सर्वोच्च न्यायालय द्वारा महाराष्ट्र में डांस बार बंद करने का प्रदेश सरकार का फैसला रद्द Supreme Court decided to cancel to close dance bars in Maharashtra, by the state government

सर्वोच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर व न्यायमूर्ति निज्जर की पीठ ने महाराष्ट्र में डांस बार बंद करने के प्रदेश सरकार के इस निर्णय की रद्द करने के बम्बई उच्च न्यायालय के फैसले को सही ठहराते हुए महाराष्ट्र सरकार की याचिका 16 जुलाई, 2013 को रद्द कर दी है। इससे प्रदेश में आठ वर्षों से बन्द रहे डांस बारों के पुनः खुलने की दिशा में मार्ग प्रशस्त हो गया है, महाराष्ट्र सरकार ने अपने फैसले पर अडिग रहते हुए सर्वोच्च न्यायालय में इस मुद्दे पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की घोषणा की है।

ध्यातव्य है कि महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2005 में प्रदेश में डांस बारों पर प्रतिबंध लगाया था। महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे पुलिस अधिनियम, 1961 की धारा 33(क) में संशोधन कर ऐसा आदेश पारित किया था, जिसमें उच्चवर्गीय होटलों में लड़कियों द्वारा नृत्य की अनुमति थी एवं अन्य जगहों की ऐसा करने से प्रतिबंधित किया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय की पीठ के अनुसार, 2005 में सरकार के इस आदेश से 75,000 से अधिक महिला कर्मी बेरोजगार हो गई। उनमें से अधिकतर को अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए वेश्यावृत्ति करनी पड़ी। प्रदेश सरकार के इस आदेश को अनुचित ठहराते हुए बम्बई उच्च न्यायालय ने इसे वर्ष 2006 में रद्द कर दिया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने बम्बई उच्च न्यायालय के इस फैसले के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी। पीठ ने कहा कि यह न्यायसंगत नहीं है कि कुछ जगहों पर लड़कियों द्वारा नृत्य की अनुमति दी जाए और अन्य को प्रतिबंधित किया जाए। यह संविधान की उद्देशिका के स्पष्ट रूप से उद्दत दर्शन एवं अनुच्छेद-15 के खिलाफ है जिसमें जाति, रंग, संप्रदाय, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव का प्रतिषेध किया गया है।

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