स्वतंत्र देशों का राष्ट्रकुल Commonwealth of Independent States - CIS

यह संगठन पूर्व सोवियत संघ के घटक गणतंत्रों को एक मंच पर लाता है।

मुख्यालय: मिंस्क (बेलारूस)।

सदस्यता: अर्मीनिया, अजरबैजान, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, मॉल्डोवा, रूस, ताजिकिस्तान।

सहयोगी सदस्य: तुर्कमेनिस्तान, यूक्रेन और उज्बेकिस्तान।

उद्भव एवं विकास

स्वतंत्र देशों के राष्ट्रकुल (Commonwealth of Independent States–CIS) की स्थापना रूस, बेलारूस और यूक्रेन द्वारा 8 दिसम्बर, 1991 को मिंस्क (बेलारूस) में एक समझौते पर हस्ताक्षर कर हुई। 21 दिसम्बर, 1991 को अल्मा-आटा (वर्तमान अल्माटी) (कजाकस्तान) में हुई बैठक में पूर्व सोवियत संघ के आठ और गणतंत्र-अर्मीनिया, अजरबैजान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, मॉल्डोवा, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान, सीआईएस के सदस्य बने। जॉर्जिया ने 1993 में इस संगठन की सदस्यता ग्रहण की। तीन बाल्टिक राज्य- एस्टोनिया, लाटविया और लिथुआनिया, सीआईएस से बाहर रहे।

उद्देश्य

सीआईएस के उद्देश्य हैं- पूर्व सोवियत संघ से स्वतंत्र हुए उत्तरवर्ती राज्यों में सरकारी कार्यों और संधि दायित्वों के व्यवस्थित स्थानान्तरण में सहायता पहुंचाना; राष्ट्रीय सुरक्षा और निरस्त्रीकरण में समन्वित नीतियों को प्रोत्साहन देना, तथा; सदस्य देशों में आर्थिक एकता स्थापित करने के लिये कार्य करना।

संरचना

राष्ट्राध्यक्ष परिषद् (Council of Heads of State); शासनाध्यक्ष परिषद् (Council of Heads of Government), मंत्रिवर्गीय परिषद, अन्तर-संसदीय सभा, अन्तर-राज्यीय आर्थिक समिति तथा संयुक्र स्टाफ प्रमुखों की समिति सीआईएस के प्रमुख अंग हैं।

राष्ट्राध्यक्ष परिषद सीआईएस की सर्वोच्च संस्था होती है। इसकी प्रत्येक छह महीने में एक बार बैठक होती है, जिसमें सदस्य देशों के सामूहिक हित के विषयों से जुड़े सैद्धान्तिक प्रश्नों पर विचार-विमर्श किया जाता है तथा उन्हें सुलझाया जाता है। सदस्य देशों के शासनाध्यक्षों की प्रत्येक तीन महीने के अंतराल पर बैठक होती है। इसमें सामूहिक हित के क्षेत्रों से जुड़े सदस्य देशों के कार्यपालक अंगों के कार्यों में समन्वय स्थापित किया जाता है। दोनों परिषदों में निर्णय आम सहमति के आधार पर लिये जाते हैं।

अन्तर-संसदीय सभा का गठन 1992 में हुआ तथा इसका मुख्यालय सेंट पीटर्सबर्ग में है। इसकी सहायता के लिये इसका अपना एक सचिवालय है। वैदेशिक मामले, रक्षा, परिवहन, ऊर्जा, पर्यावरण, आदि विषयों पर मंत्री स्तर पर चर्चाएं आयोजित की जाती हैं।

विदेश मंत्रियों की परिषद सदस्य देशों की विदेश नीतियों में समन्वय स्थापित करती है। समन्वय परामर्श समिति सीआईएस का स्थायी कार्यपालक और समन्वयकारी अंग है। इसके अतिरिक्त एक रक्षा परिषद्, एक सीमा बल कमांडर परिषद्, एक आर्थिक न्यायालय और एक मानवाधिकार आयोग भी कार्यरत हैं।

सचिवालय एक स्थायी कार्यकारी अंग है।

गतिविधियां

1993 में सीआईएस के सात सदस्य (रूस, बेलारूस, अर्मीनिया, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिस्किस्तान और उज्बेकिस्तान) राजनितिक अ आर्थिक पर्यावरणीय, मानवीय, सांस्कृतिक और अन्य क्षेत्रों में सहयोग स्थापित करने तथा मानवाधिकार एवं स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिये एक घोषणा-पत्र (चार्टर) पर सहमत हुये।

सीआईएस अन्तर-राज्यीय कारोबार की सरल बनाने के लिये एक सीआईएस अन्तर- राज्यीय बैंक का गठन किया गया। सशस्त्र सेना व्यापक प्रयोजनार्थ (General Purpose Armed Forces) के प्रबंधन को सदस्य देशों के राष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप परिवर्तित करने के लिये 1992 में रक्षा मंत्री परिषद की स्थापना की गई। उसी वर्ष सामूहिक शांति बल स्थापित करने के उद्देश्य से एक समझौता हुआ, जिसके द्वारा सदस्य देश तथा गैर-सदस्य देश के मध्य संघर्षों में शांतिपूर्ण प्रयासों की सदस्य देशों के आग्रह पर क्रियान्वित किया जा सकता है।

