भारत: एक सामान्य परिचय India: A General Introduction

अवस्थिति एवं विस्तार

भारत एक विशाल देश है। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह विश्व का सातवां सबसे बड़ा देश है तथा जनसंख्या की दृष्टि से यह चीन के पश्चात् द्वितीय स्थान पर है। यह पूर्णतया उत्तरी गोलार्द्ध में विषुवत रेखा के उत्तर में 8°4 से 37°6' उत्तरी अक्षांश और 68°7 से 97°25 पूर्वी देशांतर के मध्य फैला हुआ है। इसके उत्तर में विशाल हिमालय पर्वत, पूर्व में बंगाल की खाड़ी तथा पश्चिम में अरब सागर विद्यमान हैं।

यह उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक तथा पश्चिम में सौराष्ट्र से लेकर पूर्व में अरुणाचल प्रदेश तक 32,87,263 वर्ग किमी. (31 मार्च, 1982 को अनंतिम) क्षेत्र में फैला हुआ है। इसकी समुद्री सीमा 7516.6 किमी. है। मुख्य भूमि, लक्षद्वीप समूह और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह को मिलाकर इसी विशालता के कारण इसे उप-महाद्वीप भी कहा जाता है। भारत के मध्य से कर्क रेखा (23°30 उत्तर) गुजरती है जो संपूर्ण देश को प्रायः दो भागों में विभाजित करती है। इसके दक्षिण का आधा भाग, जिसमें प्रायद्वीपीय भारत सम्मिलित है, उष्णकटिबंध में आता है तथा उत्तर का आधा भाग उपोष्णकटिबंध के अंतर्गत आता है। विश्व के लगभग 2.4 प्रतिशत क्षेत्रफल पर अवस्थित भारत हिमालय की हिमाच्छादित चोटियों से लेकर दक्षिण के उष्णकटिबंधीय सघन वनों तक विस्तृत है।

भारत एक बड़ा देश है परंतु सम्पूर्ण देश के लिए एक ही समय जोन कायम किया गया है। भारत में मानक समय 82½° पूर्वी देशांतर से निर्धारित किया गया है जो इलाहाबाद के निकट से गुजरती है।

भारत पूर्वी गोलार्द्ध के मध्य में हिंद महासागर के उत्तरी सिरे पर मौजूद है अतः पूर्व से पश्चिम या पश्चिम से पूर्व की जाने वाले प्रमुख व्यापारिक मार्ग भारत से होकर गुजरते हैं।

स्वेज नहर तथा पूर्व में मलक्का जल संयोजक से आने वाले सभी जलयान भारत से होकर निकलते हैं।

प्राचीन काल में भी सभी महत्वपूर्ण व्यापारिक स्थल मार्ग भारत से होकर ही निकलते थे। पूर्व में चीन, थाईलैंड, कंबोडिया, सुमात्रा, जावा से लेकर पश्चिम में अरब, फारस, यूनान, मिस्र व रोम तक भारत का व्यापार फैला हुआ था। अंतरराष्ट्रीय वायु यातायात की दृष्टि से भी भारत की स्थिति काफी महत्वपूर्ण है। स्थलीय महत्व की दृष्टि से भी भारत दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा प्रायद्वीप है।

राजनीतिक इकाई

स्वतंत्रता से पूर्व भारत में 562 लघु देशी राज्य इकाइयां तथा 9 ब्रिटिश प्रांत विद्यमान थे। स्वतंत्रता के तुरंत पश्चात् देश को विभाजन का दंश झेलना पड़ा तथा इसकी परिणति पाकिस्तान नामक इस्लामिक राष्ट्र के निर्माण में हुई। (पूर्वी एवं पश्चिमी पाकिस्तान में गहरा सांस्कृतिक व राजनीतिक मतभेद होने के कारण 1971 में पूर्वी पाकिस्तान के स्थान पर बांग्लादेश का जन्म हुआ ) इस विभाजन से कई प्रकार के परिवर्तन जैसे राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक व सामाजिक स्वरूप परिलक्षित होते हैं।

वर्तमान में भारत प्रायः भाषाई आधार पर 29 राज्यों व 7 केन्द्र शासित प्रदेशों में विभाजित है। ये 29 राज्य हैं- आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैण्ड, ओडीशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश एवं पश्चिम बंगाल, तथा; केंद्र शासित प्रदेश का विवरण इस प्रकार है-चंडीगढ़, दादरा व नागर हवेली, दिल्ली, दमन एवं दीव, लक्षद्वीप, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह तथा पुदुचेरी।

