कितना जानते हैं आप लोकसभा चुनावों के बारे में What You Know About Lok Sabha Election 2014

नरेन्द्र मोदी भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने दो लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों-वड़ोदरा और वाराणसी से चुनाव लड़ा और दोनो जगह से जीत हासिल की।

1984 के बाद पहली बार कोई भी दल प्रमुख विपक्षी दल बनने के लायक बहुमत नही प्राप्त कर सका. प्रमुख विपक्षी दल बनने के लिए कुल लोकसभा सदस्यों की संख्या का 1/10 अर्थात 54 सीट प्राप्त करना ज़रूरी है।

लोकसभा के कुल 543 निर्वाचित सदस्यों में से 65% यानि 349 सदस्यों ने एक लाख से ज़्यादा वोटों से जीत हासिल की।

लोकसभा में निर्वाचित कुल सांसदों में से 12 सांसद ही 30 वर्ष से कम उम्र के हैं, हिना गवित (भाजपा), दुष्यंत चौटाला (इंडियन नेशनल लोकदल) जिनकी उम्र 26 वर्ष है, लोकसभा के सबसे युवा सांसद हैं एवं 86 वर्ष के लाल कृष्ण आडवाणी सबसे वृद्ध सांसद हैं।

सन् 2009 के लोकसभा चुनाव में करोड़पति सांसदों की संख्या 319 थी, जो सन् 2014 के लोकसभा चुनावों में बढ़कर 449 हो गयी। कॉंग्रेस और भरतीय जनता पार्टी के बाद केवल दो पार्टियों आम आदमी पार्टी(AAP) और बहुजन समाज पार्टी(BSP) ने 400 सीटों पर चुनाव लड़ा था, BSP तो अपना ख़ाता भी नही खोल पायी, जबकि AAP केवल 4 सीटों पर ही जीत हासिल की।

66.2% मतदान के साथ सन् 2014 में संपन्न हुए 16वीं लोकसभा चुनाव का मतदान प्रतिशत सबसे अधिक रहा, इससे पूर्व सर्वाधिक प्रतिशत सन् 1984 में 64% एवं 2009 के लोकसभा चुनावों में यह केवल 58.2% था।

भारत में केवल दो शहरों दिल्ली में 7 एवं मुंबई में 6, लोकसभा सीटों की संख्या 5 से ज़्यादा है, इन सभी सीटों के उम्मीदवारों ने 1 लाख से ज़्यादा वोटों से जीत हासिल की और ये सभी उम्मीदवार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(NDA) के थे।

NOTA (None of the above) का प्रयोग करने वाला भारत 12वॉं देश है।इन चुनावों में 59, 97,054 मतदाताओं ने NOTA का इस्तेमाल किया। जो की कुल 543 निर्वाचन क्षेत्रों में पड़े कुल मतों का 1.1% है।

कुल योग्य मतदाताओं की संख्या 814,591,184 है, इनमें से पुरुष मतदाताओं की संख्या 426,615,513 है और महिला मतदाताओं की संख्या 387,911,330 है। 28314 'ट्रॅनस्जेंडर' मतदाताओं 'अन्य' की श्रेणी में हैं। 11,844 मतदाता प्रवासी भारतीय (NRI-Non Resident Indian) हैं।

पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं की संख्या 23,161,296 है।

कुल मतदान स्थलों की संख्या 930,000 है एवं सभी स्थानो पर EVM(Electronic Voting Machine) का प्रयोग किया जायेगा। EVM का पहली बार सन् 2004 के चुनावों में प्रयोग किया गया था।मतदाताओं की संख्या उत्तर-प्रदेश में सबसे ज़्यादा 134 मिलियन है एवं सबसे कम सिक्किम में मात्र 362,000 है।

इन चुनावों मे 52.4 पुरुष मतदाता हैं परंतु 6 राज्यों केरल, मणिपुर, मिज़ोरम, मेघालय, गोआ, अरुणाचल प्रदेश और दो केंद्र शासित प्रदेशों पुडुचेरी एवं दमन और दीव में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से ज़्यादा है।

