वित्त मंत्रालय Ministry of Finance

भारत की संघीय सरकार के वित्तीय प्रशासन एवं उससे सम्बन्धित विभिन्न राज्यों के वित्तीय मामलों के निपटारे का पूर्ण दायित्व भारत सरकार के वित्त मंत्रालय पर है। संघीय सरकार के व्यय का नियमन भी इसी मंत्रालय द्वारा किया जाता है, जिसके अंतर्गत राज्यों के साधनों का अंतरण करने सम्बन्धी कार्य भी सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त वित्त मंत्रालय सम्पूर्ण देश को प्रभावित करने वाले समस्त आर्थिक एवं वित्तीय मामलों के सम्बन्ध में कार्यवाही करने का उत्तरदायित्व वहन करता है, जिसमें विकास सम्बन्धी और अन्य प्रयाज्नों हेतु साधनों का संग्रहण करने सम्बन्धी कार्य सम्मिलित हैं। वित्त मंत्रालय का प्रधान कैबिनेट स्तर का वरिष्ठ मंत्री होता है।

उसकी सहायता हेतु वित्त राज्य मंत्री तथा उप-मंत्री होते हैं।

वित्त मंत्रालय की स्थापना 1810 में वित्त विभाग के नाम से हुई थी। 1947 में इसका नाम बदलकर वित्त मंत्रालय कर दिया गया।

वित्त मंत्रालय के प्रभाग

वर्तमान समय में भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अंतर्गत तीन विभाग कार्यरत हैं। इन तीनों विभागों में प्रत्येक के कुछ प्रभाग भी हैं। ये तीन विभाग निम्नलिखित हैं-

आर्थिक विभाग: इस विभाग के द्वारा अन्य बातों के साथ-साथ विद्यमान आर्थिक प्रवृत्तियों का परिवीक्षण किया जाता है। साथ ही यह विभागआतंरिक एवं वाह्य आर्थिक प्रबंध को प्रभावित करने बाले समस्त मामलों के सम्बन्ध में सरकार को आवश्यक परामर्श प्रेषित करता है। इन मामलों के अंतर्गत वाणिज्यिक बैंकों तथा सार्वजानिक ऋणदाता संस्थाओं का कार्यचालन, पूंजी निवेश का विनियमन, विदेश सहायता, इत्यादि सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त भारत संघ तथा उन राज्य सरकारों एवं विधानमण्डल वाले संघ राज्य क्षेत्रों के, जब वे राष्ट्रपति शासन के अंतर्गत हों, बजट तैयार करने तथौन्हें संसद में प्रस्तुत करने का उत्तरदायित्व भी इसी विभाग का है।

आर्थिक कार्य विभाग के निम्नलिखित आठ मुख्य प्रभाग हैं-

1. आर्थिक प्रभाग: प्राथमिक रूप से परामर्शकारी भूमिका वाले इस प्रभाग के प्रमुख कार्यों के अंतर्गत सम्मिलित हैं- अर्थव्यवस्था के कार्य-निष्पादन का परिवीक्षण करना, अर्थव्यवस्था की विद्यमान प्रवृत्तियों का विश्लेषण करना, वर्तमान आर्थिक नीतियों की समीक्षा एवं मूल्यांकन करना, विकास की गति में तेजी लाने हेतु नीति में आवश्यक समझे जाने वाले परिवर्तनों के सम्बन्ध में परामर्श देना तथा मुद्रास्फीति को रोकने एवं आर्थिक कार्य-प्रणाली के अन्य पक्षों में सुधार करने हेतु परामर्श प्रदान करना।

आर्थिक प्रभाग द्वारा ही प्रतिवर्ष आर्थिक समीक्षा का प्रकाशन किया जाता है, जिसे केंद्र सरकार के वार्षिक बजट के पृष्ठभूमि प्रलेख के रूप में संसद के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। आर्थिक प्रभाग के समस्त कार्यो को चार इकाइयों के अंतर्गत रखा गया है- मूल्य एवं उत्पादन इकाई; लोक वित्त, मुद्रा एवं ऋण तथा सूचना इकाई, भुगतान शेष इकाई राजकोषीय नीति इकाई।

2. बैंकिंग प्रभाग: यह प्रभाग वाणिज्यिक बैंकों एवं भारतीय जीवन बिमा निगम, भारतीय साधारण बिमा निगम एवं भारतीय यूनिट ट्रस्ट को छोड़कर सावधि ऋणदाता संस्थाओं के कार्यचालन से सम्बन्धित नीतियों के विषय में कार्य करता है।

