अन्तर-अमेरिकी विकास बैंक Inter-American Development Bank - IADB or IDB or BID

यह बैंक प्रचिंतामौर सबसे बड़ी क्षेत्रीय बहुपक्षीय विकास संस्था है तथा यह लैटिन अमेरिकी और कैरेबियन देशों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिये कार्यरत है।

औपचारिक नाम: बैंको इन्टरअमेरिकानो डी डेसारोलो (बीआईडी) (Banco Interamericano de Desarrollo—BID)

मुख्यालय: वाशिंगटन डीसी (संयुक्त राज्य अमेरिका)।

सदस्यता: अर्जेंटीना, इक्वाडोर, निकारागुआ, ऑस्ट्रिया, अल साल्वाडोर, नॉर्वे, बहामा, फिनलैंड, पनामा, बारबाडोस,  फ्रांस, पैराग्वे, बेल्जियम, जर्मनी, पेरू, बेलीज, ग्वाटेमाला, पुर्तगाल, बोलीविया, गुयाना, स्लोवेनिया, ब्राजील, हैती, स्पेन, कनाडा,  होंडुरास, सूरीनाम, चिली, इसराइल, स्वीडन, चीन,  इटली, स्विट्जरलैंड, कोलम्बिया, जमैका, त्रिनिदाद और टोबैगो, कोस्टारिका, जापान, यूनाइटेड किंगडम, क्रोएशिया, कोरिया,   संयुक्त राज्य अमेरिका, डेनमार्क, मैक्सिको, उरुग्वे, डोमिनिकन गणराज्य, नीदरलैंड, वेनेजुएला।

उद्भव एवं विकास

अंतर अमेरिकी विकास बैंक (Inter-American Development Bank—IDB) की स्थापना ओएएस के तत्कालीन सदस्य देशों (20 लैटिन अमेरिकी गणराज्य और संयुक्त राज्य अमेरिका) के द्वारा अप्रैल 1959 में वाशिंगटन डीसी में एक संधि पर हस्ताक्षर के साथ हुई। बैंक ने अक्टूबर 1960 से कार्य करना प्रारम्भ किया तथा 1970 के दशक में इसकी सदस्यता का विस्तार हुआ। आज इजरायल, जापान के साथ-साथ अधिकांश उत्तरी और दक्षिणी अमेरिकी देश तथा कैरेबियन देश और अनेक यूरोपीय देश इस बैंक के सदस्य हैं।

उद्देश्य

बैंक के मुख्य उद्देश्य हैं- आर्थिक और सामाजिक विकास परियोजनाओं के लिये धन, लोक एवं निजी बाह्य पूंजी दोनों, की व्यवस्था करना; संसाधन सर्वेक्षण के संबंध में तकनीकी सहायता प्रदान करना; व्यवहार्यता अध्ययन और पेशेवर प्रशिक्षण आयोजित करना, तथा; विकास परियोजनाओं में समन्वय स्थापित करने के लिये क्षेत्रीय सदस्यों की सहायता पहुंचाना।

संरचना

गवर्नर बोर्ड बैंक का सबसे शक्तिशाली अंग है। इसमें प्रत्येक सदस्य देश के एक गवर्नर और एक वैकिल्पक गवर्नर सम्मिलित रहते हैं तथा नीति-निर्धारण के उद्देश्य से इसकी वर्ष में सामान्यतया एक बार बैठक होती है। प्रत्येक सदस्य को एक निश्चित मत प्राप्त रहता है। गवर्नर बोर्ड के अधिकांश अधिकार निदेशक बोर्ड में प्रत्यायोजित कर दिये गये हैं। निदेशक बोर्ड बैंक का अधिशासी अंग होता है तथा यह स्थायी रूप से वाशिंगटन डीसी में अवस्थित है। बैंक के अध्यक्ष का चुनाव गवर्नर बोर्ड द्वारा किया जाता है तथा वह निदेशक बोर्ड के सभापित के रूप में कार्य करता है। उपाध्यक्ष का मनोनयन निदेशक बोर्ड के द्वारा होता है। प्रत्येक ऋण-ग्राही देश तथा पेरिस और टोक्यो में बैंक के देश कार्यालय (country office) कार्यरत हैं।

गतिविधियां

बैंक के प्रमुख संसाधनों में इसके सामान्य संसाधन और एक विशेष कार्यवाही कोष सम्मिलित रहते हैं। इन दोनों प्रकार के संसाधनों में सदस्य देशों का योगदान रहता है। सामान्य पूंजी संसाधन अभिदत्त पूंजी स्टॉक (subscribed capital stock) तथा पूंजी बाजार में उगाही तथा केंद्रीय बैकों के हाथ अल्पावधि बॉण्डों को बेचकर प्राप्त किये गये धन के सुरक्षित भाग का बना होता है। संसाधनों की भरपाई परिशोधनों के माध्यम से होती है। इसके अतिरिक्त बैंक कई ऐसे कोषों का प्रशासन भी करता है, जो दाता देश लैटिन अमेरिकी देशों की वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिये उसे सौंपते हैं। बैंक की पूंजी की प्रत्येक चार वर्षों पर भराई की जाती है।

