अमेरिकी राज्य संगठन Organization of American States - OAS

यह संगठन आर्थिक, सैन्य और सांस्कृतिक सहयोग विकसित करने के किए अमेरिका महाद्वीप के लगभग सभी देशों को एक मंच पर लाता है।

औपचारिक नाम: ऑर्गनाईजेशन डेस इटैट्स अमेरिकन्स (Organisation des Etats Americains)

: ऑर्गनाईजेका ओ डोस इस्टाडोस अमेरिकैनोज (Organizaca o des Estados Americanos)

: ऑर्गनाइजेशियोन डी लोस इस्टाडोस अमेरिकैनोज (Organizacion de los Estados Americarios)

मुख्यालय: वाशिंगटन डीसी (संयुक्त राज्य अमेरिका)।

सद्स्स्यता: एंटीगुआ और बरबुडा, अर्जेंटीना, बहामास, बारबडोस, बेलीज, बोलीविया, ब्राजील, कनाडा, चिली, कोलंबिया, कोस्टा रिका, क्यूबा (1962 से ओएएस में औपचारिक सहभागिता से वंचित), डोमिनिका, डोमिनिकन गणराज्य, इक्वाडोर, अल साल्वाडोर, ग्रेनेडा, ग्वाटेमाला, गुयाना, हैती, होंडुरास, जमैका, मेक्सिको, निकारागुआ, पनामा पराग्वे, पेरू, सेंट किट्स और नेविस, पनामा, सेंट लूसिया, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइन्स, सूरीनाम, त्रिनिदाद और टोबैगो, संयुक्त राज्य अमेरिका और वेनेजुएला।

[क्यूबा की ओएएस की गतिविधियों से 1962 से हटा दिया गया, लेकिन वर्ष 2009 में, ओएएस ने निलम्बन को समाप्त कर दिया। 5 जुलाई, 2009 को, ओएएस ने अंतर-अमेरिकी लोकतांत्रिक चार्टर के अनुच्छेद 21 को शामिल कर होंडुरास को सक्रिय सहभागिता से निलम्बित कर दिया। लेकिन 1 जून, 2011 की होडुरास को संगठन में फिर से शामिल कर लिया गया।]

स्थायी पर्यवेक्षक सदस्य: 31 जनवरी, 2014 की स्थिति के अनुसार, यूरोपीय संघ सहित 68 स्थायी पर्यवेक्षक सदस्य देश थे। आधिकारिक भाषाएं: अंग्रेजी, फ्रेंच, पुर्तगाली और स्पेनिश।

उद्भव एवं विकास

अमेरिकी राज्य संगठन [Organisation of American States (OAS/OEA) के गठन का इतिह्रास 14 अप्रैल, 1890 को आयोजित पहले अमेरिकी राज्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन से आरम्भ होता है। अमेरिकी गणतंत्रों के प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय अमेरिकी गणतंत्र संघ का गठन किया। संघ का केन्द्रीय कार्यालय वाशिंगटन में था। संघ का गठन पश्चिमी गोलार्द्ध के देशों के बीच पारस्परिक समझ-बूझ और सहयोग विकसित करने के लिये किया गया (14 अप्रैल को, जिस दिन 1890 में समझौते पर हस्ताक्षर हुए, प्रत्येक वर्ष अखिल अमेरिकी दिवस के रूप में मनाया जाता है)। चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय अमेरिकी राज्य सम्मेलन, 1910 में संघ का नाम बदलकर अमेरिकी गणराज्य संघ कर दिया गया तथा ब्यूरो को अखिल अमेरिकी संघ नाम देने का निर्णय लिया गया। उत्तरवर्ती सम्मेलनों में कानून और विवाचान जैसे कई विषयों को जोड़कर अन्तर-अमेरिकी सहयोग क्षेत्रों में विस्तार किया गया। 1940 के दशक की राजनीतिक-सैन्य परिस्थितियों ने पश्चिमी गोलार्द्ध के तत्कालीन 21 स्वतंत्र राज्यों को 1947 में एक औपचारिक पारस्परिक रक्षा संधि, अन्तर-अमेरिकी पारस्परिक सहायता संधि (रियो संधि) के नाम से ज्ञात, पर सहमत होने के लिये प्रेरित किया। यह सामूहिक सुरक्षा पर पहली व्यापक संधि थी, जिसमें सभी अमेरिकी राज्य सम्मिलित थे। नौवां अंतर्राष्ट्रीय अमेरिकी राज्य सम्मेलन 30 अप्रैल, 1948 को बगोटा (कोलंबिया) में सम्पन्न हुआ। इस सम्मेलन में अमेरिकी गणराज्य संघ का नाम बदलकर अमेरिकी राज्य संगठन (ओएएस) कर दिया गया तथा 20 लैटिन अमेरिकी देश तथा संयुक्त राज्य अमेरिका ने ओएएस संविदा पर हस्ताक्षर किए। 1960 के दशक में नये स्वतंत्र कैरेबियन देश भी इस संगठन में सम्मिलित हुये, जबकि कनाडा ने 1990 में इसकी सदस्यता ग्रहण की। स्थायी पर्यवेक्षक सदस्य की व्यवस्था आधिकारिक रूप से 1971 में की गई।

