महिलाओं के प्रति सभी प्रकार के भेदभावों को समाप्त करने के लिये अभिसमय The Convention on the Elimination of All Forms of Discrimination against Women – CEDAW

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1979 में इस अभिसमयं को अपनाया तथा यह सितम्बर 1981 में प्रभाव में आया। 10 मई, 2000 तक इस अभिसमय पर हस्ताक्षर करने वाले देशों की संख्या 169 हो गई थी।

अंतरराष्ट्रीय महिला अधिकार विधेयक के रूप में वर्णित इस अभिसमय में एक प्रस्तावना (preamble) और 30 अनुच्छेद (Article) हैं। यह अभिसमय महिलाओं के प्रति भेदभाव को परिभाषित करता है और इसके अंत के लिये एक राष्ट्रीय कार्य सूची स्थापित करता है। महिलाओं के प्रति भेदभाव को इस प्रकार परिभाषित किया गया है- लिंग के आधार पर किया गया कोई भेदभाव, प्रतिबंध अथवा बहिष्करण, जो महिलाओं (चाहे वे विवाहित हों अथवा नहीं) के राजनितिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक अथवा अन्य क्षेत्रों से सम्बद्ध मानवाधिकारों एवं मौलिक स्वतंत्रताओं को निरस्त करता हो अथवा ऐसा करने का उद्देश्य रखता हो।

अभिसमय की स्वीकार करके सदस्य देश स्वयं की महिलाओं के विरुद्ध सभी प्रकार के भेदभावों को मिटाने के लिये कदम बढ़ाने के लिये समर्पित करते हैं। इन उपायों में से कुछ प्रमुख उपाय हैं- देश की कानून व्यवस्था में महिलाओं और पुरुषों की समानता के सिद्धान्त को अपनाना; सभी प्रकार के भेदभावपूर्ण कानूनों को समाप्त करना और महिलाओं के विरुद्ध भेदभावों को रोकने के लिये उपयुक्त कदम उठाना; भेदभाव से महिलाओं की रक्षा सुनिश्चित करने के लिये के द्वारा महिलाओं के विरुद्ध सभी प्रकार के भेदभावों की समाप्ति सुनिश्चित करना।

अभिसमय राजनीतिक और लोक जीवन, जिनमें मत देने के अधिकार और चुनाव लड़ने के अधिकार भी सम्मिलित हैं तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में महिलाओं की समान पहुंच तथा समान अवसरों के माध्यम से महिला-पुरुष समानता के सपने को साकार करने के लिये आधार प्रदान करता है। अभिसमय एकमात्र ऐसी मानवाधिकार संधि है, जो महिलाओं को प्रजनन अधिकार प्रदान करती है तथा संस्कृति और परम्परा को एसे प्रभावकारी कारकों के रूप में लक्षित करती है, जो पारिवारिक संबंधों और लिंग जन्य भूमिकाओं के निर्धारण में महत्वपूर्ण होते हैं। यह अभिसमय महिलाओं तथा उनके बच्चों के लिए राष्ट्रीयता प्राप्त करने, परवर्तित करने और बरकरार रखने के अधिकार की पुष्टि करता है। सदस्य देश महिलाओं के सभी प्रकार के देह व्यापार और शोषण के विरुद्ध उपयुक्त कदम उठाने के लिये भी सहमत होते हैं।

1982 में इस अभिसमय के अंतर्गत महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव समाप्त करने के लिये महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव निराकरण समिति के नाम से एक शीर्ष निकाय की स्थापना की गई। यह समिति सदस्य देशों के द्वारा सीईडीएडब्ल्यू के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के उद्देश्य से उठाये गये कदमों के क्रियान्वयन का विश्लेषण करती है। समिति में महिला विषयों से संबंधित विश्व के 23 विशेषज्ञ सम्मिलित होते हैं। यह सदस्य देशों द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रीय रिपोर्टी की समीक्षा करती है तथा महिलाओं को प्रभावित करने वाले किसी ऐसे विषय के संबंध में अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए अधिकृत होती है, जहाँ समिति के अनुसार सदस्य देशों को अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

अक्टूबर 1999 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सीईडीएडब्ल्यू के लिये अनुच्छेद 21 वैकल्पिक प्रोटोकॉल (21-Article Optional Protocol) को अपनाया (वैकल्पिक प्रोटोकॉल अपने आप में संधियां हैं। ये मूल संधि के लिये प्रक्रियाओं का निर्धारण करती हैं या मूल संधि से संबंधित किसी व्यापक समस्या के निदान का मार्ग प्रस्तुत करती हैं। ये संधियां मूल संधि के सदस्यों के द्वारा हस्ताक्षर, स्वीकृति या अनुमोदन के लिये खुली होती हैं)। प्रोटोकॉल दस देशों के द्वारा अनुमोदित होने के बाद दिसम्बर 2000 में प्रभाव में आया। यह प्रोटोकॉल यौन भेदभाव या सीईडीएडब्ल्यू में सम्मिलित किन्हीं अन्य प्रकार के भेदभावों से संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायतों (किसी व्यक्ति विशेष या किसी समूह के माध्यम से) को सुनने और उस पर विचार करने की शीर्ष समिति के अधिकार को स्वीकार करता है। प्रोटोकॉल में दो प्रक्रियाएं सम्मिलित हैं-(i) संचार प्रक्रिया, इसके अंतर्गत किसी महिला विशेष या महिला समूह को अभिसमय में निर्दिष्ट महिला अधिकारों के उल्लंघन के संबंध में समिति के समक्ष दावा प्रस्तुत करने का अधिकार प्राप्त है। समिति के विचारार्थ व्यक्तिगत समस्याएं प्रस्तुत करने से पहले अनेक मानदण्डों को पूरा करना पड़ता है। इस प्रकार का दावा तभी किया जा सकता है, जब सभी राष्ट्रीय विकल्पों का सहारा लिया जा चुका हो। (ii) जांच प्रक्रिया, समिति को महिला अधिकारों के गंभीर और सुनियोजित उल्लंघनों के मामलों की जांच शुरू करने के योग्य बनाती है।

किसी भी परिस्थिति में, शिकायतकर्ता देश के लिये अभिसमय और प्रोटोकॉल का सदस्य होना अनिवार्य है। प्रोटोकॉल में एक चुनाव करने का प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके अंतर्गत प्रोटोकॉल को अनुमोदित या स्वीकृत करने वाले सदस्य को जांच प्रक्रिया से अलग होने की घोषणा करने का अधिकार होता है। प्रोटोकॉल का अनुच्छेद 17 यह स्पष्ट करता है कि इसके प्रावधानों में किसी प्रकार के आरक्षण की गुंजाइश नहीं है।


वैकल्पिक प्रोटोकॉल सीईडीएडब्ल्यू को नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय प्रसंविदा, सभी प्रकार के जातीय भेदभावों की समाप्ति के लिए अभिसमय तथा उत्पीड़न एवं अन्य प्रकार के क्रूर, अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार या दण्ड के विरुद्ध अभिसमय के समकक्ष बनाता है। इन सभी अभिसमयों में संचार प्रक्रिया को अपनाया गया है। जांच प्रक्रिया उत्पीड़न के विरुद्ध अभिसमय के समकक्ष है।

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