सौरमंडलीय पिण्ड Solar System Bodies

सौरमंडलीय पिण्डों की तीन श्रेणियां Three Categories of Solar System Bodies

अंतरिक्ष संबंधी नामकरण के लिए एकमात्र अधिकृत संस्था अन्तर्राष्ट्रीय खगोलशास्त्रीय संघ (International Astronomical Union—IAU, स्थापना वर्ष–1919 ई०) के प्राग सम्मेलन (2006 ई०) में सौर मंडल में मौजूद पिण्डों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। ये हैं-

1. परम्परागत ग्रहबुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण व वरुण
2. बौने ग्रह या प्लूटोन्सप्लूटो, चेरॉन, सेरेस व जेना (2003 यू०बी० 313)
3. लघु सौर मंडल पिण्डक्षुद्रग्रह, धूमकेतु या पुच्छल तारा, उल्का, उपग्रह व अन्य छोटे खगोलीय पिण्ड

परम्परागत ग्रह Classical Planets

अंतर्राष्ट्रीय खगोलशास्त्रीय संघ (LAU) के नवीनतम परिभाषा के अनुसार ग्रह वे खगोलीय पिण्ड हैं जो निम्नलिखित तीन शर्तों को पूरा करते हैं –

1. सूर्य की परिक्रमा करते हों,

2. उनका द्रव्यमान कम-से-कम इतना हो कि अपने गुरुत्वाकर्षण के कारण उसका आकार लगभग गोल हो गया हो तथा

3. वह अपने पड़ोसी पिण्डों की कक्षा की नहीं लांघता हो।


उपर्युक्त परिभाषा के आधार पर आधुनिक खगोलविदों ने प्लूटो (यम) की ग्रह के रूप में चली आ रही मान्यता को समाप्त कर दिया है, जिससे ग्रहों की संख्या 9 से घटकर 8 हो गई है। प्लूटो को अब बौने ग्रह (Dwarf Planets) की श्रेणी में रखा गया है।

प्राग सम्मलेन
सौरमंडल में ग्रहों की नवीन परिभाषा देने के लिए 15-24 अगस्त, 2006 को चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में एक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसे प्राग सम्मेलन (Prague Summit) कहा गया। इस सम्मेलन में कुल 75 देशों के 2500 से अधिक खगोलविदों ने भाग लिया । सम्मेलन में प्लूटो को खगोलविदों ने ग्रहों की बिरादरी से बेदखल कर दिया जिससे ग्रहों की संख्या 9 से घटकर 8 रह गई । प्लूटो को तीन अन्य खगोलीय पिण्डों चेरॉन (Cheron), सेरस (Ceres) तथा जेना 2003 यू बी 313 (Xena-2003 UB 313) के साथ बौने ग्रह की श्रेणी में रखा गया है। यह सम्मेलन 10 दिन तक चला। अमेरिकी अंतरिक्ष शोध एजेंसी (NASA) ने प्राग सम्मेलन के घोषणा को अपमानजनक बताते हुए इसका विरोध किया है।

ग्रह के लिए प्रयुक्त होनेवाला अंग्रेजी शब्द Planet ग्रीक शब्द Planetes से बना है। Planetes का अर्थ है घुमक्कड़ या यायावर (vvanderer)। अतः Planet शब्द मुख्यतः ग्रहों की सतत् गतिशीलता का परिचायक है। आकाश में सभी ग्रह अपनी स्थिति बदलते रहते हैं, जिसके कारण ये आकाश में बहुत कम दिखाई पड़ते हैं और कभी-कभी गायब भी हो जाते हैं। इसलिए इनको प्लेनेट कहा जाता है। अब तक ज्ञात ग्रहों का नामकरण रोम के देवताओं के नाम के आधार पर किया गया है जैसे मरक्यूरी, वीनस, मार्स, जुपिटर, सैटर्न, यूरेनस एवं नेप्च्यून।

ग्रहों का अपना प्रकाश नहीं होता है तथा ये सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित होते हैं।

परम्परागत ग्रहों में छः ग्रहों- बुध (Mercury), शुक्र (venus), पृथ्वी (Earth), मंगल (Mars), वृहस्पति (Jupiter) व शनि (saturn)- के बारे में जानकारी प्राचीन काल से ही थी। दो अन्य ग्रहो - अरुण (Uranus) व वरुण (Neptune) की खोज दूरबीन (Telescope) के आविष्कार के पश्चात् हुई। अरुण की खोज 1781 ई० में विलियम हर्शल (William Herschel) ने की तथा वरुण की खोज 1846 ई० में जॉन गैले (John Galle) ने की।

