भारत-नेपाल सम्बन्ध India-Nepal Relations

नेपाल, हिमालय क्षेत्र में स्थित एक पहाड़ी, पथरीला एवं स्थलरुद्ध देश है। भारत की नेपाल के साथ 1700 कि.मी. की सीमा है। दोनों देशों हैं। पारस्परिक मैत्री बनाए रखने हेतु इनके मध्य 1950 में मैत्री संधि अखंडता, स्वतंत्रता एवं सम्मान को अक्षुण्ण बनाए रखने का उल्लेख है। जुलाई-अगस्त 2000 में नेपाल के प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला भारत की यात्रा पर आये। विमान अपहरण कांड तथा ऋत्कि रोशन प्रकरण के कारण दोनों देशों के मध्य योड़ी-सी दूरी दिखाई दी किंतु सीमा प्रबंधन, सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास तथा जल संसाधनों के दोहन के क्षेत्र में परस्पर सहयोग को और अधिक मजबूत बनाया गया है। भारत व नेपाल के मध्य सुरक्षा से संबंधित सहयोग को प्रभावी बनाने हेतु द्विपक्षीय संस्थागत तंत्रों का एक नेटवर्क भी तैयार किया गया है।

नेपाल के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के दौरान द्विपक्षीय मसलों की व्यापक समीक्षा की गई। इसके अलावा, कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें हुई, जिनमें गृह-सचिव स्तर की वार्ता (19-20 जनवरी, 2005), सुरक्षा मसलों से सम्बद्ध भारत-नेपाल द्विपक्षीय परामर्शीय समूह की बैठक, जल संसाधनों से सम्बद्ध संयुक्त समिति (7-8 अक्टूबर, 2004), पंचेश्वर परियोजना से सम्बद्ध विशेषज्ञों के संयुक्त दल की बैठक (6 अक्टूबर, 2004), सचिव स्तर की दूरसंचार समन्वय बैठक (1-2 नवम्बर, 2004) और संयुक्त सचिव स्तर की व्यापार बातचीत (1-2 नवम्बर, 2004) शामिल है। फलस्वरूप कई द्विपक्षीय मसलों पर उल्लेखनीय प्रगति प्राप्त की गई।

वर्ष 2007 में राजशाही की समाप्ति एवं 2008 में संविधान सभा के चुनावों के पश्चात् नेपाल में गणतंत्र स्थापित हुआ जिसके परिणामस्वरूप भारत-नेपाल संबंधों में नए आयाम परिलक्षित हुए। श्री पुष्प कुमार दहल प्रचंड के नेतृत्व में माओवादियों की सरकार बनने से भारत-नेपाल संबंधों में मिठास कुछ कम होने लगी। प्रधानमंत्री प्रचंड द्वारा 1950 की मैत्री संधि की पुनर्समीक्षा की घोषणा एवं चीन की तरफ उसके बढ़ते झुकाव ने इस बात को पुख्ता किया। उल्लेखनीय है कि सेनाध्यक्ष की बर्खास्तगी के मुद्दे पर प्रचंड को इस्तीफा देना पड़ा। तत्पश्चात् उन्होंने नेपाल की आंतरिक अस्थिरता के लिए भारत की जिम्मेदार ठहराया। गौरतलब है कि माओवादियों के सत्ता में आने के पश्चात नेपाल में चीन का प्रभाव असामान्य रूप से फैला है। नेपाल को तिब्बत से जोड़ने के लिए आंतरिक सड़कों एवं रेल की व्यवस्था की गई है। चाइना रेडियो इंटरनेशनल ने काठमांडू में स्थानीय एफ.एम. रेडियो स्टेशन भी खोला है। यहां से पूरे नेपाल में कार्यक्रम प्रसारित किए जाते है। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ने 4 मई, 2009 को इस्तीफा दे दिया एवं उनके स्थान पर माधव कुमार नेपाल ने प्रधानमंत्री का पद संभाला। वर्तमान में नेपाल के राष्ट्रपति पद पर भारतीय मूल के व्यक्ति हैं।

20-23 अक्टूबर, 2011के दौरान नेपाल के प्रधानमंत्री डॉ.बाबूराम भट्टराई ने एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल के साथ भारत की यात्रा की। यात्रा के दौरान भारत एक एमीनेन्ट पर्सन्स ग्रुप स्थापित करने पर सहमत हुआ जो भारत-नेपाल संबंधों को पूर्णता में देखेगा तथा इन देशों के मध्य सम्बंधों को मजबूत एवं और विस्तारित करने के उपाय सुझाएगा। दोनों प्रधानमंत्रियों की उपस्थिति में एक भारत-नेपाल द्वितीय निवेश प्रोटेक्शन एवं संवर्द्धन समझौता (बीआईपीपीए) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत् नेपाल सरकार एवं भारतीय आयात निर्यात बैंक के मध्य 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर की साख उपलब्ध कराने का प्रावधान है। साथ ही नेपाल में घेंघा नियंत्रण कार्यक्रम के लिए 1.875 करोड़ रुपए की भारतीय सहायता के सम्बन्ध में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर शामिल है।

वर्तमान में भारत-नेपाल आर्थिक सहयोग कार्यक्रम के तहतू छोटे तथा बड़े लगभग 400 प्रोजेक्ट चल रहे हैं। नेपाल के आर्थिक विकास में सहयोग करने तथा नेपाल के तराई क्षेत्र में विकास की सुविधा प्रदान करने की दृष्टि से, भारत, नेपाल को भारत से जुड़े उसके सीमावर्ती क्षेत्रों में समेकित चेक पोस्टों के विकास, क्रास बार्डर रेल लिंक तथा तराई क्षेत्र में फीडर रोड तथा पाश्विक सड़कों के विकास के जरिए आधारभूत संरचना का विकास करने में सहायता प्रदान कर रहा है।

नेपाल में व्यापार को बढ़ावा देने से पनबिजली, कृषि,पर्यटन और बुनियादी ढांचा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी लाभ के लिए भारतीय निवेश के प्रमुख विस्तार की संभावनाओं का दोहन करने में मदद मिल सकती है।

उल्लेखनीय है कि भारत एवं नेपाल के मध्य पिछले 60 सालों से लगातार मिठासपूर्वक एवं विशिष्ट संबंध आज तनाव की त्रासदी झेल रहे हैं। वस्तुतः नेपाल पर चीन की तुलना में भारत का अधिक प्रभाव रहा है। हालांकि भारत, नेपाल के आंतरिक एवं राजनीतिक मामलों में अहस्तक्षेप की नीति का अनुसरण करता है, लेकिन वहां की अस्थिर राजनीतिक स्थिति पर शांत होकर बैठा भी नहीं जा सकता। सीमावर्ती देशएवं नागरिकों की मुक्त आवाजाही के कारण घुसपैठ एवं राष्ट्रविरोधी गतिविधियां सक्रिय हो सकती हैं। अंततः भारत को चीन के मद्देनजर सावधानी पूर्वक नेपाल से संबंधों में गर्माहट एवं मधुरता बनाए रखनी होगी जिसके लिए भारत हमेशा प्रयासरत है।

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