पेट्रोलियम Petroleum

पेट्रोलियम एक प्राकृतिक ईंधन है। यह भू-पर्पटी (Earth’s Crust) के बहुत नीचे अवसादी परतों के बीच पाया जाने वाला संतृप्त हाइड्रोकार्बनों का काले भूर रंग का गाढ़ा तैलीय द्रव है। इसे कच्चा तेल (Crude Oil) या धात्विक तेल (Mineral Oil) के नाम से भी जाना जाता है। पेट्रोलियम (Petroleum) दो शब्दों के मिलने से बना है- पेट्रा (Petra) तथा ऑलियम (Oleum)। पेट्रा (Petra) का शाब्दिक अर्थ होता है- चट्टान जबकि ओलियम (Oleum) का शाब्दिक अर्थ तेल (Oil) होता है। इस कारण पेट्रोलियम को रॉक ऑयल भी कहते हैं। आधुनिक समय में इसकी अत्यधिक महत्ता के कारण ही इसे काला सोना (Black Gold) द्रव सोना (Liquid Gold) आदि की संज्ञा दी गई है। पेट्रोलियम से पेट्रोल, मिट्टी का तेल, विभिन्न हाइड्रोकार्बन, ईथर, प्राकृतिक गैस आदि प्राप्त किये जाते हैं। विश्व का सबसे पहला पेट्रोलियम कुआँ कर्नल ड्रेक द्वारा 1859 ई० में संयुक्त राज्य अमेरिका के पेन्सलवेनिया राज्य के टाइटसविले नामक स्थान पर खोदा गया था। पेट्रोलियम एक गाढ़ा गहरे रंग का चिपचिपा व दुर्गन्धयुक्त पदार्थ है। पेट्रोलियम से इसके विभिन्न अवयवों को प्रभाजी आसवन विधि (Fractional Distillation Method) द्वारा अलग-अलग किया जाता है। इसे पेट्रोलियम का शोधन (Petroleum Refining) कहते हैं। आधुनिक विचारधारा के अनुसार पेट्रोलियम की उत्पत्ति जीव जन्तुओं एवं वनस्पतियों से हुई है।

अपस्फोटन एवं ऑक्टेन संख्या (Knocking and Octane Number): कुछ ईंधन ऐसे होते हैं जिनका वायु मिश्रण इंजनों के सिलिण्डर में ज्वलन समय के पहले हो जाता है, जिससे ऊष्मा पूर्णतया कार्य में परिवर्तित न होकर धात्विक ध्वनि (Metallic sound) उत्पन्न करने में नष्ट हो जाती है। यही धात्विक ध्वनि अपस्फोटन कहलाती है। ऐसे ईंधन जिनका अपस्फोटन अधिक होता है, उपयोग के लिये अच्छा नहीं माना जाता है। अपस्फोटन कम करने के लिये ऐसे ईधनों में कुछ ऐसे यौगिक मिश्रित कर दिये जाते हैं, जिससे इनका अपस्फोटन कम हो जाता है। ऐसे यौगिको को ही अपस्फोटरोधी यौगिक (Anti knocking compound) कहते हैं। किसी ईधन के अफस्फोटन को ओक्टेन संख्या (Octane Number) के द्वारा व्यक्त किया जाता है। जिस किसी ईंधन का ऑक्टेन संख्या जितनी अधिक होती है, उसका अपस्फोटन उतना ही कम होता है, तथा वह उतना ही अच्छा ईधन माना जाता है। ईधन की ऑक्टेन संख्या को बढ़ाने लिये उसमें अपस्फोटनरोधी यौगिक मिलाये जाते है। ट्रेटाइथाइल लेड या TEL सबसे अच्छा अपस्फोटनरोधी यौगिक है। BTX (Benzene-Toluene-xylene) भी एक अच्छा अपस्फोटनरोधी यौगिक है। साधारणतः प्रति लीटर पेट्रोल में टेट्राइथाइल लेड की 0.15 मिलीलीटर मात्रा के साथ कुछ इथाइल ब्रोमाइड मिलाकर अपस्फोटन कम किया जाता है।

डीजल (Diesel): डीजल एक प्रकार का तैलीय द्रव हाइड्रोकार्बन है, जो पेट्रोलियम के प्रभाजी आसवन (Fractional Distination) से प्राप्त किया जाता है। यह पेट्रोल की तुलना में एक सस्ता ईंधन है, जिसका उपयोग वाहनों, मशीनों, संयंत्रों आदि को चलाने के लिये होता है। डीजल के जलने से अनेक खतरनाक विषैली गैसें निकलती हैं, जिनमें सल्फर डाइऑक्साइड प्रमुख है। इन खतरनाक एवं विषैली गैसों से ऑखों में जलन, सिर में चक्कर आना एवं साँस लेने में परेशानी आदि होती है। इससे अनेक त्वचा एवं श्वसन संबंधी व्याधियाँ पैदा होती हैं।