ग्रहों का क्रम Order of Planets:
1. सूर्य से दूरी के अनुसार:बुध (Mercury), शुक्र (venus), पृथ्वी (Earth), मंगल (Mars), बृहस्पति (Jupiter), शनि (saturn), अरुण (Uranus) व वरुण (Neptune)।
2. पृथ्वी से दूरी के अनुसारशुक्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शनि, अरुण व वरुण
3. आकार के अनुसार:बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण, पृथ्वी, शुक्र, मंगल व बुध

परम्परागत ग्रहों का परिचय

बुध Mercury

यह सूर्य का निकटतम ग्रह है। इसकी सूर्य से औसत दूरी 5 करोड़ 80 लाख किमी० है। यह सौर मंडल का सबसे छोटा ग्रह भी है (प्लूटो की ग्रह के रूप में मान्यता समाप्त होने के बाद)। यह आकार में पृथ्वी के उपग्रह चन्द्रमा से थोड़ा बड़ा है। इसका व्यास लगभग 4,900 किमी० है। यह 88 दिन में सूर्य की परिक्रमा कर लेता है। यह अपने दीर्घवृतीय कक्ष में 1,76,000 किमी० प्रति घंटे की गति से घूमता है। यह गति इसे सूर्य की गुरुत्वाकर्षण शक्ति की पकड़ से सुरक्षित रखती है। इसे अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाने में 59 दिन लगता है। इसका द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का 0.056 गुना है। इसका घनत्व 5.6 ग्राम प्रति घन सेमी० है। बुध का अधिक घनत्व यह सिद्ध करता है कि इसकी सतह भारी तत्वों से बनी है। इसका क्रोड लोहे से बना हुआ है। इसका गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी का 3/8 वाँ भाग है।

बुध ग्रह पर वायुमंडल नहीं है। यहाँ दिन अतिशय गर्म और रातें बफीली होती हैं। बुध का एक पूरा दिन पृथ्वी के 176 दिनों के बराबर अवधि का होता है (बुध का सिर्फ दिन पृथ्वी के 90 दिनों के बराबर अवधि का तथा इतने ही अवधि की सिर्फ रात होती है)। बुध चन्द्रमा के सदृश दिखायी देता है तथा यहाँ पर भी चन्द्रमा की तरह बड़े-बड़े पहाड़ व ज्वालामुखी के मुँह है। यहाँ पर एक कैलोरिस बेसिन (Caloris Basin) है। इस बेसिन का व्यास 1,300 किमी० है तथा यह सतह से 2,000 मीटर ऊँचे पर्वतों से चारों ओर से घिरी हुई है। बुध ग्रह का कोई उपग्रह नहीं है।

शुक्र Venus

बुध के बाद यह सूर्य का निकटतम ग्रह है। इसकी सूर्य से औसत दूरी 10 करोड़ 82 लाख किमी० है। यह आकार और भार में पृथ्वी के लगभग बराबर है। इसलिए इसे पृथ्वी की बहिन (Earth's sister) तथा पृथ्वी का जुड़वां (Earth's Twin) भी कहा जाता है। इसे अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाने में 243 दिन लगता है।

यह अरुण (Uranus) की भाँति पृथ्वी की विपरीत दिशा में अर्थात् पूर्व से पश्चिम दिशा में घूर्णन करता है। इसका द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का 0.815 गुना है। इसका घनत्व 5.2 ग्राम प्रति घन सेमी० है। शुक्र ग्रह गर्म और तपता हुआ ग्रह है। यह सूर्य और चन्द्रमा को छोड़कर सबसे चमकीला दिखायी देता है। इसके चारों ओर सल्फ्यूरिक एसिड के जमे हुए बादल हैं, जो शुक्र के धरातल से 80 किमी० ऊँचाई पर हरदम छाये रहते हैं। ये बादल शुक्र पर पड़नेवाली सूर्य की अधिकांश किरणों (76% किरणों) को परावर्तित कर देते हैं। शुक्र ग्रह का अधिकतर भाग घुमावदार मैदानों से ढंका है तथा इस ग्रह पर कुछ जीवित ज्वालामुखी भी हैं।