3. बीमा प्रभाग:इस प्रभाग द्वारा डाक-तार विभाग सहित विभिन मंत्रालयों एवं विभागों को बीमांकिक परामर्श प्रदान किया जाता है। राष्ट्रीयकृत बीमा उपक्रमों अर्थात् भारतीय जीवन बीमा निगम तथा भारतीय साधारण बिमा निगम एवं उनकी कम्पिनियों के कार्यचालन क्र प्रशासन सहित नीतियां तैयार करने तथा बीमा सम्बन्धी कानूनों के प्रशासन का उत्तरदायित्व भी इसी प्रभाग द्वारा वहन किया जाता है। इसके अतिरिक्त बीमा प्रभाग द्वारा जीवन एवं साधारण दोनों प्रकार के बीमा उद्योगों से सम्बन्धित समस्त मामलों का पर्यवेक्षण किया जाता है।

4. बजट प्रभाग: संघीय सरकार (रेलवे के अतिरिक्त) तथा राष्ट्रपति शासन के अंतर्गत आए हुए राज्यों एवं संघ शासित क्षेत्रों के बजट, अनुदान की पूरक मांगे और अतिरिक्त मांगे तैयार करने एवं उन्हें संसद के समक्ष प्रस्तुत करने का कार्य बजट प्रभाग को है। इसके अतिरिक्त इस प्रभाग द्वारा अनिवार्य विशेषज्ञ योजनाएं, लोक ऋण, बाज़ार ऋण, सरकार की अर्थोपाय स्थिति, केन्द्र सरकार द्वारा लिए एवं दिए जाने वाले उधारों एवं ऋणों के ब्याज की दर एवं भारत की आकस्मिकता निधि से सम्बद्ध कार्यों का भी सम्पादन किया जाता है। राष्ट्रीय बचत संगठन के प्रशासन हेतु भी यही प्रभाग उत्तरदायी है।

5. प्रवर्तन निदेशालय: इसका मुख्य कार्य 1973 के विदेशी मुद्रा नियंत्रण अधिनियम के प्रावधानों की क्रियान्वित करना है। इसके अतिरिक्त यह विदेशी मुद्रा अपराधों के सम्बन्ध में सूचनाएं संगृहीत करता है तथा संदेहास्पद मामलों की जांच भी करता है।

6. निवेश प्रभाग: इस प्रभाग द्वारा मुख्य रूप से पूंजी निर्गम नियंत्रण, विदेशी निवेश नीति, विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वावधान में बहुराष्ट्रीय निगमों के लिए आचार संहिता, भारतीय निवेश केन्द्र, अनिवासी भारतीयों को भारत में निवेश हेतु सुविधाएं, शेयर बाजार तथा भारतीय यूनिट ट्रस्ट से सम्बन्धित कार्यों को देखता है।

7. विदेश वित्त प्रभाग: यह प्रभाग विदेशों के साथ व्यापार एवं भुगतान सम्बन्धी समझौतों से सम्बन्धित समस्त प्रस्तावों एवं विदेश व्यापार नीति से सम्बन्धित सामान्य पक्षों की जांच करता है। विदेश वित्त प्रभाग द्वारा सम्पादित किए जाने वाले मुख्य कार्यों में सम्मिलित हैं- भारत को विदेशों से प्राप्त होने वाली सहायता, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय विकास संघ, एशियाई विकास बैंक, अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास निधि, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम तथा राष्ट्रमण्डल तकनीकी सहयोग निधि के साथ भारत के सम्बन्धों, भारत द्वारा दूसरे देशों को दी जाने वाली सहायता, विदेशी मुद्रा नियंत्रण एवं विदेशी मुद्रा बजट तैयार करने से सम्बन्धित कार्य।

8. मुद्रा एव सिक्का प्रभाग: भारतीय सुरक्षा प्रेस [नासिक रोड] की दो इकाइयां हैं:

