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वाणिज्यिक (नकदी) फसल: गन्ना Commercial (Cash) Crops: Sugarcane- Saccharum officinarum – Vivace Panorama

वाणिज्यिक (नकदी) फसल: गन्ना Commercial (Cash) Crops: Sugarcane- Saccharum officinarum

वाणिज्यिक या नकदी फसलों में खाद्यान्नों के अतिरिक्त वे फसलें आती हैं जिससे कृषकों की नकदी की प्राप्ति होती है। इसके अंतर्गत गन्ना, तम्बाकू, फाइबर फसलें इत्यादि आती हैं।

गन्ना

वाणिज्यिक फसलों में सर्वाधिक उत्पादन गन्ने का होता है। सभी देशों में भारत में गन्ने के उत्पादन व क्षेत्र में ब्राजील के पश्चात् भारत का दूसरा स्थान है।

वृद्धि की शर्ते: गन्ना एक शीतोष्णकटिबंधीय फसल है। इसका उत्पादन उन क्षेत्रों में अधिक होता है, जहां तापमान 20° सेंटीग्रेड से 28° सेंटीग्रेड के बीच होता है। आठ महीने की लम्बी अवधि में 150 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा शीतित एवं शुष्क शीत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु का होना (गन्ने की बुआई से लेकर कटाई के बीच) आवश्यक है।

गन्ने की पोध लगायी जाती है या फिर उसे बीच-बीच से गांठ सहित काट कर लगाया जाता है। उत्तरी भारत में गन्ने का रोपण उष्ण मौसम में किया जाता है और ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत के पहले फसल तैयार हो जाती है। पंजाब और हरियाणा में मार्च का प्रथम सप्ताह, उत्तर प्रदेश में फरवरी और बिहार में जनवरी-फरवरी गन्ने के रोपण के लिए उपयुक्त हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ क्षेत्र में गन्ने का रोपण दिसम्बर से फरवरी के बीच किया जाता है। दिसम्बर-फरवरी में रोपी जाने वाली फसल 12 महीने के लिए, अक्टूबर-नवम्बर में रोपी जाने वाली फसल 15-16 महीने के लिए और जुलाई-अगस्त में रोपी जाने वाली फसल 18 महीने के लिए होती है।

उत्पादन: उत्तर प्रदेश में सहारनपुर, बुलन्दशहर, शाहजहाँपुर, मेरठ, अलीगढ़, आजमगढ़, फैजाबाद, बलिया, मुरादाबाद, जौनपुर और वाराणसी प्रमुख गन्ना-उत्पादक जिले हैं। इन जिलों में उर्वर भूमि की उपलब्धता तथा सिंचाई की उचित व्यवस्था के कारण गन्ने का उत्पादन अधिक होता है।

पंजाब में अमृतसर, जालंधर, फिरोजपुर, गुरदासपुर, संगरूर, पटियाला और लुधियाना प्रमुख गन्ना उत्पादक जिले हैं।


हरियाणा में करनाल, अम्बाला, रोहतक, हिसार और गुड़गांव यहां के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिले हैं।

बिहार में चम्पारण, सारण, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर, पटना और पूर्णिया प्रमुख गन्ना उत्पादक जिले हैं।

आंध्र प्रदेश में श्रीकाकुलम के तटीय जिले, विशाखापट्टनम, पूर्वी और पश्चिमी गोदावरी जिले तथा कृष्णा और निजामाबाद के दक्षिणी जिले प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्र हैं।

तमिलनाडु में कावेरी डेल्टा और मेत्तूर बांध के सिंचित क्षेत्रों में मुख्य रूप से गन्ने की खेती होती है। उत्तरी एवं दक्षिणी अर्काट, रामनाथपुरम, मदुरई, कोयम्बटूर, तिरुचिरापल्ली आदि इस राज्य के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिले हैं।

महाराष्ट्र में गन्ने की खेती काली कपास मिट्टी में सिंचाई के द्वारा की जाती है। कोल्हापुर, पुणे, अहमदनगर, सतारा, सांगली और शोलापुर प्रमुख गन्ना उत्पादक जिले हैं।

कर्नाटक में कृष्णराज सागर बांध, ऊपरी कावेरी और, तुंगभद्रा बांध के समीपवर्ती क्षेत्रों में मुख्य रूप से गन्ने की खेती होती है। शिमोगा, रायचूर, मान्ध्य, कोलार, बेल्लारी और पश्चिमी बेलगांव प्रमुख गन्ना उत्पादक जिले हैं।

उत्पादन के आधार पर उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है, उसके बाद महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात का स्थान आता है।

प्रति हेक्टेयर उपज के आधार पर तमिलनाडु का प्रथम स्थान है और उसके बाद गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश का स्थान आता है। उत्पादन क्षेत्र के विस्तार के आधार पर उत्तर प्रदेश का पहला स्थान है और उसके बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश का स्थान आता है।

गन्ने के उत्पादन के एकड़ों वाले क्षेत्र की नाप में अस्थायित्व का मुख्य कारण अनुपयुक्त मौसमी दशाएं, कीट एवं रोग हैं। खांडसारी और गुड़ की कीमत नीतियां तथा चीनी के वितरण में कमियां भी गन्ने की खेती को प्रभावित करते हैं।

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