भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण Airports Authority of India – AAI

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) का गठन संसद के एक अधिनियम द्वारा किया गया तथा यह तत्कालीन राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण तथा भारतीय अंतरराष्ट्रीय विमानपतन प्राधिकरण के विलय के माध्यम से 1 अप्रैल, 1995 को अस्तित्व में आया । इस विलय से एक एकल संगठन अस्तित्व में आया जिसे देश में जमीन पर एवं वायु प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई।

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण 125 विमानपत्तनों का प्रबंधन करता है जिसमें 11 अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन, 8 सीमा शुल्क विमानपत्तन, 81 घरेलू विमानपत्तन तथा रक्षा वायु क्षेत्रों में 27 सिविल एंक्लेव शामिल हैं। भारतीय विमानपतन प्राधिकरण 2.8 मिलियन वर्ग नॉटिकल मील के हवाई अंतरिक्ष में हवाई नेविगेशन की सुविधाएं उपलब्ध कराता है।

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के कार्य

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के कार्य इस प्रकार हैं-

  1. अंतर्राष्ट्रीय एवं घरेलू विमानपत्तनों की डिजायन, विकास, प्रचालन एवं अनुरक्षण।
  2. आईसीएओं द्वारा यथा स्वीकृत देश की भौगोलिक सीमाओं के बाद भारतीय वायु अंतरिक्ष का नियंत्रण एवं प्रबंधन।
  3. यात्री टर्मिनलों का निर्माण, सुधार एवं प्रबंधन।
  4. अंतरराष्ट्रीय एवं घरेलू विमानपत्तनों पर कागों टर्मिनलों का विकास एवं प्रबंधन
  5. विमानपत्तनों के यात्री टर्मिनलों पर यात्री सुविधाओं एवं सूचना प्रणाली का प्रावधान।
  6. प्रचालन क्षेत्र अर्थात् रनवे, एप्रन, टेक्सी वे आदि का विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण।
  7. विजुअल एड्स का प्रावधान।
  8. संचार एवं नेविगेशन एड्स अर्थात् आईएलएस, डीवीओआर, डीएमई, रडार आदि का प्रावधान।

एएआई की वर्तमान स्थिति एवं निष्पादन

सुरक्षित विमान प्रचालन हेतु भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण सभी विमानपत्तनों एवं 25 अन्य स्थानों पर जमीनी अधिष्ठापनों के साथ संपूर्ण भारतीय वायु क्षेत्र एवं समीपवर्ती महासागरीय क्षेत्रों में वायु ट्रैफिक प्रबंधन सेवाएं (एटीएमएस) प्रदान करता है।

इलाहाबाद, अमृतसर, कालीकट, गुवाहाटीजयपुर, त्रिवेंद्रम, कोलकाता एवं चेन्नई के विमानपत्तन, जो आज अंतर्राष्ट्रीय विमानपत्तन के रूप में स्थापित हैं, विदेशी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों द्वारा भी प्रचालन के लिए खुले हैं। कोयम्बतूर, तिरुचिरापल्ली, वाराणसी एवं गया के हवाई अड्डों से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के अलावा राष्ट्रीय ध्वज वाहक भी प्रचालन करते हैं। केवल इतना ही नहीं अपितु आज आगरा, कोयम्बटूर, जयपुर, लखनऊ, पटना आदि के विमानपत्तनों तक टूरिस्ट चार्टर भी जाते हैं।


भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, बंगलुरु एवं नागपुर के विमानपत्तनों के उन्नयन के लिए तथा विश्वस्तरीय मानकों से से बराबरी करने के लिए पर एक संयुक्त उद्यम भी स्थापित किया है।

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा कोलकाता एवं चेन्नई के वायु ट्रेफिक नियंत्रण केंद्रों पर देशज प्रौद्योगिकी का प्रयोग करके ऑटोमेटिक डिपेंडेंस सर्विलांस सिस्टम (एडीएसएस) के सफल कार्यान्वयन ने भारत को दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्र में इस उन्नत प्रौद्योगिकी का प्रयोग करने वाला पहला देश होने का गौरव प्रदान किया जिससे उपग्रह आधारित संचार प्रणाली का प्रयोग करके  महासागरीय क्षेत्रों के ऊपर वायु ट्रेफिक का प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है। उपग्रह संचार लिंक के साथ रिमोट कंट्रोल्ड वीएचएफ कवरेज के प्रयोग ने हमारे एटीएमएस को और मजबूती प्रदान की है। वी-सेट अधिष्ठापनों द्वारा 80 स्थानों को जोड़ने से बड़े पैमाने पर वायु ट्रैफिक प्रबंधन में वृद्धि होगी और बदले में एयरक्राफ्ट के प्रचालन की सुरक्षा वृद्धि होगी। इसके आलावा, हमारे वृहद् एअरपोर्ट नेटवर्क पर प्रशासनिक एवं प्रचालनात्मक नियंत्रण संभव होगा। मुम्बई, दिल्ली एवं इलाहाबाद के विमानपत्तनों पर निष्पादन आधारित नेविगेशन (पीएनबी) प्रक्रिया पहले ही कार्यान्वित की जा चुकी है।

