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मध्य अफ्रीकी एवं मौद्रिक संघ Economic Community of Central African States – CEMAC – Vivace Panorama

मध्य अफ्रीकी एवं मौद्रिक संघ Economic Community of Central African States – CEMAC

औपचारिक नाम: Communaute Economique et Monetaire d’Afrique Centrale.

मुख्यालय: बैन्गुई (मध्य अफ्रीकी गणराज्य)।

सदस्यता: कैमरून, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, चाड, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, इक्वेटोरियल गिनी, अंगोला और बुरुंडी।

आधिकारिक भाषा: फ्रेंच और पुर्तगाली।

उद्भव एवं विकास

मध्य अफ्रीकी एवं मौद्रिक संघ 8 दिसम्बर, 1964 को ब्रेझविले (कांगो) में अस्तित्व में आया, जब कैमरून ने मध्य अफ्रीकी गणराज्य, चाड, कांगो और गैबन से बने विषुवतीय सीमा शुल्क संघ की सदस्यता ग्रहण की। इक्वेटोरियल गिनी ने 1988 में इसकी सदस्यता ग्रहण की।

उद्देश्य


यूडीईएसी (Customs and Economic Union of Central Africa–UDEAC) का प्रमुख उद्देश्य है—मध्य अफ्रीकी साझा बाजार की उत्तरोत्तर स्थापना (progressive establishment) को प्रोत्साहन देना, जो सदस्य देशों के नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने में सहायता प्रदान करेगा।

यूडीईएसी ने मध्य अफ्रीका के साथ मौद्रिक संघ के गठन के माध्यम से उपक्षेत्रीय एकीकरण की समग्र प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने के लिए मध्य अफ्रीकी आर्थिक एवं मौद्रिक संघ की स्थापना के लिए एक संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसमें फ्रैंक एक साझा मुद्रा होगी; औपचारिक रूप से जून 1999 में इसे सीईएमएसी द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया। मई 2014 की स्थिति तक सीईएमएसी सीमाकर संघ के सृजन के अपने उद्देश्य की प्राप्ति नहीं कर सका।

संरचना

यूडीईएसी अपना कार्य राष्ट्रध्यक्ष परिषद्, सलाहकारी समिति और सामान्य सचिवालय के माध्यम से करता है।

राष्ट्राध्यक्ष परिषद की वर्ष में एक बार बैठक होती है। यह परिषद सामान्य सीमा शुल्क और आर्थिक नीतियों के मध्य समन्वय स्थापित करती है। इसमें सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि सम्मिलित होते हैं। सलाहकारी समिति के सदस्य सभी सदस्य देशों के वित्त मंत्री होते हैं। यह यूडीईएसी के परिचालनात्मक (operational) विषयों पर विचार करती है। सामान्य सचिवालय का प्रधान अधिकारी महासचिव होता है।

गतिविधियां

यूडीईएसी विकास नीतियों में, विशेषकर मौलिक ढांचे और उद्योगीकरण के क्षेत्रों में, समन्वय तथा सामान्य बाह्य शुल्को (external tariffs) के माध्यम से व्यापक आर्थिक सहयोग स्थापित करने के लिये कार्य करता है। इस संगठन ने 1973 में द बैंके डेस इटेट्स डी आई अफ्रीके सेन्ट्रले (The Banque des Etats de I’Afrique Centrale–BEAC) के नाम से एक केन्द्रीय बैंक का गठन किया। 1983 में मध्य अफ्रीकी राज्य आर्थिक समुदाय के गठन में यूडीईएसी ने सहायक भूमिका अदा की थी। 1988 के शिखर सम्मेलन में सदस्यों ने उस लक्ष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया, यद्यपि क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण की दिशा में कोई महत्वपूर्ण कदम नहीं उठाया गया। निरन्तर बढ़ रहे वित्तीय दबावों के कारण 1990 के शिखर सम्मेलन में यूडीईएसी के सचिवालय कर्मचारियों की संख्या में भारी कमी लाने का निर्णय लिया गया। नवम्बर 1992 में यूडीईएसी शिखर  सम्मलेन ने मध्य अफ़्रीकी आर्थिक और मौद्रिक समुदाय (CentralAfrican Economicand Monetary Community–CEMAC) के गठन का समर्थन किया और 1994 के शिखर  सम्मेलन में सीईएमएसी गठित करने के लिये एक संधि पर हस्ताक्षर किए।