ओएएस परम्परागत रूप से साम्यवाद विरोधी रहा है। क्यूबा तकनीकी रूप से इसका सदस्य है, लेकिन देश की वर्तमान सरकार को वर्ष 1962 से अन्तर-अमेरिकी प्रणाली में भाग लेने से वंचित कर दिया गया है।

समय के साथ संगठन की स्थिति और भूमिका में हुये/हो रहे परिवर्तनों को प्रतिबिम्बित करने के उद्देश्य से ओएएस के संविधान में अनेक संशोधन किये गये हैं।

उद्देश्य

ओएएस निम्नांकित उद्देश्यों की पूर्ति के लिये कार्यरत है- अमेरिकी राज्यों में एकजुटता लाने के लिये शांति और न्याय की स्थापना करना; सदस्यों के बीच सहयोग की भावना को मजबूत बनाना तथा उनकी संप्रुभता, क्षेत्रीय अखंडता, स्वतंत्रता की रक्षा करना; पश्चिमी गोलार्द्ध के लोगों के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के लिये नये उद्देश्यों और मानकों का निर्धारण करना, तथा; आर्थिक एकीकरण की प्रक्रिया में गति लाना।

संरचना

ओएएस अपना कार्य कई संस्थाओं के माध्यम से करता है, जिसमें महासभा, विदेश मंत्रियों की परामर्श बैठक, परिषदें, अंतर-अमेरिकी न्यायिक समिति, अंतर-अमेरिकी मानवाधिकार आयोग, सामान्य सचिवालय तथा विशेष संगठन प्रमुख हैं।

महासभा ओएएस का मुख्य राजनीतिक अंग है। इसमें सभी सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व रहता है तथा प्रत्येक सदस्य को एक मत दिया गया है। महासभा की प्रत्येक वर्ष बैठक होती है, जिसमे नीतियों एवं बजट का निर्धारण तथा संगठन की विशिष्ट एजेंसियों के कार्यों का पर्यवेक्षण होता है। विदेश मंत्रियों की परामर्श बैठक में सभी सदस्य भाग ले सकते हैं। सुरक्षा कार्यों का निष्पादन और अमेरिकी राज्यों के सामूहिक हित से जुड़ी महत्वपूर्ण समस्याओं पर विचार करना संगठन की बैठक के प्रमुख विचारणीय विषय होते हैं।