1993 में नौ सदस्यों (अजरबैजान, अर्मीनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, मॉल्डोवा, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान) ने एक आर्थिक संघ बनाने के लिये एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। जॉर्जिया और तुर्कमेनिस्तान ने इस संधि पर 1994 में हस्ताक्षर किए। अक्टूबर 1994 में एक अन्तर-राज्य आर्थिक समिति का गठन किया गया। अपरिवर्तनीय स्वतंत्र मुद्रा वाले सदस्य देशों के मध्य भुगतान व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिये एक सीमा शुल्क संघ और आर्थिक न्यायालय का गठन किया गया।

बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस और ताजीकिस्तान के बीच पारस्परिक आर्थिक और सामाजिक संबधों को मजबूत बनाने के लये 1996 में एकसमझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के अंतर्गत एक सर्वोच्च अन्तर-सरकारी परिषद का गठन हुआ।

1996 में रूस और बेलारूस ने राजनीतिक, आर्थिक और सैनिक एकीकरण को स्थापित करने के लिये एक सर्वोच्च परिषद गठित करने का निर्णय लिया तथा एक संधि पर हस्ताक्षर किए। 1997 में इन दोनों देशों ने सामूहिक नागरिकता, सामूहिक मुद्रा और सामूहिक सैनिक फैलाव स्थापित करने के लिये एक अन्य संधि पर हस्ताक्षर किए।

हाल के वर्षों में आतंकवाद सीआईएस देशों के लिये एक सामूहिक चिन्ता का विषय बनकर उभरा है। वर्ष 2000 में रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, बेलारूस और आर्मीनिया ने सामूहिक सुरक्षा संधि (Collective Security Treaty-CST) पर हस्ताक्षर कर मध्य एशिया में इस्लामी आतंकवाद से लड़ने के लिए सीआईएस सामूहिक सुरक्षा परिषद् का गठन किया।

सीएसटीओ: सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (सीएसटीओ) या सामान्य तौर पर कहें तो ताशकंद संधि प्रथम सीआईएस सामूहिक सुरक्षा संधि बनी जिसे ताशकंद शहर में आर्मेनिया, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, रूसी संघ, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान द्वारा 15 मई, 1992 को हस्ताक्षरित किया गया। इस संधि पर अजरबैजान ने सितंबर 1993 में, जार्जिया ने दिसंबर 1993 में और बेलारूस ने 1993 में हस्ताक्षर किए। संधि 20 अप्रैल, 1994 से प्रभावी हुई। इस संगठन का नाम 7 अक्टूबर, 2002 में ताशकद में सीएसटीओ किया गया। उज्बेकिस्तान सीएसटीओ में संपूर्ण भागीदार बन गया और मार्च 2008 में इसकी संसद द्वारा इसकी सदस्यता की औपचारिक तौर पर पुष्टि कर दी गई।

सीएसटीओ को वर्ष 2004 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त हुआ। 2 मार्च, 2010 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने संयुक्त राष्ट्र एवं सीएसटीओ के बीच सहयोग पर बिना किसी विरोध के एक प्रस्ताव स्वीकार किया। रूस और सीएसटीओ सदस्य देशों ने यूएन सचिवालय के सीएसटीओ की मान्यता को लेकर उठाए गए कदम का समर्थन करने के लिए प्रस्ताव के प्रति समर्थन प्रकट किया।

वर्ष 2006 का समझौता व्यापार पर क्षेत्र के नियमों को एकबद्ध एवं आधुनिक करता है और प्रतिस्पर्द्धा, सरकारी प्रापण और बौद्धिक संपदा के संरक्षण को शामिल करता है। यह संगत व्यापार-सम्बद्ध नियमों के लिए समानता प्रदान करेगा।

सीएसटीओ के नियमित सम्मेलन 21 दिसंबर, 2011 मॉस्को में आयोजित, जिसमें सात देशों के नेताओं ने अपने संगठन को और मजबूत करने के रास्तों पर बातचीत की। भागीदार देशों ने यह भी निर्णय लिया कि वे सभी सीएसटीओ सदस्य देशों की सहमति के बिना अपने क्षेत्र में अन्य देशों के सैन्य बेस बनाने की अनुमति नहीं देंगे। सम्मेलन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण परिणाम भूतपूर्व सोवियत संघ क्षेत्र में पश्चिम के प्रभाव को सीमित करने के कदम उठाना था। रूस, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाखस्तान किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान सीएसटीओ सदस्य देशों के क्षेत्र में विदेशी सैन्य बेस बनाने के निर्णय पर सहमत हुए।

सभी सीएसटीओी सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करने वाली विदेश मंत्रिस्तरीय बैठक का आयोजन 6 अप्रैल, 2012 को अस्ताना, कजाखस्तान में किया गया। इस उच्चस्तरीय बैठक में द्विपक्षीय संबंधों से लेकर संगठन के अंतरराष्ट्रीय एजेंडे तक पर चर्चा हुई।

