ब्रिक्स BRICS - Brazil, Russia, India, China and South Africa

ब्रिक्स-ब्राजील, रूस, चीन, भारत एवं दक्षिण अफ्रीका-पांच देशों का समूह है। 21वीं शताब्दी के पहले दशक में जहां परम्परागत देश दशक के अंत तक वैश्विक वित्तीय संकट से ग्रसित हो गए, वहीं विश्व के कतिपय विकासशील देशों ने इस दशक में उल्लेखनीय आर्थिक प्रगति दर्ज की है। वर्ष 2009 में ऐसे ही चार देशों- ब्राजील, रूस, भारत व चीन ने एक नए आर्थिक संगठन ब्रिक्स (बीआरआईसी) की स्थापना की।

सदस्यता: ब्राजील, रूस, चीन, भारत एवं दक्षिण अफ्रीका।

उद्भव एवं विकास

ब्रिक्स की धारणा का प्रतिपादन सर्वप्रथम 2001 में अमेरिका की वित्तीय कंपनी गोल्डमैन सैक के अर्थशास्त्री जिम ओ नील ने किया था। नील ने इन चार देशों (ब्राजील, रूस, चीन एवं भारत) को आने वाले समय की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं माना है। उनके अनुसार, इन चार देशों की विकास क्षमता इतनी अधिक है कि इनकी अर्थव्यवस्थाएं सम्मिलित रूप में 2050 तक विश्व की वर्तमान अर्थव्यवस्थाओं (अमेरिका तथा यूरोपीय संघ) को पीछे छोड़ देंगी।

ब्रिक्स का विचार सबसे पहले 2008 में गोल्डमैन सैक ने व्यवस्थित रूप में अपनी पहली रिपोर्ट ड्रीमिंग विद ब्रिक्सः द पाथ टू 2050 में प्रस्तुत किया था। इस रिपोर्ट में इनकी विकास क्षमता के साथ-साथ इनके मध्य सहयोग की भावना पर भी प्रकाश डाला गया था, क्योंकि इनकी अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की प्रतियोगी न होकर पूरक हैं। इन चारों देशों में दो देश ब्राजील तथा रूस प्राकृतिक संसाधनों यथा तेल व कोयला के सबसे बड़े उत्पादक देश के रूप में उभर रहे हैं तथा दो देश भारत व चीन विश्व के बड़े विनिर्माण कर्ता तथा वस्तुओं एवं सेवाओं के आपूर्तिकर्ताओं के रूप में उभर रहे हैं।

गोल्डमैन सैक की ब्रिक के संबंध में अंतिम रिपोर्ट 2010 में प्रकाशित हुई जिसका शीर्षक है- इज दिस ए ब्रिक डिकेड। इस रिपोर्ट के अनुसार, 2000-2010 के बीच में विश्व के कुल घरेलू उत्पादन में ब्रिक देशों का हिस्सा यद्यपि 25 प्रतिशत ही रहा, फिर भी इस दशक में सकल घरेलू उत्पाद में हुई कुल वृद्धि में इनका हिस्सा 36 प्रतिशत था। आने वाले दशक में विश्व के सकल घरेलू उत्पाद में इन देशों का हिस्सा 33 प्रतिशत होगा तथा सकल घरेलू उत्पाद में भी इनका हिस्सा 49 प्रतिशत होगा। इन देशों में मध्यम वर्गीय जनसंख्या 2020 तक वर्तमान के 800 मिलियन से बढ़कर 1600 मिलियन हो जाएगी, जिससे ये देश सामूहिक रूप से दशक के अंत तक विकसित देशों से आगे निकल जाएंगे। इसका कारण यह है कि जहां अमेरिका व पश्चिमी देश विश्व आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं, वहीं चीन तथा भारत इस संकट से अधिक प्रभावित नहीं हैं।

