डेन्यूब आयोग Danube Commission

यह आयोग डेन्यूब नदी में नौ-संचालन तथा नदी के विविध पक्षों के लिये उत्तरदायी है।

मुख्यालय: बुडापेस्ट (हंगरी)।

सदस्यता: आस्ट्रिया, बुल्गारिया, क्रोएशिया, जर्मनी, हंगरी, माल्डोवा, रोमानिया, रूस, स्लोवाकिया, युक्रेन और सर्बिया।

आधिकारिक भाषाएं: फ्रेंच, रूसी और जर्मन।

उद्भव एवं विकास

डेन्यूब आयोग का गठन 18 अगस्त, 1948 को बेलग्रेड में हस्ताक्षरित एक अभिसमय के माध्यम से 1949 में हुआ। बेलग्रेड अभिसमय ने घोषित किया कि नागरिकों, व्यापारिक बेड़ों तथा सभी सदस्य देशों की वस्तुओं के लिये डेन्यूब नदी में उल्म (Ulm) से काला सागर तक का नौ-संचालन (सुलीना शाखा और सुलीना नहर के माध्यम से समुद्र में प्रवेश की अनुमति के साथ) समान रूप से उन्मुक्त है।

उद्देश्य

डेन्यूब आयोग के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं- अभिसमय के प्रावधानों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करना; सभी नौगम्य जलमार्गों पर एक एकसमान उत्प्लावन (uniform buoying) पद्धति विकसित करना; नदी में नौ-संचालन के लिये मौलिक विनियमों को निर्धारित करना तथा जहाजरानी (shipping) की सुविधाएं सुनिश्चित करना; नदी, सीमा शुल्क, सफाई नियंत्रण तथा जल-मौसम विज्ञान सेवा के विनियमों में समन्वय स्थापित करना, तथा; डेन्यूब नदी में नौ-संचालन से संबंधित प्रासंगिक सांख्यिकीय आंकड़े एकत्रित करना।

संरचना

डैन्यूब आयोग की वर्ष में एक बार बैठक होती है। इस आयोग में प्रत्येक सदस्य देश का एक प्रतिनिधि सम्मिलित रहता है।

गतिविधियां

युगोस्लाविया तथा अभिसमय के अन्य संस्थापक हस्ताक्षरकर्ताओं के मध्य विवादों के कारण डैन्यूब आयोग के कार्य बाधित हुए हैं।

आयोग अपने सदस्यों में से तीन वर्ष की अवधि हेतु एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सचिव का चुनाव करता है। आयोग का एक सचिवालय है जिसमें महानिदेशक के पर्यवेक्षण एवं निगरानी में 11 अंतरराष्ट्रीय लोक सेवक और 19 कर्मचारी होते हैं।

आयोग की वर्ष में दो बार बैठकें होती हैं। यह आयोग के कार्य योजनाओं में विशेषज्ञों के समूह की सुविधा भी उपलब्ध कराता है।

मध्य एवं पूर्वी यूरोप के देशों में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों के परिणामस्वरूप, और पूर्व संघीय युगोस्लाविया गणराज्य के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के चलते, नाटकीय रूप से वस्तुओं की आवाजाही में भारी कमी आई। अब यह समस्याएं समाप्त हो चुकी हैं, डेन्यूब पर वस्तुओं की कुल आवाजाही में तेजी से सुधार हो रहा है और पूर्वी और पश्चिमी यूरोप के बीच विनिमय धीरे-धीरे बढ़ रहा है।

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