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गृह मंत्रालय Ministry of Home Affairs – Vivace Panorama

गृह मंत्रालय Ministry of Home Affairs

भारत सरकार के समस्त मंत्रालयों में गृह मंत्रालयका स्थान सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। प्रोटोकॉल नियमों के अनुसार, मंत्रिमंडल में प्रधानमंत्री के पश्चात् गृह मंत्री का नाम आता है। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य सम्पूर्ण देश में शांति एवं सुव्यवस्था बनाए रखना है। गृह मंत्रालय द्वारा इतने अधिक एवं महत्वपूर्ण कार्य सम्पन्न किए जाते हैं कि उन्हें देखते हुए यह प्रतीत होता है कि मानों गृह मंत्रालय ही सम्पूर्ण भारत की सरकार हो।

गृह मंत्रालय के कार्य

गृह मंत्रालय एक बहु-कार्यकारी मंत्रालय है। संघीय सूची के अंतर्गत आने वाले लगभग समस्त कार्यों का सम्पादन इसी मंत्रालय के माध्यम से होता है। इसके द्वारा सम्पादित किए जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण कार्य निम्नलिखित है-

  1. देश में शांति एवं व्यवस्था बनाए रखना: गृह मंत्रालय द्वारा मुख्यतः ऐसे मामलों का निपटारा किया जाता है, जो कि देश में शांति एवं व्यवस्था बनाए रखने से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से सम्बन्धित हैं। यदि किसी राज्य में शांति एवं व्यवस्था के भंग होने की स्थिति में राष्ट्रपति शासन आरोपित किया जाता है तो उस राज्य के प्रशासन का संचालन गृह मंत्रालय द्वारा ही किया जाता है। राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में भी केन्द्रीय सरकार की समस्त शक्तियों का प्रयोग गृह मंत्रालय द्वारा ही प्रयुक्त किया जाता है। राज्यों की पुलिस, जेल, रेलवे पुलिस, सतर्कता ब्यूरो, केन्द्रीय रक्षा कॉलेज, इत्यादि विभिन्न संगठनों का नियोजन तथा उनके कार्यों के समन्वय द्वारा यह मंत्रालय सम्पूर्ण देश की कानून एवं शांति व्यवस्था पर दृष्टि रखता है।
  2. समन्वय सम्बन्धी कार्य: गृह मंत्रालय एक समन्वयकारी मंत्रालय है। यह स्वयं इतने अधिक कार्य नहीं करता, जितने कि दूसरे सम्बन्धित मंत्रालयों से करवाता है। राष्ट्र हित के प्रश्नों पर राज्य सरकारों द्वारा गृह मंत्रालय से परामर्श प्राप्त किया जाता है तथा यह उनके प्रयासों में समन्वय स्थापित करता है।
  3. राजनीतिक कार्य: गृह मंत्रालय द्वारा कुछ ऐसे कार्य भी सम्पन्न किए जाते हैं, जिनसे देश की राजनीति गहन रूप से प्रभावित होती है। इस प्रकार के कार्यों में समाचार-पत्रों का प्रकाशन, पासपोर्ट, आदि से सम्बन्धित कार्य प्रमुख हैं। यह भारतीय पासपोर्ट अधिनियम तथा विदेशी नागरिकों से सम्बन्धित कानूनों एवं आदेशों के विषय में नीति-निर्णय भी लेता है।
  4. लोक सेवाओं का नियमन: राष्ट्रपति द्वारा लोक सेवआों की स्थापना एवं उनसे सम्बन्धित अन्य प्रश्नों पर निर्णय गृह मंत्रालय से परामर्श के पश्चात् ही लिए जाते हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की नियुक्ति भी इसी के द्वारा की जाती है। समस्त सेवाओं में नियुक्ति, अनुशासन एवं अन्य शर्तों में एक मानकीय स्तर बनाए रखने हेतु उनके समस्त विषयों का नियमन करना गृह मंत्रालय का विशेष उत्तरदायित्व है।
  5. केन्द्र शासित प्रदेशीं का प्रशासन: सभी केन्द्र शासित प्रदेशों-दिल्ली, पुदुचेरी, दमन-दीव, चण्डीगढ़, अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप तथा दादरा एवं नागर हवेली; में शांति एवं व्यवस्था बनाए रखने तथा प्रशासन सुचारू रूप से चलाने की दृष्टि से गृह मंत्रालय द्वारा आवश्यक उपाय किए जाते हैं।
  6. उच्च पदों का सृजन तथा सेवा शर्तों का नियमन: भारत सरकार तथा राज्यों में उच्च पदाधिकारियों की नियुक्ति एवं प्रतिनियुक्ति सम्बन्धी कार्यों का व्यवस्थापन गृह मंत्रालय द्वारा ही किया जाता है। उच्च अधिकारियों से सम्बन्धित सेवा शर्तों के नियमन हेतु यह वैधानिक करिवाही हेतु प्रबंध करता है सर्वोच्च एवं उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायधीशों तथा अन्य न्यायधीश सदस्यों की नियुक्ति तथा सेवा शर्तें भी इसी मंत्रालय द्वारा नियमित की जाती हैं। इनके अतिरिक्त राष्ट्र ध्वज, राष्ट्रीय प्रतीक, राष्ट्र पक्षी, इत्यादि से सम्बन्धित विषय भी इसी मंत्रालय के अधीन हैं।
  7. भ्रष्टाचार निरोध एवं प्रशासनिक सुधार से सम्बन्धित कार्य: इसके अंतर्गत गृह मंत्रालय में लोक सेवाओं में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का संचालन एक सतर्कता आयोग द्वारा किया जाता है।