शुक्र ग्रह का वायुमंडल लगभग 97% कार्बन डाईऑक्साइड से भरा हुआ है तथा शेष नाइट्रोजन, जलवाष्प तथा अन्य तत्व से। शुक्र का वायुमंडलीय दाब पृथ्वी के वायुमंडलीय दाब से 90 गुना ज्यादा है।

प्रातः पूर्वी आकाश में एवं सायं पश्चिमी आकाश में दिखायी पड़ने के कारण इसे क्रमशः भोर का तारा (Morning Star) तथा सांझ का तारा (Evening star) भी कहते हैं।

बुध ग्रह की भाँति शुक्र ग्रह का भी कोई उपग्रह नहीं है।

पृथ्वी Earth

अवस्थिति Position: पृथ्वी शुक्र और मंगल के मध्य स्थित ग्रह है।

सूर्य से दूरी Distance from Sun: यह सूर्य से दूरी के अनुसार तीसरा ग्रह है। पृथ्वी की सूर्य से औसत दूरी 14 करोड़ 95 लाख 98 हजार 5 सौ किमी० [=1 खगोलीय इकाई (Astronomical Unit-A.U.)] है। सूर्य से इसकी निकटतम दूरी (Perihelion) 14.73 करोड़ किमी० तथा अधिकतम दूरी (Aphelion) 15.2 करोड़ किमी० है। सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश पहुँचने में 8 मिनट 18 सेकण्ड (498 सेकण्ड) लगता है।

आकार Size: आकार के अनुसार यह पांचवाँ सबसे बड़ा तथा चौथा सबसे छोटा ग्रह है (प्लूटो की ग्रह के रूप में मान्यता समाप्त होने के बाद)। इसका औसत व्यास लगभग 12,740 किमी० है। इसका विषुवत्रेखीय व्यास 12,756 किमी० तथा ध्रुवीय व्यास 12,714 किमी० है।

आकृति Shape: सामान्यतया पृथ्वी की आकृति गोलाकार है किन्तु यह ध्रुव पर कुछ चिपटा तथा विषुवत रेखा पर कुछ फुला हुआ है। पृथ्वी की इस लगभग गोलाकार आकृति को लक्ष्वभ गोलाभ (Oblate spheriod / Ellipsoid /Geoid) कहा जाता है।

परिक्रमण (Revolution) या वार्षिक गति: यह सूर्य की परिक्रमा 1,07,160 किमी० प्रति घंटे की गति से 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 4551 सेकण्ड (या 365.25636 दिन या 365 1/4 दिन) में पूरी करती है। पृथ्वी अपने कक्ष (Orbit) पर सूर्य के परितः एक दीर्घवृतीय या अण्डाकार मार्ग (elliptical path) पर चक्कर काटती है। पृथ्वी अपने कक्ष पर 66 1/2° झुकी हुई है। परिक्रमण के कारण पृथ्वी पर ऋतु परिवर्तन होता है। यदि पृथ्वी अपने कक्ष पर परिक्रमण बंद कर दे तो पृथ्वी के आधा भाग पर सदैव एक ऋतु तथा शेष आधा भाग पर सदैव दूसरा ऋतु रहेगा।

घूर्णन (Rotation) या दैनिक गति: पृथ्वी अपने अक्ष या धुरी (axis) पर पश्चिम से पूर्व की ओर 1,610 किमी० प्रति घंटे की गति से 23 घंटे 56 मिनट 4.091 सेकण्ड में एक पूरा चक्कर काटती है। पृथ्वी अपने अक्ष पर 23°26’59" (लगभग 231/2°) अक्षांश झुकी हुई है। घूर्णन के कारण पृथ्वी पर दिन-रात होते हैं। यदि पृथ्वी अपने अक्ष पर घूर्णन बंद कर दे तो पृथ्वी का आधा भाग सदैव प्रकाश में रहेगा तथा शेष आधा भाग सदैव अंधकार में।

द्रव्यमान (Mass) व घनत्व (Density): पृथ्वी का द्रव्यमान 5.976 ×1024 किग्रा० है। पृथ्वी का घनत्व 5.52 ग्राम प्रति घन सेमी० है।

