बागानी फसल: चाय Plantation Crops: Tea- Camellia sinensis

भारत की बगनी फसलों के अंतर्गत चाय, कहवा, नारियल, रबड़, इलायची, मिर्च, हल्दी इत्यादि मसाले आते हैं।

निश्चित रूप से, चाय रोपण कृषि में एक बड़ा स्थान रखती है। यद्यपि काली मिर्च और इलायची भी भारत में पैदा की जाती हैं, इन्हें स्वीकृत रोपण कृषि के तहत् सामान्यतः उगाया, संसाधित या विपणन नहीं किया जाता है। इसलिए, मात्र चाय, कॉफी और रबड़ की ही वास्तविक रूप में भारत की मुख्य रोपण फसल माना जाता है।

चाय

भारत में उत्पादित होने वाली चाथ में दो मुख्य किस्में हैं- चीनी और असमी। तीन मुख्य चाय यहां उत्पादित होती है- काली, हरी और ईंट-रंग की धूल वाली चाय। काली चाय का उत्पादन मुख्य रूप से भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश में होता है। हरी चाय का उत्पादन चीन, जापान और थाईलैण्ड में होता है।

वृद्धि की शर्तें

चाय की खेती के लिए 18° सेंटीग्रेड से 24° सेंटीग्रेड के बीच तापमान होना चाहिए, 245 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा होनी चाहिए। चाय की खेती के लिए पर्वतीय ढाल और जीवांशयुक्त उर्वर मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है।

उत्पादक क्षेत्र

भारत के कुछ प्रमुख पहाड़ी जिलों में ही चाय का उत्पादन केंद्रित है। उत्तर-पूर्वी भारत में दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल), सदिया (असम) और चटगांव (बांग्लादेश) के बीच के त्रिकोणात्मक क्षेत्र में चाय की खेती होती है। इस भाग के प्रमुख क्षेत्र इस प्रकार हैं-

  1. ब्रह्मपुत्र घाटी: यह क्षेत्र भारत के कुल चाय उत्पादन क्षेत्र का 40 प्रतिशत घेरता है और कुल उत्पादन का 45 प्रतिशत उत्पादित करता है। लखीमपुर खीरी, शिवसागर, तेजपुर और विश्वनाथ इस क्षेत्र के प्रमुख चाय-उत्पादक जिले हैं। इस क्षेत्र में जुलाई से लेकर नवम्बर तक अधिकांश फसल की कटाई हो जाती है।
  2. सुरमा घाटी: असम का कछार जिला इसी क्षेत्र में है, जो देश की कुल चाय का 5 प्रतिशत उत्पादित करता है।
  3. पश्चिम बंगाल में कूच बिहार और जलपाईगुड़ी जिले, देश की कुल चाय का 18 प्रतिशत उत्पादित करते हैं।
  4. पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में 1800 मीटर से ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में ढलानों पर चाय की खेती की जाती है। दक्षिण भारत में केरल में मालाबार तट के पहाड़ी ढालों, तमिलनाडु में नीलगिरि, मदुरई, तिरुनेवेल्ली, कोयम्बटूर आदि जिले और कर्नाटक में शिमोगा में चाय की खेती की जाती है। ये तीनों राज्य 20 प्रतिशत चाय उत्पादक क्षेत्र को घेरते हैं और देश की कुल चाय में 25 प्रतिशत की भागीदारी करते हैं। मध्य तिरुवनंतपुरम, वायनाड, कोचीन, मालाबार तट, नीलगिरी, मदुरई, कन्याकुमारी और मैसूर जिले चाय के महत्वपूर्ण उत्पादक क्षेत्र हैं।

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