  • टिकट मुद्रणालय, जो कि डाक स्टेशनरी, न्यायिक एवं गैर-न्यायिक टिकट, स्टाम्प, बॉण्ड इत्यादि का मुद्रण करता है, तथा;
  • केन्द्रीय टिकट गृह,जो कि टिकट मुद्रणालय द्वारा मुद्रित वस्तुओं के वितरण की व्यवस्था करता है। करेन्सी नोट प्रेस, नासिक द्वारा एक, दो, पांच तथा दस रुपए के नोटों का मुद्रण किया जाता है। देवास स्थित बैंक नोट प्रेस द्वारा बीस, पचास, सौ तथा पांच सौ क्र नोट छापे जाते हैं। इसके अतिरिक्त इण्डिया गवर्नमेंट मिण्ट, मुम्बई; इण्डिया गवर्नमेंट मिण्ट, कोलकाता; इण्डिया गवर्नमेंट मिण्ट, हैदराबाद, तथा; न्यू मिण्ट प्रोजेक्ट, नोएडा भी इसी प्रभाग से सम्बन्धित हैं।

व्यय विभाग: इस प्रभाग द्वारा प्रमुख रूप से निम्नलिखित कायों को सम्पन्न किया जाता है-

  • वित निगम एवं प्रतिबंध तथा वित्तीय शक्तियों का प्रत्यायोजन।
  • भारत सरकार के समस्त मंत्रालयों एवं कार्यालयों से सम्बन्धित वित्तीय अनुमतियां, विशेष रूप से उन विभागों में जिन्हें कोई सामान्य अथवा विशेष आदेश प्राप्त नहीं है, प्राप्त करना।
  • मितव्ययिता लाने के उद्देश्य से सरकारी संस्थाओं की भर्ती पर पुनर्विचार।
  • लागत लेखा सम्बन्धी प्रश्नों पर मंत्रालय एवं सरकारी उद्यमों की परामर्श प्रदान करना।
  • भारतीय लेखा परीक्षण विभाग।
  • प्रतिरक्षा लेखा विभाग।

व्यय विभाग के उल्लिखित कार्यों के महत्त्व को देखते हुए संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि, व्यय विभाग भारत सरकार के समस्त व्यय का नियंत्रण करता है तथा अपव्यय को रोकने हेतु उत्तरदायी है।

व्यय विभाग में मुख्य रूप से निम्नलिखित छह प्रभाग हैं:

  • योजना वित्त विभाग: यह प्रभाग मुख्य रूप से केन्द्र एवं राज्यों की योजनाओं हेतु कुल बजट सम्बन्धी एवं अतिरिक्त बजटीय संसाधनों का अनुमान लगाता है। इसके अतिरिक्त यह प्रभाग केन्द्रीय क्षेत्र में निवेश आयोजना एवं अनुमोदन हेतु समन्वयात्मक अभिकरण के रूप में भी कार्य करता है।
  • वित्त आयोग प्रभाग: इस प्रभाग हेतु निर्धारित कार्यों में सम्मिलित हैं- वित्त आयोग द्वारा की गई संस्तुतियों की क्रियान्वित पर दृष्टि रखना तथा राज्यों के वित्त सम्बन्धी अध्ययन करना तथा ऐसे शोध-पत्रों एवं आंकड़ों का प्रकाशन करना, जो कि इससे सम्बन्धित हों।
  • संस्थापना प्रभाग:यह प्रभाग विभिन्न प्रकार की वित्तीय नियमावलियां एवं विनियमों के प्रकाशनार्थ उत्तरदायी है। इनमें केन्द्रीय सरकारी कर्मचारियों की सेवा शर्तों से सम्बन्धित नियम एवं विनियम, इत्यादि भी सम्मिलित हैं।
  • लागत लेखा शाखा: यह शाखा केन्द्र सरकार की एक स्वतन्त्र मूल्य निर्धारण एजेन्सी है। इसके अतिरिक्त यह विभिन्न मंत्रालयों, समितियों तथा औद्योगिक लागत और मूल्य जैसे अन्य सरकारी अभिकरणों को भी व्यावसायिक सहायता प्रदान करती है।
  • महालेखा नियंत्रक: वित्त मंत्रालय में महालेखा नियंत्रक शीर्षस्थ तकनीकी नीति-निर्माता संस्था है तथा संघ एवं राज्य सरकारों के लेल्हओं का स्वरूप निर्धारित करते हुए भारतीय संविधान के अनुच्छेद-150 के अंतर्गत राष्ट्रपति की शक्तियों का पालन अब इसी संस्था के माध्यम से किया जाता है।
  • कर्मचारी निरीक्षण इकाई: इस इकाई की स्थापना 1964 में की गई थी। इसके गठन का मुख्य उद्देश्य पूर्ण रूप से या अधिकांशतः सरकारी अनुदानों पर आश्रित सरकारी कार्यालयों एवं संस्थाओं में प्रशासनिक कार्यकुशलता के अनुरूप कर्मचारियों की संख्या में मितव्ययिता बरतने तथा निष्पादन सम्बन्धी मानक एवं कार्यों के प्रतिमान तैयार करना था।

