अरब पेट्रोल निर्यातक राष्ट्र संघ Organization of Arab Petroleum Exporting Countries - OAPEC

यह संगठन मध्य-पूर्व और अफ्रीका में अरब तेल निर्यातक देशों को एक मंच पर लाता है।

औपचारिक नामः मुनाजमत अद-दुवल अल-अरबिया अल-मुसद्दराह लिल-बितरुल (अरबी) [Munazamat ad-Duwalal-Arabiyah al-Musaddarahlil-Bitrul (Arabic]

मुख्यालयः कुवैत सिटी (कुवैत)।

सदस्यता: अल्जीरिया, बहरीन, मिस्र, इराक, कुवैत, लीबिया, क़तर, सऊदी अरब, ट्यूनीशिया, सीरिया और संयुक्त अरब अमीरात।

आधिकारिक भाषा: अरबी।

उद्भव एवं विकास

अरब तेल नियतिक राष्ट्र संघ (ओएपीईसी) 1968 में अस्तित्व में आया। इसकी स्थापना के पीछे मुख्य उद्देश्य हैं- उन अरब देशों के मध्य सहयोग को विकसित करना, जिनकी आय का प्रधान स्रोत तेल है। ओएपीईसी के गठन के लिये बेरूत (लेबनान) में कुवैत, लीबिया और सऊदी अरब के मध्य एक समझौता हुआ। आरंभ में ओएपीईसी के तीन ही सदस्य थे। बाद में अन्य अरब तेल निर्यातक देश-अल्जीरिया, मिस्र तथा ट्यूनीशिया (अफ्रीका महाद्वीप) और बहरीन, इराक, कतर, सीरिया और संयुक्त अरब अमीरात (मध्य-पूर्व), इसके सदस्य बने। ट्यूनीशिया की सदस्यता 1987 में उस समय समाप्त हो गई, जब उसका दर्जा (status) तेल निर्यातक न रहकर तेल आयातक का हो गया। 1979 में मिस्र की इस संगठन से निलंबित कर दिया गया था; लेकिन उसे 1989 में फिर-से सदस्य बना लिया गया।

उद्देश्य

ओएपीईसी निम्नांकित उद्देश्यों की पूर्ति के लिये प्रयत्नशील है-

  1. सदस्य देशों की पेट्रोलियम नीतियों में समन्वय स्थापित करना;
  2. अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिये जितना आवश्यक हो, सदस्य देशों की न्याय प्रणाली को सुसंगत बनाने के लिये कदम उठाना;
  3. सूचना एवं सुविज्ञता (expertise) के आदान-प्रदान में सहायता प्रदान करना;
  4. सदस्य देशों के नागरिकों को प्रशिक्षण और नियोजन प्रदान करना;
  5. पेट्रोलियम तथा पेट्रोलियम से जुड़े उद्योगों में संयुक्त परियोजना स्थापित करने में सदस्य देशों के संसाधनों और सामूहिक क्षमता का उपयोग करना, तथा;
  6. उपभोक्ता देशों को उचित दर पर पेट्रोलियम की आपूर्ति सुनिश्चित करना।

सरंचना

ओएपीईसी के संगठनात्मक ढांचे में मंत्रिस्तरीय परिषद, कार्यवाहक ब्यूरो, न्यायिक अधिकरण तथा सामान्य सचिवालय सम्मिलित हैं।

मंत्रिस्तरीय परिषद सर्वोच्च सत्ता होती है। सभी सदस्य देशों के पेट्रोलियम मंत्री इसके सदस्य होते हैं। मंत्रियों की प्रत्येक वर्ष में दो बार बैठक होती है। इन बैठकों में मंत्रीगण संगठन की नीतियों की रूपरेखा तैयार करते हैं, चालू गतिविधियों का निर्देशन करते हैं तथा संगठन की कार्यप्रणाली से संबंधित नियमों का निर्धारण करते हैं। कार्यवाहक ब्यूरो में सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि सम्मिलित होते हैं। यह ओएपीईसी की कार्यपालक शाखा है। मंत्रिवर्गीय परिषद को संगठन के प्रबंध में सहायता पहुंचाने के लिये कार्यवाहक ब्यूरो की प्रत्येक वर्ष तीन बार बैठक होती है। न्यायिक अधिकरण अरब देशों के सात न्यायाधीशों से बना होता है। यह अधिकरण सदस्य देशों के भध्य या किसी सदस्य देश और वहां कार्यरत पेट्रोलियम कंपनी के मध्य ओएपीईसी समझौते की व्याख्या और क्रियान्वयन से उत्पन्न विवादों को सुलझाता है। सचिवालय का प्रधान अधिकारी महासचिव होता है, जिसकी सहायता के लिये तीन सहायक उप-महासचिवों का प्रावधान है। सम्पूर्ण सचिवालय को चार प्रमुख विभागों में विभाजित किया गया है-वित्त एवं प्रशासनिक कार्य विभाग; आर्थिक विभाग, सूचना तथा पुस्तकालय विभाग, और, तकनीकी विभाग।

गतिविधियां

अरब पेट्रोलियम उद्योग के विभिन्न पक्षों में सभन्वय स्थापित करने के लिये ओएपीईसी अरब लीग, संयुक्त राष्ट्र संघ और ओपेक जैसे संगठनों से सहयोग स्थापित करता है। अरब और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में वृद्धि लेन के लिए यह गैर अरब संगठनों के साथ संयुक्त सम्मलेन और गोष्ठियां आयोजित करता है। यह प्रलेखन, सूचना और तकनीकी विषयों में प्रशिक्षण प्रदान करता है, तथा अरब क्षेत्र के विभिन्न अनुसंधान संस्थानों के मध्य संपर्क स्थापित करता है। संयुक्त राष्ट्रीय उपक्रमों ने कध्ये तेल, गैस और परिष्कृत उत्पादों के परिवहन पर अपना ध्यान केंद्रित किया है तथा परिवहन उद्योग, तेल टैंकरों और पेट्रोरसायन संयंत्रों के निर्माण में अरब साझेदारी में वृद्धि की है।

1990 के दशक के प्रारंभ में इराक और कुवैत से पेट्रोल के निर्यात पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध ने ओएपीईसी की गतिविधियों को बुरी तरह से प्रभावित किया। 1990 में कुवैत पर इराकी कब्जे के दौरान इस संगठन के मुख्यालय को काहिरा (मिस्र) में स्थानांतरित कर दिया गया। किंतु, 1994 में इसे पुनः कुवैत में लाया गया। ओपेक उत्पादन कोटे के प्रश्न पर सदस्य देशों के बीच मतभेद और तेल के मूल्यों में अस्थिरता ने भी संगठन के सुलभ संचालन को बाधित किया है।

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