सभी सदस्य देशों से बनी दो परिषदों का गठन किया गया है। ये परिषदें अपनी-अपनी क्षमता (competence) के अन्दर महासभा के समक्ष प्रस्ताव रखती है। स्थायी परिषद के कार्य हैं- महासभा के निर्णयों का क्रियान्वयन करना; संगठन के कार्यों के संबंध में सिफारिशें करना; अन्य अंगों द्वारा महासभा में रखी गयी रिपोंटों पर विचार करना, और; विवादों के शांतिपूर्ण हल ढूंढने में सदस्य देशों की सहायता पहुंचाना। ओएएस क्षेत्र में या सदस्यों के बीच सैनिक आक्रमण की स्थिति में स्थायी परिषद उस समय तक परामर्श के लिये अस्थायी अंग के रूप में कार्य करती है जब तक कि विदेश मंत्रियों की परामर्श बैठक नहीं बुलाई जाती। अन्तर-अमेरिकी शांतिपूर्ण समाधान समिति स्थायी परिषद की सहायता पहुंचाती है। अन्तर-अमेरिकी एकीकृत विकास परिषद (सीआईडीआई) ओएस की दूसरी परिषद है। इस परिषद का गठन अन्तर-अमेरिकी आर्थिक और सामाजिक परिषद (सीआईईएस) तथा अन्तर-अमेरिकी शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति परिषद (सीआईईसीसी) के विलय से हुआ है।

अन्तर-अमेरिकी न्यायिक समिति ओएएस को न्यायिक विषयों पर सलाह देती है तथा अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के विकास और संहिताकरण को प्रोत्साहन देती है। 11 विधिवेत्ताओं से बनी यह समिति रियो डी जेनिरो में अवस्थित है। विधिवेत्ताओं का चुनाव महासभा के द्वारा चार वर्षों के लिये होता है। अन्तर-अमेरिकी मानवाधिकार आयोग एक परामर्शदात्री अंग है। यह मानवाधिकारों की रक्षा और पालन का निरीक्षण करता है तथा अमेरिकी मानवाधिकार अभिसमय, 1969 के अनुरूप मानदंडों और विधानों का सुझाव देता है। कोस्टा रिका में अवस्थित अन्तर-अमेरिकी मानवाधिकार न्यायालय का कार्य अमेरिकी मानवाधिकार अभिसमय की व्याख्या और उपयोग करना है।

सामान्य सचिवालय ओएएस की प्रशासनिक शाखा है। महासचिव और सहायक महासचिव इसके दो मुख्य अधिकारी हैं, जिनका चुनाव महासभा के द्वारा पांच वर्षों के लिये किया जाता है। सहायक महासचिव स्थायी परिषद का सचिव भी होता है।

विशेषज्ञ संगठन बहुपक्षीय समझौतों के आधार पर गठित अन्तर-सरकारी अभिकरण हैं। इन्हें स्वास्थ्य, कृषि, भूगोल, इतिहास महिला मामलों, बल कल्याण और इण्डियन मामलों जैसे विशेषज्ञ क्षेत्रों में कार्य करने के लिये गठित किया गया है। जेनेवा स्थित अखिल अमेरिकी स्वास्थ्य संगठन विश्व की प्राचीनतम अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी है।

इन निकायों के अतिरिक्त ऐसे अभिकरण भी हैं, जो ओएएस के विभिन्न अंगों के साथ कार्य कर रहे हैं। ऐसे अभिकरणों में अन्तर-अमेरिकी रक्षा बोर्ड, अन्तर-अमेरिकी सांख्यिकी संस्थान, अन्तर-अमेरिकी नाभिकीय उर्जा आयोग, अन्तर-अमेरिकी आपात-कालीन सहायता कोश तथा प्रशासनिक न्यायाधिकरण प्रमुख हैं।

