दक्षिणी शंकु साझा बाजार Common Market of the South- MERCOSUR

यह संगठन दक्षिण अमेरिका के चार देशों को एक क्षेत्रीय साझा बाजार गठित करने के उद्देश्य से एक मंच पर लाता है।

औपचारिक नाम: मर्काडो कोमुन डेल कोनो सुर (Mercado Comun del Cono Sur)

मर्काडो कोमुम डेल कोनो सुल (Mercado Comum de Cone Sul) |

मुख्यालय: मॉटिवीडियो (उरुग्वे)।

सदस्यता: अजेंटीना, ब्राजील, पैराग्वे, उरुग्वे, और वेनेजुएला।

सहयोगी सदस्य: बोलीविया, चिली, कोलंबिया, इक्वेडोर, और पेरू।

पर्यवेक्षक सदस्य: मैक्सिको।

आधिकारिक भाषाए: पुर्तगाली और स्पेनिश।

उद्भव एवं विकास

दक्षिणी शंकु साझा बाजार (Southern Cone Common Market–MERCOSUR/MERCOSUL) का गठन अर्जेंटीना, ब्राजील, पैराग्वे और उरुग्वे के मध्य 26 मार्च, 1991 को एसनसियोन (पैराग्वे) में हुई संधि के आधार पर हुआ। एसनसियोन संधि के अंतर्गत सदस्य देश शुल्क में क्रमिक कमी लाने, 1 जनवरी, 1995 को साझा बाजार गठित करने और आर्थिक नीतियों में सामंजस्य स्थापित करने के लिये तैयार हुये। इस संधि में संशोधन करने और पूरक जोड़ने के उद्देश्य से 1994 में ओरो प्रीटी (Ouro Preto) प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किये गये।

एसनसियोन संधि ने पांच वर्षों तक संगठन की नई सदस्यता पर रोक लगा दी। साथ ही, अन्य उप-क्षेत्रीय और/या क्षेत्रेत्तर (extra-regional) एकीकरण योजनाओं में दोहरी सदस्यता को भी निषेध कर दिया गया।

चिली और बोलीविया की क्रमशः 1996 और 1997 में सहायक सदस्यों का दर्जा प्रदान किया गया।

उद्देश्य

मर्कोसुर की स्थापना के प्रमुख उद्देश्य हैं- कृषि, उद्योग, वित्त, परिवहन और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी नीतियों में तारतम्य स्थापित करने हेतु एक साझा क्षेत्रीय बाजार का गठन करना, और; क्षेत्रेत्तर व्यापार तथा विदेशी निवेश के माध्यम से आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देना ।

संरचना

मर्कोसुर साझा बाजार परिषद (सीसीएम), साझा बाजार समूह (सीएमजी), व्यापार आयोग, संयुक्त संसदीय आयोग, आर्थिक और सामाजिक परामर्श मंच तथा सचिवालय से बना है। सीसीएम में सदस्य देशों के आर्थिक और विदेश मंत्री सम्मिलित होते हैं तथा यह नीतिगत मुद्दों पर निर्णय लेता है। सीएमजी संगठन का कार्यपालक अंग होता है। इसमें चार नियमित सदस्य तथा चार उप-सदस्य होते हैं, जो तृतीय पक्षों से बातचीत करने के लिये विदेश मंत्रियों के निर्देशन में कार्य करता है। व्यापार आयोग सीमा शुल्क संघ के संचालन के लिये सामूहिक व्यापार नीति प्रपत्र (instruments) को लागू करवाने में सीएमजी की सहायता करता है। मकॉसुर संसदों का प्रतिनिधित्व संयुक्त संसदीय आयोग में होता है। आर्थिक और सामाजिक परामर्श मंच आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों की देखभाल करता है। मोंटिवीडियो स्थित सचिवालय का मुख्य अधिकारी महानिदेशक होता है।

ओरो प्रीटो प्रोटोकॉल ने विवाचन न्यायाधिकरण, जिसके निर्णय सदस्य देशों के लिए बाध्यकारी होते हैं, के माध्यम से विवादों को समाप्त करने हेतु प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार की।

गतिविधियां

मर्कोसुर के सदस्य देश शुल्क में कमी लाने के लिये प्रतिबद्ध हैं। 1 जनवरी, 1995 को एक साझा बाजार का गठन किया गया। यह बाजार बाद में एक मुक्त व्यापार क्षेत्र के रूप में प्रभावी हुआ, जिसमें 90 प्रतिशत वस्तुओं को सम्मिलित किया गया। गैर-मर्कोसुर देशों के साथ हो रहे 80 प्रतिशत व्यापार में साझा बाह्य शुल्क दर 14 प्रतिशत है। 1991 में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक व्यापार और निवेश समझौता हुआ। चिली और मकॉसुर के मध्य 1996 में एक समझौता हुआ, जिसमें आठ वर्षों के अन्दर अधिकांश पारस्परिक व्यापार की उदार बनाने का निर्णय लिया गया। इसी प्रकार की एक संधि 1996 में बोलीविया के साथ की गई, यद्यपि इसका उद्देश्य सीमित था। मौद्रिक एकीकरण और कृषि एवं औद्योगिक नीतियों में समन्वय स्थापित करने के लिए अनेक योजनाओं का अनुमोदन किया गया है। मर्कोसुर विश्व के शीर्षस्थ आर्थिक गुटों में एक है। यह 200 मिलियन लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। इसने अन्य क्षेत्रीय समूहों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है, जैसे-यूरोपीय संघ ने 1995 में मर्कोसुर के साथ एक सहयोग समझौता किया। फ़िलहाल मर्कोसुर और एंडियन समूह के मध्य मुक्त व्यापार क्षेत्र गठित करने के लिए सघन वार्ताएं/बैठकें हो रही हैं।

