खाद्यान्न फसलें: धान Food Crops: Rice- Oryza sativa

देश के लगभग 75 प्रतिशत क्षेत्र में खाद्यान्न फसलें उगायी जाती है और कुल कृषि उत्पादन में लगभग 50 प्रतिशत योगदान देती हैं। खाद्यान्न फसलों को पृथक् रूप से या अन्य फसलों के साथ उगाया जा सकता है।

धान भारत में सर्वाधिक मात्रा में उत्पादित होने वाली फसल है। इसे 8 डिग्री उत्तरी अक्षांश से 34 डिग्री उत्तरी अक्षांश के बीच में मुख्यतया उत्पादित किया जाता है। धान की फसल समुद्र तल से भी नीचे के क्षेत्र में केरल के कट्टनाड क्षेत्र में उत्पादित की जाती है। धान की फसल कुल क्षेत्र के लगभग 32 प्रतिशत भाग में उगायी जाती है। धान की फसल मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम की मानसूनी वर्षा पर आश्रित है। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, पंजाब, बिहार, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु अग्रणी उत्पादक राज्य हैं।

वृद्धि की शर्ते: धान के उत्पादन में काफी लम्बा समय लगता है और उसके विभिन्न चरणों में तापमान का स्तर विभिन्न प्रकार का होना आवश्यक होता है। जब इसे बोया जाता है, उस समय तापमान 16° सेंटीग्रेड से 20° सेंटीग्रेड के बीच होना चाहिए, जबकि फसल तैयार होने के समय तापमान 18° सेंटीग्रेड से 82° सेंटीग्रेड के बीच होना चाहिए। सामान्य वर्षा 112-150 सेंटीमीटर होनी चाहिए। धान जमीन के भीतर और बाहर पर्याप्त पानी की मांग करता है। मानसूनी वर्षा वाले क्षेत्र धान की खेती के लिए सर्वाधिक उपयुक्त माने जाते हैं। वर्षा के अभाव में इस फसल के लिए पर्याप्त सिंचाई की व्यवस्था करनी होती है। धान की खेती के लिए चिकनी तथा दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है।

भारत में चावल की खेती तीन प्रकार से होती है- बीज छींटकर, बीज-रोपण कर और छोटे पौधों का स्थानान्तरण कर। पहली विधि का उपयोग उन क्षेत्रों में किया जाता है, जहाँ भूमि जोतना मुश्किल होता है। दूसरी विधि का उपयोग प्रायद्वीपीय क्षेत्र में किया जाता है। तीसरी विधि का उपयोग नदियों के डेल्टाओं तथा मैदानी क्षेत्रों में होता है। विभिन्न मौसमों में उगायी जाने वाली फसलों की बुआई और कटाई की अवधि नीचे दी गई है-

फसलबुआईकटाई
खरीफ क्षेत्रीय नाम - ऑस या कारमई-जूनसितम्बर-अक्टूबर
शीतकालीन क्षेत्रीय नाम – अरमन, साली या कार्तिकजून-जुलाईनवम्बर-दिसम्बर
रबी क्षेत्रीय नाम - बोरो या डालनानवम्बर-दिसम्बरमार्च-अप्रैल

उपज: भारत में प्रति हेक्टेयर धान की उपज अन्य धान-उत्पादक देशों की तुलना में कम है। इसका कारण जल-आपूर्ति का गैर-उचित प्रबंध और प्राचीन पद्धतियों का पोषण है। भारत में उपज की क्षमता कम होने का कारण स्थलाकृतिक विविधता है- यहां कुछ क्षेत्र सिंचित हैं, कुछ पर्याप्त वर्षा वाले हैं, कुछ की परत नम है, तो कुछ अत्यंत शुष्क, बंजर, वर्षा-रहित और कठोर मृदा वाले। इसके साथ ही, कुछ क्षेत्रों में तापमान काफी ऊंचा होता है, तो कुछ क्षेत्रों में काफी नीचा।

तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश, जम्मू और कश्मीर तथा पंजाब ऐसे राज्य हैं, जहां धान की उपज राष्ट्रीय औसत से अधिक होती है, जबकि शेष राज्यों में औसत से कम।

राज्यों के बड़े चावल- उत्पादक क्षेत्र:

आंध्र प्रदेश: कृष्णा और गोदावरी का डेल्टा तथा उससे सम्पृक्त समुद्रतटीय मैदान भारत के अत्यंत महत्वपूर्ण धान उत्पादक क्षेत्रों में से एक हैं। इस राज्य में खरीफ और रबी दोनों मौसमों में धान की खेती की जाती है। गोदावरी, कुर्नूल, अनंतपुर, कृष्णा, श्रीकाकुलम, विशाखापत्तनम, नेल्लौर और कुडप्पा मुख्य स्थान हैं जहाँ धान काफी मात्रा में उत्पादित होता हैं।