असम, सिक्किम और लक्षद्वीप के स्वायत्त शासी क्षेत्रों को छोड़कर कोई भी उम्मीदवार किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ सकता है।

23,161,296 मतदाता पहली बार अपने मतों का प्रयोग करेंगे, जिनकी उम्र 18-19 वर्ष के बीच है। यह भारत के कुल मतदाताओं का 3% है।

उत्तर प्रदेश में सबसे ज़्यादा लोकसभा सीट 80 है, नगालैंड, सिक्किम, मिज़ोरम तथा केंद्र शासित प्रदेशों में केवल 1-1 लोकसभा सीट है।

अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, गोआ और केंद्र साशित प्रदेशों को छोड़कर किसी प्रत्याशी की अपने निर्वाचन क्षेत्र में चुनावी खर्च सीमा ₹  70,00,000 है और इन प्रदेशों यह सीमा ₹ 54,00.000 है।

नामांकन के समय किसी लोकसभा प्रत्याशी को ₹ 25,000 जमा करने पड़ते हैं, यदि यह प्रत्याशी कुल वैध मतों का 1/6 भाग पाने में असफल रहता है तो उसकी यह राशि जब्त कर ली जाती है। सन् 2009 के चुनावों में 85% उम्मीदवारों की जमानत राशि जब्त हो गयी थी।

मतदाताओं की संख्या के आधार पर आँध्र प्रदेश का मलकजगीरी निर्वाचन क्षेत्र सबसे बड़ा निर्वाचन है (2.95 Million) एवं लक्षद्वीप सबसे छोटा (47,972) क्षेत्र है। अरुणाचल प्रदेश के लोअर दिबांग वैली जिले के हूकानी मतदान केंद्र पर केवल 22 मतदाता ही पंजीकृत हैं। मतदान कर्मियों को यहाँ तक पहुचने के लिये 22 किमी. तक पैदल चलना पड़ता है।

आम चुनाव 2014 में 8,251 उम्‍मीदवारों ने चुनाव लड़ा, जिनमें से 668 महिला और 7578 पुरूष थे। 2014 में 61 महिलाएं संसद सदस्‍य चुनी गई, जबकि 2009 में यह संख्‍या 59 थी। 16वीं लोकसभा में महिलाओं की जीत का 6.36 प्रतिशत रहा। 2014 में उम्‍मीदवारों की प्रत्‍येक सीट पर औसत संख्‍या 15.2 रही।

आम चुनाव 2014 में निर्दलीय उम्मीदवारों में अब तक सबसे कम उम्मीदवार निर्वाचित हुए है। चुनाव लड़ रहे कुल 8251 उम्मीदवारों में 3234 निर्दलीय उम्मीदवार थे और इनमें से केवल तीन निर्दलीय उम्मीदवार ही निर्वाचित हुए है। 2009 के पिछले आम चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों की कुल संख्य 3831 थी जिनमें से 9 उम्मीदवार निर्वाचित हुए। सबसे ज्यादा निर्दलीय निर्वाचित उम्मीदवारों की संख्या 42 थी (दूसरा आम चुनाव 1957); और 1996 में 11वें आम चुनाव में सर्वाधिक निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या 10635 थी।

16वें आम चुनाव में 464 राजनीतिक दलों ने भागीदारी की। इनमें 6 राष्ट्रीय दल, 39 राज्य स्तरीय दल और 419 गैरमान्यता प्राप्त दल शामिल हैं। 2009 के आम चुनाव में 363 दलों ने भाग लिया था जिनमें 7 राष्ट्रीय दल, 34 राज्य स्तरीय दल और 322 गैरमान्यता प्राप्त दल शामिल थे।

आम चुनाव 2014 से पहले देश में कुल 1,687 पंजीकृत राजनीतिक दल थे जिनमें 6 राष्ट्रीय दल, 47 राज्य स्तरीय दल और 1,634 गैरमान्यता प्राप्त दल शामिल थे। 2009 में पंजीकृत दलों की संख्या कुल 1,060 थी। राजनीतिक दलों की कुल संख्या 2004 में 764 से बढ़कर 2014 में 1,687 हो गई। यह संख्या बढ़ने का सबसे बड़ा कारण गैरमान्यता प्राप्त दलों की संख्या थी जो 2004 में 702 से बढ़कर 2014 में 1,634 हो गई।