राजस्व विभाग: इस विभाग द्वारा संवैधानिक बोडों अर्थात् केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड तथा केन्द्रीय उत्पाद शुल्क एवं सीमा शुल्क बोर्ड के माध्यम से नियंत्रण रखता है। साथ ही विभाग केन्द्रीय विक्रय कर, स्टाम्प शुल्क, स्वर्ण नियंत्रण, विदेशी मुद्रा एवं अन्य संगत वित्तीय अधिनियमों से सम्बन्धित कानूनों में दिए गए नियंत्रणों एवं विनियामक उपायों के प्रशासन एवं प्रवर्तन सम्बन्धी कार्यों को भी सम्पादित करता है। सभी प्रकार के प्रत्यक्ष करों को लगाने एवं उनकी वसूली सम्बन्धी मामलों को केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड देखता है जबकि केन्द्रीय उत्पादन शुल्क एवं सीमा शुल्क लगाने एवं उसकी वसूली का कार्य केन्द्रीय उत्पादन शुल्क एवं सीमा शुल्क बोर्ड के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आता है।

कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय

कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय प्रधानमंत्री के प्रभारी नियंत्रण में है। मंत्रालय का प्रमुख कैबिनेट स्तर का एक मंत्री होता है, जिसके कार्यों में सहायतार्थ राज्य मंत्री तथा उप-मंत्री होते हैं। इस मंत्रालय के तीन पृथक्-पृथक् विभाग हैं- कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, प्रशासनिक सुधार एवं लोकशिकायत विभाग; पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग।

इन तीनों विभागों का प्रधान सचिव (कार्मिक) को बनाया गया है, जिसकी सहायतार्थ तीन अपर सचिव, छह संयुक्त सचिव तथा अन्य सहायक स्टाफ होता है।

भारत सरकार के समस्त संगठनों हेतु कार्मिक प्रबंध क्षेत्र का मुख्य नीति-निर्धारक यह मंत्रालय सतर्कता सेवाओं तथा पदों में अनुसूचित जातियों, जनजातियों एवं अन्य निर्दिष्ट वर्गों के लिए आरक्षण, संयुक्त परामर्श तंत्र तथा अनिवार्य विवाचन, कर्मचारी कल्याण, पेंशन प्रबन्ध, प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत को दूर करने हेतु विभिन्न पक्षों के कार्यान्वयन का समन्वय करता है।

मंत्रालय के विभाग  

  1. कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग: यह विभाग इस मंत्रालय की सबसे बड़ी इकाई है, जो कि भारतीय प्रशासनिक सेवा तथा केन्द्रीय सचिवालय सेवा संवर्ग का नियंत्रण करती है। इस विभाग के निर्धारित उत्तरदायित्वों में सम्मिलित हैं- केन्द्रीय जांच ब्यूरो, प्रशासनिक अधिकरणों, संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (मसूरी) तथा सचिवालय प्रशिक्षण एवं प्रबंध संस्थान (नई दिल्ली) के प्रशासनिक मामलों की देख-रेख करना।
  2. प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग: यह विभाग भारत सरकार के अंतर्गत प्रशासनिक सुधार, संगठन एवं पद्धति के क्षेत्र में केन्द्र बिन्दु अथवा नाभिक के रूप में कार्य करता है। इस विभाग द्वारा वहन किए जाने वाले प्रमुख उत्तरदायित्वों में प्रमुख रूप से सम्मिलित हैं- प्रशासन से सम्बन्धित लोक शिकायतों का निवारण करना (सामान्य रूप में) तथा केन्द्र सरकार के विभिन्न अभिकरणों से सम्बन्धित शिकायतों के निवारण से सम्बंधित नीतियों का निर्धारण एवं उपायों का समन्वय करना (विशेष रूप में)।
  3. पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग: यह विभाग पेंशन नीति हेतु केन्द्रीय अभिकरण एवं पेंशन भोगियों की शिकायतों के निवारणार्थ एक केन्द्रीय तंत्र के रूप में कार्यरत है। पेंशनभोगियों के कल्याण हेतु नीतियों एवं प्रक्रियाओं का निरूपण/पुनर्निर्धारण करना इस विभाग का एक सतत् प्रयास रहा है।

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