कठोर शर्तों पर प्रदत्त ऋण या व्यावसायिक और गैर-रियायती शर्तों पर प्रदत्त ऋण, बैंक के सामान्य पूंजी संसाधन से निर्गत होते हैं। ऐसे ऋण कुल अभिदत्त पूंजी से अधिक नहीं हो सकते हैं। साथ ही, इस श्रेणी के ऋण किसी विशिष्ट देश में वस्तुओं और सेवाओं के क्रम से बंधे नहीं होते हैं तथा इसका भुगतान 40 वर्षों के भीतर उसी मुद्रा में होना चाहिये, जिस मुद्रा में ऋण लिया गया हो।

विशेष कार्यवाही कोष से आसान शर्तों या रियायती और गैर-व्यावसायिक शर्तों, पर ऋण दिये जाते हैं। ये ऋण कम ब्याज दर पर उपलब्ध होते हैं तथा इनके भुगतान की अवधि लम्बी होती है। कर्जदार अपनी मुद्रा में ऋण का भुगतान कर सकते हैं।

बैंक ने विभिन्न बैंक इकाइयों, विशिष्ट सदस्य देशों, क्षेत्रीय संगठनों तथा एकीकरण के विभिन्न पहलुओं से जुड़ी अन्य निजी एवं लोक संस्थाओं को सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से वर्ष 1964 में ब्यूनस आयर्स में लैटिन अमेरिकी और कैरेबियन एकीकरण संस्था (आईएनटीएएल) की स्थापना की। लघु एवं मध्यम आकार वाले उपक्रमों में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिये 1986 में अन्तर-अमेरिकी निवेश सहयोग (आईआईसी) ने कार्य करना शुरू कर दिया। फिर, एक अतिरिक्त सुविधा के रूप में, क्षेत्र में निवेश सुधारों और निजी क्षेत्र के विकास की सहायता प्रदान करने के लिए 1992 में बहुपक्षीय निवेश कोष का गठन किया गया।

प्रमुख क्षेत्र, जिसमें बैंक ने वित्तीय सहायता प्रदान की है, इस प्रकार हैं- कृषि परियोजनाएं, उद्योग, ऊर्जा और गैर-ईंधन खनिज, जल एवं मल-निकास (sewerage) सुविधाएं, सस्ते गृह निर्माण, परिवहन एवं संचार, विद्युत शक्ति, शिक्षा और पर्यटन। बैंक की वर्तमान प्राथमिकताओं में गरीबी-निवारण, सामाजिक समानता, आधुनिकीकरण और एकीकरण सम्मिलित हैं।

अंतर-अमेरिकी विकास बैंक (आईडीबी) का संचालन इसके निदेशक मंडल द्वारा होता है, जिसमें 48 सदस्य हैं और जिसकी निरंतर वर्ष में एक बार बैठक होती है। मार्च 2010 में, कैनकुन (मैक्सिको) में हुई बैठक में बैंक के निदेशक मंडल हैती को 70 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि पर सहमत हुए और साथ ही इसका सारा ऋण माफ कर दिया। हैती इसका निर्धनतम सदस्य देश है। एक भूकंप ने इसकी राजधानी पोर्ट-ओ-प्रिंस को पूरी तरह बर्बाद कर दिया।

विकासशील देश, जो आईडीबी से ऋण लेते हैं, बहुमत में हिस्सेदार हैं, और इसलिए बैंक के अधिकतर निर्णयों को नियंत्रित करते हैं। 21 जुलाई, 2010 में, बैंक के निदेशक मंडल ने बैंक की साधारण पूंजी को 70 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने पर सहमति की। यह बैंक के इतिह्रास में सबसे बड़ा विस्तार था और हैती की मदद के लिए अपूर्व वित्तीय मदद की। बैंक की बढ़ी हुई पूंजी 2015 से अमल में आएगी जैसाकि इसके सदस्य देशों की संसदें आवश्यक कोष मुहैया कराएंगी।

आलोचना: इस बात का दावा किया जाता रहा है कि आईडीबी द्वारा मुहैया कराए गए वित्त से स्थानीय पर्यावरण और मूल एवं स्थानीय निवासियों पर विपरीत प्रभाव पड़ सकते हैं। बैंक के सुचना केंद्र के अनुसार, नागरिक समाज समूह आईडीबी के अभियानों का पर्यावरण और स्थानीय लोगों पर नकारात्मक प्रभाव को लेकर चिंतित रहा है।

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