Notice: Function _load_textdomain_just_in_time was called incorrectly. Translation loading for the colormag domain was triggered too early. This is usually an indicator for some code in the plugin or theme running too early. Translations should be loaded at the init action or later. Please see Debugging in WordPress for more information. (This message was added in version 6.7.0.) in /home/vivace/public_html/wp-includes/functions.php on line 6131
विश्व की भाषायें Languages Of The World – Vivace Panorama

विश्व की भाषायें Languages Of The World

दुनिया की कितनी भाषाएं हैं इसका उत्तर देना ठीक तरह से संभव नहीं है। एक अनुमान के अनुसार दुनिया में कुल भाषाओं की संख्या 6809 है, इनमें से 90 फीसदी भाषाओं को बोलने वालों की संख्या 1 लाख से भी कम है। लगभग 200 से 150 भाषाएं ऐसी हैं जिनको 10 लाख से अधिक लोग बोलते हैं। लगभग 357 भाषाएं ऐसी हैं जिनको मात्र 50 लोग ही बोलते हैं। इतना ही नहीं 46 भाषाएं ऐसी भी हैं जिनको बोलने वालों की संख्या मात्र 1 है।

दुर्भाग्यवश संचार के माध्यमों में वृद्धि के साथ ही कई ऐसी छोटी भाषाएं हैं जो लुप्तप्राय हैं। इन भाषाओं के लुप्त होने के साथ ही इनके बोलने वालों की संस्कृति भी समाप्त हो जाएगी।

पारिवारिक वर्गीकरण

संस्कृत, ग्रीक, लेटिन आदि भाषाओं का अध्ययन करने पर यह मालूम होता है कि वे किसी एक ही मूल भाषा से निकली हैं। इसी आधार पर भाषाओं को परिवारों में बांटने का प्रयास किया जाता है। भाषा परिवारों के बारे में अलग-अलग विद्वानों की अलग-अलग राय है। भाषा परिवारों के नाम और उनमें शामिल प्रमुख भाषाएं इस प्रकार हैं-

भारोपीय परिवार Indo-European languages

यह सर्वप्रमुख भाषा परिवार है जिसके बोलने वालों की संख्या विश्व में सबसे ज्यादा है। इस भाषा परिवार की प्रमुख भाषाएं संस्कृत, पालि, प्राकृत, अपभ्रंश, हिंदी, बंगाली, फारसी, ग्रीक, लेटिन, अंग्रेजी, रूसी, जर्मन, पुर्तगाली, इतालवी इत्यादि हैं।

यूराल परिवार Ural languages


इस परिवार की भाषाएं यूरोप में बोली जाती हैं। प्रमुख भाषाएं हंगेरियन, फिन्निश और मॉर्डिविन हैं।

अल्टाइक परिवार Altaic languages

इस भाषा परिवार की भाषाएं यूरोप (तुर्की), मध्य एशिया (उज्बेक), मंगोलिया (मंगोलियन), सुदूर पूर्व एशिया (कोरियाई, जापानी) इत्यादि में बोली जाती हैं।

चीनी परिवार

यह एशिया का प्रमुख भाषा परिवार है जिसमें दुनिया की सबसे ज्यादा बोलने वाली भाषा मंदारिन (चीनी) शामिल है। इस परिवार की प्रमुख भाषाएं मंदारिन, तिब्बती या मोट, बर्मी, थाई, मैतेई, गारो, नागा, बोडो, नेबारी आदि हैं। यह सभी भाषाएं ध्वनि आधारित हैं।

मलय-पॉलीनेशियन परिवार

इस भाषा परिवार में लगभग 1000 भाषाएं शामिल हैं और ये भाषाएं मुख्य रूप से हिंद व प्रशांत महासागर और दक्षिण-पूर्व एशिया में बोली जाती हैं। इस भाषा परिवार की प्रमुख भाषाएं हैं- मलाया, इंडोनेशियाई, माओरी, फिजियन, हवाइयन इत्यादि।

अफ्रीकी-एशियाई परिवार

इस भाषा परिवार में उत्तरी अफ्रीका और मध्य-पूर्व की भाषाएं शामिल हैं। मुख्य भाषाओं में अरबी और हिब्रू शामिल हैं।

कॉकेशियाई परिवार

इस परिवार की भाषाएं मुख्य रूप से काला सागर और कैस्पियन सागर के बीच स्थित देशों के लोगों द्वारा बोली जाती हैं। जॉर्जियाई और चेचेन इस परिवार की मुख्य भाषाएं हैं।

