा मुरझा जाता है। इससे पशु पौधे को बेजान समझ कर आगे बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह पौधा भी हमारी तरह रात को सोता है।


आकाश में ध्रुवतारा सदा एक ही स्थान पर दिखता है, जबकि अन्य तारे नहीं, क्यों ?

ध्रुवतारे की स्थिति हमेशा उत्तरी ध्रुव पर रहती है। इसलिए उसका या उनका स्थान नहीं बदलता। यह एक तारा नहीं है, बल्कि तारामंडल है। धरती के अपनी धुरी पर घूमते वक्त यह उत्तरी ध्रुव की सीध में होने के कारण हमेशा उत्तर में दिखाई पड़ता है।  इस वक्त जो ध्रुव तारा है उसका अंग्रेजी में नाम उर्सा माइनर तारामंडल है। जिस स्थान पर ध्रुव तारा है उसके आसपास के तारों की चमक कम है इसलिए यह अपेक्षाकृत ज्यादा चमकता प्रतीत होता है। धरती अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व की ओर परिक्रमा करती है, इसलिए ज्यादातर तारे र्पूव से पश्चिम की ओर जाते हुए नज़र आते हैं। चूंकि ध्रुव तारा सीध में केवल मामूली झुकाव के साथ उत्तरी ध्रुव के ऊपर है इसलिए उसकी स्थिति हमेशा एक जैसी लगती है। स्थिति बदलती भी है तो वह इतनी कम होती है कि फर्क दिखाई नहीं पड़ता। पर यह स्थिति हमेशा नहीं रहेगी। हजारों साल बाद यह स्थिति बदल जाएगी, क्योंकि मंदाकिनियों के विस्तार और गतिशीलता के कारण और पृथ्वी तथा सौरमंडल की अपनी गति के कारण स्थिति बदलती रहती है। यह बदलाव सौ-दो सौ साल में भी स्पष्ट नहीं होता। आज से तीन हजार साल पहले उत्तरी ध्रुव तारा वही नहीं था जो आज है। उत्तर की तरह दक्षिणी ध्रुव पर भी तारामंडल हैं, पर वे इतने फीके हैं कि सामान्य आँख से नज़र नहीं आते। उत्तरी ध्रुव तारा भूमध्य रेखा के तनिक दक्षिण तक नज़र आता है। उसके बाद नाविकों को दिशाज्ञान के लिए दूसरे तारों की मदद लेनी होती है।


भारत में पहली मोबाइल कॉल कौन से सन में हुई तथा किस-किस शहर के बीच हुई ?

भारत में मोबाइल फोन सेवा का गैर-व्यावसायिक तौर पर पहला प्रदर्शन 15 अगस्त 1995 को दिल्ली में किया गया। पर पहली कॉल उसके पहले 31 जुलाई 1995 को कोलकाता में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने की जब मोदी टेलस्ट्रॉ मोबाइल नेट सेवा का प्रदर्शन और उद्घाटन किया गया।


ट्रैफिक सिगनल का रंग लाल होता है, क्यों ?

लाल रंग का प्रकीर्णन न्यूनतम होता है। अतः वह काफी दूर से दिखाई देता है। इसलिए ट्रैफिक सिगनल लाल रंग का होता है।


बैक्टीरिया तथा वायरस (Bacteria and Virus) में क्या अंतर है ?

बैक्टीरिया- यह छोटे-छोटे जीवित कीटाणु होते हैं, जो सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखे जा सकते हैं। इनसे अनेक रोग जैसे- टी.बी. आदि उत्पन्न होते हैं।

वायरस- यह भी अत्यन्त छोटे कीटाणु होते हैं, जिनमें सजीव और निर्जीव दोनों गुण पाए जाते हैं। इनसे अनेक रोग जैसे-चेचक, पोलियो आदि उत्पन्न होते हैं।


जेनेटिकली मोडीफाइड फूड्स क्या हैं ?

जेनेटिकली मोडीफाइड या बायोटेक फूड्स से आशय उस खाद्य सामग्री से है, जिसे उगाने के लिए प्रयुक्त बीजों के डीएनए में बदलाव किया जाता है। यह बदलाव उपज बढ़ाने के अलावा रोगों से लड़ने, खास परिस्थितियों जैसे की ज्यादा पानी या कम पानी में फसल उगाने आदि के काम आता है। हमारे देश में अभी तक इस प्रकार की खाद्य सामग्री की अनुमति नहीं है।


राष्ट्रीय जाँच एजेंसी एनआईए (National Investigation Agency- NIA) क्या है यह कब बनी ?

भारत में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए भारत सरकार द्वारा स्थापित यह संघीय जाँच एजेंसी है। यह केन्द्रीय आतंकवाद विरोधी कानून प्रवर्तन एजेंसी के रूप में कार्य करती है। एजेंसी राज्यों से विशेष अनुमति के बिना राज्यों में आतंक संबंधी अपराधों से निपटने में समर्थ है। एजेंसी 31 दिसम्बर 2008 को भारत की संसद द्वारा पारित अधिनियम राष्ट्रीय जाँच एजेंसी विधेयक 2008 के लागू होने के साथ अस्तित्व में आई थी। इसकी स्थापना 2008 के मुंबई हमले के बाद की गई थी। इस घटना के बाद आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए एक विशेष केंद्रीय एजेंसी की जरूरत महसूस की गई। इसके संस्थापक महानिदेशक राधा विनोद राजू थे। आतंकी हमलों की घटनाओं, आतंकवाद को धन उपलब्ध कराने एवं अन्य आतंक संबंधित अपराधों का अन्वेषण के लिए एनआईए का गठन किया गया जबकि सीबीआई आतंकवाद को छोड़ भ्रष्टाचार, आर्थिक अपराधों एवं गंभीर तथा संगठित अपराधों का अन्वेषण करती है।


फसल को पाले से बचाने के लिए किसान खेतों को पानी से भर देते हैं, क्यों ?