गृह मंत्रालय का प्रशासनिक संगठन

भारत सरकार के गृह मंत्रालय का प्रधान कैबिनेट स्तर का एक वरिष्ठ मंत्री होता है। गृह मंत्री की सहायता हेतु गृह राज्य मंत्री तथा उप-मंत्री होते हैं। विभाग से सम्बन्धित कार्यों की देख-रेख प्रशासकीय सचिव करता है। गृह मंत्रालय का सचिव भारतीय प्रशासनिक सेवा का वरिष्ठ सदस्य होता है। संयुक्त सचिव, उप-सचिव, अवरसचिव आदि अधिकारी सचिव के अधीनस्थ होते हैं।

गृह मंत्रालय के चार विभाग हैं-

  1. आंतरिक सुरक्षा विभाग;
  2. राज्य विभाग;
  3. राजभाषा विभाग;
  4. गृह विभाग

गृह मंत्रालय के सचिवालय के कार्य 26 प्रभागों में विभक्त हैं-


प्रशासन एवं ओ. एवं एम. प्रभाग प्रशासनिक सतर्कता प्रभाग अखिल भारतीय सेवा प्रभाग
केन्द्रीय सचिवालय सेवा प्रभाग स्थापना प्रभाग विदेशी एवं नागरिकता प्रभाग
न्यायिक प्रभाग आपातकालीन सहायता प्रभाग स्थापनाधिकारी प्रभाग
पुलिस प्रभाग राजनीतिक प्रभाग राज्य पुनर्गठन प्रभाग
राज्य पुनर्गठन (सेवाएं) प्रभाग संघीय प्रदेश प्रभाग (प्रशासन एवंसेवाएं आदि) संघीय प्रदेश (विधायी) प्रभाग
सरकारी भाषा प्रभाग कश्मीर प्रभाग कल्याण प्रभाग
वित्त एवं लेखा प्रभाग जन-शान्ति निदेशालय सार्वजनिक प्रभाग
सार्वजनिक शिकायत प्रभाग प्रशिक्षण प्रभाग संयुक्त मंत्रण एवं अनिवार्य पंच निर्णय प्रभाग
सचिवालय सुरक्षा संगठन शोध एवं नीति प्रभाग

उल्लिखित प्रत्येक प्रभाग को एक उप-सचिव के अधीन रखा गया है।

प्रशासनिक सुधार विभाग: गृह मंत्रालय के सचिवालय के अंतर्गत इस अति महत्वपूर्ण विभाग की स्थापना 1964 में प्रशासन में सुधार लाने और प्रशासनिक सुधार कार्यों के मार्ग में आने वाले अवरोधों के समाधान हेतु की गई थी। प्रशासनिक सुधार विभाग का प्रमुख कार्य भारत के सम्पूर्ण प्रशासन में सुधार, पुनर्गठन एवं आधुनिकीकरण से सम्बन्धित समस्याओं के निवारण हेतु आवश्यक सुझाव प्रेषित करना था। सरंचनाओं की जांच-पड़ताल की जा चुकी है। ओ. एवं एम. प्रभाग का भी अब इस विभाग के अंतर्गत विलय कर दिया गया है।