भारतीय विमानपतन प्राधिकरण ने भारतीय अंतरिक्ष एवं अनुसंधान केंद्र (इसरो) के साथ प्रौद्योगिकीय सहयोग से गगन परियोजना शुरू की है जहां नेविगेशन के लिए उपग्रह आधारित प्रणाली का प्रयोग किया जाएगा। इस प्रकार जीपीएस से प्राप्त नेविगेशन के संकेतों को हवाई जहाजों की नेविगेशन संबंधी आवश्यकता को पूरा करने के लिए उन्नत किया जाएगा। प्रौद्योगिकी प्रदर्शन प्रणाली का पहला चरण फरवरी 2008 में पहले ही सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। प्रचालनात्मक चरण में इस प्रणाली को स्तरोन्नत करने के लिए विकास टीम को सक्षम बनाया गया है।

व्भार्तीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने दिल्ली एवं मुंबई के विमानपत्तनों पर ग्राउंड बेस्ड ऑगमेंटेशन सिस्टम (जीबीएएस) उपलब्ध कराने की भी योजना बनाई है। यह जीबीएएस उपकरण हवाई जहाजों को श्रेणी-2 (वक्र एप्रोच) लैंडिंग सिगनल उपलब्ध कराने और इस प्रकार आगे चलकर लैंडिंग सिस्टम के विद्यमान उपकरण को प्रतिस्थापित करने में समर्थ होगा, जिसकी रनवे के प्रत्येक छोर पर जरूरत होती है।

ग्राहकों की अपेक्षाएं पर अधिक बल के साथ भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के प्रयास को उस स्वतंत्र एजेंसी से उत्साहवर्धक प्रत्युत्तर मिला है जिसने 30 व्यस्त विमानपत्तनों पर ग्राहक संतुष्टि सर्वेक्षण संचालित किया है। इन सर्वेक्षणों ने हमें विमानपत्तनों के प्रयोक्ताओं द्वारा सुझाव गए पहलुओं पर सुधार करने में समर्थ बनाया है। विमानपत्तनों पर हमारे व्यवसाय उत्तर पत्र के लिए रिसेप्टुकल लोकप्रिय हुए हैं; इन प्रत्युत्तरों ने हमें विमानपत्तनों के प्रयोक्ताओं की बदलती महत्वाकांक्षाओं को समझने में समर्थ बनाया है। सहस्राब्दि के पहले वर्ष के दौरान, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण अपने प्रचालन को अधिक पारदर्शी बनाने तथा अधुनातन सुचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करके ग्राहकों को तत्काल सूचना उपलब्ध कराने के लिए प्रयास कर रहा है।

विशिष्ट प्रशिक्षण, कर्मचारी प्रयुत्तर में सुधार तथा व्यावसायिक कौशल के उन्नयन पर फोकस स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के चार प्रक्स्हीं स्थापनाओं अर्थ नागरिक विमानन प्रशिक्षण कॉलेज (सीएटीसी), इलाहाबाद; राष्ट्रीय विमानन प्रबंधन एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईएएमएआर), दिल्ली और कोलकाता स्थित अग्नि प्रशिक्षण केंद्र (एफटीसी) के बारे में ऐसी अपेक्षा है कि वे पहले से अधिक व्यस्त रहेंगे।

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने सीएटीसी, इलाहाबाद एवं हैदराबाद एयरोपोर्ट पर प्रशिक्षण सुविधाओं को स्तरोन्नत करने की भी पहल की है। हाल ही में सीएटीसी पर एयरपोर्ट विजुअल सिमुलेटर (एवीएस) उपलब्ध कराया गया है तथा सीएटीसी, इलाहाबाद एवं हैदराबाद एअरपोर्ट को गैर-राडार प्रक्रियात्मक एटीसी सिम्युलेटर उपकरण की आपूर्ति की जा रही हैं।

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की एक समर्पित उड़ान निरीक्षण यूनिट (एफआईयू) है तथा इसके बेड़े में तीन हवाई जहाज हैं जो निरीक्षण में समर्थ अधुनातन एवं पूर्णतः स्वचालित उड़ान निरीक्षण प्रणाली से सुसज्जित हैं।

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