संरचना Structure: पृथ्वी की आंतरिक संरचना सियाल (sial), सीमा (sinna) और निफे (Nife) से हुई है। मध्य तापमान, ऑक्सीजन और प्रचुर मात्रा में जल की उपस्थिति (71% क्षेत्र पर जल का विस्तार) के कारण पृथ्वी सौरमंडल का अकेला ऐसा ग्रह है जहाँ जीवन (life) है। पृथ्वी को नीला ग्रह (Blue Planet) भी कहा जाता है क्योंकि अंतरिक्ष से यह नीला दिखाई देता है। नीला दीखने का कारण जल है ।

वायुमंडल Atmosphere: पृथ्वी के ऊपर वायुमंडल का आवरण है। वायुमंडल का 78.03% नाइट्रोजन से तथा 20.99% ऑक्सीजन से निर्मित है। स्पष्ट है कि वायुमंडल का 99.02% भाग सिर्फ नाइट्रोजन व ऑक्सीजन से ही बना है। वायुमंडल पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण पृथ्वी से बंधा हुआ है।

उपग्रह Satellite: पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह चन्द्रमा (Moon) है।

मंगल Mars

यह सूर्य से दूरी के अनुसार चौथा ग्रह है। सूर्य से इसकी दूरी 22 करोड़ 80 लाख किमी० है। यह सौरमंडल का दूसरा छोटा ग्रह है (प्लूटो की ग्रह के रूप में मान्यता समाप्त होने के बाद)। इसका व्यास 6,800 किमी० है। पृथ्वी का दूसरा पड़ोसी ग्रह है। यह सूर्य की परिक्रमा 686 दिन में पूरी करता है। चूंकि मंगल अपने कक्ष पर झुकी हुई है, अतः यहाँ ऋतुएँ भी होती हैं। यहाँ 6 महीने गर्मी और 6 महीने जाड़े का मौसम होता है। इसे अपने अक्ष या धुरी पर एक चक्कर लगाने में 24.7 घण्टा लगता है। इसका द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का 0.107 गुना है। इसका घनत्व 3.95 ग्राम प्रति घन सेमी० है। इसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति पृथ्वी के मात्र एक तिहाई के बराबर है। मंगल की भूमि बंजर है। इसका रंग इसके मिट्टी में लौह ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण लाल है। अतः इसे लाल ग्रह (Red Planet) भी कहते हैं। मंगल ग्रह की सतह अत्यंत जटिल है। यहाँ पर बड़े-बड़े रेगिस्तान, ज्वालामुखी व पर्वत पाये जाते हैं। मंगल का सबसे ऊँचा पर्वत निक्स ओलम्पिया (Nix Olympia) है जो एवरेस्ट से तीन गुना ऊँचा है। मंगल पर सबसे बड़ा ज्वालामुखी आलम्पस मोन्स है। यहाँ पर चैनल भी पाया जाता है। इनमें से एक चैनल वैलेस मैरिनरिस (valles Marineris) है। इसकी लंबाई 4,000 किमी०, चौड़ाई 200 किमी० व गहराई 6 किमी० है। इसकी सतह पर गहरे गड़े, ज्वालामुखी और ऐसी घाटियाँ हैं जिससे पता चलता है कि यहाँ पर कभी पानी का मुक्त बहाव था।

मंगल के चारों ओर एक पतला वायुमंडल पाया जाता है। वायुमंडलीय दाब बहुत कम है। वायुमंडल का 95% भाग दमघोंटू कार्बन डाईऑक्साइड से बना है। शेष में नाइट्रोजन, ऑर्गन तथा थोड़ी मात्रा में जलवाष्प उपस्थित है। थोड़ी मात्रा में हाइड्रोजन, ऑक्सीजन व ओजोन भी पाया जाता है। 1976 में वायकिंग यान मंगल की सतह पर उतरा। वायकिंग की खोज से यह पता चला कि यहाँ पर जीवन की कोई संभावना नहीं है। मंगल ग्रह पर भेजे गए अन्य अंतरिक्ष अभियान हैं -पाथ फाइंडर, मार्स ओडिसी, बीगल-2 (2003), स्पिरिट व अपार्च्युनिटी (2004)।

फोबोस (Phobos) व डीमोस (Deimos) मंगल ग्रह के दो उपग्रह हैं। डीमोस सौर मंडल का सबसे छोटा उपग्रह है।