आम चुनाव 2014 में मतदान करने वाले मतदाताओं के 66.4 प्रतिशत होने के फलस्वरूप भारत में अब तक के सर्वाधिक मत पडे हैं। पिछली बार 1984 में 64.01 प्रतिशत का सर्वाधिक मतदान हुआ था। 2009 के पिछले आम आम चुनाव में 58.19 प्रतिशत मतदाताओं ने भाग लिया। पूर्ण संख्या की दृष्टि से  834101479 मतदाताओं में से 553801801 लोगों ने आम चुनाव 2014 में अपने मत का इस्तेमाल किया। इनमें से 65.3 प्रतिशत महिला तथा 67.09 प्रतिशत पुरुष मतदाता थे।

अटल बिहारी वाजपेयी इकलौते एसे सांसद हैं जिन्होने 4 अलग-अलग राज्यों से चुनाव लड़ा और वाजपेयी एकमात्र ऐसे राजनेता रहे जिन्होने 6 अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों से जीत हासिल की, बलरामपुर-1957,1967, ग्वालियर-1971, नई दिल्ली-1977,1980,  विदिशा-1991, गाँधीनगर-1996, लखनऊ-1991,1996,1998।

गुंटूर से तेलगु देशम पार्टी के निर्वाचित सांसद . जयदेव गल्ला की सर्वाधिक संपन्न सांसद हैं, इनकी कुल परिसंपत्तियों का मूल्य ₹ 683 करोड़ है एवं सबसे कम परिसांम्पतियों वाली सांसद राजस्थान सीकर से निर्वाचित भाजपा की सुमेधा नंद सरस्वती हैं, इनकी कुल घोषित परिसंपत्ति ₹ 34,311 है।

16वीं लोकसभा चुनावों में कुल सरकारी व्यय ₹ 3426 करोड़ अनुमानित है तथा यह 2009 के लोकसभा चुनावों के कुल व्यय ₹ 1483 करोड़ से लगभग 150% अधिक है।

2014 के लोकसभा चुनावों में सबसे ज़्यादा मतों से जीतने का कीर्तिमान नरेन्द्र मोदी ने स्थापित किया। इन्होने वडोदरा सीट से 5,50,128 मतों के अंतर से विजय प्राप्त की। दूसरा स्थान भाजपा के ही वी. के. सिंह के नाम रहा जिन्होने ग़ाज़ियाबाद सीट से 5,67,207 मतों कॉंग्रेस प्रत्याशी राज बब्बर से जीत हासिल की।

अब तक हुए सभी लोकसभा चुनावों में सर्वाधिक वोटों से जीतने का रिकॉर्ड माकपा के अनिल बसु के नाम है। अनिल बसु ने 2004 के लोकसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल की आरामबाग सीट से 5,92,502 मतों से अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को हराया था। 2014 के चुनावों में सबसे कम मतों से जीतने वाले लद्दाख से भाजपा उम्मीदवार थुपस्तान छिवांग हैं जिन्होने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी निर्दलीय उम्मीदवार गुलाम रज़ा को मात्र 36 मतों से हराया, इस मामले में दूसरा स्थान भाजपा के चंदू लाल साहू का रहा जिन्होने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कॉंग्रेस के अजीत जोगी को 1217 मतों से हराया।

कुल 16 लोकसभा चुनावों में सबसे कम मतों से जीतने का रेकॉर्ड कॉंग्रेस के कोनथला कृष्ण और भाजपा के सोम मरांडी के नाम है। कोनथला कृष्ण ने 1989 में आँध्र प्रदेश के अनकपल्ली सीट से तथा सोम मरांडी ने 1998 में बिहार की राजमहल सीट से 9-9 मतों से जीत हासिल की थी।

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