गतिविधियां

ओएएस मुख्य रूप से एक राजनीतिक और सुरक्षा संगठन है, यद्यपि इसकी वार्ताओं/बैठकों में आर्थिक और सामाजिक विषयों का महत्व बढ़ रहा है। यह विशेष रूप से क्षेत्र की प्रजातंत्रिक सरकारों को प्रोत्साहन देने और रक्षा करने में सक्रिय है तथा सदस्य देशों के चुनावों को अनियमितताओं तथा धोखेबाजी से मुक्त रखने में एक अग्रणी संस्था बनकर उभरा है। ओएएस अनेक अन्तर-अमेरिका विवादों (मुख्य रूप से कैरेबियन और मध्य अमेरिकी क्षेत्रों में), कई सदस्य देशों (जैसे-ग्वाटेमाला में 1954 और 1993 में, डोमिनिकन गणराज्य में 1965 में, अर्जेटीना में 1979 में, पेरू में 1992 में, आदि) की आन्तरिक अस्थिरता और महाद्वीपीयेतर (extracontinental) हस्तक्षेपों (जैसे-फॉकलैण्ड द्वीप समूह पर अर्जेटीना और युनाइटेड किंगडम के बीच विवाद में) में प्रतिक्रियाशील रहा है।

क्यूबा मुद्दे ने संगठन में मतभेद उत्पन्न किया है। यद्यपि क्यूबा को 1962 में संगठन से निलंबित कर दिया गया तथा इस देश के द्वारा आतंकवाद और विनाशक गतिविधियों को दिये जा रहे समर्थन की निंदा होती रहती है। क्यूबा की शासन-प्रणाली के संबंध में ओएएस ने एक निश्चित नीति विकसित नहीं की है। कई सदस्यों ने क्यूबा को बिना शर्त संगठन में वापस लाने की मांग की है। 1975 के एक प्रस्ताव ने रिओ संधि के सदस्यों को क्यूबा से संबंध सुधारने के लिये उन्मुक्त छोड़ दिया है, यद्यपि, संयुक्त राज्य अमेरिका अपनी व्यक्तिगत क्षमता से सदस्य देशों पर क्यूबा को अलग रखने के लिये अपना दबाव बनाये हुए है।

1991 में ओएएस ने सेंटियागी प्रजातंत्र प्रतिज्ञा तथा अन्तर-अमेरिकी प्रणाली के नवीनीकरण को अपनाया। वाशिंगटन प्रोटोकॉल (1992), जो 1997 में प्रभाव में आया, “प्रजातांत्रिक राजनीति संस्थागत प्रक्रिया के अचानक या अनियंत्रित हस्तक्षेप या प्रजातंत्रिक रूप से चुनी सरकारों के द्वारा अपने अधिकारों के वैध उपयोग” की स्थिति में सामूहिक कदम उठाने की मांग करता है। महासभा ने उस अनुच्छेद (Article) को भी अनुमोदित कर दिया, जिसमें ऐसे सदस्य देशों को संगठन से निकलने की मांग की गयी है, जहाँ प्रजातान्त्रिक सरकार को बल प्रयोग के द्वारा सत्ताच्युत कर जाता है। 1995 के शिखर सम्मेलन में ओएएस के लिये एक नई दृष्टि (A New Vision for the OAS) को अपनाया गया। इसने एक नई ओएएस इकाई, जिसे राष्ट्रीय चुनावों का पर्यवेक्षण

अमेरिका शिखर सम्मेलन
अमेरिका शिखर सम्मेलन एक प्रक्रिया या पश्चिमी गोलार्द्ध में शीर्षतम सरकारी निर्णय-प्रक्रिया के लिए होने वाली बैठकों का एक संस्थागत रूप है। बैठकों (शिखर सम्मेलनों) का उद्देश्य सामूहिक विषयों की चर्चा करना तथा अमेरिका महाद्वीप के सभी देशों की सामूहिक समस्याओं, चाहे वे आर्थिक, सामाजिक, सैन्य या राजनीतिक प्रकृति के हो, का निदान ढूंढ़ना है।