बृहस्पति Jupiter

यह सूर्य से दूरी के अनुसार पांचवां ग्रह है। सूर्य से इस ग्रह की दूरी 77 करोड़ 80 लाख किमी० है। यह सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। इसका व्यास 1 लाख 43 हजार किमी० है। यह सूर्य की परिक्रमा करने में 11.9 वर्ष लगाता है। इसे अपने अक्ष या धुरी पर एक चक्कर लगाने में 9.8 घंटा लगता है। यह सौर मंडल का सबसे भारी ग्रह है। इसका द्रव्यमान सौर मंडल के सभी ग्रहों का 71% है। इसका द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का 318 गुना है। इसका घनत्व 131 ग्राम प्रतिघन सेमी० है। इसका गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के 5 गुना अधिक है। बड़ा होने पर भी इसकी गति बहुत तेज है। इस तीव्र गति के कारण इसका ध्रुवीय प्रदेश अधिक पतला हो गया है। वस्तुतः यह गैस व द्रव का बना गोला है जिसमें कोई ठोस धरातल नहीं है। यह हल्के पदार्थों से बना है जिसमें हाइड्रोजन अमोनिया, मिथेन और हीलियम की प्रधानता है। बृहस्पति की सतह का तापमान जहाँ- 108°C होता है वहीं भीतरी तापमान 25000°C तक। पायनियर (Pioneer) अंतरिक्ष अभियान द्वारा प्राप्त चित्रों के अनुसार बृ हस्पति के विशालकाय लाल धब्बे (Great Red sports) की जानकारी मिली है। वोयेजर-1 (voyager-1) के द्वारा बाद में पता लगा कि ये लाल धब्बे अशांत बादलों के घेरे में विशाल चक्र वात हैं। यहाँ पर धूल भरे वलय और ज्वालामुखी भी हैं।

बृहस्पति के चारों ओर वायुमंडल का हजारों किलोमीटर मोटा आवरण पाया जाता है। इसका वायुमंडल अधिकांशतः हाइड्रोजन एवं हीलियम से बना है। अन्य तत्वों में अमोनिया व मिथेन गैस शामिल हैं। बृहस्पति सूर्य से जितनी ऊर्जा अवशोषित करता है उससे अधिक विकिरण द्वारा उत्सर्जित कर देता है। इसका विकिरण ऊष्माविहीन विद्युत चुम्बकीय है। इसके वायुमंडल में तापमान -125°C तक रहता है।

बृहस्पति के 67 उपग्रह हैं जिनमें गैनिमीड (Ganymede) सबसे बड़ा है। यह सौर मंडल का भी सबसे बड़ा उपग्रह है। अन्य उपग्रहों में आयो, यूरोपा, कैलिस्टो, आलमथिआ आदि प्रमुख हैं।

शनि Saturn

यह सूर्य से दूरी के अनुसार छठा ग्रह है। सूर्य से इस ग्रह की दूरी 142 करोड़ 70 लाख किमी० है। यह आकार में बृहस्पति के बाद सौर मंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है। इसका व्यास 1 लाख 20 हजार किमी० है। यह सूर्य की परिक्रमा करने में 29.5 वर्ष लगाता है। यह अपनी धुरी पर 10.2 घंटा में एक चक्कर लगाता है। इसका द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का 95 गुना अधिक है। शनि ग्रह का घनत्व सौर मंडल के ग्रहों में सबसे कम है । इसका घनत्व मात्र 0.70 ग्राम प्रति घन सेमी० है और पानी में डाल दिये जाने पर यह तैरने लगेगा। यह ग्रह गैस व द्रव से बना है। यहाँ ठोस धरातल का अभाव है। यह हल्के तत्वों से बना है जिसमें हाइड्रोजन व हीलियम प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त इसमें अमोनिया, मिथेन आदि हैं। इस ग्रह का तापमान -139°C है।

इसका वायुमंडल अधिकांशतः हाइड्रोजन व हीलियम से बना है। यह बृहस्पति से अधिक ठंढा ग्रह है। इसके वायुमंडल में औसत तापमान -180°C होता है। शनि ग्रह की सबसे बड़ी विशिष्टता यह है कि इसके चारों ओर वलय (Rings) पाये जाते हैं। इन वलयों की संख्या 10 है। वोयेजर-1 (voyager 1) ने पता लगाया कि ग्रह के वलय हजारों सपीली तरंगों की पट्टियाँ हैं जिनकी मोटाई लगभग 100 फीट है।

