एंजस ANZUS

सदस्यता: ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका (ए=ऑस्ट्रेलिया; एनजेड=न्यूजीलैंड, तथा; यूएस=संयुक्त राज्य अमेरिका)

आधारिक भाषा: अंग्रेजी।

उद्भव एवं विकास

साम्यवादी चीन की दक्षिण-पूर्व एशियाई गतिविधियों, तिब्बत पर नियंत्रण तथा उत्तर कोरिया एवं उत्तर वियतनाम पर प्रभाव से संयुक्त राज्य अमेरिका तथा प्रशांत क्षेत्र के तीन देशों-फिलीपीन्स, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड, ने भयाक्रांत हो कर अतः 1 सितंबर, 1951 की सेन फ्रांसिस्को (संयुक्त राज्य अमेरिका) में एक त्रि-पक्षीय सुरक्षा संधि पर हस्ताक्षर किए। एंजस (ANZUS) संधि 29 अप्रैल, 1952 से प्रभाव में आई।

उद्देश्य

इस संधि के अनुसार- प्रत्येक सदस्य यह स्वीकार करता है कि प्रशांत क्षेत्र या संधि के किसी भी सदस्य पर सशस्त्र आक्रमण उसकी अपनी शांति और सुरक्षा के लिये खतरा होगा तथा यह घोषणा करता है कि, वह अपनी संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार इस सामूहिक खतरे से निपटने के लिए कार्यवाही करेगा।

संरचना

एंजस का एकमात्र राजनीतिक अंग एंजस परिषद है। यह सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों (या उनके प्रतिनिधियों) से बनी होती है। परिषद किसी सदस्य देश विशेष या गठबंधन की सुरक्षा से जुड़े किसी भी विषय पर विचार करने के लिए अधिकृत है। इसका न तो कोई मुख्यालय है और न ही स्थायी कर्मचारी।

गतिविधियां

किसी प्रशांत सुरक्षा प्रणाली की अनुपस्थिति में एंजस संधि ने राजनीतिक और रणनीतिक परामर्श के लिए एक वाहक का कार्य किया। लेकिन इस संधि द्वारा निष्पादित गतिविधियों की परिधि बहुत ही संकुचित रही, मुख्य रूप से 1980 के दशक में न्यूजीलैंड में कुछ राजनीतिक परिवर्तनों के कारण। 1980 के दशक के मध्य में न्यूजीलैंड ने परमाणु-विरोधी नीति को अपनाया, जिसके तहत इसने संयुक्त राज्य अमेरिका (या किसी भी अन्य देशों के) के युद्धपोतों को तब तक अपने बंदरगाहों में प्रवेश की अनुमति न देने का निर्णय लिया जब तक कि उसे यह आश्वासन नहीं मिल जाता कि उन युद्धपोतों में कोई परमाणु अस्त्र नहीं है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने नीतिगत कारणों से ऐसा आश्वासन न देने का निर्णय लिया। अपने युद्धपोतों को न्यूजीलैंड से मिल रहे अवरोधों के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका ने 1986 में न्यूजीलैंड के प्रति अपंनी संधि बाध्यताओं को औपचारिक रूप से समाप्त घोषित कर दिया तथा दोनों देशों के मध्य सैन्य-बंधनों में भी कमी लाने का निर्णय लिया। यद्यपि ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका आज भी औपचारिक रूप से एंजस संधि के सदस्य हैं; किंतु, व्यावहारिक रूप से यह संधि निष्क्रिय है।

वर्ष 2000 में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक बार फिर न्यूजीलैंड नौसेना के लिए अपने पत्तनों के द्वार खोल दिए, और अमेरिका में बिल क्लिंटन की अध्यक्षता में और न्यूजीलैंड में हेलेन क्लार्क की सरकार के अंतर्गत दोनों देशों ने विश्व शांति के लिए रक्षा एवं सुरक्षा पर द्विपक्षीय सहयोग की पुनर्स्थापना की। नाटो की तरह, एंजस का कोई समन्वित रक्षा ढांचा या समर्पित बल नहीं है। इसी बीच आस्ट्रेलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका किसी प्रकार की संयुक्त गतिविधियों का आयोजन करते हैं।

वर्ष 2001 को न्यूजीलैंड और अमेरिका के बीच रणनीति भागीदारी के वर्ष के तौर पर परिभाषित किया गया, और न्यूजीलैंड 1984 के बाद से वर्ष 2002 में हवाई के द्विवार्षिक रिम ऑफ पैसिफिक सैन्य अभ्यास में शामिल हुआ।

वर्ष 2010 की वेलिंगटन उद्घोषणा और इसके परिणामस्वरूप 2012 की वाशिंगटन उद्घोषणा ने दोनों देशों के रिश्तों को गठबंधन के सहयोगी की अपेक्षा मित्रों के तौर पर देखा जिसने पत्तन सीमा के उल्लंघन के मामलों को हल करने की दिशा में अपेक्षाकृत तौर पर अधिक कार्य किया।

20 सितंबर, 2012 को संयुक्त राज्य अमेरिका ने न्यूजीलैंड के युद्धपोत पर अमेरिका के विश्व भर में रक्षा एवं तटरक्षक बेस पर प्रवेश के 26 वर्ष पुराने प्रतिबंध को हटा दिया। अमेरिकी नौसेना को न्यूजीलैंड में प्रशिक्षित किया गया और न्यूजीलैंड की नौसेना ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ रिमपैक मेरीटाइम अभ्यास में भाग लिया।

16 नवम्बर, 2011 को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड की कैनबरा, ऑस्ट्रेलिया में मुलाकात हुई जिसमें अमेरिका की ऑस्ट्रेलिया की धरती पर सतत् मौजूदगी की योजना की घोषणा की गई। 2,500 अमेरिकी सैनिकों को ऑस्ट्रेलिया के डार्विन, क्षेत्र में तैनात किया गया।

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