भारत की सीमाओं का विस्तार एवं पडोसी देश

भारत की सीमाएं चीन-तिब्बत, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा म्यांमार से मिलती हैं। भारत की सीमाएं प्रायः प्राकृतिक हैं किंतु कुछ सीमाएं कृत्रिम भी हैं। उत्तर में हिमालय, दक्षिण-पश्चिम में अरब सागर, दक्षिण-पूर्व में बंगाल की खाड़ी तथा दक्षिण में हिन्द महासागर भारत की प्राकृतिक सीमाएं निर्मित करते हैं। भारत एवं चीन के मध्य की सीमा मैकमोहन रेखा कहलाती है। इसका निर्धारण 1914 में किया गया था। भारत-चीन की सीमा लगभग 3840 कि.मी. लम्बी है। इसी तरह भारत-पाकिस्तान सीमा कश्मीर, पंजाब, पश्चिमी राजस्थान तथा कच्छ प्रदेश तक फैली हुई है। भारत के सीमावर्ती राज्य राजस्थान व पाकिस्तान के मध्य 1120 कि.मी. लम्बी सीमा रेखा है।

भारतीय सीमा सम्बन्धी प्रमुख तथ्य
1. भारत वर्ष उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक 3214 किमी. तथा पश्चिम में सौराष्ट्र से लेकर पूर्व में अरुणाचल प्रदेश तक 2933 किमी. तक फैला हुआ है। इसकी आकृति लगभग चतुष्कोणीय है।
2. भारत की स्थल सीमा की कुल लम्बाई 15200 किमी. है।
3. भारत की समुद्री सीमा की कुल लम्बाई 6100 कि.मी. है किंतु लक्षद्वीप तथा अंडमान निकोबार द्वीप समूह की लम्बाई भी इसमें शामिल की जाती है तो यह 7516.6 कि.मी. हो जाती है।
4. भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा पूर्व में बांग्लादेश के साथ 4096 कि.मी., उत्तर में चीन के साथ 3917 कि.मी., अफगानिस्तान के साथ 80 किमी. तथा उत्तर-पश्चिम में पाकिस्तान के साथ 3310 कि.मी. लम्बी है।
5. भारत की नेपाल के साथ 1752 कि.मी., म्यांमार के साथ 1458 कि.मी. तथा भूटान के साथ 587 किमी. लम्बी अंतरराष्ट्रीय सीमा है।

भारत का पड़ोसी देश श्रीलंका पाक जलडमरूमध्य द्वारा सीमा से पृथक् होता है। भारत व बांग्लादेश के मध्य संपूर्ण सीमा रेखा पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, असम व मेघालय के स्थलीय भागों को स्पर्श करती है। भारत व म्यांमार के मध्य हिमालय से निकलने वाली उत्तर-पूर्वी श्रेणियां-लुशाई, नागा, अराकनयोम एवं पटकोई स्थलीय सीमा का निर्माण करती हैं। ये श्रेणियां भारत को इरावदी नदी की घाटी द्वारा म्यांमार से अलग करती हैं।

लक्षद्वीप समूह के दक्षिण में बसा हुआ सामुद्रिक देश मालदीव हमारा एक अन्य पड़ोसी देश है। इसी तरह बंगाल की खाड़ी के सीमान्त से संबद्ध देशों में थाइलैंड, मलेशिया, इण्डोनेशिया, लाओस, आदि उल्लेखनीय हैं। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, इराक तथा अरब राष्ट्र हैं। सागरपारीय राष्ट्रों में सूडान, इथियोपिया, सोमालिया, तंजानिया तथा कीनिया हैं। एशिया के पांच राष्ट्र-चीन, उज्बेकिस्तान, अफगानिस्तान, भारत एवं पाकिस्तान उत्तर भारत के त्रिकोण पर एक साथ स्पर्श करते हैं। इसी प्रकार भारत के सुदूर पूर्वोत्तर भाग में भारत, चीन व म्यांमार त्रिमूर्ति का निर्माण करते हैं।

अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मिलने वाले भारतीय राज्य हैं-गुजरात (पाकिस्तान), राजस्थान (पाकिस्तान), पंजाब (पाकिस्तान), जम्मू एवं कश्मीर (चीन और पाकिस्तान), हिमाचल प्रदेश (चीन), बिहार (नेपाल), उत्तराखंड (चीन और नेपाल), उत्तर प्रदेश (नेपाल), प. बंगाल (भूटान और बांग्लादेश), सिक्किम (चीन, भूटान और नेपाल), अरुणाचल प्रदेश (भूटान, चीन और म्यांमार), नागालैण्ड (म्यांमार), मणिपुर (म्यांमार), मिजोरम (बांग्लादेश और म्यांमार), मेघालय (बांग्लादेश), त्रिपुरा (बांग्लादेश) तथा असम (भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार)।

