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पारा Mercury – Vivace Panorama

पारा Mercury

प्राप्ति Occurrence

पारा प्रकृति में विस्तृत रूप में नहीं पाया जाता है। यह थोड़ी मात्रा में स्वतंत्र रूप में पाया जाता है। इसका मुख्य अयस्क सिनेबार है, जो मुख्यतः संयुक्त राज्य अमेरिका, मैक्सिको तथा इटली में पाया जाता है।

पारा का निष्कर्षण: पारा का निष्कर्षण मुख्यतः सिनेबार अयस्क से किया जाता है।

भौतिक गुण: यह चांदी जैसी सफेद और चमकीली धातु है। यह साधारण ताप पर द्रव अवस्था में विद्यमान रहता है। इसका आपेक्षिक घनत्व 13.6 होता है। यह ऊष्मा एवं विद्युत् का सुचालक होता है। यह एकपरमाण्विक होता है। चर्बी या चीनी के साथ खूब जोर से हिलाने पर यह भूरे रंग के चूर्ण में परिणत हो जाता है। इस घटना को पारा का मृतकीकरण (Deadening of Mercury) कहते हैं। यह न तो आघातवद्धर्य होता है और न ही तन्य। 4.12K ताप पर पारा का प्रतिरोध शून्य हो जाता है।

रासायनिक गुण: इस पर जल और क्षार का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। यह धातुओं के साथ संयोग कर अमलगम (Amalgam) का निर्माण करता है। यह गंधक के साथ प्रतिक्रिया कर मरक्यूरिक सल्फाइड बनाता है। यह क्लोरीन के साथ प्रतिक्रिया कर मरक्यूरिक क्लोराइड (HgCl2) बनाता है। यह ठंडा तथा तनु HNO3 से प्रतिक्रिया कर मरक्यूरस नाइट्रेट [Hg2(NO3)2] एवं NO बनाता है। यह गर्म तथा सान्द्र HNO3 से प्रतिक्रिया का मरक्यूरिक नाइट्रेट एवं NO और NO2 बनाता है। यह अम्लराज में घुलकर मरक्यूरिक क्लोराइड बनाता है।

पारा का उपयोग: (i) थर्मामीटर, बैरोमीटर आदि यंत्रों में (ii) गैस को एकत्र करने में (iii) धातुओं के अमलगम के निर्माण में (iv) चांदी और सोने के निष्कर्षण में (v) सिन्दूर के निर्माण में (vi) कास्टनर-केलनर विधि द्वारा सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) के निर्माण में (vii) मरकरी वाष्प लैम्प बनाने में।

पारा के यौगिक


  1. मरक्यूरस क्लोराइड (Mercurous Chloride): इसे केलोमल (Calomel) भी कहा जाता है। यह सफेद तथा रवेदार चूर्ण होता है। यह जल तथा तनु अम्लों में अविलेय होता है। अम्लराज के साथ गर्म करने पर यह मरक्यूरिक क्लोराइड बनाता है। इसका उपयोग औषधि के रूप में तथा केलोमल इलेक्ट्रोड बनाने में होता है।
  2. मरक्यूरिक क्लोराइड (Mercuric chloride): इसे कोरोसिव सब्लिमेट (corrosive sublimate) भी कहा जाता है। यह एक भयंकर विष है। यह रंगहीन तथा रवेदार ठोस पदार्थ होता है। यह ठंडे जल में कम किन्तु गर्म जल में काफी विलेय है। यदि मरक्यूरिक क्लोराइड के विलयन में सोडियम हाइड्रॉक्साइड डाल दिया जाए तो नेस्लर अभिकर्मक बनता है। कोरोसिव सब्लिमेट कीटाणुनाशक के रूप में तथा सर्जिकल उपकरणों को साफ करने के काम आता है।
  3. मरक्यूरिक सल्फाइड (Mercuric Sulphide): इसे वर्मीलियन (Vermillion) भी कहा जाता है। यह लाल रंग का रवेदार ठोस पदार्थ होता है। यह जल तथा अम्ल में अविलेय है। यह अम्लराज में घुलकर मरक्यूरिक क्लोराइड बनाता है। इसका उपयोग सिन्दूर के रूप में, औषधियों में मकरध्वज के रूप में तथा जल रंग (water Colours) बनाने में किया जाता है।

अमलगम (Amalgam): पारा (Hg) अन्य धातुओं के साथ मिलकर धातुई घोल बनाता है, जिसे अमलगम कहते हैं।

नोट:

  • पारा को लौह-पात्र में रखा जाता है, क्योंकि यह लोहे के साथ अमलगम नही बनाता है।
  • ट्यूबलाइट में सामान्यतः मरकरी का वाष्प और आर्गन गैस भरी रहती है।
  • बैरोमीटर में पारे की सतह का चढ़ना और उतरना क्रमशः स्वच्छ मौसम एव तूफान के बारे में सूचना देता है।
  • पारा को क्विक सिल्वर (Quick sirver) के नाम से भी जाना जाता है।

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