द्रविड़ परिवार

इस भाषा परिवार की भाषाएं भारत के दक्षिणी राज्यों में बोली जाती हैं। तमिल, कन्नड़, तेलुगू इस भाषा परिवार की प्रमुख भाषाएं हैं।

ऑस्ट्रो-एशियाटिक परिवार Austric languages

इस परिवार की भाषाएं एशिया में भारत के पूर्वी हिस्से से लेकर वियतनाम तक बोली जाती हैं। प्रमुख भाषाओं में वियतनामी और ख्मेर शामिल हैं।

नाइजर-कांगो परिवार

इस भाषा परिवार की भाषाएं दक्षिणी सहारा के इलाके में बोली जाती हैं। प्रमुख भाषाओं में स्वाहिली, शोना, झोसा और जुलु शामिल हैं।

अमेरिका परिवार

इस भाषा परिवार में उत्तरी अमेरिका, मध्य अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, ग्रीनलैंड इत्यादि की भाषाएं शामिल हैं। प्रमुख भाषाओं में एस्किमो (ग्रीनलैंड), अथबस्कन (कनाडा और सं. रा. अमेरिका), नहुअव्ल (मैक्सिको), करीब, चेरोकी (पनामा के पूर्व में), गुआर्नी अरबक, क्वाचुआ, नुत्का इत्यादि।

भारतीय भाषाएं

प्रसिद्ध भाषाविद ग्रियर्सन के अनुसार भारत में भाषाओं की संख्या 179 और बोलियों की संख्या 544 है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में कुल भाषाओं की संख्या 418 है, जिनमें 407 जीवित भाषाएं हैं जबकि 11 लुप्त हो चुकी हैं।

भारत का संविधान अपनी 8वीं अनुसूची में 18 भाषाओं को मान्यता देता है। देवनागरी लिपि में हिन्दी भारतीय संघ की भाषा है जबकि विभिन्न प्रदेशों की अपनी-अपनी सरकारी भाषाएं हैं। अंग्रेजी भारतीय संघ की दूसरी राजभाषा है। अंग्रेजी का प्रयोग केंद्र सरकार गैर-हिंदी भाषी राज्यों के साथ संवाद में करती है। अंग्रेजी नागालैंड और मेघालय की राजभाषा है। भारत का संविधान 22 भाषाओं को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा देता है जो पूरे देश में बोली जाती हैं।

हिंदी और अंग्रेजी के अतिरिक्त भारत का संविधान 21 अन्य भाषाओं को मान्यता प्रदान करता है।

भाषा राज्य की राजभाषा
असमी असम
बंगाली त्रिपुरा व पश्चिम बंगाल
बोडो असम
डोगरी जम्मू व कश्मीर
गुजराती दादरा व नागरहवेली, दमन व दीव, गुजरात
कन्नड़ कर्नाटक
कश्मीरी जम्मू-कश्मीर
कोंकणी गोवा
मलयालम केरल, लक्षद्वीप व पुदुचेरी
मैथिली बिहार
मणिपुरी मणिपुर
मराठी महाराष्ट्र
नेपाली सिक्किम
उडिय़ा   उड़ीसा
पंजाबी पंजाब व चंडीगढ
संस्कृत यह किसी राज्य की भाषा नहींहै
संथाली छोटानागपुर पठार के संथालों की भाषा (किसीराज्य की राजभाषा नहीं)
सिंधी सिंधी समुदाय की  भाषा
तमिल तमिलनाडु व पुदुचेरी
तेलुगू आंध्र प्रदेश
उर्दू जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश, दिल्ली व उत्तर प्रदेश

भाषाई दृष्टिकोण से भारत में काफी विविधता है। भारतीय भाषाओं का उद्भव व विकास अलग-अलग तरीके से हुआ है और वे भारतीय के विभिन्न जातीय समूहों से संबंधित हैं। भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी है। देश की कुल जनसंख्या का 73 फीसदी भारोपीय परिवार की, 25 फीसदी द्रविड़ परिवार की, 1.3 फीसदी आस्ट्रिक परिवार की तथा मात्र 0.7 फीसदी भाग चीनी-तिब्बत परिवार की भाषाएं बोलता है।

भारतीय भाषाओं को मुख्य रूप से चार परिवारों में वर्गीकृत किया जाता है-

  1. इंडो-यूरोपीय या भारोपीय परिवार
  2. द्रविड़ परिवार
  3. आस्ट्रिक परिवार
  4. चीनी-तिब्बती परिवार