प्रक्रिया में राजनीतिक सिद्धांतों और संस्थागत तत्वों दोनों का समावेश होता है। प्रक्रिया के राजनीतिक सिद्धांतों के अनुसार इसमें (प्रक्रिया में) अमेरिका के ऐसे देश सम्मिलित हो सकते हैं, जहां का शासन प्रजातांत्रिक पद्धति पर आधारित है तथा जो मुक्त बाजार व्यवस्था, समानता पर आधारित बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं तथा आम सहमति को अपनाए हुए हैं। संस्थागत तत्वों में प्रक्रिया, निर्णय क्रियान्वयन तथा अनुवर्ती कार्यवाही के लिए उत्तरदायी निकाय सम्मिलित होते हैं। अमेरिका देशों के 34 शिखर सम्मेलन तथा ओएएस के 34 सदस्य देशों में कोई अंतर नहीं है (ओएएस का 35वां सदस्य क्यूबा 1962 से निष्काषित है)।

प्रथम अमेरिका शिखर सम्मेलन वर्ष 1994 में मियामी (संयुक्त राज्य अमेरिका) में आयोजित हुआ। मियामी शिखर सम्मेलन से पूर्व, 1956 में पनामा सिटी (पनामा) में आयोजित राष्ट्रपति शिखर सम्मेलन ओएएस के तत्वावधान में 19 देशों के राष्ट्राध्यक्षों की एक मंच पर लाया। इसका लक्ष्य था-अमेरिकी देशों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए ओएएस को एक प्रमुख प्रेरक बल बनाना। दूसरा राष्ट्रपति शिखर सम्मेलन 1967 में पुन्टा डेल एस्टे (उरुग्वे) में आयोजित हुआ। इस शिखर सम्मेलन में भी संयुक्त राज्य के राष्ट्रपति केनेडी की पहल-प्रक्रिया के लिए गठबंधन के समर्थन में 19 राष्ट्राध्यक्ष एकजुट हुए। केनेडी की पहल का उद्देश्य अमेरिका महाद्वीप में विकास और शांतिपूर्ण संबंधों को प्रोत्साहित करना था। सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपतियों की घोषणा (Declaration of the Presidents of America) को जारी किया गया। इस घोषणा में अनेक लक्ष्यों का निर्धारण किया गया, जिनमे लैटिन अमेरिकी साझा बाजार की स्थापना और मौलिक ढांचों, कृषि एवं शिक्षा के विकास तथा शस्त्र नियंत्रण के लिए बहुपक्षीय सहयोग की स्थापना भी सम्मिलित थे। लेकिन इन लक्ष्यों को प्राप्त नहीं किया जा सका। 1990 के दशक के आरंभ में शीतयुद्ध की समाप्ति ने आपसी समझदारी और आम सहमति के एक नए युग का सूत्रपात किया। नये नेताओं के आगमन तथा प्रजातंत्र एवं बाजार अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों पर आधारित सामूहिक राजनीतिक एवं आर्थिक दृष्टिकोण ने अमेरिका महाद्वीप के देशों (कनाडा से अर्जेंटीना तक) में राजनीतिक सहयोग और आर्थिक एकीकरण का मार्ग प्रशस्त्र किया। अमेरिकी देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों ने नए एजेंडा के मौलिक नियमों के निर्धारण के लिए नियमित रूप से बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया। बैठकों को संस्थागत रूप से देने के निर्णय से शिखर सम्मेलन प्रक्रिया की धारणा विकसित हुई। ऐसा समझा जाने लगा कि इस प्रक्रिया में अनुभवों का एकत्रीकरण, एक सामूहिक भाषा का विकास तथा सामूहिक कार्यवाहियों का निर्धारण संभव है, जिसमें गोलार्द्ध के संबंधों में नए सैद्धांतिक और व्यावहारिक संदर्भों को सुव्यवस्थित किया जा सकेगा।

मियामी शिखर सम्मेलन, जिसमें ओएएस के सभी 84 सदस्यों ने भाग लिया, में सिद्धांत घोषणा (Declaration of Principles) और एक कार्य योजना (Plan of Action) जारी किए गए। सिद्धांत घोषणा ने अमेरिका महाद्वीप के देशों के विकास और समृद्धि के लिए एक समझौता प्रारूप प्रस्तुत किया। दस्तावेज में आर्थिक एकीकरण और मुक्त बाजार व्यवस्था के आधार पर आर्थिक समृद्धि लाने की अपील की गयी, ताकि महाद्वीप में भेदभाव और गरीबी समाप्त हो सके और पर्यावरण की रक्षा करते हुए स्थायी विकास सुनिश्चित किया जा सके। कार्य योजना में निम्नांकित अभिक्रमों को सम्मिलित किया गया- प्रजातंत्र का सुदृढ़ीकरण; मानवाधिकार; समाज सशक्तिकरण; सांस्कृतिक मूल्य; भ्रष्टाचार; पर्यटन; परस्पर विश्वास; मुक्त व्यापार; पूंजी बाजार; गोलार्द्ध अवसंरचना; ऊर्जा सहयोग; दूरसंचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; आतंकवाद; शिक्षा, स्वास्थ्य; महिला; लघु उद्योग; स्थायी ऊर्जा उपयोग; जैव-विविधता, तथा; प्रदूषण निवारण।

सबसे महत्वपूर्ण अभिक्रम था- अमेरिकी मुक्त व्यापार क्षेत्र (Free Trade Area of the Americas-FTAA) की स्थापना पर सहमति। एफटीएए में सम्पूर्ण अमेरिकी महाद्वीप में वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान के लिए मुक्त बाजार व्यवस्था का प्रावधान है। यह निर्णय लिया गया कि एफटीएए के गठन से संबंधित सभी वार्ताएं 2005 तक पूरी हो जानी चाहिए। यूएनईसीएलएसी की एक त्रि-पक्षीय समिति गठित की गयी।

ऊर्जा के क्षेत्र में स्थायी विकास के लिए 1966 में बोलीविया में एक विशेष शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में इन क्षेत्रों में कदम उठाने की मांग की गई-स्वास्थ्य एवं शिक्षा; स्थायी कृषि एवं वन विकास; स्थायी नगर और समुदाय विकास; जल संसाधन और तटवर्ती प्रदेश; तथा ऊर्जा एवं खनिज।

दूसरा अमेरिका शिखर सम्मेलन 1998 में सेंटियागो (चिली) में आयोजित हुआ। इस सम्मेलन में हुई वार्ताओं के आधार पर एक घोषणा-पत्र और सेंटियागो कार्य योजना तैयार किए गए। सेंटियागो कार्य योजना में 27 अभिक्रमों को सम्मिलित किया गया। इन अभिक्रमों की अग्रलिखित विषयों में वर्गीकृत किया गया-शिक्षा (सम्मेलन का सबसे प्रमुख विषय); प्रजातंत्र संरक्षण एवं सुदृढ़ीकरण; न्याय एवं मानवाधिकार; आर्थिक एकीकरण एवं मुक्त व्यापार, तथा; गरीबी एवं भेदभाव उन्मूलन।

तीसरा अमेरिका शिखर सम्मेलन 2001 में कनाडा के क्यूबेक शहर में आयोजित हुआ। सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि 2005 के अंत तक एफटीएए का गठन कर लिया जाएगा।

सेंटियागो सम्मेलन में शिखर सम्मेलन को एक प्रक्रिया के रूप में गठित करने हेतु पृष्ठभूमि तैयार की गयी इसमें यह निर्णय लिया गया की ओएएस, यूएनईसीएलएसी, आईडीबी, अखिल अमेरिकी स्वास्थ्य संगठन तथा विश्व बैंक सम्मेलन प्रक्रिया की क्रियान्वित करने के लिए उत्तरदायी होंगे।

शिखर सम्मेलन प्रक्रिया की संरचना इस प्रकार है-1955 में मियामी कार्य योजना के क्रियान्वयन के लिए शिखर सम्मेलन क्रियान्वयन समीक्षा दल (The Summit Implementation Review Group-SIRG) का गठन हुआ। सिर्ग में अमेरिकी महाद्वीप के सभी देशों का प्रतिनिधित्व होता है। प्रत्येक वर्ष सिर्ग की चार नियमित बैठकें होती हैं। इसके अतिरिक्त, सिर्ग की वार्षिक मंत्रिस्तरीय बैठक भी होती है। सिर्ग के प्रतिनिधियों की राष्ट्रीय समन्वयक कहा जाता है।

सिर्ग का प्रमुख उत्तरदायित्व है-कार्य योजना के क्रियान्वयन की दिशा में हुई प्रगति के संबंध में विदेश मंत्रियों को रिपोर्ट प्रस्तुत करना। सदस्य देशों के विदेश मंत्री ओएएस की महासभा की नियमित बैठकों के दौरान सिर्ग से प्राप्त सूचनाओं की समीक्षा करते हैं। विदेश मंत्रियों के मार्ग-निर्देशन में सिर्ग आगामी शिखर सम्मेलन की तैयारी करता है। इसमें ओएएस, आईडीबी, यूएनईसीएलएसी, अखिल अमेरिकी स्वास्थ्य संगठन तथा इससे जुड़े अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के योगदान को ध्यान में रखा जाता है।

सिर्ग बैठकों के अतिरिक्त, ओएएस तथा अंतर-अमेरिकी शिखर सम्मेलन प्रबंधन के लिए गठित विशेष समिति की राजनीतिक संरचना के अंतर्गत अनुवर्ती प्रक्रिया के निर्धारण के लिए एक समानांतर बहुपक्षीय शिखर सम्मेलन होता है। स्थायी परिषद की यह संमिति विभिन्न इकाइयों तथा शिखर सम्मेलन की कार्य योजना के क्रियान्वयन के लिए उत्तरदायी अन्य कार्यालयों की रिपोटों पर विचार करती है।

शिखर सम्मेलन के प्रत्येक निर्णय के वास्तविक क्रियान्वयन के लिए कुछ उत्तरदायी समन्वयकों का समूह गठित किया जाता है। अधिकांश निर्णयों के संबंध में ये समन्वयक अमेरिका शिखर सम्मेलन प्रक्रिया के सदस्य देशों के प्रतिनिधि ही होते हैं। कुछ विषयों के संबंध में ही देशों के बदले अंतरराष्ट्रीय संगठनों की उत्तरदायी समन्वयक बनाया गया है।

शिखर सम्मेलन अनुवर्ती कार्यक्रम कार्यालय का गठन ओएएस सामान्य सचिवालय के अंतर्गत वर्ष 1998 में किया गया । इस कार्यालय के दो प्रमुख कार्य हैं-() रिकार्ड-धारक संरचना के रूप में कार्य करना, तथा; (ii) सिर्ग की तकनीकी सहायता प्रदान करना।

अमेरिका शिखर सम्मेलन बैठकों की एक निरंतर श्रृंखला है जो अमेरिका के नेताओं की एक मंच पर इकट्ठा करती है, इसमें क्यूबा को छोड़कर उत्तरी अमेरिका, मध्य अमेरिका, कैरेबियन एवं  दक्षिण अमेरिका शामिल है। इन शिखर सम्मेलनों का कार्य पश्चिमी गोलार्द्ध को प्रभावित करने वाले विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श करना है।

अमेरिका शिखर सम्मेलन की छठी बैठक 14-15 अप्रैल, 2012 को कार्टाजेना, कोलम्बिया में आयोजित की गई। इस शिखर बैठक की मुख्य थीम थी-कनेक्टिंग द अमेरिकाः पार्टनर्स फॉर प्रॉस्पेरिटी। इस बैठक के मुख्य विषय थे-क्यूबा को सम्मेलन से बाहर करना, मादक द्रव्यों से निपटने एवं इनका वैधीकरण और फॉकलैण्ड द्वीप पर अर्जेटीना का प्रभुत्व का दावा। इस बैठक में संयुक्त राज्य अमेरिका और ग्वाटेमाला, अल साल्वाडोर, अर्जेंटीना और पेरू के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई। कैरेबियन देशों-सेंट लुसिया भी शामिल-ने हल्के हथियारों जैसे शस्त्र अप्रसार के विषय को उठाया। इस सम्मेलन में सहमति के अभाव के कारण किसी प्रकार की घोषणा नहीं हुई। 7वां अमेरिका शिखर सम्मेलन वर्ष 2015 में पनामा में आयोजित किया जाएगा।