जिम ओ नील ने जब 2001 में ब्रिक का विचार दिया था तब उनका मंतव्य यह नहीं था कि ये देश अपना एक अलग राजनीतिक और आर्थिक संगठन बना लें, लेकिन इस विचार से प्रभावित होकर तथा पश्चिमी देशों के प्रभुत्व के विरुद्ध आपसी वैश्विक आर्थिक हितों से प्रेरित होकर इन चार देशों ने ब्रिक संगठन की स्थापना 2008 में की। वर्ष 2008 में इन देशों के विदेश मंत्रियों ने एक सम्मेलन द्वारा इसकी स्थापना करने व नियमित शिखर सम्मेलन करने का प्रस्ताव पारित किया था। ब्रिक्स का अपना कोई भी चार्टर या औपचारिक ढाँचा नहीं है।

उद्देश्य

दक्षिण अफ्रीका को छोड़कर ब्रिक्स के अन्य चारों सदस्य देश विश्व के प्रगतिशील देशों के संगठन जी-20 के सदस्य हैं। ब्रिक्स मूलतः विश्व की पांच अर्थव्यवस्थाओं का आर्थिक सहयोग संगठन है, लेकिन भविष्य में यह राजनीतिक मुद्दों पर भी ठोस पहल करने की क्षमता रखता है। इस समूह का मुख्य उद्देश्य अमेरिका एवं उसके सहयोगियों की वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनावश्यक वर्चस्व को चुनौती देना है।

गतिविधियां

आर्थिक रूप से ब्रिक्स वैश्विक विकास का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है। वर्तमान में ब्रिक्स के सदस्य देश विश्व के 25 प्रतिशत भू-भाग तथा विश्व की 41 प्रतिशत से अधिक का प्रतिनिधित्व करते हैं। ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्था का आकार 11,700 अरब डॉलर है। ब्रिक्स देशों की मुद्रा रियाल, रूबल, रुपया, रैनमिंबी और रैंड पहले अक्षर के आधार पर इस समूह को आर-5 का नाम भी दिया गया है। ब्रिक्स देशों का आर्थिक विस्तार निरंतर जारी है। ब्रिक्स न केवल सबसे बड़ी और सबसे तेजी से उभरती बाजार अर्थव्यवस्था का समूह है, बल्कि इसमें तीनों महाद्वीपों-एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका का प्रतिनिधित्व भी है। यह अर्थव्यवस्था की गतिविधियों की विकसित उत्तर से विकासशील दक्षिण की ओर खिसकती धुरी को भी रेखांकित करता है। आर्थिक क्षेत्र की भांति राजनीतिक क्षेत्र में ब्रिक देशों का दृष्टिकोण वैश्विक मामलों में पूरक है। सभी सदस्य राष्ट्र विश्व व्यवस्था में अमरीकी वर्चस्व को चुनौती देने की भावना से प्रेरित हैं। विश्व के अन्य मामलों जैसे-अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सुधार, संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था में बदलाव, अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ताएं, जलवायु परिवर्तन को चुनौती आदि में इन सदस्य राष्ट्रों में समानता के कई बिंदु हैं।

ब्रिक्स का प्रथम शिखर सम्मेलन 2009 में रूस के शहर येकैटरिनबर्ग में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में शीर्ष नेताओं ने आर्थिक मामलों में आपसी सहयोग को मजबूत बनाने, विकासशील देशों के संबंध में जी-20 के प्रस्तावों को शीघ्र लागू करने तथा वैश्विक वित्तीय व आर्थिक संस्थाओं में लोकतांत्रिक सुधार लाने पर बल दिया। साथ ही इन देशों ने वैश्विक मामलों में ब्रिक की प्रभावी भूमिका पर विचार-विमर्श किया तथा इन देशों के आपसी सहयोग के कार्यक्रमों पर भी विचार किया गया।