भारोपीय और द्रविड़ परिवार देश के प्रमुख भाषा परिवार हैं।

भारोपीय परिवार

यह भारतीय भाषाओं में सबसे महत्वपूर्ण भाषा परिवार है और देश की प्रमुख भाषाएं हिंदी, बंगाली, मराठी, गुजराती, पंजाबी, सिंधी, असमी, उडिय़ा, कश्मीरी, उर्दू, मैथिली और संस्कृत इसमें शामिल हैं।

द्रविड़ परिवार

यह देश का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण भाषा परिवार है जिसमें दक्षिण भारत में बोली जाने वाली लगभग सभी भाषाएं शामिल हैं। द्रविड़ भाषाएं काफी प्राचीन हैं। इस भाषा परिवार की भाषाओं का देश के बाहर की भाषाओं से कोई संबंध नहीं है। रूसी भाषाशास्त्री एस. एस. एंद्रोनोव के अनुसार प्रोटो-द्रविड़ से 21 द्रविड़ भाषाओं की उत्पत्ति हुई। इस भाषा परिवार को तीन भागों- दक्षिणी द्रविड़ वर्ग, मध्य द्रविड़ वर्ग व उत्तरी द्रविड़ वर्ग में विभाजित किया जाता है। इस परिवार की सात मुख्य भाषाएं- कन्नड़, तमिल, मलयालम, तुलु, कोडागू, तोडा और कोटा हैं।

चीनी-तिब्बत परिवार

इस भाषा परिवार के बोलने वाले उत्तरी बिहार, उत्तरी बंगाल और असम में पाये जाते हैं। इन भाषाओं को भारोपीय परिवार की भाषाओं से अधिक पुराना माना जाता है और इनके बोलने वालों को प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में किरात के नाम से जाना जाता था।

इस समूह की भाषाओं को तीन शाखाओं में विभाजित किया जाता है-

  1. तिब्बती हिमालय
  2. उत्तरी असम
  3. असमी-म्यांमारी 

तिब्बती-हिमालयी भाषाओं को दो वर्र्गों में विभाजित किया गया है-

  1. भोटिया वर्ग
  2. हिमालय वर्ग

भोटिया वर्ग की भाषाओं में तिब्बती, बाल्ती, लद्दाखी, लाहूली, शेरपा, सिक्किमी-भोटिया आदि भाषाएं शामिल हैं। हिमालय वर्ग में चम्बा, लाहौली, किन्नौरी और लेप्चा भाषाएं आती हैं। उत्तरी असमी वर्ग में 6 बोलियां शामिल हैं-

अका, डफला, मिरी, अबोर, मिश्मी तथा मिशिंग। असमी-म्यांमारी वर्ग की भाषाओं को पांच उपवर्र्गों में विभाजित किया जाता है- बोडो, नागा, कचिन, कुकिचिन और म्यांमारी-बर्मी।

ऑस्ट्रिक परिवार

ऑस्ट्रिक भाषा परिवार का विकास भूमध्य सागर से आये हुए निवासियों द्वारा हुआ। ऑस्ट्रिक भाषाएं मध्य और पूर्वी भारत के पहाड़ी व वन इलाकों में बोली जाती हैं। ये काफी प्राचीन भाषाएं हैं और इनको बोलने वालों को प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में निषाद कहा जाता था। इस भाषा परिवार की सबसे महत्वपूर्ण भाषा संथाली है जिसे लगभग 50 लाख संथाल बोलते हैं। मुंडा जनजाति द्वारा बोली जाने वाली मुंदरी दूसरी सबसे महत्वपूर्ण भाषा है।

अन्य भाषाएं

गोंडी, ओरांव, मल-पहाडिय़ा, खोंड और पारजी जैसी कुछ आदिवासी भाषाएं हैं जो अपने-आप में अनूठी हैं और इन्हें किसी भाषा परिवार के अंतर्गत नहीं रखा जा सकता है।

[divide]

राजभाषा

केद्र सरकार अपने कार्र्यों के निष्पादन के लिए दो भाषाओं का इस्तेमाल करती है:

हिंदी भाषी राज्यों के साथ संवाद में केंद्र सरकार हिंदी का प्रयोग करती है। हिंदी अरुणाचल प्रदेश, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, बिहार, चंडीगढ, छत्तीसगढ, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तरांचल राज्यों की भी राजभाषा है।

इसके आलावा केंद्र सरकार द्वारा अंग्रेजी भाषा का भी प्रयोग किया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *