राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास और वित्त निगम National Minorities Development and Finance Corporation - NMDFC

अधिसूचित अल्पसंख्यकों के पिछड़े वर्गों के बीच, आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 30 सितंबर, 1994 को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास और वित्त निगम की स्थापना की गई। आयोग अल्पसंख्यक समुदाय के ऐसे लोगों को स्वरोजगार के लिए रियायती दर पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है जिनकी पारिवारिक आय बीपीएल से दोगुनी से कम हो। निगम की अधिकृत हिस्सा पूंजी ₹1500 करोड़ है। जिसमें से ₹ 975 करोड़ (65%) केंद्र सरकार का हिस्सा, ₹ 390 करोड़ (26%)राज्य सरकारों का हिस्सा है और शेष ₹185 करोड़ (96%) अल्पसंख्यकों के हितों से संबद्ध संस्थाओं/व्यक्तियों द्वारा दिए जाते हैं।

निगम संबंद्ध राज्य/केंद्रशासित प्रशासन द्वारा नामित स्टेट चैनेलाइजिंग एजेंसी (एससीए) तथा एनजीओ के जरिए लाभार्थी को सहायता उपलब्ध कराता है। एससीए कार्यक्रम के तहत् पांच लाख तक लागत वाली परियोजनाओं की वित्तीय सहायता दी जाती है। इस कार्य के लिए एससीए को तीन प्रतिशत ब्याज की दर पर ऋण दिया जाता है जिसे वह छह प्रतिशत की ब्याज दर पर दे सकती है। निगम एससीए के जरिए व्यावसायिक प्रशिक्षण तथा शैक्षिक ऋण की योजना भी चला रहा है।

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