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भाजपा के पितृपुरुष लाल कृष्ण आडवाणी Lal Krishna Advani – Vivace Panorama

भाजपा के पितृपुरुष लाल कृष्ण आडवाणी Lal Krishna Advani

लाल कृष्ण आडवाणी (Lal Krishna  Advani)  भारतीय राजनीतिज्ञ, भारत के पूर्व उप प्रधानमंत्री और सन् 2004 में लोकसभा में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता, का जन्म 8 नवंबर 1927 को करांची पाकिस्तान में हुआ था।

आडवाणी भारतीय राजनीति के केन्द्र में तब आये जब उन्होने हिंदुत्व आंदोलन के रूप में सोमनाथ से अयोध्या तक राम रथ यात्रा का नेतृत्व किया।

आडवाणी ने 1942 में कराची में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सचिव के रूप में अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत की। आजादी के बाद, वह भारत आ गए और राजस्थान प्रांत के संयुक्त सचिव के रूप में भारतीय जनता संघ (जनसंघ) पार्टी में शामिल हो गए।

1958 में उन्हें दिल्ली में पार्टी के सचिव पद पर पदोन्नत कर दिया गया और तभी से वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ पार्टी के केन्द्र में रहे हैं।

1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए “राष्ट्रीय आपातकाल” के दौरान आडवाणी ने लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली के लिए संघर्ष किया और परिणामस्वरूप उन्हें अठारह महीने के लिए जेल में बंद रहना पड़ा था।

1977-1979 में जब जनता पार्टी सत्ता में आई थी तब आडवाणी को सूचना और प्रसारण मंत्रालय के लिए कैबिनेट मंत्री बनाया गया था।अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए काम किया।

जब भारतीय जनता संघ(जनसंघ) से भारतीय जनता पार्टी का जन्म हुआ तब आडवाणी कोभारतीय जनता पार्टी का महासचिव बनाया गया था। 1986-1989 संगठन के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने अपने रथयात्रा के साथ भारतीय राजनीति के केंद्र में सांप्रदायिकता पर बहस भी साथ लेकर आये।


रथ यात्रा के बाद संसद में भाजपा का प्रतिनिधित्व 1984 में दो सदस्यों से बढ़कर 1999 में 181 सदस्यों तक पहुँच गया।

लाल कृष्ण आडवाणी ने 1998 में भाजपा के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार(NDA-National Democratic Alliance) के गठन में फिर राज्य स्तर पर रणनीतिक गठजोड़ कायम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लाल कृष्ण आडवाणी को 1998 में गृह मंत्रालय में गृहमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया और सन 2002 में उन्हें भारत का उपप्रधानमंत्री बनाया गया।

सन् 2004 लोकसभा चुनावों में भाजपा की हार के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने आप को सक्रिय राजनीति से अलग कर लिया, तत्पश्चात आडवाणी को संसद में मुख्य विपक्षी दल का नेता चुना गया।

आडवाणी के अनुसार सभी भारतीय उनके अपनी व्यक्तिगत धार्मिक प्रथाओं के बावजूद एक धर्म हिंदू धर्म द्वारा आपस में बँधे हुए हैं।

‘हिंदू सर्वप्रथम’ अपनी इस वैचारिक स्थिति के लिये आडवाणी, धर्मनिरपेक्षता पर बहस तेज करते हुए भी प्रधानमंत्री के पद से से वंचित हो सकते थे।

एक संवैधानिक सुधारवादी के रूप में उन्होंने चुनावी प्रणाली के पुनर्निर्माण के लिए जाना जाता है, इस संबंध में राजनीतिक दलबदल और अपराधीकरण को रोकने पर उनकी पहल उल्लेखनीय है।

संघ और राज्य मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या सीमित करने में उनकी भूमिका, भारतीय राजनीति के बारे में उनकी दृष्टि को साकार करने के सबसे स्पष्ट कदमों में से एक है।

आडवाणी हमेशा एक विवादास्पद व्यक्ति रहें है, लेकिन उन्हें भारत की राज्य व्यवस्था बनाने के लिये उनके विचारों की स्पष्टता और गठजोड़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(NDA), जिसने 1999-2004 तक भारत पर शासन किया, बनाने की उनकी क्षमता के लिये हमेशा याद किया जाएगा।

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