आकाश में यह ग्रह पीले तारे के समान नजर आते हैं। यह अंतिम ग्रह है जिसे नंगी ऑखों से देखा जा सकता है। इसके बाद के ग्रह नंगी आँखों से नहीं देखे जा सकते।

शनि के अभी तक 62 उपग्रह ज्ञात हैं। इसका सबसे बड़ा उपग्रह टाइटन (Titan) है। टाइटन की खोज क्रिस्टियान हाइगन्स (Christiaan Huygens) ने की। टाइटन में नाइट्रोजन युक्त वायुमंडल पाया जाता है। यह सौर मंडल का एकमात्र उपग्रह है जहाँ घना वायुमंडल पाया जाता है। इस वायुमंडल की उपस्थिति से जीवन के लक्षण का पता चलता है। लेकिन यहाँ पर जीवन का अस्तित्व नहीं मिलता। अन्य उपग्रहों में एटलस, मीमास, इंक्लेडस, टेथिस, डायोन, रिया, हाइपेरियोन और फोइबे उल्लेखनीय हैं।

अरुण Uranus

इस ग्रह की खोज 1781 ई० में सर विलियम हर्शल (williarn Herschel) ने की। अरुण को प्रथम आधुनिक ग्रह कहा जाता है।

सूर्य से दूरी के अनुसार यह सातवां ग्रह है। सूर्य से इसकी दूरी 286 करोड़ 90 लाख किमी० है। यह आकार में सौर मंडल का तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है। इसका व्यास 52,000 किमी० है। यह सूर्य की परिक्रमा करने में 84 वर्ष लगाता है। अपने धुरी के लम्ब के साथ 90° झुके रहने के कारण यह एकमात्र ऐसा ग्रह है जो एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक अपनी परिक्रमा कक्ष में सूर्य के सामने रहता है और पहियों की तरह घूमता है। इसीलिए इसे लेटा हुआ ग्रह कहा जाता है। यह अपने अक्ष या धुरी पर 10.8 घंटा में एक चक्कर लगाता है। इसका द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का 14.5 गुना है। इसका घनत्व 1.21 ग्राम प्रति घन सेमी० है। इस ग्रह पर ठोस धरातल का अभाव है। इसके सतह का तापमान -197°C है।

इस ग्रह का वायुमंडल घना है। इसमें मिथेन गैस की प्रधानता है जिसके कारण दूरबीन से देखने पर यह हरे रंग का नजर आता है। इसके अलावे इसमें हाइड्रोजन और हीलियम प्रमुखता से पाये जाते हैं। इसके वायुमंडल में औसत तापमान -225°C के लगभग है। शनि की भाँति इस ग्रह के चारों और धुंधले वलय (rings) हैं। ये वलय गहरे कसे हुए हैं और इनकी संख्या 9 है। इन वलयों में अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा व एप्सीलान प्रमुख हैं। इसके अलावा इसमें 40 लाख वर्गमील से बड़ा चुम्बकीय क्षेत्र है।

इस ग्रह के 27 उपग्रह हैं जिनमें ऐरियल, अम्ब्रियल, टिटेनिया, ओबेरोन, मिराण्डा आदि प्रमुख हैं।

वरुण Neptune

इस ग्रह की खोज 1846 ई. में जर्मन खगोलवेत्ता जॉन गैले (John Galle) ने की। सूर्य से दूरी के अनुसार यह आठवां एवं अंतिम ग्रह है। सूर्य से इसकी दूरी 450 करोड़ 5 लाख किमी० है। यह आकार में सौर मंडल का चौथा सबसे बड़ा ग्रह है। इसका व्यास 49,000 किमी० है। यह सूर्य की परिक्रमा करने में 165 वर्ष लगाता है। अर्थात् यह सूर्य की परिक्रमा सबसे ज्यादा समय में करनेवाला ग्रह है (प्लूटो की ग्रह के रूप में मान्यता समाप्त होने के बाद)। यह अपनी धुरी पर 15.8 घंटा में एक चक्कर लगाता है। इसका द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का 17.2 गुना है। इसका घनत्व 1.67 ग्राम प्रति घन सेमी० है। इस ग्रह में ठोस धरातल का अभाव है। इस ग्रह के सतह का तापमान -193°C है। यह सबसे ठंढा ग्रह है (प्लूटो की ग्रह के रूप में मान्यता समाप्त होने के बाद)।

