महिलाओं को सरकारी नौकरी में 20 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त होगा: सर्वोच्च न्यायालय Women will receive 20 per cent reservation in government jobs: Supreme Court

सर्वोच्च न्यायालय ने 29 नवंबर, 2010 को अपने निर्णय में यह व्यवस्था दी है कि महिलाओं को सीधी भर्ती वाली सरकारी नौकरियों में 20 प्रतिशत आरक्षण होगा। यह जाति एवं वर्ग से भिन्न होगा। उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति आफताब आलम और आर.एम. लोढ़ा की खंडपीठ ने यह आदेश उत्तर प्रदेश सरकार की अपील पर दिया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सरकार की योजना यह कहकर समाप्त कर दी थी कि यह आरक्षण के अंदर आरक्षण वाली योजना नहीं है।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एएजी शैल द्विवेदी तथा बंदना मिश्रा ने दलील दी थी कि यदि उच्च न्यायालय का फैसला माना जाए ती सरकार को आरक्षण के अंदर ही आरक्षण देना पड़ेगा, जबकि सरकार का यह आशय नहीं है। सरकार ने महिलाओं के लिए वर्गगत आरक्षण का प्रावधान किया है। श्री द्विवेदी ने कहा कि यह अनुच्छेद 15(3) के तहत् नौकरियों के लिए दिया गया विशेष आरक्षण है, जो अनुच्छेद 16(4) के अंतर्गत दिए जाने वाले सामाजिक आरक्षण से अलग है। यह आरक्षण सिर्फ महिलाओं के लिए है, जिसमें जाति, वर्ग और धर्म का कोई अर्थ नहीं है। महिलाएं स्वयं में एक विशेष वर्ग हैं। पूरे आदेश का आशय महिलाओं के लिए अवसरों का समतल मैदान बनाना है। अदालत ने उनकी दलील स्वीकार कर ली।

गौरतलब है कि असम सरकार ने 14 अगस्त, 2010 की सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की। इसी प्रकार तमिलनाडु, राजस्थान, उत्तराखण्ड इत्यादि में भी 30 प्रतिशत आरक्षण इस संदर्भ में प्रदान किया गया है। यहां तक कि राजस्थान में तो महिला कल्याण संबंधी परियोजनाओं में महिलाओं की 100 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया है।

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