असम: धान असम की मुख्य खाद्य-फसल है। ब्रह्मपुत्र घाटी के साथ गोलपाड़ा, कामरूप, दर्राग, लखीमपुरखीरी, शिवसागर, नौगांव और कछार जिले की बराक घाटी में धान की खेती की जाती है।

बिहार: इस राज्य में जिन क्षेत्रों में धान की फसल मुख्य रूप से की जाती है, वे हैं- शाहाबाद, चम्पारण, गया, दरभंगा, पूर्णिया, मुंगेर, भागलपुर, सहरसा और मुजफ्फरपुर। बिहार में धान की खरीफ फसल मई-जून में बोयी जाती है और सितम्बर में काटी जाती है, किन्तु शीतकालीन फसल मई-जून में बोयी जाती है, जून-जुलाई में स्थानांतरित की जाती है और अक्टूबर-नवम्बर में काटी जाती है।

झारखंड: इस राज्य में संथाल परगना, रांची तथा सिंहभूम जिलों में धान की खेती की जाती है।

ओडीशा: इस राज्य का 90 प्रतिशत से अधिक धान संबलपुर, ढेंकनाल, कटक, पुरी, बालासोर, गंजाम, केन्द्रपाड़ा, कोरापट, मयूरभंज, बोलनगिरि आदि से प्राप्त होता है। राज्य के कुल फसल-क्षेत्र के 58 प्रतिशत क्षेत्र में धान उत्पादित होता है।

उत्तर प्रदेश: सम्पूर्ण खाद्यान्न फसल के उत्पादन की दृष्टि से उच्च स्थान रखने वाले उत्तर प्रदेश में धान की खेती उच्च पैमाने पर नहीं होती है। इस राज्य में सहारनपुर, देवरिया, गोंडा, बहराइच, बस्ती, रायबरेली, लखनऊ, वाराणसी और गोरखपुर आदि क्षेत्रों में ही धान की खेती की जाती है।

उत्तराखंड: यहाँ देहरादून और मध्य हिमालय के तराई एवं ढलान वाले क्षेत्रों में धान की खेती की जाती है।

छत्तीसगढ़: इस राज्य में धन की खेती करने वाले क्षेत्रों के अंतर्गत, रायपुर, बलाघात, रायगढ़, बेतुल, बिलासपुर, सरगुजा आदि जिले आते हैं। तपती महानदी और नर्मदा की घाटियों में धान की सर्वाधिक खेती होती है।

तमिलनाडु: इस राज्य का 60 प्रतिशत से अधिक धान कावेरी डेल्टा में स्थित उत्तरी अर्काट और तंजावुर जिले में उत्पादित होता है। चिंगलेपट, तिरुनेवेल्ली, तिरुचिरापल्ली और रामनाथपुरम् अन्य मुख्य धान उत्पादक जिले हैं।

पश्चिम बंगाल: इस राज्य के प्रत्येक जिले में 60 प्रतिशत से अधिक फसल-क्षेत्र में धान की खेती की जाती है। धान की शीतकालीन फसल (अमन धान) कुल धान उत्पादन का दो-तिहाई भाग होता है। कूच बिहार, जलपाईगुड़ी, बांकुड़ा, मिदनापुर, दिनाजपुर, वर्द्धमान और दार्जिलिंग प्रमुख धान उत्पादक जिले हैं।

पंजाब: सिंचाई की व्यवस्था के बाद पंजाब धान के बड़े उत्पादक के रूप में उपस्थित हुआ है। पटियाला, जालंधर, अमृतसर और फरीदकोट धान की कृषि में अग्रणी स्थान रखते हैं।

हिमाचल प्रदेश: धान इस राज्य की तीसरी मुख्य खाद्य फसल है। यहां के कुल कृषि-योग्य क्षेत्र के 10 प्रतिशत भाग में धान की खेती होती है। कांगड़ा और मण्डी मुख्य धान उत्पादक क्षेत्र हैं, जबकि बिलासपुर, हमीरपुर आदि में भी धान की खेती होती है।

धान की किस्में:  कुछ बीजों के संकरण द्वारा उपज देने वाले धान-बीजों का विकास किया गया है। धान की कुछ प्रमुख किस्में हैं- रत्ना, हमसा, जया, आई.आर. 8, आई.आर. 20, आई.आर. 36, पूसा 1, बी.आर. 10, बी.आर. 43, हेमा, राजेश्वरी। सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए आई.ई.टी. 826, आई.आर. 30, रत्ना आदि किस्में विकसित की गई हैं; बाढ़ का सामना करने वाली किस्में हैं- एफ.आर. 13ए और एफ.आर. 43बी; कम जल वाले क्षेत्रों के लिए पी.एल.ए. 1, जलधि 1 और 2; और लवण प्रभावित क्षेत्रों के लिए रूपसैल, नोना बोकरा की किस्में विकसित की गई हैं। लूनीश्री विश्व की सर्वाधिक उत्पादक क्षमता वाली धान की किस्म है।

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