इसके वायुमंडल में हाइड्रोजन गैस अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसके साथ ही कुछ मात्रा में मिथेन गैस भी पाया जाता है। इसका रंग पीतमिश्रित हरा (पीलापन लिये हुए हरा) है। शनि, अरुण की भाँति इस ग्रह के चारों ओर धुंधले वलय (rings) हैं। इन वलयों की संख्या 5 है। आंतरिक वलय पतली और सख्त है और बाह्य वलय बर्फ चन्द्रिकाओं से भरी हुई है।

वरूण के 14 उपग्रह हैं । जिनमें प्रमुख हैं- ट्रिटोन (Triton) व नेरेइड (Nereid)


बौने ग्रह या प्लूटोन्स Dwarf Planets or Plutones

अंतर्राष्ट्रीय खगोलशास्त्रीय संघ (IAU) ने सौरमंडलीय पिण्डों की दूसरी श्रेणी को बौने ग्रह या प्लूटोन्स का नाम दिया है। प्लूटोन्स का अर्थ है- प्लूटो जैसे अन्य पिण्ड। बौने ग्रह या प्लूटोन्स के अन्तर्गत प्लूटो, चेरॉन, सेरेस एवं जेना (2003 यू बी 313) को शामिल किया गया है।

यम या कुबेर Pluto

यह अपने खोज के बाद से ही विवादास्पद रहा है। लम्बे विचार-विमर्श के बाद खगोलशास्त्रियों के अंतर्राष्ट्रीय संघ (International Astronomical Union-LAU) ने प्लूटो की ग्रह के रूप में मान्यता समाप्त कर दी है। क्यूपर बेल्ट में स्थित प्लूटो की खोज 1930 ई० में क्लाड टामवो ने की थी। ग्रह की सुस्पष्ट वैज्ञानिक परिभाषा के अभाव में अन्य 8 ग्रहों से उल्लेखनीय भिन्नताओं के बावजूद इसे ग्रहों की श्रेणी में स्वीकार किया गया था। मगर अंतर्राष्ट्रीय खगोलशास्त्रीय संघ के चेक गणराज्य की राजधानी प्राग (Prague) में अगस्त 2006 में संपन 26वीं महासभा में ग्रह की जो परिभाषा स्वीकार की गई, उसके आधार पर प्लूटो का ग्रह का दर्जा समाप्त कर उसे बौने ग्रह (Dwarf Planets) की श्रेणी में रखा है।

सूर्य से प्लूटो की दूरी 589 करोड़ किमी० है। इसका व्यास 2,300 किमी० है। यह सूर्य की परिक्रमा करने में 248 वर्ष लगाता है। यह सौर मंडल में अनियमित परिक्रमा पथ पर घूमता है। प्लूटो की कक्षा (orbit) वरुण (Neptune) की कक्षा को काटती है। यह अपनी धुरी पर 6.4 दिन में एक चक्कर लगाता है। इसका द्रव्यमान पृथ्वी के द्रव्यमान का 0.002वाँ भाग है। इसका घनत्व 2.03 ग्राम प्रति घन सेमी० है। यह पानी और मिथेन का जमा हुआ बर्फ का गोला है। इसके सतह का तापमान-220°C है। यह अत्यधिक ठंडा बौना ग्रह है।

चेरॉन Cheron

पहले इसे प्लूटो का एकमात्र उपग्रह स्वीकार किया जाता था। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय खगोलशास्त्रीय संघ (IAU) के प्राग सम्मेलन 2006 के निर्णयानुसार इसे बौने ग्रह की श्रेणी में डाल दिया गया है। इसका व्यास 1192 किमी० है।

सेरेस Ceres

इसे 1801 में इटली के खगोलविद पियाजी द्वारा खोजा गया था। यह अब तक खोजे गए सभी क्षुद्रग्रहों में सबसे बड़ा था लेकिन आकाशीय पिण्डों की नई परिभाषा के अनुसार अब इसे बौने ग्रह की श्रेणी में डाल दिया गया है। इस पिण्ड का व्यास 936 किमी० है जो बुध के व्यास का 1/5 भाग है।

जेना-2003 यू बी 313 Xena-2003 UB313

अंतर्राष्ट्रीय खगोलशास्त्रीय संघ (IAU) के नवीनतम परिभाषानुसार यह एक बौना ग्रह या प्लूटोन्स है। लगभग 1490 मील चौड़े इस पिंड को इरीस (136199) नाम दिया गया है।

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