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नारियल विकास बोर्ड Coconut Development Board – CDB – Vivace Panorama

नारियल विकास बोर्ड Coconut Development Board – CDB

नारियल विकास बोर्ड (सीडीबी) एक संविधिक निकाय है जिसकी स्थापना 12 जनवरी, 1981 को कृषि मंत्रालय, भारत सरकार के तहत् देश में उत्पादकता वृद्धि एवं उत्पाद विविधीकरण पर ध्यान देते हुए नारियल फसल एवं उद्योग के समन्वित विकास के उद्देश्य से की गई। इसका मुख्यालय कोच्चि एवं केरल में है तथा क्षेत्रीय कार्यालय बंगलुरु, चेन्नई एवं गुवाहाटी में हैं। बोर्ड के देश के विभिन्न हिस्सों में 9 प्रदर्शन-बीज उत्पादन (डीएसपी) फार्म हैं। दिल्ली में एक बाजार विकास एवं सूचना केंद्र स्थापित किया गया है। बोर्ड ने केरल में अलुवा के निकट वझाकुलम में एक तकनीकी विकास केंद्र स्थापित किया है।

बोर्ड में केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष होता है; भारत सरकार का हॉर्टीकल्चर आयुक्त; निदेशक, केंद्रीय रोपण कृषि अनुसंधान संस्थान (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्); जूट उद्योग अधिनियम, 1953 की धारा 4 के अंतर्गत गठित जूट बोर्ड का अध्यक्ष; संसद से तीन सदस्य जिसमें से दो लोकसभा से और एक राज्यसभा से चुने जाएंगे; दो सदस्य केंद्र सरकार द्वारा क्रमशः राजस्व संबंधी मंत्रालयों के प्रतिनिधि और खाद्य आपूर्ति एवं सहकारिता के प्रतिनिधित्व करने वाले नियुक्त किए जाएंगे; केंद्र सरकार द्वारा नारियल उत्पादक राज्य होने के नाते केरल, तमिलनाडु एवं कर्नाटक में प्रत्येक का एक प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य ; एवं केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त अन्य सदस्य।

बोर्ड के कार्य एवं दायित्व

  • नारियल उद्योग के विकास हेतु कदम उठाना।
  • नारियल उत्पादन एवं उद्योग में शामिल क्षेत्रों की तकनीकी सलाह देना।
  • नारियल की फसल के क्षेत्राधीन क्षेत्र के विस्तार के लिए वित्तीय एवं अन्य सहायता मुहैया कराना।
  • नारियल एवं इसके उत्पादों के संसाधन के लिए नवीन एवं आधुनिक तकनीक को अपनाने को प्रोत्साहित कराना।
  • नारियल एवं इसके उत्पादों के लिए प्रेरक मूल्य प्राप्त करने के उपाय करना।
  • नारियल एवं इसके उत्पादों के विपणन में सुधार के लिए उपाय सुझाना।
  • नारियल एवं इसके उत्पादों के आयात-निर्यात के विनियमन हेतु उपायों की अनुशंसा करना।
  • नारियल एवं इसके उत्पादों के मानकों, विशिष्टीकरण एवं ग्रेडिंग निर्धारित करना।
  • नारियल की उपज एवं गुणवत्ता सुधारने और उत्पादन में वृद्धि के लिए उपयुक्त योजनाओं का वित्तीयन करना।
  • नारियल एवं इसके उत्पादों के कृषीय, तकनीकीय, औद्योगिकीय आर्थिक अनुसंधान को प्रोत्साहित, सहायता एवं वित्तीयन करना।
  • नारियल एवं इसके उत्पादों सम्बन्धी सांख्यिकी करना एवं उसे प्रकाशित करना।
  • नारियल एवं इसके उत्पादों पर प्रचार गतिविधियां करना और पुस्तकें तथा पीरियोडिकल्स प्रकाशित कराना।

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