राज्यों की स्थिति से संबद्ध विशिष्ट तथ्य
1. जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम तथा अरुणाचल प्रदेश पूर्णतया हिमालयी क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं जबकि उत्तराखंड का कुछ भाग हिमालयी क्षेत्र के अंतर्गत है तथा कुछ भाग उत्तरी मैदान के अंतर्गत आता है।
2. मध्य प्रदेश, छतीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र, ओडीशा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल तथा तमिलनाडु एक साथ विशाल प्रायद्वीपीय पठार का निर्माण करते हैं।
3. अरुणाचल प्रदेश, नागालैण्ड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा एवं मेघालय उत्तर-पूर्व के पर्वतीय क्षेत्रों में अवस्थित हैं।
4. गुजरात, महाताश्त्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आन्ध्र-प्रदेश, ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल समुद्री तट पर बसे राज्य हैं। केंद्र प्रशासित प्रदेशों-दमन एवं दीव तथा पुडुचेरी की सीमाएं समुद्री हैं।
5. अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर बसे राज्यइस प्रकार हैं-गुजरात (पाकिस्तान), राजस्थान (पाकिस्तान), पंजाब (पाकिस्तान), जम्मू-कश्मीर (चीन व पाकिस्तान), हिमाचल प्रदेश (चीन), बिहार (नेपाल), उत्तराखंड (चीन एवं नेपाल), उत्तर प्रदेश (नेपाल), पश्चिम बंगाल (भूटान व बांग्लादेश), सिक्किम (चीन, भूटान एवं नेपाल), अरुणाचल प्रदेश (चीन, भूटान एवं म्यांमार), मणिपुर (म्यांमार), नागालैण्ड (म्यांमार), मिजोरम एवं म्यांमार), मेघालय (बांग्लादेश), त्रिपुरा (बांग्लादेश), असोम (भूटान, म्यांमार एवं बांग्लादेश)।
6. हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं झारखण्ड राज्यों की कोई अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है तथा इनके सीमांत में किसी भी देश का क्षेत्र नहीं पड़ता।

अवस्थिति के महत्व

भारत की ऐसी स्थिति के अपने अनेक आर्थिक लाभ हैं। प्राचीन काल में अपनी स्थिति के कारण भारत ने पश्चिम मे अरब देशों के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व एशिया एवं सुदूर पूर्व के देशों के साथ भी सांस्कृतिक तथा अन्य प्रकार के संबंध स्थापित किए। संसार के पूर्व और पश्चिम दिशाओं में जाने वाले व्यापारिक मार्गों पर भारत की स्थिति बहुत ही अनुकूल है। पूर्व और दक्षिण-पूर्व

एशिया तथा आस्ट्रेलिया को जाने वाले समुद्री मार्ग हिन्द महासागर से होकर गुजरते हैं। भारत, यूरोप, उत्तरी अमेरिका तथा दक्षिणी अमेरिका से स्वेज नहर तथा आशा अंतरीप, दोनों ही मार्गों के द्वारा जुड़ा हुआ है।

हिमालय, जो भारत की उत्तरी सीमा बनाता है, कई कारणों से भारत की लाभदायक स्थिति प्रदान करता हैः आक्रामक थल सेनाओं से मजबूत प्रतिरक्षा मुहैया कराता है; शीतकाल में घुसपैठी शीतल हवाओं को भारतीय सीमा में प्रवेश से रोकता है तथा ग्रीष्म मानसून के पलायन को रोकता है; और नदियों को सदानीरा प्रदान करता है, जो सिंचाई एवं जल-विद्युत के विकास के लिए एक बहुमूल्य संसाधन है।

सांस्कृतिक विशिष्टता

भारत की संस्कृति व सभ्यता की गणना विश्व की प्राचीनतम संस्कृतियों व सभ्यताओं में होती है। इस उप-महाद्वीप में प्राचीन सिंधु सभ्यता के काल से ही समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के प्रमाण प्राप्त होते हैं। यूनानी, अरब, तुर्की, अफगानी तथा पाश्चात्य सभ्यताओं के प्रभावों को अपने में आत्मसात करने वाली भारतीय संस्कृति ने अपने मूल-भूत स्वभाव व पहचान को अक्षुण्ण रखा है। अनेकता में एकता' सदियों से भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र रहा है। इसी मंत्र के प्रभाव से भारत की अखंडता अभी तक सुरक्षित रह सकी है। भारत के विभिन्न भागों में हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, जैन सिख, पारसी व् इसाई धर्मों की आस्थाओं के विभिन्न प्रतिक बिखरे हुए हैं। विभिन्न जातियों के आगमन, अनेक सभ्यताओं के साथ संपर्क तथा विभिन्न विचारों के पारस्परिक आदान-प्रदान ने भारतीय संस्कृति को एक बहुआयामी तथा विशिष्ट स्वरूप प्रदान किया है।

विविधताओं से परिपूर्ण भारत देश मानव संसाधन व प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। खनिजों की प्रचुरता, विशाल पशु सम्पदा, कृषि हेतु भू-संपदा, जल के विशाल स्रोत, जलवायु की विविधता, विशाल श्रम बल, प्राकृतिक वनस्पतियों का वैविध्य, इत्यादि भारत के वैशिष्ट्य को इंगित करते हैं।

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