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अनुसूचित जनजातियों के लिए विशेष कल्याण प्रावधान व योजनाएं Special Welfare Provision and Plans for Scheduled Tribes – Vivace Panorama

अनुसूचित जनजातियों के लिए विशेष कल्याण प्रावधान व योजनाएं Special Welfare Provision and Plans for Scheduled Tribes

संवैधानिक प्रावधान के तहतू अनुच्छेद 244 में कहा गया है कि राष्ट्रपति राज्यपाल के परामर्श से किसी भी क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति क्षेत्र घोषित कर सकते हैं। अनुच्छेद 244(2) के अनुसार, छठी अनुसूची में, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम जनजातीय क्षेत्र घोषित किए गए हैं। पांचवीं अनुसूची के अनुसार इस के मानदंड हैं- जनजातीय जनसंख्या का बाहुल्य; क्षेत्र का तर्कसंगत आकार और सघनता; व्यावहारिक प्रशासनिक सत्ता जैसे जिला, ब्लॉक या मंडल, और पड़ोसी क्षेत्रों की तुलना में क्षेत्र का आर्थिक पिछड़ापन।

आदिम जाति कल्याण के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने जनजाति उपयोजना का आरंभ 1974-75 में पांचवीं पंचवर्षीय योजना की शुरुआत के साथ किया। इसके अंतर्गत अनुसूचित जनजाति की बड़ी आबादी वाले 21 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया। इस विशेष रणनीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि केंद्र और राज्य स्तर पर चलाई जा रही विकास योजनाओं का उचित हिस्सा अनुसूचित जनजातियों के लोगों तक पहुंचे। इसमें राज्य योजना की धनराशि ही नहीं अपितु सभी केंद्रीय मंत्रालय/विभागों की धनराशि का लाभ भी अनुसूचित जनजाति को मिलना सुनिश्चित करने की बात की गई। जनजातीय उपयोजना (टीएसपी) राज्य/केंद्रशासित प्रदेश या केंद्रीय मंत्रालय/विभाग की सकल योजना का एक हिस्सा है इसलिए इसे उपयोजना कहा गया। भारत के संविधान के अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत अनुसूचित जनजातियों के कल्याण को बढ़ावा देने और अनुसूचित क्षेत्रों में प्रबंधन के स्तर को बढ़ाकर, राज्य के अन्य क्षेत्रों के समान करने के लिए सुनिश्चित विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया।

जनजातीय मामलों का मंत्रालय जनजातीय उपयोजना के तहत् विशेष केंद्रीय सहायता, 21 जनजातीय राज्यों की सरकारों और दो केंद्रशासित प्रदेशों को उपलब्ध कराता है। इन राज्यों में पूर्वोत्तर राज्य-असम, मणिपुर और त्रिपुरा शामिल हैं लेकिन वर्ष 2003-04 से केंद्रशासितप्रदेशों के लिए जनजातीय उपयोजना को विशेष केंद्रीय सहायता के तहत् धनराशि गृह मंत्रालय उपलब्ध करा रहा है।

विशेष केंद्रीय सहायता का इस्तेमाल जनजातीय उपयोजना की राशि के साथ समन्वित रूप से किया जाता है जिससे उन कमियों को दूर किया जा सके जिनकी ओर राज्य योजना में ध्यान नहीं दिया जाता। टीएसपी की एससीए का उद्देश्य और कार्यक्षेत्र मूलतः दसवीं पंचवर्षीय योजना से टीएसपी की परिवार आधारित आय वृद्धि में भारी अंतर को मिटाना था। अब एससीए का उद्देश्य और कार्य क्षेत्र आय वृद्धि के लिए आधारभूत आकस्मिक आय को सम्मिलित करने तक बढ़ा दिया गया है।

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