सीएमजी के सदस्य प्रस्तुत देशों द्वारा नियुक्त किए जाते हैं और उस राष्ट्र विशेष के लिए साझा बाजार समूह के राष्ट्रीय विभाग का गठन करेंगे। सामान्यतः ओएमजी की बैठक सदस्य देशों में तीन महीनों में एक बार होती है और यह चक्रीय अक्षरवार होता है। विशेष बैठकों का आयोजन पूर्व में निर्धारित स्थान पर कभी भी किया जा सकता है। बैठक में मेजबान सदस्य देश के प्रतिनिधिमण्डल के मुखिया होंगे। व्यापार आयोग साझा व्यापार नीति उपकरणों के प्रवर्तन में सीएमजी की मदद करता है।

दिसंबर 2004 में अध्यक्षीय शिखर बैठक में मर्कोसुर संसद की नींव डालने पर सहमति हुई। वर्ष 2010 तक, जनसंख्या के परिप्रेक्ष्य में नहीं, प्रत्येक देश से इसमें 18 प्रतिनिधि थे। संयुक्त संसदीय समिति को परामर्शकारी एवं निर्णयन दोनों प्रकार की शक्तियां प्राप्त हैं। समिति में अधिकतम 64 कार्यकारी संसदीय सदस्य होते हैं, 16 सदस्य देश होते हैं और इतनी ही संख्या में कांग्रेस द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। समिति सामान्य तौर पर वर्ष में दो बार मिलती है, और असाधारण रूप से इसकी बैठक तब होती है जब इसके पांच राष्ट्रपति इसका आह्वान करते हैं। संयुक्त संसदीय समिति की बैठकें तभी वैध होती हैं जब इसमें सभी सदस्य देशों के संसदीय प्रतिनिधिमण्डल भाग लेते हैं।

वेनेजुएला की पूर्ण सदस्यता 31 जुलाई, 2012 से प्रभावी हो गई। इस संगठन में प्रवेश करने के लिए वेनेजुएला काफी वर्षों से प्रयासरत रहा है। किन्तु दो कारणों से वह पूर्व के वर्षों में इसमें प्रवेश करने में सफल नहीं हो सका। इसका एक कारण चावेज का चावेजिम था। वेनेजुएला के इसमें प्रवेश न हो पाने का दूसरा कारण ब्राजील के तत्कालीन राष्ट्रपति लूला और पराग्वे थे। लूला का चावेज के साथ संबंध बढ़िया नहीं था क्योंकि दोनों की राजनीतिक विचारधारा एक-दूसरे के विपरीत थी। वहीं पराग्वे का भी वेनेजुएला के साथ परस्पर संबंध मधुर नहीं था। प्रत्येक देश की संसद वेनेजुएला के प्रवेश को लेकर सहमत हो गई मगर पराग्वे की संसद इसके लिए तैयार नहीं हुई। जिस कारण इसका प्रवेश रुका हुआ था। यह बाधा तब हटी जब पराग्वे की संसद ने वहां के निर्वाचित राष्ट्रपति लुगों को हटा दिया और इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए मकॉसुर ने पराग्वे को निलंबित कर दिया। इस प्रकार पराग्वे के निलम्बन से वेनेजुएला का इस ब्लॉक में आगमन संभव हो सका। इसमें इसके प्रवेश से न केवल वेनेजुएला को लाभ होगा अपितु इसके अन्य सदस्यों को भी लाभ होगा। वैसे इस लाभ में सर्वाधिक हिस्सेदारी ब्राजील की होगी क्योंकि वर्तमान में इस क्षेत्र का सर्वाधिक विकसित देश यही है। इसके पास विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काफी उन्नत तकनीक मौजूद हैं। वहीं दूसरी ओर वेनेजुएला के प्रवेश ने इस संगठन को विश्व का सबसे बड़ा खाद्य उत्पादक बना दिया है। इतना ही नहीं यह संगठन अब दुनिया का सर्वाधिक जैव विविधता को धारण करने वाला भी बन गया है। इतना ही नहीं अब यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक ब्लॉक तथा पांचवां सर्वाधिक बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। कुल मिलाकर यदि देखा जाए तो वेनेजुएला के प्रवेश ने इस ब्लॉक को उत्तर से दक्षिण तक विस्तारित कर दिया है।

मर्कोसुर ने दिसंबर 2007 में उरुग्वे में इजरायल के साथ एक मुक्त व्यापार समझौता किया, जिससे इजरायल पहला गैर-दक्षिण अमेरिकी मुक्त व्यापार भागीदार बना।

अंतर-मर्कोसुर व्यापार (वेनेजुएला को छोड़कर) 1991 में व्यापार गुट के अपनाने पर 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2010 में 88 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। ब्राजील एवं अर्जेटीना प्रत्येक के साथ यह कुल व्यापार का 43 प्रतिशत था।

मर्कोसुर ने इजरायल के साथ दिसंबर 2007 में, मिस्र के साथ अगस्त 2010 में और फिलिस्तीन के साथ 2011 में मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) किया।

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