अफ्रीकी आर्थिक संघ (एईसी) ने सीईएमएसी के साथ सम्पर्क स्थापित किया और इसे क्षेत्रीय एकीकरण में बेहद क्रियाशील के तौर पर लिया। एईसी और आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (ईसीओएसओसी) के संयुक्त मिशन ने संगठन का अगस्त 1998 में दौरा किया और अफ्रीका में सभी क्षेत्रीय आर्थिक समुदायों के विशेष हित में इसके विकास कार्यक्रमों और क्रियान्वयन में संसाधनों को लगाने में इसकी सफलता को पाया। हालांकि, जून 1999 की बैठक में एईसी के ईसीओएसओसी ने फिर से इस बात पर जोर दिया कि वह मध्य अफ्रीकी देशों के आर्थिक समुदाय (ईसीसीएएस) को बड़े क्षेत्रीय आर्थिक समुदाय के रूप में देखता है।

जून 2002 में मलाबो में राष्ट्राध्यक्षों एवं राज्याध्यक्षों का 10वां सामान्य सम्मेलन आयोजित किया गया। इस शिखर सम्मेलन में मध्य अफ्रीकी देशों के सांसदों के नेटवर्क की स्थापना के लिए एक प्रोटोकॉल अपनाने का निर्णय लिया गया और मध्य अफ्रीका में शांति एवं सुरक्षा परिषद् (सीओपीएएक्स) के लिए स्थायी आदेश प्राप्त किए गए, जिसमें रक्षा एवं सुरक्षा आयोग (सीडीसी), मध्य अफ्रीका का बहुराष्ट्रीय बल (एफओएमएसी) और मध्य अफ्रीका का समय पूर्व चेतावनी तंत्र (एमएआरएसी) शामिल हैं।

24 जनवरी, 2003 को, यूरोपीय संघ (ईयू) ने ईसीसीएएस और सीईएमएसी के साथ एक वित्तीय समझौता सम्पन्न किया। सीईएमएसी अफ्रीकन इकोनॉमिक कम्युनिटी का एक स्तंभ नहीं है, अपितु इसके सदस्य इससे सम्बद्ध हैं। यूरोपीय संघ ने लोकतांत्रिक गणतंत्र कांगो में कई शांति स्थापना अभियान किए हैं- ऑपरेशन आर्टमिस (सितंबर 2008), ईयूपीओएल किंशाशा (अक्टूबर 2003) और ईयूएसईसी डीआर कांगो (मई 2005)।

राष्ट्राध्यक्षों एवं राज्याध्यक्षों का 11वां सामान्य सत्र जनवरी 2004 के दौरान ब्रेजविले में आयोजित किया गया। इसमें इस तथ्य का स्वागत किया गया कि मध्य अफ्रीका में शांति एवं सुरक्षा परिषद् की स्थापना से सम्बद्ध प्रोटोकॉल ने प्रवर्तन में आने के लिए आवश्यक संख्या में पुष्टियां प्राप्त कर ली हैं। इस बैठक में मध्य अफ्रीका में एनईपीएडी के क्रियान्वयन की घोषणा के साथ-साथ लिंग समानता की घोषणा की भी स्वीकार किया गया।

वर्ष 2007 में रवांडा ने संगठन को छोड़ने का निर्णय लिया ताकि वह क्षेत्रीय व्यापार गुट में अपनी सदस्यता के दोहरेपन को खत्म कर सके और वह ईएसी और सीओएमईएसए में अपनी सदस्यता पर बेहतर ध्यान दे सके। रवांडा संगठन का संस्थापक सदस्य था और 18 अक्टूबर, 1981 से इसका एक हिस्सा रहा था।

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