सिटी डीजल (City Diesel): सिटी डीजल को अल्ट्रा लो सल्फर डीजल (USLD: Ultra Low sulphur Diesel) के नाम से भी जाना जाता है, जो कि डीजल का एक अत्यधिक स्वच्छ रूप है। इसके दहन से वायुमंडल में कम प्रदूषण फैलता है, क्योंकि इसमें सल्फर को मात्रा काफी कम रहती है। यूरोप के अधिकांश शहरों में इस प्रकार के डीजल का प्रयोग होने की वजह से इसका यह नाम पड़ा है।

हरित डीजल (Green Diesel): हरित डीजल या ग्रीन डीजल एक उच्च कोटि का डीजल है, जिसे यूरो : 4 (Euro-4) मानक की मान्यता प्राप्त है। डीजल की सभी श्रेणियों में यह सबसे अच्छा माना जाता है और वायुमंडलीय प्रदूषण भी अन्य की अपेक्षा काफी कम करता है।

द्रवित पेट्रोलियम गैस (L.PG.): – यह प्रोपेन, ब्यूटेन तथा आइसो ब्यूटेन आदि हाइड्रोकार्बनों का मिश्रण है एवं घरों में रसोई गैस के रूप में प्रयुक्त होता है। इसमें अत्यंत उच्च दाब पर प्रोपेन, ब्यूटेन एवं आइसो ब्यूटेन जैसी गैसें द्रवित होती हैं। इन्हीं द्रवित हाइड्रोकार्बनों के मिश्रण को द्रवित पेट्रोलियम गैस या L.P.G. कहते हैं। यह प्राकृतिक गैस तथा पेट्रोलियम के प्रभाजी आसवन से प्राप्त होता है। एल० पी० जी० के रिसाव की पहचान के लिये उसमें कुछ दुर्गन्धयुक्त पदार्थ जैसे-मरकेप्टन आदि मिला दिया जाता है।

संपीडित प्राकृतिक गैस (C.N.G.) – सी० एन० जी० (compressed Natural cas) अर्थात् संपीडित प्राकृतिक गैस धरती के भीतर पाये जाने वाले हाइड्रोकार्बनों का मिश्रण है, जिसमें 80 से 90% मात्रा मिथेन गैस की होती है। यह गैस पेट्रोल तथा डीजल की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड 70% नाइट्रोजन ऑक्साइड 87% और जैविक गैसों का लगभग 89% कम उत्सर्जन करती है। सी० एन० जी० को जलाने के लिये 540°C से अधिक ताप की आवश्यकता होती है, जबकि पेट्रोल मात्र 232 से 282°C पर जलता है। यह गैस रंगहीन, गंधहीन, हवा से हल्की तथा पर्यावरण की दृष्टि से सबसे कम प्रदूषण करती है। सी० एन० जी० को वाहनों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यह गैस वाहनों में पेट्रोल तथा डीजल के विकल्प के रूप में प्रयोग किया जाता है। पेट्रोल एवं डीजल के प्रयोग से वाहनों से निकलने वाले खतरनाक रासायनिक पदार्थ जैसे: सीसा, सल्फर डाइऑक्साइड आदि से मनुष्य के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है, तथा ये कई बीमारियों जैसे-चर्म कैन्सर, ऑखों में जलन, सिरदर्द आदि को जन्म देती हैं। वाहनों में सी० एन० जी० के प्रयोग से इन खतरनाक रासायनिक पदार्थों का उत्सर्जन अत्यन्त ही अल्प मात्रा में होता है, जिससे पर्यावरण स्वच्छ बना रहता है।


गैसोहोल (Gasohol): पेट्रोल तथा ऐल्कोहॉल के मिश्रण को गैसोहोल कहा जाता है। यह गन्ने के रस से प्राप्त ऐल्कोहॉल को पेट्रोल में मिलाकर प्राप्त किया जाता है, इसमें पेट्रोल और ऐल्कोहॉल की मात्रा क्रमश: 90% और 10% होती है। गैसोहोल से पेट्रोल द्वारा होने वाला कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) तथा सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) के उत्सर्जन को रोका जा सकता है। अतः यह पेट्रोल का बेहतर प्रतिस्थापन साबित हो सकता है, वहीं यह विश्व में पेट्रोलियम की बढ़ती समस्या के समाधान में कारगर साबित हो सकता है। इसकी खोज ब्राजील में की गई है।

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