अंततः, सीएसटीओ विदेश मंत्रियों ने नाटो के साथ अपने सहयोग को व्यापक करने हेतु एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया। 33 बिलियन रूबल (1 बिलियन यूएस डॉलर) के आवंटन की योजना बना रहा है। सीएसटीओ इस वैपनरी कार्यक्रम को वर्ष 2014 से क्रियान्वित करेगा।

मई, 2013 में सीएसटीओ का एक अनौपचारिक सम्मेलन बिश्केक, किर्गिस्तान में आयोजित किया गया। इसमें नेताओं ने अफगानिस्तान से 2014 के अंत में अंतरराष्ट्रीय सैनिक बलों के हटाए जाने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करने के उपायों पर बातचीत की।

सीएसटीओी-संयुक्त राष्ट्र समझौता: 18 मार्च, 2010 को संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सीएसटीओ के महासचिव ने दो सचिवालयों के बीच सहयोग की घोषणा पर हस्ताक्षर किए। इस दस्तावेज, और इसके प्रोत्साहन के लिए यूएन के कदम को पोस्ट सोवियत स्पेस में इसे रूस द्वारा नेतृत्व प्राप्त गुट को संयुक्त राष्ट्र की मान्यता प्राप्त होने के तौर पर देखा गया । रूसी गुट ने इसे

संयुक्त राष्ट्र का संपूर्ण आशीर्वाद और सीएसटीओ (रूस, बेलारूस, आर्मेनिया, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान, और उज्बेकिस्तान) को स्पष्ट मान्यता देना माना।

सीएसटीओ के महासचिव ने इस उद्घोषणा को संयुक्त राष्ट्र द्वारा सीएसटीओ के प्राधिकार को मान्यता देने के तौर पर परिचित कराया। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने इस उद्घोषणा की क्षेत्रीय संगठनों के साथ संयुक्त राष्ट्र के सहयोग को मजबूत करने की दिशा में बड़े कदम के रूप में परिभाषित किया।

सीएसटीओ द्वारा 19-27 सितंबर, 2011 के बीच अभी तक का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास, जिसमें 12000 सैनिकों ने भाग लिया, आयोजित किया गया जिससे अस्थिरता विरोधी तकनीकियों में समन्वय एवं तैयारी बढ़ाई जा सके।

सीआईएस मुक्त व्यापार क्षेत्र (सीआईएसएफटीए): वर्ष 2009 में मुक्त व्यापार क्षेत्र के सृजन के लिए एक नवीन समझौते की शुरुआत हुई। अक्टूबर, 2011 में, सेंट पीटर्सबर्ग में, 11 सीआईएस देशों में से आठ देशों-आर्मेनिया, बेलारूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, मॉल्दोवा, रूस, तजाकिस्तान, और यूक्रेन-के प्रधानमंत्रियों ने नए मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। वर्ष 2013 तक, इसकी यूक्रेन, रूस, बेलारूस, मॉल्दोवा, और आर्मेनिया द्वारा पुष्टि की गई और केवल उन देशों में ही प्रवृत्त हुई।

मुक्त व्यापार समझौता कई वस्तुओं पर आयत एवं मिर्यत शूल का उन्मूलन करता है और बड़ी संख्या में छूट भी देता है जिसे अंततः चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाएगा। अक्टूबर 2011 की बैठक में सीआईएस देशों में मुद्रा विनियमन और नियंत्रण के लिए मूलभूत सिद्धांतों के लिए भी एक समझौता किया गया। सीआईएस देशों में व्यापार के सम्मुख भ्रष्टाचार एवं नौकरशाही बेहद गंभीर समस्याएं हैं।

जॉर्जिया ने आधिकारिक रूप से यह कहकर रक्षा मंत्रियों की परिषद् को छोड़ दिया कि उसने नाटों की सदस्यता ग्रहण कर ली है और उसके लिए एक-साथ दो सैनिक संगठनों का सदस्य रहना संभव नहीं होगा। लेकिन वह अगस्त 2009 तक सीआईएस का पूर्ण सदस्य बना रहा। तुर्कमेनिस्तान, चार्टर की पुष्टि नहीं की, ने 26 अगस्त, 2005 से सीआईएस में एसोसिएट मेम्बर रहने का निर्णय लिया ताकि संयुक्त राष्ट्र द्वारा उसे अंतरराष्ट्रीय तटस्थता के दिए गए दर्जे को बनाए रख सके। यद्यपि यूक्रेन सीआईएस के तीन संस्थापक सदस्यों में से एक है और उसने दिसंबर, 1991 में सृजन समझौते की पुष्टि की थी, इसने सीआईएस के चार्टर की पुष्टि नहीं की और सीआईएस का सदस्य नहीं बना।

मई 2001 में बेलारूस की राजधानी मिंस्क में सीआईएस की शिखर बैठक में रूस, बेलारूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान और तजाकिस्तान ने औपचारिक तौर पर यूरेशियन आर्थिक समुदाय (ईईसी) का शुभारंभ किया। नए निकाय ने 1999 में पांच देशों के बीच गठित मोरीबंद कस्टम यूनियन का स्थान लिया।

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