विकासशील आठ Developing-8 Organization For Economic Cooperation - D-8

विकासशील आठ (डी-8) विश्व के आठ सबसे अधिक जनसंख्या वाले और विकासशील इस्लामिक देशों के मध्य सहयोग विकसित करने की एक व्यवस्था है।

सदस्यता: बांग्लादेश, मिस्र, इण्डोनेशिया, ईरान, मलेशिया, नाइजीरिया, पाकिस्तान और तुर्की।

उद्मव एवं विकास

22 अक्टूबर, 1996 में विकास के लिये सहयोग सम्मेलन तथा अनेक प्रारम्भिक बैठकों के पश्चात् 15 जून, 1997 को इस्तानबुल (तुर्की) में आयोजित राज्याध्यक्षों/शासनाध्यक्षों के शिखर सम्मेलन में डी-8 के गठन की औपचारिक घोषणा (इस्तानबुल घोषणा) हुई। ऐसे अन्य देश भी इस समूह के सदस्य बन सकते हैं, जो सामूहिक बंधन से बंधे हुये हैं तथा संगठन के लक्ष्यों, उद्देश्यों और सिद्धान्तों को स्वीकार करने के लिये सहमत हैं।

उद्देश्य

विश्व आर्थिक व्यवस्था में विकासशील देशों की स्थिति में सुधार लाना; व्यापार संबंधों में नये अवसरों का सृजन करना तथा विविधता लाना; अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्णय-प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाना, तथा; बेहतर जीवन-स्तर प्रदान करना डी-8 के प्रमुख लक्ष्य हैं।

गतिविधियां

मार्च 1999 में ढाका में डी-8 का दूसरा शिखर सम्मेलन हुआ, जिसमें 33-सूत्री ढाका घोषणा को अपनाया गया। ढाका घोषणा ने भूमण्डलीकरण तथा इसकी सुरक्षा के लिये कदम उठाने पर बल दिया। घोषणा ने विकसित राष्ट्रों से विकासशील राष्ट्रों को संसाधन प्रदान करने की अपील की।

डेवलपिंग-8 या डी-8 नाम से इस समूह का गठन मूलतः ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कॉन्फ्रेंस (ओआईसी) के नाम से हुआ था। इन 8 बड़ी जनसंख्या वाले देशों में कुल जनसंख्या 80 करोड़ से अधिक तथा विश्व व्यापार में संयुक्त भागीदारी 4 प्रतिशत है।

शैशवावस्था के दौर से गुजर रहे इस इस्लामिक संगठन के प्रति सदस्य राष्ट्रों की रुचि का अंदाजा इससे लगता है कि मेजबान बांग्लादेश के अतिरिक्त केवल 3 अन्य राष्ट्रों के राष्ट्राध्यक्ष ही मार्च 1999 के शिखर सम्मेलन में उपस्थित हुए। इसमें शामिल होने वाले राष्ट्र थे - पाकिस्तान, मलेशिया और तुर्की।

डी-8 का तीसरा शिखर सम्मेलन 25-26 फरवरी, 2007 में काहिरा में संपन्न हुआ। अपनी अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने में पारस्परिक सहयोग के मुद्दों पर इस सम्मेलन में मुख्य रूप से चर्चा हुई। सम्मेलन में स्वीकार किया गया कि निर्धनता की समस्या यद्यपि प्राचीनतम समस्याओं में से एक है, तथापि पिछली शताब्दी में, विशेषतः विगत् दशकों में हुए विकास ने इसे ऐसे स्तर पर ला दिया है, जो राजनीतिक, आर्थिक, और यहां तक कि नैतिक दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है।

मुख्यतः आठ मुस्लिम विकासशील देशों के समूह डी-8 का सातवां शिखर सम्मेलन नाइजीरिया की राजधानी अबुजा में 10 जुलाई, 2010 को संपन्न हुआ। इसका आठवां शिखर सम्मेलन वर्ष 2011 में करांची में संपन्न हुआ।

डी-8 के बाली इंडोनेशिया में 14 मई, 2006 को आयोजित शिखर बैठक में प्रत्येक सदस्य देश प्रीफेरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (पीटीए) पर सहमत हुआ। समझौते के तहत् सदस्य देशों के बीच विशिष्ट वस्तुओं पर प्रशुल्कों को धीरे-धीरे कम करना है, जिस पर पर्यवेक्षक समिति नजर रखेगी। इस समझौते का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच मुक्त व्यापार की बाधाओं को हटाना और साथ ही साथ अंतरराज्यीय सहयोग में अभिवृद्धि करना है।

डी-8 के देशों की संयुक्त रूप से सभी मुस्लिम जनसंख्या का 60 प्रतिशत है, जो विश्व जनसंख्या का लगभग 13 प्रतिशत है। वर्ष 2006 में डी-8 सदस्य देशों के बीच व्यापार 35 बिलियन डॉलर था, जो 2010 में लगभग 68 बिलियन डॉलर था। डी-8 देशों के बीच व्यापार विनिमय विश्व व्यापार का 3.3 प्रतिशत है, जिसे कुछ सालों में 10-15 प्रतिशत प्रक्षेपित किया गया है।

डी-8 का अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में संयुक्त राष्ट्र, नाटो एवं आसियान संगठनों जैसा प्रभाव नहीं है। संगठन का उद्देश्य प्रत्येक सदस्य देश के प्रयासों का समन्वय करना है। क्योंकि प्रत्येक सदस्य देश एकपक्षीय तौर पर कार्य कर सकता है, इसलिए डी-8 की विश्व मंच पर सौदेबाजी शक्ति सीमित है।

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