करने, राष्ट्रीय विधानमंडलों के कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने, सरकारी गतिविधियों के प्रचार और प्रसार के लिये उपयुक्त प्रणालियों को सृजित करने तथा मानवाधिकारों की रक्षा करने के अधिदेश (mandate) प्राप्त हों, के गठन की मांग की।

सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ रहा है। इस तथ्य को स्वीकार किया गया है कि शांति और सुरक्षा सामाजिक और आर्थिक कल्याण अभिन्न रूप से जुड़े हैं। सरकारों एवं लोक तथा निजी उपक्रमों को ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 1959 में आईडीबी की स्थापना की गई। लैटिन अमेरिका में आर्थिक और सामाजिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिये प्रगति के लिये गठबंधन (Alliance for Progress) नाम की एक योजना का 1961 में औपचारिक रूप से उद्घाटन हुआ। अन्तर-अमेरिकी आर्थिक और सामाजिक परिषद संरक्षणवादी व्यापार व्यवस्था, जिसका उपयोग लैटिन अमेरिकी देशों के विरुद्ध आर्थिक आक्रमण के लिये एक यंत्र के रूप में होता है, के अंत के लिये कार्यरत है तथा यह बरोजगारी, खाद्यान्न की कमी, ऊर्जा संकट आदि समस्याओं के निदान के लिये प्रतिबद्ध है। 1990 के दशक में अमेरिकी मुक्त व्यापार क्षेत्र (एफटीएए) के गठन के लिये वार्ताएं शुरू हुई। वाशिंगटन प्रोटोकॉल, 1992 ने अत्यधिक निर्धनता उन्मूलन को ओएएस के एक प्रमुख लक्ष्य के रूप में समाविष्ट किया। मानागुआ प्रोटोकॉल, 1993 में इस प्रतिबद्धता को दुहराया गया।

ओएएस आर्थिक और सामाजिक विकास के लिये भी कई कार्यक्रम संचालित कर रहा है तथा यह विकास से जुड़े क्षेत्रों में लैटिन अमेरिकी लोगों को प्रशिक्षण देता है। अन्य गतिविधियों के रूप में ओएएस ने संगठित अपराध के अंत, अवैध औषधि व्यापार और भ्रष्टाचार को मिटाने, मानवाधिकार की रक्षा करने, पर्यावरणीय संरक्षण तथा सांस्कृतिक सहयोग विकसित करने पर अपना ध्यान केन्द्रित किया है।

2004-2005 में कनाडा ओएएस का दूसरा बड़ा योगदानकर्ता राष्ट्र है और यह ओएएस के नियमित बजट में 12.36 प्रतिशत का योगदान देता है। वर्ष 2009 में, अंतर-अमेरिकी लोकतांत्रिक चार्टर को शामिल किया गया। नशीले द्रव्यों के क्षेत्र में सहयोग के प्रयास एवं सीमा के आर-पार सहयोग करने के लिए 1986 में अंतर-अमेरिकी नशीले द्रव्य नियंत्रण आयोग स्थापित किया गया।

ओएएस आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए कई कार्यक्रम भी चलाता है और विकास सम्बन्धी क्षेत्रों में लैटिन अमेरिकी और कैरेबियन नागरिकों के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान करता है। अपनी अन्य गतिविधियों के हिस्से के तौर पर, ओएएस ने संगठित अपराधों से लड़ने, मादक द्रव्यों की सांस्कृतिक सहयोग पर ध्यान देने का निर्णय लिया।

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