संलग्न कार्यालय

सात संलग्न कार्यालय विद्यमान हैं-

  1. लाल बहादुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी (मसूरी) इस अकादमी की स्थापना 1959 में भारतीय प्रशासनिक सेवा प्रशिक्षण स्कूल (दिल्ली) तथा भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी महाविद्यालय (शिमला) का परस्पर विलय करके की गई थी। इस अकादमी में सेवा में प्रवेश के पश्चात् भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा तथा केन्द्रीय सेवाओं के नए युवा अधिकारियों को सेवा पूर्व प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त अकादमी द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों हेतु नवीनीकरण पाठ्यक्रमों तथा प्रशिक्षण योजनाओं का भी संचालन किया जाता है।
  2. केन्द्रीय रिजर्व पुलित (नीमच): इस केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल का प्रमुख कार्य देश में आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में राजकीय पुलिस की सहायता करना है। इसका अध्यक्ष एक महानिदेशक होता है, जो गृहविभाग के तत्वावधान में संकटकालीन स्थितियों से निपटने हेतु अपने संगठन को उद्यत रखता है।
  3. सचिवालय प्रशिक्षण विद्यालय (नर्झ दिल्ली): 1948 में स्थापित इस विद्यालय में केन्द्र सरकार के मंत्रालयी अधिकारियों एवं सचिवालय कर्मचारियों को कार्य निपुणता की दृष्टि से तक़नीकी प्रशिक्षण दिया जाता है।
  4. केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो: अप्रैल 1963 में स्थापित केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो मुख्य रूप से एक भ्रष्टाचार विरोधी अधिकरण है, जिसके अंतर्गत विशेष पुलिस संस्थाओं को सम्मिलित किया गया है। यह केन्द्र सरकार के कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार सम्बन्धी आरोपों की जांच-पड़ताल करता है।
  5. सीमा सुरक्षाबल: 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के पश्चात् भारत-पाक सीमा की सुरक्षा के उद्देश्य से सीमा सुरक्षा बल की स्थापना की गई। यह अर्द्ध-सैनिकपुलिस बल शान्तिकाल में सीमाओं की देखभाल करने हेतु उत्तरदायी है। यह बल सीमा सुरक्षा सेवा कानून, 1968 द्वारा अभिशासित होता है। इस दल का प्रधान इंस्पेक्टर-जनरल होता है तथा इसके वरिष्ठ अधिकारी भारतीय पुलिस सेवा के सदस्य होते हैं।
  6. केन्द्रीय गुप्तचर ब्यूरो: इसका उदय 1887 के ठगी विभाग की एक विशेष शाखा से हुआ है। इस ब्यूरो का प्रमुख कार्य देश की सुरक्षा से सम्बन्धित गुप्त सूचनाएं एकत्रित करना तथा सुरक्षा के मामलों में सरकार को आवश्यक परामर्श प्रदान करना है। इसका प्रधान एक डायरेक्टर होता है, जिसकी सहायतार्थ अनेक क्षेत्रीय अधिकारी होते हैं। ब्यूरो का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
  7. जनगणना महारजिस्ट्रार (नई दिल्ली): इसकी स्थापना 1951 की जनगणना से सम्बन्धित कार्यों को सम्पन्न करने हेतु की गई थी।

अधीनस्थ कार्यालय: गृह मंत्रालय के अंतर्गत उल्लिखित सात संलग्न कार्यालयों के अतिरिक्त निम्नलिखित अधीनस्थ कार्यालय भी हैं-

  1. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (नई दिल्ली): इस पुलिस बल का प्रमुख कार्य भारत-तिब्बत सीमा की चौकसी करना है। इसका प्रधान पुलिस के एक इंस्पेक्टर-जनरल स्तर का अधिकारी होता है।
  2. भ्रमणशील नागरिक आपातकालीन पुलिस (नई दिल्ली): भ्रमणशील नागरिक आपातकालीन पुलिस बल की स्थापना आपात स्थिति में पुलिस दल के बचाव कार्यों में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है।
  3. राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (हैदराबाद): इसकी स्थापना 1948 में केन्द्रीय पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज के रूप में की गई थी। 1967 में इसका नाम परिवर्तित करके राष्ट्रीय पुलिस अकादमी कर दिया गया।