पानी की विशिष्ट ऊष्मा अधिक होने के कारण पानी का ताप धीरे-धीरे गिरता है। पानी द्वारा दी गई ऊष्मा पौधों तथा वायु का ताप अधिक नहीं गिरने देती जिससे पौधे पाले से सुरक्षित रहते हैं।


क्या कुछ प्राणी कलर ब्लाइंड होते हैं ?

जो देखता है उसे कोई न कोई रंग तो दीखता ही है। इसलिए कलर ब्लाइंड का मतलब है कुछ जानवरों को सारी चीजें एक रंग में या दो रंगों में नजर आती हैं। चमगादड़ को ध्वनि की तरंगें बेहतर तरीके से समझ आती है। पर वह कलर ब्लाइंड होते हैं। पर बंदरों में तीन रंग देखने की क्षमता होती है। इंसान एक करोड़ तक रंगों को अलग-अलग पहचान सकता है। कुछ तो इससे ज्यादा रंगों का भेद कर पाते हैं। कुछ पक्षियों में रंग देखने की बेहतरीन क्षमता होती है वे अल्ट्रा वॉयलेट रंग भी देख लेते हैं।


हमारे सौरमंडल के सारे ग्रहों और सूर्य के द्रव्यमान का अनुपात क्या है?

पूरे सौरमंडल का 99.86 प्रतिशत द्रव्यमान सूर्य में है। यानी शेष सभी ग्रह और उनके चन्द्रमा और उल्का पिंड मिलाकर 0.14 प्रतिशत हैं। उसके इसी द्रव्यमान के कारण उसकी गुरुत्व शक्ति है कि सारे ग्रह उसके चारों ओर घूमते हैं।


क्या कारण है कि हाइड्रोजन परऑक्साइड की बोतल खोलने से पहले उसे ठण्डा किया जाता है ?

हाइड्रोजन परऑक्साइड का पानी और हाइड्रोजन में विघटन को रोकने के लिए हाइड्रोजन परऑक्साइड की बोतल को खोलने से पहले ठण्डा किया जाता है।


दुनिया में कितनी भाषाएं हैं ?

एथनोलॉग कैटलॉग के अनुसार 7102 जीवंत भाषाएं हैं। इनमें से तकरीबन दो हजार भाषाएं ऐसी हैं जिन्हें बोलने वालों की संख्या एक हजार से कम है।


पिनकोड क्या है और इसे क्यों बनाया गया है ?

पिनकोड यानी पोस्टल इंडेक्स नम्बर Postal Index Number भारतीय डाकव्यवस्था के वितरण के लिए बनाया गया नम्बर है। 6 संख्याओं के इस कोड में सबसे पहला नम्बर क्षेत्रीय नम्बर है। पूरे देश को 8 क्षेत्रीय और 9वें फंक्शनल जोन में बाँटा गया है। इसमे दूसरा नम्बर उप क्षेत्र का नम्बर है। तीसरा नम्बर सॉर्टिंग डिस्ट्रिक्ट का नम्बर है। अंतिम तीन संख्याएं सम्बद्ध डाकघरों से जुड़ी हैं।

देश के 9 ज़ोन इस प्रकार है-

1. दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़

2. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड

3. राजस्थान, गुजरात, दमण और दीव, दादरा और नगर हवेली

4. गोवा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़

5. आंध्र प्रदेश, कर्नाटक

6. तमिलनाडु, केरल, पुदुच्चेरी, लक्षद्वीप

7. उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय, अंडमान और निकोबार

8. बिहार और झारखंड

9. आर्मी पोस्ट ऑफिस (एपीओ) और फील्ड पोस्ट ऑफिस (एफपीओ)

16 thoughts on “प्रश्न-उत्तर

  • January 22, 2016 at 4:25 pm
    Permalink

    Very good effort

    Reply
    • January 22, 2016 at 9:56 pm
      Permalink

      Thank you for your appreciation.

      Reply
      • August 25, 2016 at 8:42 am
        Permalink

        धन्यवाद

        Reply
    • August 24, 2016 at 8:10 am
      Permalink

      Awesome.

      Thanks Sir.

      Reply
      • August 25, 2016 at 8:42 am
        Permalink

        धन्यवाद

        Reply
  • January 27, 2016 at 8:13 pm
    Permalink

    सर आपके इस प्रयास की जितनी भी तारीफ की जाये वह कम ही है।

    भगवान आपको सुख और समृद्धि प्रदान करे ताकि आप हम लोगो का मार्गदर्शन करते रहे।

    बहुत बहुत धन्यवाद सर।

    Reply
    • January 27, 2016 at 11:02 pm
      Permalink

      धन्यवाद
      सुरेन्द्र प्रताप जी

      Reply
  • March 30, 2016 at 2:58 pm
    Permalink

    बहुत कमाल की जानकारी दी ह आपने इसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद

    Reply
  • May 31, 2016 at 3:14 pm
    Permalink

    Bahut khub ......ati sundram..!!!!!!!

    Reply
  • August 24, 2016 at 8:11 am
    Permalink

    Awesome.

    Thanks Sir.

    Reply
    • August 25, 2016 at 8:41 am
      Permalink

      धन्यवाद

      Reply
  • August 31, 2016 at 9:14 pm
    Permalink

    Thanks sir ji very nic question

    Reply
  • October 11, 2016 at 9:31 pm
    Permalink

    what is the differences b/w mercantile and merchant captlism
    sir pleaaw tell me in hindi language

    Reply

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