ऊर्जा दक्षता ब्यूरो Bureau of Energy Efficiency – BEE

भारत सरकार ने, ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के उपबंधों के अंतर्गत 1 मार्च, 2002 को ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) की स्थापना की। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो का मिशन, ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के समग्र ढांचे के अन्दर स्व-विनियम और बाजार सिद्धांतों पर महत्व देते हुए ऐसी नीतियों और रणनीतियों का विकास करने में सहायता देना है जिनका प्रमुख उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था में ऊर्जा की गहनता को कम करना है। यह तभी प्राप्त किया जा सकता है जब इसमें सभी पण्य धारियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो तथा परिणामस्वरूप सभी क्षेत्रों में ऊर्जा दक्षता को अधिकाधिक एवं सतत् रूप से अपनाया जाए।

बीईई की भूमिका

बीईई, ऊर्जा संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत इसे सौंपे गए कार्यों को करने के लिए अभिहित उपभोक्ताओं, अभिहित अभिकरणों और अन्य संगठनों के साथ समन्वय करके मौजूदा संसाधनों और अवसंरचना को मान्यता देने, इनकी पहचान करने तथा इस्तेमाल का कार्य करता है। ऊर्जा संरक्षण अधिनियम में विनियामक और संवर्द्धनात्मक कार्यों का प्रावधान है।

विनियामक कार्य

बीईई के प्रमुख विनियामक कार्यों में निम्नलिखित कार्य शामिल हैं-

  • उपकरण और उपस्करों के लिए न्यूनतम ऊर्जा निष्पादन मानकों और लेबलिंग डिजाइन का विकास करना।
  • विशिष्ट ऊर्जा संरक्षण भवन निर्माण संहिता का विकास करना।
  • अभिहित उपभोक्ताओं पर केन्द्रित गतिविधियां
  • विशिष्ट ऊर्जा खपत मानदंडों का विकास करना
  • उर्जा प्रबंधकों और उर्जा संपरीक्षकों का प्रमाणन
  • ऊर्जा संपरीक्षकों को प्रत्यायन
  • अनिवार्य ऊर्जा संपरीक्षक का तरीका और आवधिकता निश्चित करना
  • ऊर्जा खपत एवं ऊर्जा संपरीक्षकों की सिफारिशों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देने का प्रोफार्मा तैयार करना

बीईई के प्रमुख संवर्द्धनात्मक कार्य

  • ऊर्जां दक्षता और संरक्षण पर जागरूकता उत्पन्न करना एवं इसका प्रसार करना
  • ऊर्जा के दक्ष उपयोग और इसके संरक्षण के लिए तकनीकों के कार्मिक और विशेग्यों के प्रक्स्हीं की व्यवस्था करना और आयोजन करना।
  • ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में परामर्शी सेवाओं का सुदृढ़ीकरण
  • अनुसंधान और विकास का संवर्द्धन
  • परीक्षण और प्रमाणनपद्धतियों का विकास करना और परीक्षण सुविधाओं का संवर्द्धन
  • प्रायोगिक परियोजनाओं तथा निदर्शन परियोजनाओं के कार्यान्वयन का निरूपण एवं सरलीकरण
  • ऊर्जा दक्ष प्रक्रियाओं, उपकरण, युक्तियों और प्रणालियों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना
  • ऊर्जा दक्ष उपकरण अथवा उपस्करों के इस्तेमाल के लिए तरजीही व्यवहार को प्रोत्साहन देने के लिए कदम उठाना।
  • ऊर्जा दक्ष परियोजनाओं के नूतन निधियन को बढ़ावा देना
  • ऊर्जा के दक्ष उपयोग को बढ़ावा देने और इसका संरक्षण करने के लिए संस्थाओं को वित्तीय सहायता देना
  • ऊर्जा के दक्ष उपयोग और इसके संरक्षण पर शैक्षणिक पाठ्यक्रम तैयार करना

ऊर्जा के दक्ष उपयोग और इसके संरक्षण से संबंधित अंतरराष्ट्रीय सहयोग के कार्यक्रमों को क्रियान्वित करना

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