इस अकादमी द्वारा भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों को विशिष्ट प्रकार का व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इसका प्रधान आईजीपी के समकक्ष प्रशासनिक स्तर का एक निदेशक होता है।

  1. क्षेत्रीय कार्यालय-हिन्दी प्रशिक्षण योजना: इस योजना का उद्देश्य सरकार के गैर-हिन्दी भाषी केन्द्रीय कर्मचारियों को हिन्दी सिखाना है। इस उद्देश्य की पूर्तिहेतु इस योजना के अंतर्गत नई दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई तथा मुम्बई में चार क्षेत्रीय संगठन कार्यरत हैं।
  2. राष्ट्रीय अग्नि सेवा महाविद्यालय (नागपुर): 2 जुलाई, 1956 को स्थापित राष्ट्रीय अग्नि सेवा महाविद्यालय में सामान्य जन-जीवन को अग्निकाण्डों से बचाने हेतु आग बुझाने के वैज्ञानिक तरीकों का प्रशिक्षण दिया जाता है।
  3. समन्वय निदेशालय (वायरलेस, नई दिल्ली): 1950 में स्थापित इस निदेशालय का मुख्य कार्य विभिन्न राज्यों की पुलिस संचार सेवाओं में समन्वय की स्थापना करना तथा विभिन्न राज्यों को रेडियो संचार की तकनीकी समस्याओं पर आवश्यक सलाह देना है।
  4. राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा महाविद्यालय (नागपुर): यहां पर सरकारी एवं गैर सरकारी पप्रशिक्षणार्थियों को आपातकालीन सहायता सम्बन्धी प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
  5. क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय: दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता एवं चेन्नई शहरों में स्थित चार क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालयों का प्रमुख कार्य भारत में विदेशों से आने वाले विदेशी नागरिकों को पंजीकृत करना अथवा उनका पंजीकरण करना है।

परामर्शदाता संगठन: भारत सरकार के गृह मंत्रालय में निम्नलिखित परामर्शदाता संगठन हैं-

  1. केन्द्रीय स्थापना मण्डल: इसके प्रमुख कार्यों में सचिवालय में अवर सचिव (सचिव को छोड़कर) तथा उससे उच्च पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति हेतु परामर्श देना सम्मिलित है। विदेश मंत्रालय संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा की जाने वाली नियुक्तियां केन्द्रीय स्थापना मण्डल के क्षेत्राधिकार की परिधि से बाहर है।
  2. आपातकालीन राहत संगठन की केन्द्रीय परामर्शदात्री समिति: इस समिति के प्रमुख कार्यों में सम्मिलित हैं-
  • गृह मंत्रालय के अंतर्गत केन्द्रीय आपातकालीन राहत संगठन को आपातकालीन राहत के मामलों में परामर्श देना;
  • आपातकालीन राहत के कार्यों में जनता की रुचि जागृत करना
  • केन्द्रीय आपातकालीन राहत संगठन को केन्द्रीय योजना का प्रारूप तैयार करने में अथवा अन्य किसी निश्चित योजना, जो उसे सौंपी जाए, के सम्बन्ध में परामर्श देना।

केन्द्र शासित प्रदेशे क परामर्शदात्री समितियां: गृह मंत्रालय में इस प्रकार की निम्नलिखित समितियां हैं-

  1. अण्डमान एवं निकोबार द्वीपसमूह हेतु परामर्शदात्री समितियां
  2. लक्षद्वीप एवं अमीनीदीव से सम्बन्धित परामर्शदात्री समितियां, तथा;
  3. चण्डीगढ़ से सम्बन्धित परामर्शदात्री समितियां।

उल्लिखित तीनों परामर्शदात्री समितियों के माध्यम से सम्बंधित क्षेत्र से निर्वाचित संसद सदस्य तथा अन्य गणमान्य गैर-सरकारी प्रतिनिधियों का सहयोग प्राप्त किया जाता है।

सहायक मण्डल: गृह मंत्रालय में परामर्श हेतु कुछ सहायक मण्डल भी पाए जाते हैं। जिनमें से प्रमुख हैं- केन्द्रीय सलाहकार बोर्ड; आदिम जाति कल्याण मण्डल; हरिजन कल्याण मण्डल, इत्यादि।

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