मशहूर बॉक्सर मोहम्मद अली का 74 साल की उम्र में निधन Boxing Legend Muhammad Ali Dies at 74

दुनिया के सबसे बड़े मुक्केबाजों में से एक माने जाने वाले मोहम्मद अली का 74 साल की उम्र में अमेरिका के फीनिक्स में निधन हो गया। मोहम्मद अली ने अपने प्रोफेशनल करियर में ज्यादातर फाइट नॉकआउट में जीती। अली ने चार शादियां की थी जिनसे उन्हें सात बेटियां और दो बेटे थे।

वह सांस संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे और 1984 से उन्हें पार्किनसन की बीमारी थी, इस वजह से उनकी स्थिति और अधिक खऱाब हो गई थी।

साल 1960 में रोम ओलंपिक में लाइट हेवीवेट में गोल्ड मेडल जीतने से वह मशहूर हुए थे. 1964 में उन्होंने अपना नाम बदल कर मोहम्मद अली कर लिया था।

अली का जन्म 17 जनवरी 1942 को हुआ था. उनका शुरुआती नाम कैसियस मर्सेलुस क्ले जूनियर था। अली ने 12 साल की उम्र में बॉक्सिंग ट्रेनिंग शुरू की थी और सिर्फ 22 साल की उम्र में 1964 में सोनी लिस्टन को हराकर उलटफेर करते हुए वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियनशिप जीत ली थी। इस जीत के कुछ ही वक्त बाद उन्होंने डेट्रॉएट में वालेस डी फ्रैड मुहम्मद द्वारा शुरू किया गया नेशन ऑफ इस्लाम ज्वाइन कर अपना नाम बदल लिया। अली तीन बार विश्व चैंपियन रहे हैं। पहली बार उन्होंने 1964 में फिर 1974 में और फिर 1978 में विश्व चैंपियनशिप का ख़िताब जीता था।

अपनी मशहूर जीत के तीन साल बाद उन्होंने यूएस मिलिट्री ज्वाइन करने से इनकार कर दिया. इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका के वियतनाम युद्ध में भाग लेने के चलते अपनी धार्मिक मान्यताओं के आहत होने का हवाला दिया। सेना को मना करने के चलते अली को गिरफ्तार कर उनका हैवीवेट टाइटल छीन लिया गया। कानूनी पचड़ों के चलते अली अगले चार साल तक फाइट नहीं कर पाए। 1971 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा पलट दी। अली के युद्ध के लिए ईमानदारी से मना करने के फैसले ने उन्हें ऐसे लोगों का नायक बना दिया जो युद्ध के खिलाफ थे।

कैसियस क्ले के नाम से मशहूर इस बॉक्सर ने 1975 में सुन्नी इस्लाम कबूल कर लिया. इसके तीस साल बाद उन्होंने सूफिज्म का रास्ता पकड़ लिया।

मशहूर पहलवान जॉर्ज वैग्नर से प्रभावित अली प्रेस कॉनफ्रेंस और इंटरव्यू के लिए किसी मैनेजर के भरोसे ना होकर इन्हें खुद ही हैंडल करते थे। 6 फीट 3 इंच लंबे अली ने अपने करियर में 61 फाइटें लड़ी और 56 जीतीं इनमें से 37 का फैसला नॉकआउट में हुआ। उन्हें अपने करियर में सिर्फ पांच बार हार का सामना करना पड़ा। 1981 में उन्होंने बॉक्सिंग से संन्यास ले लिया।

अली को न सिर्फ उनकी मुक्केबाज़ी बल्कि नागरिक अधिकार कार्यकर्ता के तौर पर भी जाना जाता था। उन्हें पार्किनसन की बीमारी थी जिसकी वजह उनके तीन दशक के करियर में वह हज़ारों मुक्के बताए जाते हैं जो उन्होंने मुकाबलों के दौरान खाने पड़े थे। इसकी वजह से वह सार्वजनिक रूप से ज्यादा बातचीत करने में समर्थ नहीं थे। हालांकि अपने परिवार और प्रवक्ताओं के ज़रिए वह अपनी राय रखते रहते थे।

1996 में अटलांटा ओलिंपिक गेम्स में अली ने बिना पूर्व सूचना के उपस्थित होकर सबको अचंभित कर दिया था। पार्किनसन की वजह से उनके हाथ कांप रहे थे लेकिन इसके बावजूद उन्होंने ओलिंपिक की मशाल जलाई थी। इसके अलावा लंदन ओलिंपिक्स 2012 में भी वह व्हीलचेयर पर आए थे।

अली के कई निकनेम्स में से सबसे मशहूर द ग्रेटेस्ट, द पीपल्स चैंपियन और द लुइसविले लिप थे।

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