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संघ प्लेटीहेल्मिन्थीज Phylum Platyhelminthes – Vivace Panorama

संघ प्लेटीहेल्मिन्थीज Phylum Platyhelminthes

प्लेटीहेल्मिन्थीज शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम गीगेनबार (Gegenbaur) ने 1899 ई. में किया था। प्लेटीहेल्मिन्थीज शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्दों Platy = Flat; helminthes = worm से मिलकर बना है। प्लेटीहैल्मिन्थीज शब्द का अर्थ चिपटे कृमि होता है। इस संघ के अन्तर्गत कीड़े के समान अखण्डित जन्तु आते हैं। इनमें से अधिकांश परजीवी होते हैं, जिसके कारण मनुष्य पालतू पशु एवं जंगली जन्तुओं में विभिन्न प्रकार के रोग उत्पन्न होते हैं। परजीवी होने के कारण इनकी संरचना, चाल एवं ज्ञानेन्द्रियाँ परपोशी (Host) की तरह ही विकसित होती है। इस संघ के जन्तुओं में पाये जाने वाले प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं-

  • इस संघ के अधिकांश जन्तु परजीवी (Parasites) होते हैं। कुछ प्रजातियाँ स्वतंत्रजीवी या स्वच्छंद (Free living) होती हैं। जैसे- प्लेनेरिया (Planaria)।
  • ये जिन जन्तुओं में आश्रय पाते हैं, उनसे सटे रहने के लिए शरीर में कॉटें (hooks) और और (Suckers) पाये जाते हैं।
  • ये चपटे फीतानुमा परजीवी कृमि होते हैं। ये पृष्ठ अधोदिशा (Dorsoventrally) में चपटे होते हैं तथा इनका शरीर द्विपार्श्विक सममिति (Bilaterally symmetrical) होता है।
  • इनमें शरीर गुहा नहीं पायी जाती है तथा शरीर के अंदर के अंगों के बीच की जगह पैरेनकाइमा (Parenchyma) से भरी रहती हैं।
  • ये जन्तु त्रिस्तरीय (Triploblastic) होते हैं अर्थात् इनका शरीर एक्टोडर्म (Ectoderm) मीसोडर्म (Mesoderm) एवं एण्डोडर्म (Endoderm) से बना रहता है।
  • इस संघ के जन्तुओं के शरीर में चारों ओर क्यूटिकिल (Cuticle) का एक आवरण पाया जाता है।
  • इस संघ के जन्तुओं में सर्वप्रथम अंग एवं विभिन्न तंत्रों का पूर्ण विकास पाया जाता है।
  • इस संघ के जन्तुओं में पाचन तंत्र (Digestive system) on विकसित होता है क्योंकि ये अपने पोषकों के शरीर में पचा हुआ भोजन ग्रहण करते हैं।
  • इस संघ के जन्तुओं में रक्त परिसंचरण तंत्र, श्वसन तंत्र तथा कंकाल तंत्र नहीं पाये जाते हैं।
  • तंत्रिका तंत्र में एक जोड़ा अग्रगुच्छिका (Anterior ganglion) या तंत्रिका वलय (Nerve ring) एवं एक से तीन जोड़ी अनुदैर्घ्य तंत्रिका रज्जू (Longitudinal nerve cord) पायी जाती है।
  • इस संघ के जन्तु प्रायः उभयलिंगी (Bisexual) होते हैं तथा निषेचन क्रिया प्रायः आन्तरिक (Internal) हुआ करती है।
  • इस संघ के जन्तुओं में उत्सर्जन क्रिया ज्वाला कोशिका (Flame cells) द्वारा होता है।
  • इस संघ के जंतुओं का शरीर खण्ड्युक्त लेकिन ये खण्ड वास्तविक नहीं होते हैं।

उदाहरण: प्लेनेरिया (Planaria), फैसिओला (Fasciola), टीनिया (Taenia), सिस्टोसीमा (Schistosoma) आदि।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  • फैसिओला हिपेटिका एक साधारण यकृत पर्णाभ (Liver fluke) है जो गाय, भेड़, बैल इत्यादि की पित्त प्रणाली (Bile Ducts) में पाया जाता है।
  • टीनिया सोलियम (Taenia solium) एक फीता कृमि (Tape worm) है जो मनुष्य की आंत में अन्तः परजीवी (Endoparasite) होता है।
  • सिस्टोसोमा (Schistosoma) को रक्त पर्णाभ (Blood fluke) कहा जाता है।

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