हॉर्मोन Hormones

हॉर्मोन ऐसा रासायनिक संदेशवाहक होता है, जो शरीर के एक भाग से सीधे रक्त में स्रावित होकर सारे शरीर में संचरित होता है और इसकी सूक्ष्म मात्रा ही किन्हीं विशिष्ट कोशाओं या विशिष्ट अंगों की कोशाओं की क्रियाओं की वातावरणीय दशाओं की आवश्यकतानुसार प्रभावित करती है।

हॉर्मोन भोजन में नहीं होते। ये शरीर में ही अन्तःस्रावी ग्रंथियों (Endocrine glands) तथा कुछ अन्य अंगों की अन्तःस्रावी कोशाओं द्वारा स्रावित होते हैं। आधुनिक वैज्ञानिक अधिकांश हॉर्मोनों के रासायनिक संयोजन का पता लगा चुके हैं और कुछ का कृत्रिम संश्लेषण भी कर चुके हैं। रासायनिक स्तर पर हॉर्मोन मुख्यतः स्टीरॉएड्स या प्रोटीन या प्रोटीन से व्युत्पन्न पदार्थ होते हैं। स्टीरॉएड (Steroid) हॉर्मोनों का आधार पदार्थ कोलेस्ट्रॉल होता है। कुछ हॉर्मोन टाइरोसीन नामक अमीनो अम्ल के व्युत्पन्न (Derivatives) होते हैं।

हॉर्मोन शरीर की रासायनी (Chemistry) का नियन्त्रण करके इसकी कार्यात्मक गति (Functional tempo) बनाए रखते हैं। ये वृद्धि एवं विकास, सुरक्षा तथा आचरण, लैंगिक लक्षणों तथा जनन आदि का नियन्त्रण करने के अतिरिक्त, बाहरी वातावरण की बदलती हुई दशाओं में, शरीर के अन्तः वातावरण को अखंड बनाए रखने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। रुधिर तथा ऊतक द्रव (Tissue fluid) मिलकर शरीर का अन्तः वातावरण अर्थात् बाह्यकोशीय द्रव (Extracellular fluid) बनाते हैं। वाल्टर कैनन (1920) ने इसके रासायनिक स्टैसिस (Homeostasis) का नाम दिया। हॉर्मोनों की गड़बड़ियों कार्यात्मक रोग (Functional diseases) हो जाते हैं। इनकी गड़बड़ियाँ दो प्रकार की हो सकती हैं- हॉर्मोनों का आवश्यक मात्रा से कम स्रावण (Hyposecretion) या अधिक स्रावण। अधिकांश हॉर्मोनों का स्रावण सामान्य दर से शरीर में सदा होता रहता है, लेकिन यह दर वातावरणीय दशाओं के अनुसार शरीर की कार्यिकी में आवश्यक परिवर्तनों के लिए घटती-बढती रहती है।

अन्तःस्रावी विज्ञान का संक्षिप्त इतिहास Short history of Endocrinology

हॉर्मोनों का ज्ञान 19वीं और 20वीं सदी की देन है। इसकी नींव बर्थोल्ड (1849) की इस खोज से पड़ी कि पट्ठा-पक्षियों (Cockerels), मुर्गे आदि में वृषणों (Testes) को हटा देने (Castration) या आरोपण (Grafting) करने से परिवर्ती लैंगिक लक्षणों (Secondary sexual characters) पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। सन् 1885 में क्लॉडी बर्नार्ड ने शब्द अन्तःस्रावणः (Internal secretion) का सबसे पहले उपयोग किया। थोमस ऐडिसन (1855) ने पता लगाया कि ऐड्रीनल ग्रन्थि के वल्कनीय (Cortical) भाग को नष्ट कर देने पर एक रोग हो जाता है, जिसे अब ऐडिसन का रोग (Addison's disease) कहते हैं। इसी खोज के कारण थोमस ऐडिसन को अन्तःस्रावी विज्ञान का पिता (Father of Endo-crinology) कहते हैं। हॉर्मोन्स की आधुनिक परिभाषा की नींव बेलिस तथा स्टारलिंग (1902, 1905) के अनुमानों से पड़ी। हॉर्मोन्स शब्द का प्रयोग भी सर्वप्रथम स्टारलिंग (1905) ने किया।

फीरोमोन्स Pheromones or Ectohormones

ये कुछ बाह्य-ग्रन्थियों द्वारा बाहरी वातावरण में स्रावित होते हैं और एक ही जीव-जाति के सदस्यों के बीच पारस्परिक आचरण को प्रभावित करते हैं। इस प्रकार, ये स्पर्श, दृष्टि तथा ध्वनि के बजाय, स्वाद एवं गंध द्वारा सदस्यों में परस्पर सूचना-संचारण का काम करते हैं। उदाहरणार्थ— कुछ कीट (Insects) अपने संगम-साथी (Copulating Partner) को आकर्षित करते हैं।

स्थानीय हॉर्मोन Local hormones

शरीर में किसी भी ऊतक के ऊतक-द्रव्य में मामूली-सा ही रासायनिक परिवर्तन हो जाने पर यहाँ तुरन्त काइनिन्स (Kinins) नामक पदार्थ बन जाते हैं। ये खोखले अंगों व रुधिर-वाहिनियों को फैलाकर रक्तदाब घटा देते हैं। साथ ही इनके प्रभाव से कुछ पीड़ा का अनुभव होता है। सम्भवतः ये प्रथम उपचार (First aid) का काम करते हैं। जहरीले कीटों के विष, जलने, भीतरी चोट तथा जीवाणुओं के संक्रमण से होने वाली पीड़ा सम्भवतः काइनिनों के कारण ही होती है।

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