मानव शरीर- त्वचा Human body-Skin

हमारे शरीर का बाहरी आवरण त्वचा कहलाता है। यह शरीर का सबसे बड़ा अंग है। हमारी त्वचा आंतरिक अंगों की रक्षा करती है। त्वचा पर स्पर्श संवेदी तंत्रिकाओं का जाल होता है जिनसे त्वचा पर होने वाली प्रत्येक घटना की सूचना निरंतर मस्तिष्क को पहुंचती रहती है। शरीर के तापमान का नियमन (Regulation of temperature) भी त्वचा द्वारा ही होता है। श्वसन क्रिया में त्वचा फेफड़ों की भी सहायता करती है। त्वचा द्वारा शरीर के अपशिष्ट पदार्थ पसीने के रूप में शरीर से बाहर निकलते रहते हैं।

त्वचा की संरचना

  • एपिडर्मिस (Epidermis): यह त्वचा की बाहरी परत है, जिसके ऊपरी स्तर में मृत कोशिकाएं होती हैं और नीचे जीवित कोशिकाएं। इसमें रक्तवाहिनियां नहीं होती।
  • डर्मिस (Dermis): इस स्तर में तंत्रिकाओं की शाखाएं फैली होती हैं।
  • त्वग्वसा ग्रंथि (Sebaceous or grease gland): इसमें एक विशेष प्रकार का वसामय पदार्थ (Sebum) बनता है, जो बालों की जड़ों को चिकना रखता है।
  • उपत्वचीय वसा (Subcutaneces fat): यह त्वचा की रक्षा करती है।
  • इरेक्टर पेशी (Erector muscle): यह बालों को खड़ा रखती है।
  • रक्तवाहिनियां (Blood vessel): त्वचा के संपर्क में आने वाली हवा में से रक्तवाहिनियों का रक्त, ऑक्सीजन सोख लेता है।
  • स्वेद ग्रथियां (Sweat glands): इनमें स्वेद या पसीना बनता है, जो शरीर के अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है।
  • मैल्पिजियन स्तर (Malphigian Layer): यह एक रंगीन पदार्थ (Pigment) उत्पन्न करता है, जो मेलानिन (Melanin) कहलाता है। त्वचा का रंग इसी पदार्थ के कारण होता है।

मानव शरीर की त्वचा की मोटाई 0.05 से 0.65 सेमी० होती है। यह मोटाई पलकों पर सबसे कम तथा तलुओं पर सबसे अधिक होती है। त्वचा में अत्यंत सूक्ष्म छिद्र होते हैं। इन्हें संक्रमण से रोकने के लिए स्वच्छ रखना अति आवश्यक है।

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