मेकाग-गंगा सहयोग Mekong–Ganga Cooperation - MGC

यह संगठन गंगा और मेकांग नदी क्षेत्रों के छह देशों की आर्थिक सहयोग के उद्देश्य से एक मंच पर लाता है।

सदस्यता: कबोडिया, भारत, लाओस, म्यांमार, थाईलैंड और वियतनाम।

उत्पति एवं विकास

जुलाई 2000 में बैंकॉक (थाईलैंड) में चल रही आसियान मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान 6 देशों के विदेश मंत्रियों की अलग से बैठक हुई। इसी बैठक में मेकांग-गंगा सहयोग संगठन को गठित करने का निर्णय लिया गया। इस संगठन का विधिवत् उद्घाटन 10 नवंबर, 2000 को विनतियेन (लाओस) में हुआ। इससे पूर्व हुई वियेनतियेन उद्घोषणा में इस संगठन के मौलिक उद्देश्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी। छह सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व कर रहे मंत्रियों ने इस घोषणा पर हस्ताक्षर किये।

उद्देश्य

एमजीसी के उद्देश्य हैं- मैत्री, एकजुटता और सहयोग बढ़ाने के लिये सदस्य देशों के बीच बेहतर तालमेल और घनिष्ठ संबंध विकसित करना; क्षेत्र के लोगों और वस्तुओं के अंतर्देशीय आवागमन और पारगमन को सरल बनाना; गंगा-मेकांग नदी घाटी क्षेत्रों में आवश्यक मौलिक सुविधाओं का सृजन करना, और; गरीबी-उन्मूलन में सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहन देना।

संरचना

एमजीसी का संस्थागत ढांचा अभी तक पूर्ण रूप से विकसित नहीं हुआ है। एमजीसी द्वारा अनुमोदित एक प्रांरभिक अवधारणा-पत्र के अनुसार, प्रत्येक वर्ष मंत्रिस्तरीय बैठक होगी। संगठन की अध्यक्षता का निर्धारण वर्णमाला क्रम में तथा चक्रण पद्धति के आधार पर होगा। जो सदस्य इसका अध्यक्ष होगा वाही योहन के समन्वय और क्रियान्वयन के लिए सचिवालय का कार्य भी करेगा।

गतिविधियां

नवंबर 2000 में संपन्न संगठन की उद्घाटन बैठक में पर्यटन, संस्कृति और मानव विकास की पहचान ऐसे आरंभिक कदमों के रूप में की गई, जिनसे संचार, परिवहन और मूल आर्थिक ढांचे के विकास के लिये प्रभावशाली नेटवर्क स्थापित होगा।

पर्यटन के क्षेत्र में एमजीसी ने ये कदम उठाने की घोषणा की- संयुक्त विपणन के लिये रणनीतिक अध्ययन आयोजित करना; मेकांग-गंगा पर्यटन निवेश गाइड प्रकाशित करना; क्षेत्र के लोगों के आवागमन को सरल बनाना; यात्रा एवं पर्यटन में वृद्धि लाने के लिये बहु-रूपात्मक संचार और परिवहन संपर्को का विस्तार करना, और; सांस्कृतिक-धार्मिक यात्रा पैकेज को प्रोत्साहन देना।

मूल अवसंरचनात्मक (infrastructure) ढांचे के विकास के क्षेत्र में सदस्य देश परिवहन और संचार शीर्षक के अंतर्गत परिवहन नेटवर्क, विशेषकर पूर्वी-पश्चिमी गलियारा और पार-एशियाई राजमार्ग, को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। एशियाई राजमार्ग परियोजना पूरा होने पर सिंगापुर को नई दिल्ली से जोड़ देगी। यह सड़क मार्ग क्वालालमपुर, हो ची मिन्ह सिटी, नाम पेन्ह, बैंकाक, वियेनतियेन, चियांग मय, यांगून, मांडले, कलेमयो, तामू, ढाका और कोलकाता से होकर गुजरेगा। सहयोग विकसित करने के लिये जिन अन्य क्षेत्रों की पहचान की गई है उनमे प्रमुख हैं- वायु सेवा और सुचना-तकनीक के क्षेत्र में मूलभूत ढांचा विकास और नेटवर्क का विस्तार।

सांस्कृतिक क्षेत्र में, इस संगठन की प्रमुख योजनाएं हैं- नाटक, संगीत और नृत्य के क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान, साहित्य, अभिनय कला (performing arts); महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य एवं पोषण; पारंपरिक स्थलों एवं शिल्प-तथ्यों के संरक्षण; परिरक्षण और सुरक्षा से जुड़े पत्रकारों, लेखकों एवं विशेषज्ञों के लिये गोलमेज सम्मेलन; क्षेत्र के विश्वविद्यालयों में नेटवकिग की व्यवस्था; एमजीसी देशों के उत्कृष्ट साहित्य का अन्य एमजीसी भाषाओं में अनुवाद, तथा; सदस्य देशों द्वारा व्यावसायिक आधार पर पुस्तक मेलों में सहभागिता।

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