ब्रिक्स का दूसरा शिखर सम्मेलन 15 अप्रैल, 2010 को ब्राजील की राजधानी ब्राजीलिया में सम्पन्न हुआ। इस सम्मेलन में 33 बिन्दुओं का ब्राजीलिया घोषणा-पत्र स्वीकार किया गया। जिसका उद्देश्य ब्रिक देशों की आपसी सहयोग की आधारशिला तैयार करना तथा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व राजनीतिक संस्थाओं में सुधार कर बहुपक्षीय कूटनीति को बढ़ावा देना था। इसमें संयुक्त राष्ट्र संघ को सुधारने व उसको प्रभावी बनाने पर बल दिया गया। आर्थिक संकट के समाधान के लिए विश्व आर्थिक व्यवस्था में जी-20 समूह की सक्रिय व प्रभावी भूमिका पर बल दिया गया। घोषणा में यह भी स्वीकार किया गया कि ब्रिक देशों का आपसी सहयोग विश्व शांति, सद्भावना तथा संपन्नता के लिए आवश्यक है। इस घोषणा-पत्र में यह भी मांग की गई कि मुद्राकोष व विश्व बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सुधार किया जाए और इस प्रक्रिया को 2010 के अंत तक पूरा कर लिया जाए। इन सुधारों में मुद्राकोष की कोटा-प्रणाली तथा विश्व बैंक में मतदान शक्ति प्रमुख रूप से शामिल है। इसके अतिरिक्त इस घोषणा-पत्र में आतंकवाद का निवारण, गरीबी निवारण, खाद्य सुरक्षा, विश्व की सभ्यताओं व संस्कृतियों के मध्य पारस्परिक अंतःक्रियाओं को बढ़ावा तथा आपसी संबंधों व सहयोग को बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग आदि पर विचार-विमर्श शामिल है।

ब्रिक्स का तीसरा सम्मेलन 14 अप्रैल, 2011 को चीन के शहर सान्या में संपन्न हुआ। दक्षिण अफ्रीका ने पहली बार इस सम्मेलन में भाग लिया। इस सम्मेलन में 32 बिंदुओं का सान्या घोषणा-पत्र जारी किया गया। इस घोषणा में पांचों देशों ने आपसी सहयोग बढ़ाने तथा सामान्य हित के क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों में समन्वय को मजबूत बनाने पर बल दिया। इस घोषणा में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् व अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं मुद्रा कोष तथा विश्व बैंक को प्रभावी बनाने के लिए उनमें सुधार की वकालत की गई अर्थात् इन संस्थाओं को अधिक प्रजातांत्रिक बनाने तथा इनमें विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर जोर दिया गया। इस सम्मेलन में पांचों देशों ने एक कार्यवाही योजना को स्वीकृति प्रदान की। इस कार्ययोजना में जहां एक ओर इन देशों में चल रहे सहयोगात्मक कार्यक्रमों की समीक्षा की गई, वहीं सहयोग की नई गतिविधियों पर प्रकाश डाला गया। इस कार्यवाही योजना में खाद्य सुरक्षा, तकनीकी शोध, बैंकिंग संस्थाओं में सहयोग तथा व्यावसायिक संगठनों में सहयोग की प्राथमिकता दी गई है।

ब्रिक्स देशों का चौथा शिखर सम्मेलन 29 मार्च, 2012 को नई दिल्ली में संपन्न हुआ। इस सम्मेलन की मुख्य थीम थी- वैश्विक स्थायित्व, सुरक्षा, तथा सम्पन्नता में ब्रिक्स की साझेदारी। इस सम्मेलन के अंत में दिल्ली घोषणा-पत्र जारी किया गया। इस घोषणा-पत्र में वर्तमान वैश्विक वित्तीय संकट तथा उससे उबरने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई है। ब्रिक्स की सर्वोच्च प्राथमिकता बाजार में विश्वास उत्पन्न करना तथा विकास की प्रक्रिया पुनः पटरी पर लाना है। ब्रिक्स देशों ने इस बात पर भी जोर दिया कि वैश्विक वित्तीय-प्रबंधन, सहयोग व समन्वय के लिए जी-20 समूह को एक आधारभूत व प्रमुख मंच के रूप में अपनाया जाए। ब्रिक्स देशों ने यह स्वीकार किया कि विकासशील देशों को अपने विकास के लिए अधिक वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है। अतः ब्रिक्स देशों के लिए अधिकाधिक वित्तीय साधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इन देशों ने सदस्य राष्ट्रों के सहयोग से एक नए विकास बैंक की स्थापना का निर्णय लिया। यह बैंक ब्रिक्स सदस्य देशों तथा अन्य विकासशील देशों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने तथा जीवन्त विकास की आवश्यकताओं हेतु वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराएगा।

