अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी कार्यक्रम एवं विधि Welfare Programs and Law for the Most Vulnerable Groups

अनुसूचित जातियों के लिए कल्याणकारी योजनाएं

अनुसूचित जातियों के लिए संवैधानिक मौलिक अधिकारों के अतिरिक्त राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग संवैधानिक संस्था के स्तर पर स्थापित किया गया है जो अनुसूचित जाति को प्राप्त सभी सुरक्षाओं के नियमित कार्यान्वयन की निगरानी करता है। इसके अतिरिक्त आयोग की इस वर्ग के उत्थान को बढ़ावा देने वाले वे सभी अधिकार प्राप्त हैं जो किसी मामले की सुनवाई कर रहे सिविल न्यायालय को प्राप्त होते हैं। अनुसूचित जातियों की सर्वाधिक आबादी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक तथा राजस्थान में निवास करती है जो अनुसूचित जाति की कुल जनसंख्या का 85.1 प्रतिशत है। अरुणाचल प्रदेश में कोई अनुसूचित जाति नहीं है। सामाजिक निर्योग्यता, अस्पृश्यता, गरीबी तया अत्याचारों से पीड़ित इस वर्ग के उत्थान हेतु सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय निम्नलिखित कार्य सम्पादित करवाता है-

  • विशेष संघटक योजना के माध्यम से कृषि, ग्रामीण विकास,लघु एवं कुटीर उद्योग, लघुसिंचाई, ग्रामीण विद्युतीकरण, आवास, शिक्षा तथा स्वास्थ्य से संबंधित विकास कार्यों को भारत सरकार 13 अन्य मंत्रालयों के माध्यम से संचालित करता है ताकि ग्रामीण अनुसूचित जातियों का समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास हो सके। बीस सूत्री कार्यक्रम के अंतर्गत परिवारोन्मुखी आय सृजक कार्यक्रमों की मॉनीटरिंग भी यही मंत्रालय करता है।
  • सफाई कर्मचारियों और उनके आश्रितों की मुक्ति तथा पुनर्वास की राष्ट्रीय योजना सन् 1992 से संचालित की जा रही है ताकि सिर पर मैला ढोने की कुप्रथा समाप्त हो सके तथा संबंधित वर्ग समाज में सम्मानित जीवन जी सके।
  • राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के माध्यम से वर्ष 1978-79 से 19 राज्यों तथा 4 संघ राज्य क्षेत्रों में स्वरोजगार, कौशल विकास, कृषि, व्यवसाय तथा परिवहन के रोजगारोन्मुखी योजनाएं संचालित करता है।
  • अनुसूचित जातियों के वियार्थियों को मैट्रिक पूर्व तथा मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्तियां इस मंत्रालय द्वारा 50 प्रतिशत सहायता के रूप में राज्य सरकारों को प्रदान की जाती है।
  • अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए चिकित्सा, इंजीनियरिंग, पशुचिकित्सा, कृषि तथा पॉलिटेक्निक विषयों पर पुस्तक बैंक योजना के अंतर्गत वितीय सहायता प्रदान करता है।
  • अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए प्रतिवर्ष 30 राष्ट्रीय समुद्रपारीय छात्रवृतियां प्रदान की जाती हैं ताकि इस वर्ग के उम्मीदवार उच्चतर अध्ययन कर सकें।
  • किसी विदेशी सरकार या संगठन से योग्यता छात्रवृति प्राप्त करने में सफल होने वाले अनुसूचित जाति इत्यादि के उम्मीदवारों को यात्रा अनुदान इस मंत्रालय द्वारा स्वीकृत किया जाता है।
  • चौथी पंचवर्षीय योजना से अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को सिविल, मेडिकल, इंजीनियरिंग तथा बैंकिंग इत्यादि परीक्षाओं से पूर्व प्रशिक्षण हेतु वित्तीय सहायता यह मंत्रालय प्रदान करता है।
  • अनुसूचित जाति एवं अन्य पिछड़े वर्गों सहित दुर्बल वर्गों के वियार्थियों हेतु कॉल सेंटर ट्रेनिंग की व्यवस्था करता है।
  • अनुसूचित जातियों के विद्यार्थियों को एम. फिल एवं पी.एच.डी. हेतु राजीव गांधी राष्ट्रीय फेलोशिप प्रदान करता है।
  • अनुसूचित जातियों की लड़कियों तथा लड़कों के लिए पृथक्-पृथक् छात्रावास सुविधा को इस मंत्रालय द्वारा प्रायोजित किया जा रहा है।
  • नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1905 तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की क्रियान्विति हेतु भारत सरकार का यह मंत्रालय सार्थक प्रयास करता है।
  • अनुसूचित जाति विकास संबंधी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण सरकारों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
  • डॉ. अम्बेडकर प्रतिष्ठान, डॉ. अम्बेडकर राष्ट्रीय सार्वजनिक पुस्तकालय,विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्यरत् डॉ. अम्बेडकर पीठें, डॉ. अम्बेडकर समुद्रपारीय फैलोशिप, डॉ. अम्बेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार तया हिंदी एवं अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की संग्रहीत कृतियों से संबंधित आवश्यक कार्य केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन हैं।

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