इस सम्मेलन की महत्वपूर्ण उपलब्धि यह थी कि सदस्यों ने आपस में स्थानीय मुद्रा के माध्यम से क्रेडिट सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एक मास्टर समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते से अभिप्राय है कि ब्रिक्स देश डॉलर के बिना आपस में स्थानीय मुद्रा के माध्यम से व्यापार व लेनदेन कर सकेंगे। ब्रिक्स देशों ने जलवायु परिवर्तन की समस्या का समुचित समाधान करने तथा जीवंत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर बल दिया तथा 2015 तक सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु प्रयासों में तेजी लाने पर बल दिया।

ब्रिक्स का पांचवां शिखर सम्मेलन दक्षिण अफ्रीका के डरबन शहर में 26-27 मार्च, 2013 को संपन्न हुआ। इस सम्मेलन की मुख्य थीम थी-ब्रिक्स एण्ड अफ्रीका- पार्टनरशिप फॉर डेवलपमेंट, इंटीग्रेशन एण्ड इंडस्ट्रियलाइजेशन। इस सम्मेलन में जारी थेकविनी घोषणा-पत्र में अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने, बहुस्तरीय सहयोग बढ़ाने व संयुक्त राष्ट्र संघ की केंद्रीय भूमिका को मजबूत बनाने का आह्वान भी किया गया है। अफ्रीका के विकास तथा गरीबी उन्मूलन के लिए क्षेत्रीय सहयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए सदस्य देशों ने विदेशी प्रत्यक्ष निवेश, जानकारियों के आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण तथा अफ्रीका देशों के औद्योगिक विकास के प्रति समर्थन घोषणा-पत्र में व्यक्त किया।

उल्लेखनीय है कि ब्रिक्स देशों के दक्षिण अफ्रीका के जोहांसबर्ग में ब्रिक्स व्यापार परिषद् की प्रथम बैठक 19-20 अगस्त, 2013 को आयोजित की गई। इसका आयोजन ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि व्यापारियों द्वारा कारोबार में वृद्धि और निवेश की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करने के उद्देश्य से विशेष उपायों की पहचान करने के लिए किया गया।

मूल्यांकन: ब्रिक्स विश्व की पांच उभरती हुई आर्थिक शक्तियों का समूह है। इन देशों की महत्वपूर्ण बात यह है कि इनकी अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की प्रतियोगी न होकर एक-दूसरे की पूरक हैं। ये देश विकासशील देशों की वैश्विक निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए वर्तमान अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व अर्थव्यवस्था में सुधार करना चाहते हैं। ये सभी देश जी-20 के सदस्य हैं और अमेरिका के प्रभुत्व वाली वर्तमान व्यवस्था में अपनी भूमिका को बढ़ाना चाहते हैं। अतः ब्रिक्स एक प्रजातांत्रिक, बहुध्रुवीय व समतापूर्ण वैश्विक व्यवस्था का पक्षधर है।

यद्यपि ब्रिक्स नई आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है, लेकिन ब्रिक्स देशों के मध्य कुछ राजनीतिक विवाद भी हैं, जिनके कारण इनके संबंध मजबूत नहीं हो पा रहे हैं। जिनमें प्रमुख हैं-भारत-चीन सीमा विवाद। इसके अतिरिक्त इन देशों की आंतरिक समस्याओं, गरीबी, अल्प मानवीय विकास आदि के कारण यह आवश्यक नहीं कि इनका विकास आशानुरूप ही हो। समग्र तौर पर कहा जाए तो, वर्तमान समय में ब्रिक्स बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के एक ऐसे समूह के रूप में उभरा है, जिसकी भविष्य में वैश्विक व्यवस्था के संचालन व प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Mobile application powered by Make me Droid, the online Android/IOS app builder.